📢 यह व्यापक संस्करण है: दक्कन साम्राज्य (चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसल, काकतीय), दक्षिण (पल्लव, चोल, पांड्य), पूर्व (पाल, सेन), उत्तर (गुर्जर-प्रतिहार, गहड़वाल, परमार), अर्थव्यवस्था, भक्ति आंदोलन, समाज, शिक्षा।
Decentralization · Regional Powers · Cultural Flowering · Bhakti Rise
काल और विशेषताएँ
अवधि: 8वीं–12वीं सदी (गुप्त साम्राज्य के बाद) | विशेषता: राजनीतिक विकेंद्रीकरण, क्षेत्रीय शक्तियाँ सशक्त | त्रि-वर्ग संघर्ष: चालुक्य, पाल, प्रतिहार का निरंतर युद्ध | सांस्कृतिक विकास: भक्ति आंदोलन, मंदिर निर्माण, स्थानीय भाषाएँ
त्रि-वर्ग: दक्कन (चालुक्य/राष्ट्रकूट), दक्षिण (चोल/पल्लव), पूर्व (पाल) | अन्य महत्वपूर्ण: होयसल, काकतीय, गुर्जर-प्रतिहार, गहड़वाल, परमार | परिणाम: क्षेत्रीय संस्कृति, स्थानीय भाषा साहित्य का विकास
Pulakeshin II (608–642): सबसे महान, हर्षवर्धन को हराया
पल्लव से युद्ध, नावलुर का युद्ध (642)
Aihole, Badami मंदिर निर्माण
Later Chalukyas
उत्तर चालुक्य
10th–12th Century
973–1189 CE
Taila II: पुनरुद्धार कर्ता
Vikramaditya VI, Someshwar III
कल्याण राजधानी बनाई
Basaveshwara के समय (12वीं) विरासंगम आंदोलन
चालुक्य की विरासत: ड्र्रविड़ आर्किटेक्चर का विकास (Badami, Aihole, Pattadakal मंदिर) | शिलालेख (कन्नड़, संस्कृत) | कला व साहित्य का संरक्षण | व्यापार नेटवर्क विकास
समय: 1000–1346 CE | क्षेत्र: कर्नाटक (मैसूर) | महान राजा: Vishnuvardhana, Ballala II | प्रसिद्ध: Hoysaleswara Temple (Halebidu) का अलंकृत वास्तु | विशेषता: मंदिर निर्माण में अत्यधिक सक्रिय, कला संरक्षक
अवधि: 300–888 CE (तमिलनाडु में) | महान राजा: Mahendravarman I (कवि, मंदिर निर्माता), Narasimhavarman I | कला: Pallava वास्तु (Mahabalipuram Rock Cut Temples) | लिपि: Grantha लिपि विकास | संस्कृति: संगम साहित्य के बाद का विकास, चोल से प्रतिद्वंद्विता
चोल की विशेषताएँ: समुद्री व्यापार नेटवर्क (दक्षिण-पूर्व एशिया), प्रशासनिक दक्षता, स्थानीय शासन (Sangam चेतन), कला-संस्कृति का शिखर | मंदिर: Brihadeshwara (विश्व की सबसे पुरानी ग्रेनाइट संरचना), चिदम्बरम् मंदिर | शिक्षा: Nalanda महाविहार से संबंध
अवधि: 6th–13th सदी | क्षेत्र: तमिलनाडु का दक्षिण (मदुरा) | महान राजा: Meghavarman, Sundara Pandya | विरासत: Meenakshi Temple (मदुरा), मोती व्यापार, प्राकृतिक संसाधन | पतन: अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण से (1310 CE)
अवधि: 770–1197 CE (बिहार, बंगाल) | संस्थापक: Gopala | महान राजा: Dharmapala, Devapala, Nalanda महाविहार के संरक्षक | बौद्ध केंद्र: Nalanda, Odantapuri विश्वविद्यालय | विरासत: बौद्ध दर्शन, तांत्रिकता, मूर्तिकला, तिब्बत से संबंध
अवधि: 1070–1230 CE | संस्थापक: Samantasena | महान राजा: Vijayasena, Ballal Sen | विरासत: हिंदूवाद का पुनरुत्थान (पाल के बौद्धवाद के बाद), Jagannath Temple, शक्ति पूजा | पतन: बख्तियार खिलजी (1202) द्वारा कब्ज़ा
भूमि अनुदान (Brahmadeya): राजा ब्राह्मणों को भूमि अनुदान देते थे (कर-मुक्त) | फलस्वरूप: नए गाँव बसे, कृषि विस्तार | कृषि प्रणाली: नहरें, बांध, तालाब निर्माण (चोल काल में विकसित) | व्यापार: पूर्व-दक्षिण एशिया मार्ग (चोल जहाज़), स्थलीय व्यापार | संघ (Guilds): शक्तिशाली, स्वायत्त संगठन
भक्ति का प्रभाव: जाति-व्यवस्था को चुनौती (महिलाएँ, दलित शामिल), स्थानीय भाषाओं में साहित्य (तमिल, कन्नड़, तेलुगु), भावनात्मक धर्म, मंदिरों में जनता की भागीदारी
मंदिरों की भूमिका: धार्मिक केंद्र के अलावा, आर्थिक, सामाजिक केंद्र | आय के स्रोत: भक्तों का दान, भूमि अनुदान, व्यापार कर | फलस्वरूप: मंदिर-नियंत्रित भूमि, कर्मचारी, स्कूल, अस्पताल | उदाहरण: Brihadeshwara Temple (तंजौर), Meenakshi Temple (मदुरा) | विरासत: स्थापत्य उत्कृष्टता, सामाजिक एकता, शिक्षा
जाति-व्यवस्था: अब और कठोर, वर्णाश्रम धर्म का कड़ा अनुप्रयोग | चार वर्ण: ब्राह्मण (शीर्ष), क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र | अस्पृश्यता: दलितों को "अस्पृश्य" माना जाता था | भक्ति का प्रभाव: कुछ सीमा तक खुलापन (आल्वार, नयनार में सभी स्वागत)
महिलाओं की स्थिति: ब्राह्मण परिवारों में सीमित, लेकिन कुछ अपवाद | संतों में: कराइक्कल (शैव संत), अंडाल (वैष्णव संत) | सती प्रथा: दक्षिण में कम प्रचलित | दासी प्रथा (Devadasi): मंदिरों में नृत्य, आध्यात्मिक-यौन भूमिका
पाठ्यक्रम: वेद, दर्शन, व्याकरण, काव्य, गणित, तर्क | शिक्षकों का सम्मान: Guru परिवार के मुखिया, शिष्य अनुगामी | परीक्षा: मौखिक, बहस में भाग लेना | दलितों के लिए: अधिकांश बाहर रखे जाते थे
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