उग्रपंथी युग एवं क्रांतिकारी आंदोलन अध्याय ०४
01 · परिचय एवं पृष्ठभूमि Background
उग्रपंथी (गरमदल) युग (1905-1919) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का वह चरण था जब नरमपंथियों की संविधानिक विधियों से असंतुष्ट होकर एक नए समूह ने अधिक सक्रिय, प्रत्यक्ष एवं क्रांतिकारी तरीकों को अपनाया।
इस युग के प्रमुख कारण थे — बंगाल विभाजन (1905), ब्रिटिश नीतियों की विफलता, नरमपंथियों की सीमित उपलब्धियाँ, एवं राष्ट्रवादी भावना का तीव्र उभार। उग्रपंथियों ने 'स्वदेशी', 'बहिष्कार', 'सविनय अवज्ञा' जैसे हथियारों का उपयोग किया।
इस काल में कई क्रांतिकारी संगठन भी सक्रिय हुए, जिन्होंने सशस्त्र प्रतिरोध का मार्ग अपनाया। लखनऊ समझौता (1916) ने नरम-उग्र विभाजन को समाप्त किया।
- समय सीमा — 1905 से 1919 (लगभग 14 वर्ष)।
- मुख्य नेता — लोकमान्य तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविंद घोष।
- मुख्य विधियाँ — स्वदेशी, बहिष्कार, शिक्षा बहिष्कार, सविनय अवज्ञा।
- लक्ष्य — पूर्ण स्वराज (Swaraj)।
02 · बंगाल विभाजन (1905) — कारण एवं प्रभाव Partition
16 अक्टूबर 1905 को लॉर्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन की घोषणा की। इस विभाजन ने बंगाल को पूर्वी बंगाल एवं असम (मुस्लिम-बहुल) तथा पश्चिमी बंगाल (हिंदू-बहुल) में बाँट दिया। इससे भारतीयों में व्यापक असंतोष फैला।
विभाजन के कारण
- प्रशासनिक सुविधा — बंगाल अत्यधिक बड़ा था, इसलिए उसे विभाजित करना आवश्यक था (सरकारी तर्क)।
- 'फूट डालो और राज करो' — अंग्रेजों का वास्तविक उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ना था।
- राष्ट्रवाद का दमन — बंगाल राष्ट्रवाद का गढ़ था; विभाजन से उसे कमज़ोर करने का प्रयास।
विभाजन के प्रभाव
- व्यापक विरोध — पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन हुए; 'बंग-भंग आंदोलन' का शुभारंभ हुआ।
- स्वदेशी आंदोलन का जन्म — विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का आह्वान।
- नरम-उग्र एकता — प्रारंभ में दोनों गुट एकजुट हुए, परंतु बाद में मतभेद बढ़े।
- राष्ट्रीय चेतना का विस्तार — यह आंदोलन पूरे भारत में फैला, जिससे राष्ट्रीय एकता को बल मिला।
- मुस्लिम लीग की स्थापना (1906) — अंग्रेजों ने मुसलमानों को प्रोत्साहित करके मुस्लिम लीग बनवाई, जिससे सांप्रदायिकता बढ़ी।
- वर्ष — 1905 (लॉर्ड कर्जन)।
- तिथि — 16 अक्टूबर 1905।
- विरोध — 'बंग-भंग आंदोलन'।
- परिणाम — 1911 में विभाजन रद्द कर दिया गया।
03 · स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन Swadeshi & Boycott
बंगाल विभाजन के विरोध में 1905 में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार एवं स्वदेशी वस्तुओं (भारतीय वस्त्र, उत्पाद) का उपयोग बढ़ाना था।
स्वदेशी आंदोलन के मुख्य पहलू
- विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार — सार्वजनिक रूप से विदेशी कपड़ों को जलाना, भारतीय खादी को बढ़ावा देना।
- शिक्षा बहिष्कार — सरकारी स्कूलों, कॉलेजों का बहिष्कार; राष्ट्रीय शिक्षा परिषदों की स्थापना।
- अदालतों का बहिष्कार — ब्रिटिश अदालतों में जाने से इनकार करना, पंचायती न्याय प्रणाली को बढ़ावा देना।
- स्वदेशी उद्योग — स्वदेशी वस्त्र, माचिस, साबुन, चीनी आदि के उद्योगों को बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीवादी प्रेस — समाचार-पत्रों (जैसे 'केसरी', 'मराठा', 'सन्ध्या') के माध्यम से आंदोलन का प्रचार।
स्वदेशी आंदोलन के परिणाम
- भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन — स्वदेशी कपड़ा उद्योग, बैंक, बीमा कंपनियाँ स्थापित हुईं।
- राष्ट्रीय शिक्षा — 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (बंगाल) और 'नेशनल कॉलेज' (कलकत्ता) की स्थापना।
- ब्रिटिश सरकार द्वारा दमन — कई नेताओं को गिरफ़्तार किया गया, समाचार-पत्रों पर प्रतिबंध लगाए गए।
- आरंभ — 1905 (बंगाल विभाजन के विरोध में)।
- 'स्वदेशी' शब्द का प्रयोग — विश्वनाथ नारायण मंडलिक ने 1905 में किया।
- मुख्य केंद्र — बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब।
04 · प्रमुख उग्रपंथी नेता Leaders
1. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक (1856-1920)
- 'भारतीय अशांति का जनक' (Father of Indian Unrest) — ब्रिटिशों ने यह उपाधि दी।
- प्रसिद्ध नारा — "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।"
- पत्रिकाएँ — 'केसरी' (मराठी) और 'मराठा' (अंग्रेजी)।
- 1890-1901 — कांग्रेस के अध्यक्ष (अहमदाबाद 1890, कलकत्ता 1906)।
- गणपति उत्सव (1893) और शिवाजी उत्सव (1895) का आरंभ — जन-जागरण के लिए।
- 1908 — मंडाले (बर्मा) में 6 वर्ष कारावास (बाल गंगाधर तिलक केस)।
- 1916 — होम रूल लीग (पुणे शाखा) की स्थापना।
- तिलक को 'लोकमान्य' (जनमान्य) की उपाधि मिली।
2. बिपिन चंद्र पाल (1858-1932)
- 'बंगाल के राष्ट्रवादी चिंतक' — उग्रपंथी नेता।
- 1906 में कांग्रेस अध्यक्ष (कलकत्ता अधिवेशन) — परंतु उन्होंने अध्यक्षता नहीं संभाली (विवाद के कारण)।
- उन्होंने 'वंदे मातरम्' गीत को राष्ट्रवादी प्रतीक के रूप में लोकप्रिय बनाया।
- पत्रिकाएँ — 'न्यू इंडिया', 'द सोवरेन'।
- शिक्षा सुधार — 'नेशनल कॉलेज' (कलकत्ता) के सह-संस्थापक।
3. लाला लाजपत राय (1865-1928)
- 'पंजाब केसरी' (Lion of Punjab) कहलाए।
- आर्य समाज से प्रभावित, दयानंद एंग्लो-वैदिक (DAV) स्कूल के प्रचारक।
- 1920 — कांग्रेस अध्यक्ष (कलकत्ता विशेष अधिवेशन)।
- 1928 — साइमन कमीशन के विरोध में लाहौर में प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज में घायल होकर मृत्यु।
- उनकी मृत्यु पर भगत सिंह ने सॉन्डर्स की हत्या करके बदला लिया।
- पुस्तक — 'इंग्लैंड एंड इंडिया' (महत्वपूर्ण राजनीतिक विश्लेषण)।
4. अरविंद घोष (1872-1950)
- 'क्रांतिकारी से महायोगी' — प्रारंभिक जीवन में उग्रपंथी, बाद में आध्यात्मिक गुरु।
- 1906 — कांग्रेस के सुरक्षा विभाग के सदस्य।
- पत्रिका — 'वंदे मातरम्' (अंग्रेजी पत्रिका)।
- 1907 — अलीपुर षड्यंत्र केस में गिरफ़्तार (बरी हो गए)।
- 1910 — पांडिचेरी चले गए और आध्यात्मिक साधना में लीन हो गए।
5. अन्य प्रमुख नेता
- वी. ओ. चिदंबरम पिल्लै — तमिलनाडु के उग्रपंथी, स्वदेशी स्टीमर कंपनी की स्थापना।
- मदनलाल धींगरा — ब्रिटिश अधिकारी (कर्जन वाइली) की हत्या (1909) के लिए फाँसी।
- खुदीराम बोस — क्रांतिकारी, 1908 में फाँसी।
- तिलक — 'लोकमान्य', 'भारतीय अशांति का जनक'।
- लाजपत राय — 'पंजाब केसरी'।
- बिपिन चंद्र पाल — 'बंगाल के राष्ट्रवादी चिंतक'।
- अरविंद — 'क्रांतिकारी से महायोगी'।
05 · नरम-उग्र विभाजन (सूरत अधिवेशन 1907) Surat Split
1905 के बाद नरमपंथियों और उग्रपंथियों के बीच मतभेद बढ़ते गए। 1907 में सूरत अधिवेशन में यह विभाजन स्पष्ट हो गया।
विभाजन के कारण
- उद्देश्यों में अंतर — नरमपंथी 'स्वशासन' चाहते थे, उग्रपंथी 'पूर्ण स्वराज'।
- तरीकों में मतभेद — नरमपंथी याचिका/ज्ञापन में विश्वास रखते थे, उग्रपंथी बहिष्कार/स्वदेशी चाहते थे।
- 1906 के कलकत्ता अधिवेशन — तिलक के अध्यक्ष पद के प्रस्ताव को नरमपंथियों ने अस्वीकार कर दिया।
- सरकारी दमन — उग्रपंथियों पर ब्रिटिश सरकार का दबाव बढ़ा, जिससे वे और अधिक आक्रामक हो गए।
सूरत अधिवेशन (1907)
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| स्थान | सूरत (गुजरात) |
| अध्यक्ष | रास बिहारी घोष (नरमपंथी) |
| घटना | उग्रपंथियों ने अध्यक्ष पद के लिए प्रस्ताव रखा, परंतु नरमपंथियों ने अस्वीकार कर दिया; हंगामा हुआ। |
| परिणाम | कांग्रेस दो भागों में विभाजित हो गई — 'नरमपंथी' और 'उग्रपंथी'। |
- 1916 तक कांग्रेस विभाजित रही।
- उग्रपंथियों ने अपना अलग संगठन नहीं बनाया, परंतु सरकार ने उन्हें दबाना शुरू कर दिया।
- तिलक को 1908 में मंडाले (बर्मा) निर्वासित किया गया (सरकारी दमन)।
06 · मार्ले-मिंटो सुधार (1909) Morley-Minto
1909 में लॉर्ड मार्ले (भारत सचिव) और लॉर्ड मिंटो (वायसराय) ने 'भारतीय परिषद अधिनियम' (Indian Councils Act 1909) पारित किया, जिसे 'मार्ले-मिंटो सुधार' कहा जाता है।
मुख्य प्रावधान
- विधान परिषदों का विस्तार — केंद्रीय एवं प्रांतीय विधान परिषदों में सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई।
- अलग निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorate) — मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई — यह 'सांप्रदायिकता' की शुरुआत थी।
- भारतीयों को विधान परिषदों में प्रतिनिधित्व — हालाँकि यह सीमित एवं अप्रत्यक्ष था।
महत्व
- यह पहली बार था जब अलग निर्वाचन क्षेत्र को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।
- इसने मुस्लिम लीग को संवैधानिक मान्यता दी।
- यह सुधार संवैधानिक प्रगति की दिशा में एक कदम था, परंतु सांप्रदायिकता को भी बढ़ावा दिया।
- अलग निर्वाचन क्षेत्र — पहली बार (मुसलमानों के लिए)।
- मुस्लिम लीग को मान्यता।
- इसे 'मार्ले-मिंटो सुधार' कहा जाता है।
- 1909 — मुस्लिमों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की शुरुआत।
- 1919 — सिख, अंग्रेजी-भारतीय आदि को भी अलग निर्वाचन क्षेत्र मिले।
- 1935 — इस व्यवस्था को और विस्तारित किया गया।
07 · क्रांतिकारी आंदोलन Revolutionary
उग्रपंथी आंदोलन के साथ-साथ क्रांतिकारी (Revolutionary) गतिविधियाँ भी शुरू हुईं, जिन्होंने सशस्त्र प्रतिरोध और ब्रिटिश अधिकारियों की हत्या का मार्ग अपनाया।
क्रांतिकारी संगठन — भारत में
| संगठन | स्थान | संस्थापक / नेता |
|---|---|---|
| अनुशीलन समिति | कलकत्ता (बंगाल) | प्रमथ चौधरी, जतिन्द्रनाथ बनर्जी (1902) |
| युगांतर | बंगाल | विप्लवी समिति (1906 में अनुशीलन से अलग) |
| अभिनव भारत | महाराष्ट्र | विनायक दामोदर सावरकर (1904) |
| लंदन इंडिया हाउस | लंदन | श्यामजी कृष्ण वर्मा (1905) |
| घदर पार्टी | सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) | लाला हरदयाल (1913) |
| बर्लिन समिति | बर्लिन (जर्मनी) | वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय (1914) |
प्रमुख क्रांतिकारी गतिविधियाँ
- मुजफ्फरपुर बम कांड (1908) — खुदीराम बोस ने अधिकारी की हत्या का प्रयास किया, परंतु गलत व्यक्ति की हत्या हो गई; फाँसी दी गई।
- अलीपुर षड्यंत्र केस (1908) — अरविंद घोष, बिपिन चंद्र पाल पर राजद्रोह का मुकदमा; अरविंद बरी हो गए।
- कर्जन वाइली की हत्या (1909) — मदनलाल धींगरा ने लंदन में ब्रिटिश अधिकारी की हत्या की; फाँसी।
- दिल्ली बम कांड (1912) — लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंका गया (राशबिहारी बोस, सचिंद्र सान्याल)।
- काकोरी ट्रेन डकैती (1925) — क्रांतिकारियों (रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्लाह खान) ने ट्रेन से सरकारी खज़ाना लूटा (हालाँकि यह बाद में — 1925 — हुआ, परंतु इस श्रृंखला में उल्लेखनीय)।
- खुदीराम बोस — 1908, मुजफ्फरपुर बम कांड।
- मदनलाल धींगरा — 1909, कर्जन वाइली हत्याकांड।
- राशबिहारी बोस — 1912, दिल्ली बम कांड।
- सावरकर — अभिनव भारत, 'हिंदुत्व' के जनक।
08 · गदर पार्टी एवं विदेशी क्रांतिकारी गतिविधियाँ Gadar Party
गदर पार्टी (1913)
- स्थापना — 1913, सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में लाला हरदयाल ने की।
- उद्देश्य — भारत में ब्रिटिश शासन को सशस्त्र क्रांति के माध्यम से उखाड़ फेंकना।
- सदस्य — मुख्यतः पंजाबी सिख, हिंदू, मुस्लिम — जो अमेरिका/कनाडा में श्रमिक थे।
- पत्रिका — 'गदर' (उर्दू, पंजाबी, अंग्रेजी में)।
- प्रमुख नेता — लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा।
- 1914 — प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में सशस्त्र विद्रोह की योजना ('गदर षड्यंत्र') विफल रही।
बर्लिन समिति (1914)
- स्थापना — प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बर्लिन (जर्मनी) में।
- नेता — वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय।
- उद्देश्य — जर्मनी की मदद से भारत में विद्रोह कराना।
- 1913 — गदर पार्टी की स्थापना (सैन फ्रांसिस्को)।
- 1914 — कोमागाटा मारू घटना (कनाडा में भारतीयों को प्रवेश से रोका गया) — इसने गदर आंदोलन को और तीव्र किया।
- 1915 — गदर विद्रोह (ब्रिटिश सेना में विद्रोह की कोशिश) विफल।
09 · लखनऊ समझौता (1916) — पुनः एकीकरण Lucknow Pact
1916 में लखनऊ में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जहाँ नरमपंथी और उग्रपंथी पुनः एकजुट हुए। यह 'लखनऊ समझौता' कहलाता है।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
- कांग्रेस का एकीकरण — तिलक और नरमपंथी नेताओं (गोखले, मालवीय) के प्रयासों से दोनों गुट पुनः एक हुए।
- मुस्लिम लीग के साथ समझौता — इसी अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने भी एक समझौता किया (संयुक्त माँगें: स्वशासन, विधान परिषदों में आधी सीटें, अलग निर्वाचन क्षेत्र बरकरार)।
- संयुक्त कार्यक्रम — दोनों दलों ने संयुक्त रूप से संविधानिक सुधारों की माँग की।
- तिलक का स्वागत — तिलक को जेल से रिहा होने पर (1914) कांग्रेस ने उनका स्वागत किया।
लखनऊ अधिवेशन — प्रमुख तथ्य
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| स्थान | लखनऊ |
| वर्ष | 1916 |
| अध्यक्ष | अम्बिका चरण मजुमदार |
| उपलब्धि | नरम-उग्र एकीकरण; कांग्रेस-लीग समझौता (लखनऊ पैक्ट) |
- नरम-उग्र विभाजन समाप्त — कांग्रेस पुनः एकजुट हुई।
- हिंदू-मुस्लिम एकता — कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने संयुक्त माँगें रखीं (हालाँकि यह एकता लंबे समय तक नहीं टिकी)।
- यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अगले चरण (गांधी युग) का आधार बना।
10 · अभ्यास प्रश्न (MCQ) Practice
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। (उत्तर नीचे दिए गए हैं।)
- बंगाल विभाजन किस वर्ष हुआ?
(अ) 1905 (ब) 1907 (स) 1909 (द) 1911 - बंगाल विभाजन के समय भारत का वायसराय कौन था?
(अ) लॉर्ड कर्जन (ब) लॉर्ड मिंटो (स) लॉर्ड हार्डिंग (द) लॉर्ड मार्ले - 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' यह कथन किसका है?
(अ) गोपाल कृष्ण गोखले (ब) लोकमान्य तिलक (स) सुरेंद्रनाथ बनर्जी (द) बिपिन चंद्र पाल - गणपति उत्सव किसने आरंभ किया?
(अ) बाल गंगाधर तिलक (ब) लाला लाजपत राय (स) बिपिन चंद्र पाल (द) अरविंद घोष - 1907 का सूरत अधिवेशन किस कारण से प्रसिद्ध है?
(अ) कांग्रेस की स्थापना (ब) नरम-उग्र विभाजन (स) हिंदू-मुस्लिम एकता (द) स्वदेशी आंदोलन - मार्ले-मिंटो सुधार (1909) में किसके लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई?
(अ) हिंदुओं (ब) मुसलमानों (स) सिखों (द) अंग्रेजी-भारतीयों - गदर पार्टी की स्थापना कहाँ हुई?
(अ) लंदन (ब) बर्लिन (स) सैन फ्रांसिस्को (द) कलकत्ता - गदर पार्टी के संस्थापक कौन थे?
(अ) सोहन सिंह भकना (ब) लाला हरदयाल (स) करतार सिंह सराभा (द) वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय - लखनऊ समझौता किस वर्ष हुआ?
(अ) 1906 (ब) 1911 (स) 1916 (द) 1919 - लखनऊ अधिवेशन (1916) में कांग्रेस का अध्यक्ष कौन था?
(अ) अम्बिका चरण मजुमदार (ब) सुरेंद्रनाथ बनर्जी (स) गोपाल कृष्ण गोखले (द) मदनमोहन मालवीय
- (अ) 1905
- (अ) लॉर्ड कर्जन
- (ब) लोकमान्य तिलक
- (अ) बाल गंगाधर तिलक
- (ब) नरम-उग्र विभाजन
- (ब) मुसलमानों
- (स) सैन फ्रांसिस्को
- (ब) लाला हरदयाल
- (स) 1916
- (अ) अम्बिका चरण मजुमदार
11 · वन-लाइनर सारांश Quick Revision
- • 1905 — बंगाल विभाजन (लॉर्ड कर्जन)।
- • 16 अक्टूबर 1905 — विभाजन की तिथि।
- • बंगाल विभाजन — 'फूट डालो और राज करो' की नीति।
- • विभाजन ने 'बंग-भंग आंदोलन' को जन्म दिया।
- • 1905 — स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत।
- • स्वदेशी शब्द — विश्वनाथ नारायण मंडलिक (1905)।
- • विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार, स्वदेशी को प्रोत्साहन।
- • शिक्षा बहिष्कार — राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना।
- • उग्रपंथी नेता — तिलक, पाल, लाजपत राय, अरविंद घोष।
- • तिलक — 'लोकमान्य', 'भारतीय अशांति का जनक'।
- • तिलक का नारा — "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।"
- • तिलक — 'केसरी' (मराठी), 'मराठा' (अंग्रेजी) के संपादक।
- • गणपति उत्सव (1893) — तिलक द्वारा आरंभ।
- • 1908 — तिलक को मंडाले (बर्मा) निर्वासित किया गया।
- • बिपिन चंद्र पाल — 'बंगाल के राष्ट्रवादी चिंतक'।
- • पाल ने 'वंदे मातरम्' को लोकप्रिय बनाया।
- • लाला लाजपत राय — 'पंजाब केसरी'।
- • 1928 — लाजपत राय की मृत्यु (साइमन कमीशन के विरोध में लाठीचार्ज)।
- • अरविंद घोष — 'क्रांतिकारी से महायोगी'।
- • 1908 — अलीपुर षड्यंत्र केस (अरविंद बरी)।
- • 1907 — सूरत अधिवेशन (नरम-उग्र विभाजन)।
- • 1907 अधिवेशन अध्यक्ष — रास बिहारी घोष।
- • विभाजन का कारण — 'स्वशासन' बनाम 'पूर्ण स्वराज'।
- • 1906 — मुस्लिम लीग की स्थापना (ढाका)।
- • 1909 — मार्ले-मिंटो सुधार (भारतीय परिषद अधिनियम)।
- • 1909 — अलग निर्वाचन क्षेत्र (मुसलमान) की शुरुआत।
- • 1908 — मुजफ्फरपुर बम कांड (खुदीराम बोस)।
- • 1909 — कर्जन वाइली हत्याकांड (मदनलाल धींगरा)।
- • 1912 — दिल्ली बम कांड (राशबिहारी बोस)।
- • अनुशीलन समिति (1902) — बंगाल का प्रमुख क्रांतिकारी संगठन।
- • अभिनव भारत (1904) — सावरकर द्वारा महाराष्ट्र में।
- • लंदन इंडिया हाउस (1905) — श्यामजी कृष्ण वर्मा।
- • 1913 — गदर पार्टी की स्थापना (सैन फ्रांसिस्को, लाला हरदयाल)।
- • गदर पत्रिका — उर्दू, पंजाबी, अंग्रेजी में।
- • 1914 — कोमागाटा मारू घटना (कनाडा में भारतीयों को वापस कर दिया गया)।
- • 1915 — गदर विद्रोह की योजना विफल।
- • बर्लिन समिति (1914) — वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय।
- • 1916 — लखनऊ समझौता (नरम-उग्र एकीकरण)।
- • 1916 अधिवेशन अध्यक्ष — अम्बिका चरण मजुमदार।
- • लखनऊ समझौता — कांग्रेस-लीग संयुक्त माँगें।
- • 1905-1916 — कांग्रेस विभाजन का काल।
- • 1911 — बंगाल विभाजन रद्द (लॉर्ड हार्डिंग)।
- • 1905 — स्वदेशी आंदोलन ने भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन दिया।
- • राष्ट्रीय कॉलेज (कलकत्ता) — अरविंद घोष, बिपिन चंद्र पाल।
- • 1908 — तिलक की सजा — 6 वर्ष कारावास।
- • बाल गंगाधर तिलक — 'होम रूल लीग' (1916, पुणे)।
- • एनी बेसेंट — होम रूल लीग (मद्रास, 1916)।
- • 1917 — तिलक ने कांग्रेस में वापसी की (लखनऊ के बाद)।
- • उग्रपंथियों ने 'आत्मबल' और 'स्वाभिमान' पर बल दिया।
- • बंगाल विभाजन ने भारतीय राष्ट्रवाद को तीव्र किया।
- • 1905-1919 — 'उग्रपंथी युग' का अंत गांधी के उदय से हुआ।
- • 1919 — रौलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग — गांधी युग का आरंभ।
- • खुदीराम बोस, मदनलाल धींगरा — क्रांतिकारी शहीद।
- • राशबिहारी बोस — 1912 दिल्ली बम कांड के नायक।
- • यह अध्याय UPSC, CGPSC, UPPCS, NET हेतु पूर्ण है।
- उग्रपंथी युग (1905-1919) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का वह चरण था जिसने 'पूर्ण स्वराज' की माँग को स्पष्ट किया।
- इस युग में स्वदेशी, बहिष्कार, शिक्षा बहिष्कार जैसे नए हथियारों का उपयोग किया गया, जो आगामी आंदोलनों के लिए प्रेरणा बने।
- क्रांतिकारी आंदोलन ने युवाओं में आत्म-बलिदान की भावना को जगाया और ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।
- यह अध्याय UPSC, CGPSC, UPPCS, NET सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आधारभूत है।