छत्तीसगढ़ का मध्यकालीन इतिहास | Medieval History of Chhattisgarh
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CGPSC · Vyapam History Notes

छत्तीसगढ़ का मध्यकालीन इतिहास Medieval History of Chhattisgarh (9th to 18th Century)

कल्चुरी वंश, फणि नागवंश, छिंदक नागवंश और काकतीय वंश के प्रतापी शासक, उनकी स्थापत्य कला और प्रमुख युद्धों का संपूर्ण परीक्षा-उन्मुख सार।
Kalachuri Dynasty Kakatiya of Bastar Nagvansh Temple Architecture Kalyan Sai
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अध्याय 01
कल्चुरी वंश (Kalachuri Dynasty)
रतनपुर शाखा (Ratanpur Branch)
छत्तीसगढ़ में कल्चुरियों का शासन सबसे लंबा (लगभग 750 वर्ष) रहा। इसके संस्थापक कलिंगराज (1000 ई.) थे, जिन्होंने तुम्माण को अपनी पहली राजधानी बनाया।
कलिंगराज (1000 - 1020 ई.)
संस्थापक
इन्होंने दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) में कल्चुरी सत्ता की स्थापना की और राजधानी तुम्माण (वर्तमान कोरबा) को बनाया। महमूद गजनवी के समकालीन।
रत्नदेव प्रथम (1045 - 1065 ई.)
रतनपुर नगर की स्थापना
1050 ई. में रतनपुर (कुबेरपुर) शहर बसाया और इसे अपनी नई राजधानी बनाया। रतनपुर में प्रसिद्ध महामाया मंदिर का निर्माण कराया।
जाजल्लदेव प्रथम (1090 - 1120 ई.)
सर्वाधिक प्रतापी शासक (स्वर्ण काल)
कल्चुरियों का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक। इसने बस्तर के छिंदक नागवंशी शासक सोमेश्वर देव को पराजित कर सपरिवार बंदी बना लिया था। 'जाजल्लनगर' (वर्तमान जांजगीर) बसाया। सोने के सिक्के (श्रीमज्जजाजल्लदेव) चलवाए।
कल्याण साय (1544 - 1581 ई.)
राजस्व सुधार (जमाबंदी प्रणाली)
इन्होंने मुगल सम्राट अकबर के दरबार (जहांगीर के समय अनुसार भी कुछ स्रोत कहते हैं, पर मुख्य रूप से 16वीं सदी) में 8 वर्ष बिताए। छत्तीसगढ़ में 'जमाबंदी प्रणाली' और 'गढ़ व्यवस्था' (36 गढ़ों का विभाजन) लागू की।
रघुनाथ सिंह (1732 - 1745 ई.)
अंतिम स्वतंत्र शासक
1741 ई. में मराठा सेनापति भास्कर पंत के आक्रमण के समय इन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे रतनपुर शाखा का पतन हो गया।
रायपुर (लहुरी) शाखा
संस्थापक: रामचंद्र देव / ब्रह्मदेव राय (14वीं सदी के अंत में)।
इन्होंने अपने पुत्र ब्रह्मदेव राय के नाम पर रायपुर नगर बसाया (1409 ई.) और इसे राजधानी बनाया। इस शाखा के अंतिम शासक अमर सिंह थे, जिन्हें 1750 में मराठों ने हरा दिया।
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अध्याय 02
नागवंश (फणि एवं छिंदक नागवंश)
फणि नागवंश (Fani Nagvansh)
कवर्धा क्षेत्र (11वीं से 14वीं सदी)
संस्थापक: अहिराज। राजधानी: कवर्धा।
गोपाल देव: इन्होंने 1089 ई. (11वीं सदी) में प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर का निर्माण कराया जिसे 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहा जाता है।
रामचंद्र देव: इन्होंने 1349 ई. में मड़वा महल (दूल्हादेव) और छेरकी महल का निर्माण कराया। इनका विवाह कल्चुरी राजकुमारी अंबिका देवी से हुआ था।
छिंदक नागवंश (Chhindaka Nagvansh)
बस्तर (चक्रकोट/भ्रमरकोट) क्षेत्र
संस्थापक: नृपतिभूषण (1023 ई.)। राजधानी: बारसूर।
सोमेश्वर देव प्रथम: इस वंश का सबसे प्रतापी शासक। इसे कल्चुरी राजा जाजल्लदेव प्रथम ने हराया था।
स्थापत्य: इस वंश के शासकों ने बारसूर में चंद्रादित्येश्वर मंदिर, मामा-भांजा मंदिर और बत्तीसा मंदिर का निर्माण कराया। 1324 ई. में काकतीय वंश के अन्नम देव ने अंतिम शासक हरिश्चंद्र को हराकर इस वंश का अंत किया।
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अध्याय 03
काकतीय वंश (बस्तर)
यह वंश मूलतः वारंगल (तेलंगाना) का था। दिल्ली सल्तनत (अलाउद्दीन खिलजी/प्रताप रुद्रदेव) के समय के बाद ये बस्तर आ गए। इन्होने बस्तर में 1324 ई. से लेकर 1948 ई. (भारत विलय) तक शासन किया।
अन्नम देव (Annam Deva)
संस्थापक (1324 ई.)
काकतीय सत्ता की स्थापना की। दंतेवाड़ा में अपनी कुलदेवी दंतेश्वरी माता के मंदिर का निर्माण कराया, जो शंखनी-डंकनी नदी के संगम पर है। इनकी पहली राजधानी 'मन्दोता' थी।
पुरुषोत्तम देव
गोंचा पर्व की शुरुआत
ये पेट के बल रेंगते हुए जगन्नाथ पुरी गए थे। वहां के राजा ने इन्हें 'रथपति' की उपाधि और 16 पहियों वाला रथ भेंट किया। बस्तर में रथ यात्रा (गोंचा पर्व) की शुरुआत इन्होंने ही की थी।
दरियाव देव
कोटपाड़ की संधि (1778)
अपने भाई अजमेर सिंह (हलबा विद्रोह के नेता) को हराने के लिए जयपुर (ओडिशा) के राजा और मराठों से सहायता ली। कोटपाड़ की संधि (1778) के तहत बस्तर मराठों (भोंसले) के अधीन हो गया।
दलपत देव और प्रवीर चंद्र भंजदेव
दलपत देव: इन्होंने राजधानी को बस्तर से जगदलपुर स्थानांतरित किया और 'दलपत सागर' बनवाया।
प्रवीर चंद्र भंजदेव: ये बस्तर के अंतिम काकतीय शासक थे, जिन्होंने 1 जनवरी 1948 को भारतीय संघ में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
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अध्याय 04
मध्यकालीन प्रमुख मंदिर एवं स्थापत्य
स्थापत्य / मंदिरस्थाननिर्माता शासकराजवंश
महामाया मंदिररतनपुर (बिलासपुर)रत्नदेव प्रथमकल्चुरी वंश
भोरमदेव मंदिरचौरा ग्राम (कवर्धा)गोपाल देव (1089 ई.)फणि नागवंश
मड़वा महल (दूल्हादेव)कवर्धारामचंद्र देव (1349 ई.)फणि नागवंश
मामा-भांजा मंदिरबारसूर (दंतेवाड़ा)छिंदक शासकछिंदक नागवंश
दंतेश्वरी मंदिरदंतेवाड़ाअन्नम देवकाकतीय वंश
पृथ्वीदेवेश्वर मंदिरतुम्माण (कोरबा)पृथ्वीदेव प्रथमकल्चुरी वंश
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Quick Revision
25 महत्वपूर्ण One-Liners (CGPSC / Vyapam)
01
छत्तीसगढ़ में कल्चुरी वंश की स्थापना कलिंगराज ने वर्ष 1000 ई. के आसपास की थी।
02
कल्चुरियों की प्रारंभिक राजधानी तुम्माण (वर्तमान कोरबा जिला) थी।
03
रतनपुर नगर की स्थापना 1050 ई. में रत्नदेव प्रथम ने की थी।
04
बस्तर के सोमेश्वर देव (छिंदक नागवंश) को पराजित करने वाला कल्चुरी शासक जाजल्लदेव प्रथम था।
05
जांजगीर (जाजल्लनगर) शहर की स्थापना जाजल्लदेव प्रथम ने की थी।
06
छत्तीसगढ़ में कल्चुरी काल में राजस्व की जमाबंदी प्रणाली कल्याण साय ने शुरू की।
07
रतनपुर के कल्चुरी वंश का अंतिम स्वतंत्र शासक रघुनाथ सिंह था।
08
रायपुर (लहुरी) शाखा की स्थापना रामचंद्र देव / ब्रह्मदेव ने की थी।
09
रायपुर शाखा के अंतिम शासक अमर सिंह थे, जिन्हें मराठों ने 1750 में हराया।
10
फणि नागवंश का शासन कवर्धा (कबीरधाम) क्षेत्र में था।
11
'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहे जाने वाले भोरमदेव मंदिर का निर्माण गोपाल देव (1089 ई.) ने कराया।
12
कवर्धा के मड़वा महल (दूल्हादेव) का निर्माण रामचंद्र देव ने कराया था।
13
बस्तर के छिंदक नागवंश की राजधानी बारसूर (चक्रकोट) थी।
14
बारसूर का प्रसिद्ध मामा-भांजा मंदिर और बत्तीसा मंदिर छिंदक नागवंशियों ने बनवाया था।
15
बस्तर में काकतीय वंश का संस्थापक अन्नम देव (1324 ई.) था।
16
अन्नम देव वारंगल के शासक प्रताप रुद्रदेव के भाई थे।
17
दंतेवाड़ा में डंकनी-शंखनी नदी के संगम पर दंतेश्वरी माता मंदिर का निर्माण अन्नम देव ने कराया।
18
बस्तर में रथ यात्रा (गोंचा पर्व) की शुरुआत काकतीय शासक पुरुषोत्तम देव ने की थी।
19
बस्तर की राजधानी बारसूर से जगदलपुर दलपत देव ने स्थानांतरित की।
20
कोटपाड़ की संधि (1778) राजा दरियाव देव और मराठों के बीच हुई, जिससे बस्तर मराठों के अधीन हो गया।
21
बस्तर का अंतिम काकतीय शासक प्रवीर चंद्र भंजदेव था।
22
राजिम के राजीवलोचन मंदिर का जीर्णोद्धार कल्चुरी सेनापति जगतपाल ने कराया था (पृथ्वीदेव द्वितीय के काल में)।
23
कल्चुरी प्रशासन में 'महाप्रमातृ' का पद राजस्व विभाग (Revenue) का प्रमुख होता था।
24
बाण वंश का शासन कोरबा क्षेत्र में था, जिसकी राजधानी पाली थी। विक्रमादित्य ने पाली का शिव मंदिर बनवाया।
25
कल्चुरी शासक पृथ्वीदेव प्रथम ने 'सकल कोसलाधिपति' की उपाधि धारण की थी।
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Practice Test
अभ्यास प्रश्न (MCQs)
1. छत्तीसगढ़ में कल्चुरी वंश की प्रारंभिक राजधानी क्या थी?
A. रतनपुर
B. तुम्माण
C. जांजगीर
D. रायपुर
सही उत्तर: B. तुम्माण (कलिंगराज ने 1000 ई. में इसे अपनी राजधानी बनाया था)।
2. बस्तर में 'रथ यात्रा' (गोंचा पर्व) प्रारंभ करने का श्रेय किस काकतीय शासक को जाता है?
A. पुरुषोत्तम देव
B. अन्नम देव
C. दलपत देव
D. दरियाव देव
सही उत्तर: A. पुरुषोत्तम देव (इन्हें पुरी के राजा से 16 पहियों वाला रथ और 'रथपति' की उपाधि मिली थी)।
3. 'भोरमदेव मंदिर' का निर्माण किस नागवंशी शासक के काल में हुआ?
A. रामचंद्र देव
B. अहिराज
C. गोपाल देव
D. सोमेश्वर देव
सही उत्तर: C. गोपाल देव (फणि नागवंश के शासक गोपाल देव ने 1089 ई. में इसे बनवाया)।
4. बस्तर के छिंदक नागवंश की राजधानी निम्नलिखित में से कौन सी थी?
A. मन्दोता
B. जगदलपुर
C. कवर्धा
D. बारसूर
सही उत्तर: D. बारसूर (इसे चक्रकोट या भ्रमरकोट भी कहा जाता था)।
5. किस कल्चुरी शासक ने बस्तर के सोमेश्वर देव को पराजित कर सपरिवार बंदी बना लिया था?
A. रत्नदेव प्रथम
B. जाजल्लदेव प्रथम
C. पृथ्वीदेव प्रथम
D. कल्याण साय
सही उत्तर: B. जाजल्लदेव प्रथम (यह कल्चुरी वंश का सबसे प्रतापी शासक था)।
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