छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास | Ancient History of Chhattisgarh
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CGPSC · Vyapam History Notes

छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास Ancient History of Chhattisgarh (Pre-historic to 8th Century)

प्रागैतिहासिक शैलचित्र, रामायण-महाभारत काल के साक्ष्य, मौर्य एवं गुप्त साम्राज्य का प्रभाव और सिरपुर के पांडुवंश का स्वर्णिम युग।
Dakshin Kosal Singhanpur Caves Hiuen Tsang Sirpur Somvansh
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अध्याय 01
प्रागैतिहासिक काल (Pre-historic Period)
पुरापाषाण काल (Paleolithic Age)
सिंघनपुर गुफा (रायगढ़)
यह छत्तीसगढ़ की सबसे प्राचीन गुफा है। यहाँ से सीढ़ीनुमा मानवाकृति, शिकार करते हुए मानव और गहरे लाल रंग के शैलचित्र (Rock paintings) मिले हैं। इसकी खोज 1910 में एंडरसन (Anderson) ने की थी।
मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)
कबरा पहाड़ (रायगढ़)
छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक शैलचित्र यहीं से प्राप्त हुए हैं। प्रमुख चित्रों में लाल रंग की छिपकली (Red lizard), सांभर, और घड़ियाल शामिल हैं। यहाँ से अर्धचंद्राकार पाषाण औजार भी मिले हैं।
नवपाषाण काल (Neolithic Age)
तेरम, अर्जुनी, चितवा डोंगरी
प्रमुख स्थल: अर्जुनी (दुर्ग), तेरम (रायगढ़), और चितवा डोंगरी (राजनांदगांव)। चितवा डोंगरी के शैलचित्रों की खोज भगवान सिंह बघेल और रमेंद्रनाथ मिश्र ने की थी। यहाँ से छिद्रित पत्थर के औजार मिले हैं।
महापाषाण काल (Megalithic Age)
गढ़धनोरा (कोंडागांव)
शवों को दफनाकर उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थर (स्मारक) रख दिए जाते थे। कोंडागांव के गढ़धनोरा से 500 से अधिक महापाषाण स्मारक प्राप्त हुए हैं (खोज: कामले एवं मिश्र)।
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अध्याय 02
रामायण एवं महाभारत काल (Epic Period)
वैदिक काल (Vedic Period)
ऋग्वेद में छत्तीसगढ़ का कोई उल्लेख नहीं है। शतपथ ब्राह्मण (उत्तर वैदिक काल) में इस क्षेत्र का वर्णन मिलता है। नर्मदा नदी को 'रेवा' नदी के नाम से जाना जाता था।
रामायण काल
दक्षिण कोसल एवं दंडकारण्य
• रामायण काल में छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोसल और बस्तर क्षेत्र को दंडकारण्य कहा जाता था।
• दक्षिण कोसल की राजधानी कुशस्थली थी (राजा भानुमंत की पुत्री कौशल्या का विवाह दशरथ से हुआ)।
प्रमुख स्थल: रामगढ़ की पहाड़ी, शिवरीनारायण (शबरी के जूठे बेर), पंचवटी, और तुरतुरिया (वाल्मीकि आश्रम - लव-कुश का जन्मस्थल)।
महाभारत काल
प्राक्-कोसल एवं कांतार
• इस काल में छत्तीसगढ़ को प्राक्-कोसल और बस्तर को कांतार (या महाकांतार) कहा जाता था।
प्रमुख स्थल (प्राचीन नाम): रतनपुर (मणिपुर - ताम्रध्वज की राजधानी), सिरपुर (चित्रांगदपुर - बभ्रुवाहन की राजधानी), आरंग (भांडेर), गूंजी (ऋषभतीर्थ)।
• बिलासपुर के मल्हार से वेदव्यास के आश्रम के साक्ष्य माने जाते हैं।
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अध्याय 03
मौर्य, सातवाहन एवं गुप्त काल
मौर्य काल (Mauryan Period)
जोगीमारा एवं सीताबेंगरा गुफाएँ
सरगुजा जिले की रामगढ़ पहाड़ियों में अशोक कालीन अभिलेख मिले हैं। जोगीमारा गुफा के अभिलेख पाली भाषा और ब्राह्मी लिपि में हैं। इसमें देवदासी 'सुतनुका' और कलाकार 'देवदत्त' की प्रेम गाथा का वर्णन है। मौर्यकालीन सिक्के अकलतरा, ठठरी और बारगाँव से प्राप्त हुए हैं।
सातवाहन काल (Satavahana Period)
किरारी का काष्ठ स्तंभ (Wooden Pillar)
जांजगीर-चांपा के किरारी ग्राम से 1921 में सातवाहन कालीन लकड़ी का स्तंभ (काष्ठ स्तंभ) प्राप्त हुआ, जिसमें अधिकारियों के नाम अंकित हैं।
गूंजी (दमाऊदरहा) का शिलालेख: राजा कुमारदत्त (वरदत्त) का लेख मिला है। सिक्के बालपुर (अपीलक के सिक्के), मल्हार, और चक्करबेड़ा से मिले हैं।
कुषाण एवं वाकाटक काल (Kushan & Vakataka)
सिक्के एवं प्रभाव
कुषाणकालीन सोने के सिक्के बिलासपुर (तेलीकोट) से मिले। वाकाटक वंश की राजधानी नंदीवर्धन (नागपुर) थी। वाकाटक नरेश प्रवरसेन का प्रभाव छत्तीसगढ़ पर था। वाकाटकों और गुप्तों के वैवाहिक संबंध थे (प्रभावती गुप्त का विवाह रुद्रसेन द्वितीय से)।
गुप्त काल (Gupta Period)
समुद्रगुप्त का दक्षिणापथ अभियान
प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण रचित) के अनुसार, समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिण अभियान के दौरान कोसल के राजा महेन्द्र और महाकांतार (बस्तर) के राजा व्याघ्रराज को हराया था। गुप्तकालीन सिक्के बानाबरद (दुर्ग) से बड़ी मात्रा में प्राप्त हुए हैं।
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अध्याय 04
प्रमुख क्षेत्रीय राजवंश (Regional Dynasties)
राजर्षितुल्य कुल वंश
राजधानी: आरंग (5वीं-6वीं सदी)
यह छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थानीय राजवंश माना जाता है। इसकी जानकारी शासक भीमसेन द्वितीय के 'आरंग ताम्रपत्र' से मिलती है। इसमें 6 शासकों के नाम (शूर से लेकर भीमसेन द्वितीय तक) वर्णित हैं। इस वंश का राजचिह्न 'सिंह' था।
नल वंश
राजधानी: पुष्करी / कोरापुट (बस्तर)
बस्तर क्षेत्र में शासन। प्रमुख शासक: भवदत्त वर्मन (वाकाटकों को हराया), स्कंदवर्मन (पुष्करी को पुनः बसाया)।
प्रसिद्ध शासक विलासतुंग ने राजिम में राजीव लोचन मंदिर (विष्णु मंदिर) का निर्माण (7वीं-8वीं सदी) कराया था।
शरभपुरीय वंश
राजधानी: शरभपुर
संस्थापक: शरभराज। इन्होने गुप्तों की अधीनता स्वीकार की थी। इनके सिक्के सोने के होते थे जिन पर 'गजलक्ष्मी' का चित्र होता था।
शासक प्रवरराज प्रथम ने नई राजधानी सिरपुर (श्रीपुर) की स्थापना की थी।
पांडु वंश (सोमवंश) - सिरपुर शाखा
स्वर्णिम युग (Golden Era)
संस्थापक: उदयन। प्रतापी शासक तीवरदेव ने 'सकलकोसलाधिपति' की उपाधि ली।
महांशिवगुप्त बालार्जुन: इनका काल छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्ण काल कहलाता है। शैव धर्म के अनुयायी। इनकी माता रानी वसाटा ने सिरपुर में लाल ईंटों से प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर (विष्णु मंदिर) का निर्माण कराया। 639 ई. में चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) इन्ही के काल में सिरपुर आया था।
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Quick Revision
25 महत्वपूर्ण One-Liners (CGPSC / Vyapam)
01
छत्तीसगढ़ की सबसे प्राचीन गुफा सिंघनपुर (रायगढ़) है, जो पुरापाषाण काल की है।
02
सर्वाधिक शैलचित्र (Rock paintings) कबरा पहाड़ (रायगढ़) से प्राप्त हुए हैं।
03
महापाषाण कालीन (Megalithic) स्मारक कोंडागांव के गढ़धनोरा से प्राप्त हुए हैं।
04
ऋग्वेद में छत्तीसगढ़ क्षेत्र का कोई उल्लेख नहीं मिलता है।
05
रामायण काल में छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोसल और बस्तर को दंडकारण्य कहा जाता था।
06
भगवान राम ने अपना अधिकांश वनवास समय दंडकारण्य (बस्तर) में बिताया था।
07
लव-कुश का जन्मस्थल वाल्मीकि आश्रम तुरतुरिया (बलौदाबाजार) माना जाता है।
08
महाभारत काल में सिरपुर का प्राचीन नाम चित्रांगदपुर था, जो बभ्रुवाहन की राजधानी थी।
09
मौर्यकालीन सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफा सरगुजा के रामगढ़ पहाड़ी पर स्थित हैं।
10
जोगीमारा गुफा में देवदासी सुतनुका का वर्णन पाली भाषा और ब्राह्मी लिपि में है।
11
सातवाहन कालीन काष्ठ स्तंभ (Wooden Pillar) जांजगीर-चांपा के किरारी ग्राम से प्राप्त हुआ है।
12
समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिण अभियान में कोसल के शासक महेन्द्र को पराजित किया था।
13
समुद्रगुप्त ने महाकांतार (बस्तर) के राजा व्याघ्रराज को पराजित किया था (प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार)।
14
गुप्तकालीन सिक्कों का सबसे बड़ा भण्डार बानाबरद (दुर्ग) से मिला है।
15
छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थानीय राजवंश राजर्षितुल्य कुल वंश को माना जाता है (राजधानी: आरंग)।
16
नल वंश का शासन बस्तर (महाकांतार) क्षेत्र में था (राजधानी: पुष्करी)।
17
राजिम के प्रसिद्ध राजीव लोचन मंदिर का निर्माण नल वंश के शासक विलासतुंग ने कराया था।
18
शरभपुरीय शासकों के सिक्कों पर गजलक्ष्मी का अंकन होता था।
19
सिरपुर (श्रीपुर) नगर की स्थापना शरभपुरीय शासक प्रवरराज प्रथम ने की थी।
20
पांडु (सोम) वंश के किस शासक ने 'सकलकोसलाधिपति' की उपाधि ली थी? तीवरदेव ने
21
प्राचीन छत्तीसगढ़ के इतिहास का स्वर्ण काल महाशिवगुप्त बालार्जुन का काल माना जाता है।
22
चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) ने 639 ई. (7वीं सदी) में सिरपुर की यात्रा की थी।
23
ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत (Si-Yu-Ki) में छत्तीसगढ़ को 'किया-स-लो' (Kiasalo) कहा है।
24
सिरपुर का प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर लाल ईंटों से बना है, जिसका निर्माण रानी वसाटा (बालार्जुन की माता) ने कराया।
25
लक्ष्मण मंदिर (सिरपुर) मूलतः एक विष्णु मंदिर (वैष्णव धर्म) है।
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Practice Test
अभ्यास प्रश्न (MCQs)
1. चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) ने किस शासक के काल में सिरपुर की यात्रा की थी?
A. तीवरदेव
B. विलासतुंग
C. महाशिवगुप्त बालार्जुन
D. भवदत्त वर्मन
सही उत्तर: C. महाशिवगुप्त बालार्जुन (639 ई. में। इनके काल को छत्तीसगढ़ का स्वर्ण काल भी कहा जाता है)।
2. प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार, समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिणापथ अभियान में कोसल के किस राजा को हराया था?
A. महेन्द्र
B. व्याघ्रराज
C. शरभराज
D. महाशिवगुप्त
सही उत्तर: A. महेन्द्र (महाकांतार/बस्तर के राजा व्याघ्रराज को हराया था और कोसल के महेन्द्र को)।
3. जोगीमारा एवं सीताबेंगरा की गुफाएँ (रामगढ़) किस काल से संबंधित मानी जाती हैं?
A. गुप्त काल
B. सातवाहन काल
C. पाषाण काल
D. मौर्य काल
सही उत्तर: D. मौर्य काल (यहाँ से अशोक कालीन पाली भाषा और ब्राह्मी लिपि के लेख मिले हैं)।
4. राजिम के प्रसिद्ध 'राजीव लोचन मंदिर' का निर्माण किस नलवंशी शासक ने कराया था?
A. भवदत्त वर्मन
B. विलासतुंग
C. स्कंदवर्मन
D. अर्थपति भट्टारक
सही उत्तर: B. विलासतुंग (यह भगवान विष्णु का मंदिर है, जिसे 7वीं-8वीं सदी में बनवाया गया)।
5. 1921 में प्राप्त 'किरारी का काष्ठ स्तंभ' (Wooden Pillar) किस राजवंश से संबंधित है?
A. कुषाण वंश
B. सातवाहन वंश
C. मौर्य वंश
D. वाकाटक वंश
सही उत्तर: B. सातवाहन वंश (यह जांजगीर-चांपा के किरारी ग्राम से मिला, जिस पर सातवाहन अधिकारियों के नाम हैं)।
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