प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत | Sources of Ancient Indian History
examcg.com · प्राचीन भारत · इतिहास के स्रोत

प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत Sources of Ancient Indian History

साहित्य, पुरातत्त्व और विदेशी विवरण — तीन साक्ष्य-धाराएँ, जिन्हें जोड़कर प्राचीन भारत का चित्र बनता है। तथ्य, तालिकाएँ, PYQ और स्वयं-जाँच एक ही पृष्ठ पर।

1500 ई.पू.ऋग्वेद — प्राचीनतम साहित्यिक स्रोत
तीसरी सदी ई.पू.अशोक के अभिलेख — प्राचीनतम पठित लेख
150 ई.जूनागढ़ — संस्कृत का प्रथम विस्तृत अभिलेख
1837 ई.जेम्स प्रिंसेप — ब्राह्मी लिपि का वाचन

01स्रोत क्यों, और कितने प्रकार के Why Sources and Their Types

प्राचीन भारत का कोई एक तैयार इतिहास-ग्रंथ नहीं मिलता। जो चित्र हम पढ़ते हैं, वह तीन प्रकार की सामग्री जोड़कर बनाया गया है — लिखे हुए ग्रंथ, ज़मीन से निकले अवशेष, और बाहर से आए यात्रियों की आँखों देखी।

ध्यान रखने योग्य बात यह है कि तीनों प्रकार एक-दूसरे की जाँच भी करते हैं। साहित्य किसी राजा की प्रशंसा कर सकता है, पर उसके सिक्कों की धातु-शुद्धता बताती है कि राज्य वास्तव में समृद्ध था या नहीं। इसी टकराव से इतिहास बनता है।

प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत

साहित्यिक स्रोत

  • धार्मिक — वैदिक, बौद्ध, जैन
  • धर्मनिरपेक्ष — अर्थशास्त्र, राजतरंगिणी
  • व्याकरण एवं कोश
  • जीवनी-काव्य (चरित)
  • संगम साहित्य

पुरातात्विक स्रोत

  • अभिलेख (Epigraphy)
  • मुद्रा (Numismatics)
  • स्मारक, मंदिर, स्तूप
  • उत्खनन एवं मृद्भाण्ड

विदेशी विवरण

  • यूनानी-रोमन लेखक
  • चीनी बौद्ध यात्री
  • अरब एवं फ़ारसी विद्वान
  • तिब्बती एवं श्रीलंकाई अनुश्रुति
परीक्षा-दृष्टि · मूल बिंदु
  • सर्वाधिक विश्वसनीय स्रोतअभिलेख, क्योंकि वे समकालीन हैं, पत्थर या ताँबे पर उत्कीर्ण हैं और बाद में बदले नहीं जा सकते।
  • सबसे प्राचीन साहित्यिक स्रोतऋग्वेद (लगभग 1500–1000 ई.पू.)।
  • साहित्य की सीमा — तिथि-निर्धारण कठिन, प्रक्षेप (बाद के जोड़) की संभावना, तथा धार्मिक-वर्गीय पूर्वाग्रह।
  • पुरातत्त्व की सीमा — अवशेष मूक हैं; वे "क्या था" बताते हैं, "क्यों था" नहीं।
  • विदेशी विवरण की सीमा — लेखक अल्पकालिक अतिथि था, भाषा अधूरी जानता था, इसलिए अतिशयोक्ति एवं भ्रम मिलते हैं।
  • ब्राह्मी लिपि का वाचनजेम्स प्रिंसेप, 1837 ई. — इसी से अशोक "देवानांप्रिय प्रियदर्शी" के रूप में पहचाना गया।

02साहित्यिक स्रोत Literary Sources

साहित्य हमें विचार देता है — धर्म, दर्शन, विधि, राजनीति और दैनिक जीवन के मूल्य। तिथियाँ यहाँ कमज़ोर हैं, पर सामाजिक चित्र सबसे समृद्ध यहीं मिलता है।

क · धार्मिक साहित्य Religious

वैदिक साहित्य Vedic

  • संहिता — ऋक्, यजु, साम, अथर्व। ऋग्वेद सबसे प्राचीन।
  • ब्राह्मण — यज्ञ-विधि की व्याख्या (ऐतरेय, शतपथ)।
  • आरण्यक — वन में चिंतन, यज्ञ का प्रतीकात्मक अर्थ।
  • उपनिषद — दर्शन; 108 में 13 प्रमुख। "सत्यमेव जयते" — मुण्डक उपनिषद।
  • वेदांग — शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।
  • स्मृति — मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य, नारद — सामाजिक-विधिक ढाँचा।

बौद्ध साहित्य Buddhist

  • त्रिपिटक (पालि) — विनय, सुत्त एवं अभिधम्म पिटक।
  • जातक — 547 कथाएँ; ई.पू. छठी–दूसरी सदी का समाज एवं व्यापार।
  • दीपवंश एवं महावंश — श्रीलंकाई इतिवृत्त; मौर्य कालक्रम के लिए निर्णायक।
  • मिलिन्दपन्हो — नागसेन एवं यवन राजा मिनाण्डर का संवाद।
  • महावस्तु, ललितविस्तर, दिव्यावदान — संस्कृत बौद्ध ग्रंथ।

जैन साहित्य Jaina

  • आगम — 12 अंग, 12 उपांग (अर्धमागधी प्राकृत)।
  • भगवती सूत्र — महावीर का जीवन एवं महाजनपदों का उल्लेख।
  • कल्पसूत्र — भद्रबाहु; तीर्थंकर-परंपरा।
  • परिशिष्टपर्वन् — हेमचन्द्र; चन्द्रगुप्त मौर्य का दक्षिण-गमन।
  • जैन ग्रंथ व्यापार, नगर एवं वणिक वर्ग पर सर्वाधिक प्रकाश डालते हैं।

ख · धर्मनिरपेक्ष एवं ऐतिहासिक ग्रंथ Secular and Historical

ग्रंथरचयितामहत्त्व
अर्थशास्त्रकौटिल्य / चाणक्यराजनीति, प्रशासन, कर, गुप्तचर व्यवस्था — मौर्य राज्य का प्रामाणिक चित्र। 15 अधिकरण।
राजतरंगिणीकल्हण (1148 ई.)कश्मीर का इतिहास — भारत का प्रथम व्यवस्थित तिथि-क्रम आधारित इतिहास-ग्रंथ।
मुद्राराक्षसविशाखदत्तनाटक — नन्द-मौर्य संक्रमण एवं चाणक्य की कूटनीति।
हर्षचरितबाणभट्टहर्षवर्धन का दरबारी जीवन-चरित — प्रथम ऐतिहासिक गद्य-काव्य।
गार्गी संहिताज्योतिष ग्रंथ; यवन (यूनानी) आक्रमण का उल्लेख।
मालविकाग्निमित्रम्कालिदासशुंग वंश एवं पुष्यमित्र-अग्निमित्र काल की सूचना।
विक्रमांकदेवचरितबिल्हणचालुक्य नरेश विक्रमादित्य षष्ठ का चरित।
गौडवहोवाक्पतिकन्नौज के यशोवर्मन की विजय।
रामचरितसन्ध्याकर नन्दीद्व्यर्थक काव्य — पाल नरेश रामपाल एवं कैवर्त विद्रोह।

ग · व्याकरण, कोश एवं संगम Grammar, Lexicon and Sangam

व्याकरण एवं कोश Grammar and Lexicon

  • अष्टाध्यायी — पाणिनि (लगभग 500 ई.पू.); संस्कृत व्याकरण का आधार, तत्कालीन भूगोल एवं जनपदों की सूचना।
  • महाभाष्य — पतंजलि (लगभग 150 ई.पू.); शुंग काल एवं यवन आक्रमण का संकेत।
  • कातन्त्र — सर्ववर्मन; सातवाहन नरेश हाल के लिए रचित।
  • अमरकोश — अमरसिंह; गुप्तकालीन शब्द-भंडार एवं सामाजिक श्रेणियाँ।
  • निरुक्त — यास्क; वैदिक शब्दों की प्राचीनतम व्युत्पत्ति।

संगम साहित्य Sangam Literature

  • तीन संगम — मदुरै केन्द्रित; काल लगभग 300 ई.पू.–300 ई.
  • तोल्काप्पियम् — तमिल व्याकरण का प्राचीनतम ग्रंथ।
  • एट्टुत्तोकै (आठ संग्रह) एवं पत्तुप्पाट्टु (दस गीत)।
  • शिलप्पदिकारम् (इलंगो आडिगल) एवं मणिमेखलै (सत्तनार) — तमिल महाकाव्य।
  • चेर, चोल एवं पाण्ड्य राज्यों तथा रोमन व्यापार का प्रत्यक्ष विवरण।
महत्वपूर्ण तथ्य
  • प्राचीनतम व्याकरण ग्रंथ — अष्टाध्यायी (पाणिनि)।
  • तिथि-क्रम सहित लिखा प्रथम इतिहास — राजतरंगिणी (कल्हण)।
  • मौर्य कालक्रम की रीढ़ — श्रीलंकाई दीपवंश एवं महावंश
  • पुराण — कुल 18; इनमें भविष्य-वाणी शैली में राजवंशावलियाँ दी गई हैं (मत्स्य, वायु, विष्णु पुराण सर्वाधिक उपयोगी)।
  • रामायण की मूल रचना वाल्मीकि, महाभारत का प्राचीन नाम जय संहिता (8,800 श्लोक) → भारत (24,000) → महाभारत (1,00,000)।

03पुरातात्विक स्रोत Archaeological Sources

पुरातत्त्व वह साक्ष्य है जिसे कोई बाद में संशोधित नहीं कर सका। यहीं से तिथियाँ, सीमाएँ और आर्थिक स्थिति की ठोस पुष्टि मिलती है।

अभिलेख Epigraphy

  • प्रकार — शिलालेख, स्तंभलेख, गुहालेख, ताम्रपत्र, मूर्तिलेख, मुद्रालेख।
  • विषय के अनुसार — प्रशस्ति (राजप्रशंसा), दानपत्र (भूमि-अनुदान), धार्मिक आदेश।
  • लिपियाँ — ब्राह्मी (बाएँ→दाएँ), खरोष्ठी (दाएँ→बाएँ, अरामाइक प्रभाव)।
  • प्राचीनतम पठित अभिलेख — अशोक के लेख, तीसरी सदी ई.पू.
  • संस्कृत में प्रथम विस्तृत अभिलेख — रुद्रदामन का जूनागढ़ लेख (150 ई.)।

उत्खनन एवं मृद्भाण्ड Excavation and Pottery

  • हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो — नगर-नियोजन, जल-निकासी, मुहरें।
  • धौलावीरा, लोथल, कालीबंगा — जल-प्रबंधन, गोदीबाड़ा, जुते खेत।
  • मृद्भाण्ड क्रम — गैरिक (OCP) → चित्रित धूसर (PGW) → उत्तरी कृष्ण मार्जित (NBPW)।
  • PGW उत्तर वैदिक बस्तियों से, NBPW द्वितीय नगरीकरण से जुड़ा।
  • कार्बन-14 पद्धति से निरपेक्ष तिथि-निर्धारण संभव हुआ।

स्मारक एवं स्थापत्य Monuments and Architecture

  • स्तूप — साँची, भरहुत, अमरावती, नागार्जुनकोंडा।
  • गुहा — बराबर (आजीवक), अजन्ता, एलोरा, कार्ले, उदयगिरि।
  • मंदिर — देवगढ़ का दशावतार, भीतरगाँव, ऐहोल-पट्टदकल।
  • मूर्तिकला — गांधार (यूनानी-रोमन प्रभाव), मथुरा (देशी, चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर), अमरावती (सफ़ेद संगमरमर)।

पुरातत्त्व की व्याख्या Interpreting Archaeology

  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना — 1861, प्रथम महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम
  • जॉन मार्शल के काल में हड़प्पा-मोहनजोदड़ो की घोषणा (1924)।
  • अवशेष मूक होते हैं — उनका अर्थ तभी बनता है जब साहित्य एवं अभिलेख से जोड़ा जाए।
  • इसीलिए आधुनिक इतिहास-लेखन में तीनों स्रोतों का संयुक्त पाठ अनिवार्य माना जाता है।

04परीक्षोपयोगी प्रमुख अभिलेख Key Inscriptions for Exams

अभिलेखशासक / रचयितामुख्य सूचना
बोगजकोई (एशिया माइनर)हित्ती–मित्तानी संधि, 1400 ई.पू.इन्द्र, मित्र, वरुण, नासत्य के नाम — आर्यों की प्राचीनता का बाह्य प्रमाण।
अशोक के शिला एवं स्तंभ लेखअशोक, तीसरी सदी ई.पू.धम्म, कलिंग युद्ध का पश्चात्ताप (13वाँ शिलालेख), प्रशासन एवं धर्म-सहिष्णुता।
हाथीगुम्फाखारवेल (कलिंग)जैन धर्म, सैन्य अभियान, नहर-निर्माण; प्राकृत भाषा।
जूनागढ़ / गिरनाररुद्रदामन, 150 ई.सुदर्शन झील की मरम्मत; संस्कृत का प्रथम विस्तृत अभिलेख।
नासिक गुहालेखगौतमी बलश्रीसातवाहन नरेश गौतमीपुत्र सातकर्णि की उपलब्धियाँ।
प्रयाग प्रशस्तिहरिषेण (समुद्रगुप्त हेतु)समुद्रगुप्त की दिग्विजय; आर्यावर्त एवं दक्षिणापथ नीति का भेद।
मंदसौर अभिलेखवत्सभट्टिरेशम बुनकर श्रेणी द्वारा सूर्य मंदिर निर्माण — गुप्तकालीन श्रेणी-व्यवस्था।
भितरी एवं जूनागढ़ (स्कंदगुप्त)स्कंदगुप्तहूण आक्रमण का प्रतिरोध; सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण।
ऐहोल प्रशस्तिरविकीर्ति (पुलकेशिन द्वितीय हेतु)हर्षवर्धन की पराजय; कालिदास एवं भारवि का उल्लेख।
उत्तरमेरूर अभिलेखपरांतक चोल प्रथमचोल ग्राम-स्वशासन एवं कुडवोलै निर्वाचन पद्धति।
मेहरौली लौह-स्तंभ लेखचन्द्र (सम्भवतः चन्द्रगुप्त द्वितीय)वंग एवं वाह्लीक विजय; उन्नत धातुकर्म का प्रमाण।

तालिका दाएँ-बाएँ स्क्रॉल की जा सकती है।

अशोक के अभिलेख · त्वरित पुनरावृत्ति
  • 14 वृहद् शिलालेख — धम्म की व्यावहारिक शिक्षा; 13वाँ कलिंग युद्ध पर।
  • लघु शिलालेख — मास्की एवं गुर्जरा में अशोक का नाम स्पष्ट मिलता है।
  • स्तंभलेख — 7; सारनाथ स्तंभ का शीर्ष भारत का राजचिह्न।
  • भाषा — मुख्यतः प्राकृत; लिपि — ब्राह्मी, उत्तर-पश्चिम में खरोष्ठी तथा शहबाजगढ़ी-मानसेहरा के आगे अरामाइक एवं यूनानी (कंधार द्विभाषी लेख)।

05मुद्राशास्त्र — सिक्के क्या बताते हैं Numismatics

सिक्का एक साथ चार सूचनाएँ देता है — शासक का नाम, तिथि, धर्म और अर्थव्यवस्था की सेहत। धातु की शुद्धता गिरे तो समझिए राज्य आर्थिक संकट में है।

काल / वंशसिक्के की विशेषताक्या सिद्ध होता है
आहत सिक्के (पंचमार्क)चाँदी एवं ताँबे; ज्यामितीय चिह्न, राजा का नाम नहीं। 'कार्षापण'।भारत के प्राचीनतम सिक्के; छठी सदी ई.पू. का व्यापार एवं द्वितीय नगरीकरण।
हिन्द-यवनराजा का सुंदर मुखचित्र, नाम एवं तिथि; द्विभाषी लेख।भारत में नाम सहित तथा तिथि सहित सिक्कों की शुरुआत।
कुषाणविपुल स्वर्ण मुद्रा; शिव, बुद्ध, नाना, मिथ्र की आकृतियाँ।रोमन व्यापार से स्वर्ण-आगम; धार्मिक बहुलता।
सातवाहनसीसा एवं पोटीन; जहाज़ अंकित सिक्के।दक्कन का समुद्री व्यापार।
गुप्तस्वर्ण 'दीनार'; वीणावादन, अश्वमेध, व्याघ्रहनन प्रकार।कला की पराकाष्ठा; उत्तरगुप्त काल में स्वर्ण-शुद्धता का ह्रास = आर्थिक गिरावट।
उत्तर-गुप्त एवं राजपूतसिक्कों की संख्या एवं गुणवत्ता में तीव्र कमी।मुद्रा-अर्थव्यवस्था का संकुचन; भू-अनुदान एवं स्थानीय विनिमय का उभार।
महत्वपूर्ण तथ्य
  • सर्वाधिक स्वर्ण मुद्राएँ जारी करने वाले — कुषाण एवं गुप्त
  • सिक्कों के अध्ययन को मुद्राशास्त्र (Numismatics) कहते हैं।
  • अनेक वंश — जैसे हिन्द-यवन — केवल सिक्कों के आधार पर ही ज्ञात हुए हैं।
  • सिक्कों पर अंकित देवता तत्कालीन धार्मिक झुकाव का सीधा प्रमाण देते हैं (कनिष्क के सिक्कों पर बुद्ध)।

06विदेशी विवरण Foreign Accounts

बाहरी लेखक वही देखता है जो उसे असामान्य लगे। इसीलिए वह उन बातों को दर्ज कर जाता है जिन्हें भारतीय लेखक साधारण मानकर छोड़ देते थे।

क · यूनानी एवं रोमन Graeco-Roman

मेगस्थनीज Megasthenes · 302–298 ई.पू.

ग्रंथ: इंडिका

सेल्यूकस का राजदूत, चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में। पाटलिपुत्र का नगर-प्रशासन, समाज के सात वर्ग, दासता के अभाव का दावा।

प्लिनी Pliny the Elder · प्रथम सदी ई.

ग्रंथ: नेचुरलिस हिस्टोरिया

भारत-रोम व्यापार का ब्योरा; रोमन स्वर्ण के भारत की ओर बहाव पर चिंता।

पेरिप्लस का अज्ञात लेखक Periplus · लगभग 80 ई.

ग्रंथ: पेरिप्लस ऑफ़ द एरिथ्रियन सी

भारतीय बंदरगाह — भड़ौच, सोपारा, मुज़िरिस; आयात-निर्यात की सूची।

टॉलेमी Ptolemy · दूसरी सदी ई.

ग्रंथ: ज्योग्राफ़ी

भारत का व्यवस्थित भौगोलिक विवरण एवं स्थान-सूची।

एरियन Arrian · दूसरी सदी ई.

ग्रंथ: इंडिका · अनाबासिस

सिकंदर के भारत अभियान का सर्वाधिक संतुलित विवरण।

हेरोडोटस एवं टेसियस Herodotus & Ctesias · पाँचवीं सदी ई.पू.

ग्रंथ: हिस्टोरिका · इंडिका

भारत-ईरान संबंध; सुनी-सुनाई बातों पर आधारित, अतः सीमित विश्वसनीयता।

ख · चीनी यात्री Chinese Pilgrims

फ़ाह्यान Fa-Hien · 399–414 ई.

शासक: चन्द्रगुप्त द्वितीय

बौद्ध ग्रंथों की खोज में आया। मध्यदेश की समृद्धि, दंड-व्यवस्था की सौम्यता एवं चांडालों की स्थिति का वर्णन। राजनीति पर लगभग मौन।

ह्वेनसांग Hiuen Tsang · 630–645 ई.

शासक: हर्षवर्धन

उपाधि "यात्रियों का राजकुमार"। ग्रंथ सी-यू-की। नालंदा में अध्ययन, कन्नौज एवं प्रयाग सभाओं का प्रत्यक्ष विवरण।

इत्सिंग I-tsing · 671–695 ई.

केन्द्र: नालंदा

नालंदा एवं विक्रमशिला की दिनचर्या, अनुशासन तथा बौद्ध संघ की शिक्षा-पद्धति।

ग · अरब एवं अन्य Arab and Others

अल-बिरूनी Al-Biruni · 11वीं सदी ई.

ग्रंथ: किताब-उल-हिन्द / तहकीक-ए-हिन्द

महमूद ग़ज़नवी के साथ आया। संस्कृत सीखी; भारतीय गणित, ज्योतिष एवं दर्शन का यूनानी परंपरा से तुलनात्मक अध्ययन।

सुलेमान Sulaiman · नवीं सदी ई.

विषय: पाल एवं प्रतिहार

अरब व्यापारी; पाल नरेश धर्मपाल एवं प्रतिहार शासकों की सैन्य शक्ति की तुलना।

तारानाथ Taranatha · तिब्बती

ग्रंथ: कंग्युर एवं तंग्युर परंपरा

भारतीय बौद्ध धर्म का इतिहास; पाल कालीन विहारों की सूचना।

तुलना · तीन प्रमुख विदेशी विवरण
आधारमेगस्थनीजफ़ाह्यानह्वेनसांग
काल302–298 ई.पू.399–414 ई.630–645 ई.
शासकचन्द्रगुप्त मौर्यचन्द्रगुप्त द्वितीयहर्षवर्धन
उद्देश्यराजनयिकधार्मिकधार्मिक एवं शैक्षिक
ग्रंथइंडिकाफ़ो-कुओ-कीसी-यू-की
बलप्रशासन एवं नगरसामाजिक जीवनराजनीति, शिक्षा, भूगोल

07कालक्रम Chronology of Sources

1500 ई.पू.ऋग्वेद
500 ई.पू.अष्टाध्यायी
302 ई.पू.मेगस्थनीज
250 ई.पू.अशोक के अभिलेख
150 ई.जूनागढ़ प्रशस्ति
405 ई.फ़ाह्यान
635 ई.ह्वेनसांग
1030 ई.किताब-उल-हिन्द
तिथिस्रोतवर्ग
लगभग 1500 ई.पू.ऋग्वेद की रचनासाहित्यिक
1400 ई.पू.बोगजकोई अभिलेखपुरातात्विक (विदेशी भूमि)
लगभग 500 ई.पू.अष्टाध्यायी — पाणिनिसाहित्यिक
302–298 ई.पू.इंडिका — मेगस्थनीजविदेशी
तीसरी सदी ई.पू.अशोक के शिला एवं स्तंभ लेखपुरातात्विक
150 ई.जूनागढ़ अभिलेख — रुद्रदामनपुरातात्विक
लगभग 360 ई.प्रयाग प्रशस्ति — हरिषेणपुरातात्विक
399–414 ई.फ़ाह्यान की यात्राविदेशी
630–645 ई.ह्वेनसांग की यात्राविदेशी
लगभग 1030 ई.किताब-उल-हिन्द — अल-बिरूनीविदेशी
1148 ई.राजतरंगिणी — कल्हणसाहित्यिक
1837 ई.ब्राह्मी लिपि का वाचन — जेम्स प्रिंसेपआधुनिक पुरातत्त्व

08शब्दावली Glossary — Tap to Reveal

09पिछले वर्षों के प्रश्न Previous Year Questions

UPSC · संघ लोक सेवा आयोग

  1. 'इंडिका' के रचयिता कौन थे? UPSC (अ) अल-बिरूनी · (ब) ह्वेनसांग · (स) मेगस्थनीज · (द) फ़ाह्यान उत्तर: (स) मेगस्थनीज
  2. संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण प्रथम विस्तृत अभिलेख कौन-सा है? UPSC (अ) हाथीगुम्फा · (ब) जूनागढ़ (रुद्रदामन) · (स) प्रयाग प्रशस्ति · (द) ऐहोल उत्तर: (ब) जूनागढ़ अभिलेख — रुद्रदामन
  3. अशोक के अभिलेखों में उसका व्यक्तिगत नाम किन स्थलों पर मिलता है? UPSC (अ) गिरनार एवं धौली · (ब) मास्की एवं गुर्जरा · (स) सारनाथ एवं साँची · (द) कालसी एवं शहबाजगढ़ी उत्तर: (ब) मास्की एवं गुर्जरा

CGPSC · MPPSC · UPPSC

  1. प्राचीनतम व्याकरण ग्रंथ किसे माना जाता है? CGPSC (अ) महाभाष्य · (ब) अष्टाध्यायी · (स) कातन्त्र · (द) अमरकोश उत्तर: (ब) अष्टाध्यायी
  2. 'अर्थशास्त्र' के रचयिता कौन हैं? UPPSC (अ) पाणिनि · (ब) कौटिल्य · (स) पतंजलि · (द) कालिदास उत्तर: (ब) कौटिल्य

NTA NET · SET

  1. हर्षवर्धन के काल में भारत आने वाला चीनी यात्री कौन था? NET (अ) फ़ाह्यान · (ब) इत्सिंग · (स) ह्वेनसांग · (द) सुंगयुन उत्तर: (स) ह्वेनसांग
  2. 'राजतरंगिणी' किस क्षेत्र का इतिहास प्रस्तुत करती है? NET (अ) बंगाल · (ब) कश्मीर · (स) गुजरात · (द) कलिंग उत्तर: (ब) कश्मीर
  3. ब्राह्मी लिपि का सर्वप्रथम वाचन किसने किया? NET (अ) अलेक्जेंडर कनिंघम · (ब) जॉन मार्शल · (स) जेम्स प्रिंसेप · (द) विलियम जोन्स उत्तर: (स) जेम्स प्रिंसेप

10स्वयं जाँच Self Test — 10 Questions

प्रत्येक प्रश्न का एक ही प्रयास मिलेगा। अंक 0 / 10
प्राचीन भारतीय इतिहास · स्रोत मॉड्यूल examcg.com
Scroll to Top