अध्यायवार परीक्षोपयोगी तथ्य-श्रृंखला

भारत का इतिहास
महत्वपूर्ण परीक्षोपयोगी तथ्य

अध्याय 6 : उत्तर मौर्य काल

शुंग वंश • कण्व वंश • सातवाहन वंश • विदेशी शासक • कला एवं संस्कृति

1

परिचय एवं पृष्ठभूमि

परीक्षा-दृष्टि : मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद राजनीतिक विखंडन और नए वंशों का उदय।
मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद (लगभग 185 ई.पू.) भारत में राजनीतिक विखंडन हुआ।
इस काल को उत्तर मौर्य काल कहा जाता है।
इस काल में उत्तर भारत में शुंग और कण्व वंश तथा दक्षिण में सातवाहन वंश का उदय हुआ।
विदेशी शासक जैसे इंडो-ग्रीक, शक और कुषाण ने भी भारत पर शासन किया।
इस काल में कला, वास्तुकला और व्यापार का विकास हुआ (गांधार कला, मथुरा कला)।
महत्वपूर्ण ग्रंथ — महाभाष्य (पतंजलि), मालविकाग्निमित्र (कालिदास) आदि।
2

शुंग वंश (185–73 ई.पू.)

परीक्षा-दृष्टि : पुष्यमित्र शुंग, ब्राह्मण धर्म का पुनरुत्थान और बौद्ध धर्म के प्रति नीति।
पुष्यमित्र शुंग ने अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या कर शुंग वंश की स्थापना की (185 ई.पू.)।
पुष्यमित्र शुंग ब्राह्मण था और उसने वैदिक धर्म का पुनरुत्थान किया।
उसने अश्वमेध यज्ञ किया (पतंजलि ने इसका उल्लेख किया)।
शुंग काल में सांची स्तूप का विस्तार और भारहुत स्तूप का निर्माण हुआ।
शुंग वंश के बाद कण्व वंश (73–28 ई.पू.) ने शासन किया।
कण्व वंश के अंतिम शासक सुशर्मा थे।
🧠 स्मरण-सूत्र

शुंग वंश : "पुष्य ने अश्वमेध किया" → पुष्यमित्र शुंग ने अश्वमेध यज्ञ किया।

3

कण्व वंश (73–28 ई.पू.)

परीक्षा-दृष्टि : कण्व वंश का संक्षिप्त शासन और मगध पर नियंत्रण।
कण्व वंश की स्थापना वसुदेव कण्व ने की।
यह वंश ब्राह्मण मूल का था।
कण्व वंश ने मगध पर लगभग 45 वर्षों तक शासन किया।
अंतिम शासक सुशर्मा कण्व थे।
कण्व वंश के पतन के बाद मगध पर आंध्र (सातवाहन) का प्रभाव बढ़ा।
4

सातवाहन वंश (दक्षिण भारत)

परीक्षा-दृष्टि : गौतमीपुत्र सातकर्णि, नासिक प्रशस्ति, सातवाहन कला और प्रशासन।
सातवाहन वंश दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण वंश था। इसकी राजधानी प्रतिष्ठान (पैठण) थी।
सबसे शक्तिशाली शासक गौतमीपुत्र सातकर्णि था।
नासिक प्रशस्ति (गौतमी बलश्री द्वारा लिखित) गौतमीपुत्र की उपलब्धियों का वर्णन करती है।
सातवाहनों ने प्राकृत भाषा को राजकीय भाषा बनाया।
सातवाहन काल में अमरावती स्तूप और नागार्जुनकोंडा का विकास हुआ।
सातवाहन वंश ने नागरिक प्रशासन और सामंती व्यवस्था को मजबूत किया।
🧠 स्मरण-सूत्र

सातवाहन के महान शासक : "गौतमी ने सातकर्णि को जन्म दिया" → गौतमीपुत्र सातकर्णि।

5

विदेशी शासक (इंडो-ग्रीक, शक, कुषाण)

परीक्षा-दृष्टि : मेनेन्डर, रुद्रदामन, कनिष्क और उनकी उपलब्धियाँ।
इंडो-ग्रीक (यवन) — सबसे प्रसिद्ध शासक मेनेन्डर (मिलिंद) था। उसने बौद्ध भिक्षु नागसेन से संवाद किया (मिलिंद पन्हो)।
शक (सिथियन) — सबसे प्रसिद्ध शासक रुद्रदामन था। उसने जूनागढ़ शिलालेख (150 ई.) लिखवाया।
कुषाण वंश — सबसे महान शासक कनिष्क (78 ई. के आसपास) था।
कनिष्क ने चौथी बौद्ध संगीति कश्मीर में बुलाई।
कनिष्क काल में गांधार कला और मथुरा कला का विकास हुआ।
कुषाण काल में भारत-रोम व्यापार चरम पर था।
★ अति महत्वपूर्ण

विदेशी शासक — परीक्षा के लिए

  • मेनेन्डर → मिलिंद पन्हो
  • रुद्रदामन → जूनागढ़ शिलालेख
  • कनिष्क → चौथी बौद्ध संगीति + गांधार कला

⚡ एक नज़र में — अध्याय 6 के 14 अमोघ तथ्य

  • शुंग वंश की स्थापना — पुष्यमित्र शुंग (185 ई.पू.)
  • पुष्यमित्र ने अश्वमेध यज्ञ किया
  • कण्व वंश की स्थापना — वसुदेव कण्व
  • सातवाहन का महान शासक — गौतमीपुत्र सातकर्णि
  • नासिक प्रशस्ति — गौतमी बलश्री द्वारा
  • इंडो-ग्रीक शासक — मेनेन्डर (मिलिंद पन्हो)
  • शक शासक — रुद्रदामन (जूनागढ़ शिलालेख)
  • कुषाण शासक — कनिष्क
  • कनिष्क ने चौथी बौद्ध संगीति बुलाई
  • गांधार कला — कुषाण काल
  • सांची स्तूप का विस्तार — शुंग काल
  • अमरावती स्तूप — सातवाहन काल
  • इस काल में प्राकृत भाषा का विकास हुआ
  • उत्तर मौर्य काल के बाद गुप्त काल का उदय हुआ

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