भारतीय इतिहास के प्रमुख युद्ध | Major Battles of Indian History
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भारतीय इतिहास के प्रमुख युद्ध Major Battles of Indian History

परुष्णी के तट से कारगिल की चोटियों तक — हर युद्ध चार सूचनाओं के साथ: वर्ष, लड़ने वाले पक्ष, विजेता और वह परिणाम जिसने आगे का इतिहास बदला। साथ में युद्धों के बाद हुई संधियों की अलग तालिका।

261 ई.पू.कलिंग युद्ध — अशोक का हृदय-परिवर्तन
1192 ई.तराइन द्वितीय — सल्तनत का मार्ग खुला
1526 ई.पानीपत प्रथम — मुगल साम्राज्य की नींव
1764 ई.बक्सर — कंपनी शासन की वास्तविक शुरुआत

01प्राचीन भारत के युद्ध Battles of Ancient India

प्राचीन युद्धों का विवरण प्रायः साहित्य या अभिलेख से आता है, समकालीन सैन्य दस्तावेज़ से नहीं। इसलिए यहाँ तिथियाँ अनुमानित हैं और महत्त्व सैन्य से अधिक राजनीतिक एवं वैचारिक है।

युद्धवर्षपक्षपरिणाम एवं महत्त्व
दाशराज्ञ युद्धऋग्वैदिक कालभरत नरेश सुदास बनाम दस राजाओं का संघपरुष्णी (रावी) नदी के तट पर; सुदास विजयी। पुरोहित वसिष्ठ एवं विश्वामित्र की प्रतिद्वंद्विता; ऋग्वेद के सप्तम मंडल में वर्णित।
वितस्ता (हाइडेस्पीज़) का युद्ध326 ई.पू.सिकंदर बनाम पोरस (पुरु)झेलम नदी के तट पर; सिकंदर विजयी, किन्तु पोरस के साहस से प्रभावित होकर राज्य लौटा दिया।
मौर्य-सेल्यूकस संघर्ष305–303 ई.पू.चन्द्रगुप्त मौर्य बनाम सेल्यूकस निकेटरचन्द्रगुप्त विजयी; संधि में चार पश्चिमी प्रांत मिले, बदले में 500 हाथी; मेगस्थनीज राजदूत बनकर आया।
कलिंग युद्ध261 ई.पू.अशोक बनाम कलिंग राज्यअशोक विजयी, पर 13वें शिलालेख में गहरा पश्चात्ताप; युद्ध-नीति से धम्म-नीति की ओर मोड़।
खारवेल के अभियानप्रथम सदी ई.पू.कलिंग नरेश खारवेल बनाम मगध एवं सातवाहनहाथीगुम्फा अभिलेख में वर्णित; कलिंग की पुनःप्रतिष्ठा।
शक-सातवाहन संघर्षदूसरी सदी ई.गौतमीपुत्र सातकर्णि बनाम शक क्षत्रप नहपाननासिक गुहालेख (गौतमी बलश्री) में वर्णित; सातवाहन शक्ति का शिखर।
समुद्रगुप्त की दिग्विजयलगभग 350 ई.समुद्रगुप्त बनाम आर्यावर्त एवं दक्षिणापथ के राजाप्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण) में वर्णित; उत्तर में उन्मूलन, दक्षिण में ग्रहण-मोक्ष-अनुग्रह की नीति।
स्कंदगुप्त एवं हूण संघर्षलगभग 455 ई.स्कंदगुप्त बनाम हूणभितरी अभिलेख; हूण आक्रमण अस्थायी रूप से रुका, पर गुप्त कोष क्षीण हुआ।
नर्मदा तट का युद्धलगभग 618–634 ई.पुलकेशिन द्वितीय बनाम हर्षवर्धनऐहोल प्रशस्ति (रविकीर्ति) में वर्णित; हर्ष का दक्षिण-विस्तार रुका, नर्मदा सीमा बनी।

तालिका दाएँ-बाएँ स्क्रॉल की जा सकती है।

02पूर्व-मध्यकालीन शक्ति-संघर्ष Early Medieval Power Struggles

युद्ध / संघर्षवर्षपक्षपरिणाम एवं महत्त्व
वातापी का युद्ध642 ई.नरसिंहवर्मन प्रथम (पल्लव) बनाम पुलकेशिन द्वितीयचालुक्य राजधानी वातापी पर अधिकार; नरसिंहवर्मन ने "वातापीकोंड" उपाधि ली। पुलकेशिन संभवतः मारा गया।
त्रिपक्षीय संघर्ष (कन्नौज हेतु)8वीं–9वीं सदीपाल बनाम प्रतिहार बनाम राष्ट्रकूटलगभग दो शताब्दी चला; अंततः प्रतिहारों का कन्नौज पर स्थायी अधिकार, पर तीनों शक्तियाँ क्षीण हुईं।
तक्कोलम का युद्ध949 ई.कृष्ण तृतीय (राष्ट्रकूट) बनाम परांतक प्रथम (चोल)चोल राजकुमार राजादित्य मारा गया; चोल विस्तार अस्थायी रूप से रुका।
राजेन्द्र चोल का गंगा अभियानलगभग 1023 ई.राजेन्द्र चोल प्रथम बनाम पाल नरेश महिपाल"गंगैकोंडचोल" उपाधि; नई राजधानी गंगैकोंडचोलपुरम की स्थापना।
रावर का युद्ध (सिंध विजय)712 ई.मुहम्मद बिन क़ासिम बनाम राजा दाहिरअरबों की प्रथम स्थायी विजय; भारत में इस्लामी शासन का पहला बिंदु, पर विस्तार सिंध-मुल्तान तक सीमित रहा।
वैहिंद (पेशावर) का युद्ध1001 ई.महमूद ग़ज़नवी बनाम जयपाल (हिन्दूशाही)महमूद के 17 आक्रमणों की शृंखला का आरंभ; जयपाल ने आत्मदाह किया।
वैहिंद का द्वितीय युद्ध1008 ई.महमूद ग़ज़नवी बनाम आनंदपाल एवं राजपूत संघउत्तर-पश्चिम का प्रतिरोध टूटा; 1025–26 में सोमनाथ पर आक्रमण संभव हुआ।

03तुर्क आक्रमण एवं सल्तनत की स्थापना Turkish Invasions

तराइन का दूसरा युद्ध भारतीय इतिहास का सबसे निर्णायक मोड़ माना जाता है — इसके बाद उत्तर भारत में सत्ता का स्वरूप ही बदल गया।

युद्धवर्षपक्षपरिणाम एवं महत्त्व
तराइन का प्रथम युद्ध1191 ई.पृथ्वीराज चौहान तृतीय बनाम मुहम्मद ग़ोरीग़ोरी पराजित एवं घायल; भारतीय पक्ष ने पीछा नहीं किया — यही निर्णायक भूल सिद्ध हुई।
तराइन का द्वितीय युद्ध1192 ई.मुहम्मद ग़ोरी बनाम पृथ्वीराज चौहानग़ोरी विजयी; दिल्ली सल्तनत की स्थापना का मार्ग खुला। सर्वाधिक निर्णायक युद्ध माना जाता है।
चंदावर का युद्ध1194 ई.मुहम्मद ग़ोरी बनाम जयचंद (गहड़वाल)कन्नौज-वाराणसी क्षेत्र पर अधिकार; उत्तर भारत में तुर्क सत्ता स्थायी हुई।
सिंधु तट पर मंगोल आक्रमण1221 ई.चंगेज़ ख़ान बनाम ख़्वारिज़्म शाह जलालुद्दीनइल्तुतमिश ने चतुराई से शरण देने से इनकार किया — सल्तनत मंगोल विनाश से बच गई।
तैमूर का आक्रमण1398 ई.तैमूर बनाम नासिरुद्दीन महमूद तुग़लक़दिल्ली का भीषण विध्वंस एवं लूट; तुग़लक़ वंश का पतन एवं सैयद वंश का उदय।
अलाउद्दीन ख़लजी के दक्षिण अभियान1296–1311 ई.मलिक काफ़ूर बनाम यादव, काकतीय, होयसल, पांड्यदेवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र एवं मदुरै तक अभियान; दक्षिण से विपुल धन एवं वार्षिक कर।
मंगोल आक्रमणों का प्रतिरोध1297–1306 ई.अलाउद्दीन ख़लजी बनाम मंगोलजालंधर, किली एवं अमरोहा में विजय; इसी दबाव में स्थायी सेना, दाग-हुलिया एवं बाज़ार-नियंत्रण लागू हुए।

04सल्तनत काल के आंतरिक युद्ध Internal Conflicts of the Sultanate Era

युद्धवर्षपक्षपरिणाम एवं महत्त्व
दिल्ली-विजयनगर-बहमनी संघर्ष14वीं–15वीं सदीविजयनगर बनाम बहमनी सल्तनतरायचूर दोआब पर लगभग दो शताब्दी का संघर्ष; दोनों शक्तियाँ क्षीण हुईं।
ख़ानुआ-पूर्व राजपूत उभार1518–19 ई.राणा सांगा बनाम इब्राहीम लोदीखातोली एवं धौलपुर में लोदी की पराजय; मेवाड़ उत्तर भारत की सबसे बड़ी देशी शक्ति बना।
पानीपत का प्रथम युद्ध1526 ई.बाबर बनाम इब्राहीम लोदीलोदी मारा गया; भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना। तुलुग़मा रणनीति एवं तोपख़ाने (उस्ताद अली, मुस्तफ़ा) का प्रथम प्रभावी प्रयोग।
खानवा का युद्ध1527 ई.बाबर बनाम राणा सांगाराजपूत संघ की निर्णायक पराजय; बाबर ने "ग़ाज़ी" उपाधि ली। मुग़ल सत्ता स्थायी हुई।
चंदेरी का युद्ध1528 ई.बाबर बनाम मेदिनी रायमालवा में राजपूत प्रतिरोध का अंत।
घाघरा का युद्ध1529 ई.बाबर बनाम अफ़ग़ान संघ (महमूद लोदी)बाबर का अंतिम बड़ा युद्ध; पूर्वी भारत में अफ़ग़ान शक्ति दबी।
पानीपत के तीनों युद्ध · एक साथ
  • 1526 · प्रथमबाबर बनाम इब्राहीम लोदी; परिणाम — मुग़ल साम्राज्य की स्थापना।
  • 1556 · द्वितीयअकबर (बैरम ख़ान) बनाम हेमू; परिणाम — मुग़ल सत्ता की पुनःस्थापना।
  • 1761 · तृतीयअहमदशाह अब्दाली बनाम मराठा; परिणाम — मराठा शक्ति को गहरा आघात, कंपनी के लिए मैदान खाली।
  • तीनों में विजेता वह रहा जो बाहर से आया — यह संयोग परीक्षा में स्मरण-सूत्र के रूप में उपयोगी है।

05मुग़ल, सूर एवं दक्कन Mughals, Surs and the Deccan

युद्धवर्षपक्षपरिणाम एवं महत्त्व
चौसा का युद्ध1539 ई.शेरशाह सूरी बनाम हुमायूँहुमायूँ किसी तरह गंगा पार कर बचा; शेरख़ाँ ने "शेरशाह" की उपाधि धारण की।
कन्नौज (बिलग्राम) का युद्ध1540 ई.शेरशाह सूरी बनाम हुमायूँहुमायूँ निर्वासित; भारत में सूर वंश की स्थापना (1540–55)।
मच्छीवाड़ा एवं सरहिंद1555 ई.हुमायूँ बनाम सिकंदर सूरहुमायूँ की सत्ता-वापसी; अगले वर्ष उसकी मृत्यु।
पानीपत का द्वितीय युद्ध1556 ई.अकबर एवं बैरम ख़ान बनाम हेमूहेमू आँख में तीर लगने से पराजित एवं मारा गया; मुग़ल सत्ता की निर्णायक पुनःस्थापना।
तालीकोटा (राक्षसी-तंगड़ी) का युद्ध1565 ई.दक्कन सल्तनतों का संघ बनाम विजयनगर (रामराय)विजयनगर की निर्णायक पराजय एवं राजधानी हम्पी का विध्वंस; दक्षिण भारत की महान शक्ति का पतन।
हल्दीघाटी का युद्ध1576 ई.मानसिंह (अकबर की ओर से) बनाम महाराणा प्रतापमुग़ल पक्ष को बढ़त, पर निर्णायक विजय नहीं; प्रताप ने छापामार संघर्ष जारी रखा और 1582 के दिवेर युद्ध में सफलता पाई।
असीरगढ़ का घेरा1601 ई.अकबर बनाम ख़ानदेशअकबर का अंतिम अभियान; दक्कन में मुग़ल पैर जमे।
प्रतापगढ़ का संघर्ष1659 ई.शिवाजी बनाम अफ़ज़ल ख़ान (बीजापुर)अफ़ज़ल ख़ान मारा गया; शिवाजी की सैन्य ख्याति स्थापित।
सिंहगढ़ (कोंढाणा) की विजय1670 ई.तानाजी मालुसरे (शिवाजी की ओर से)तानाजी वीरगति को प्राप्त; किला पुनः मराठा अधिकार में।
गोलकुंडा एवं बीजापुर का पतन1686–87 ई.औरंगज़ेब बनाम आदिलशाही एवं कुतुबशाहीदक्कन सल्तनतें समाप्त; पर लंबे दक्कन युद्धों ने मुग़ल कोष एवं सेना को खोखला कर दिया।

06मराठा एवं अठारहवीं सदी The Marathas and the Eighteenth Century

हमने दो मोती बिखेर दिए, सत्ताईस स्वर्ण-मुद्राएँ खो दीं, और चाँदी-ताँबे की गिनती तो हो ही नहीं सकती।

पानीपत की तृतीय पराजय की सूचना देने वाला मराठा संदेश (1761) — परंपरागत रूप से उद्धृत
युद्धवर्षपक्षपरिणाम एवं महत्त्व
पालखेड़ का युद्ध1728 ई.बाजीराव प्रथम बनाम निज़ामुल्मुल्कगतिशील घुड़सवार रणनीति का उत्कृष्ट उदाहरण; मराठा उत्तर-विस्तार का मार्ग खुला।
दिल्ली पर मराठा आक्रमण1737 ई.बाजीराव प्रथम बनाम मुग़लमुग़ल राजधानी तक मराठा पहुँच; मुग़ल दुर्बलता उजागर।
भोपाल का युद्ध1737 ई.बाजीराव प्रथम बनाम निज़ामदुरई सराय की संधि; मालवा मराठों को मिला।
करनाल का युद्ध1739 ई.नादिरशाह बनाम मुहम्मद शाह 'रंगीला'दिल्ली की लूट; मयूर सिंहासन एवं कोहिनूर ईरान ले जाया गया। मुग़ल प्रतिष्ठा समाप्तप्राय।
पानीपत का तृतीय युद्ध1761 ई.अहमदशाह अब्दाली बनाम मराठा (सदाशिवराव भाऊ, विश्वासराव)मराठों की भीषण पराजय; विश्वासराव एवं भाऊ मारे गए। उत्तर भारत में शक्ति-शून्य बना, जिसका लाभ अंततः कंपनी को मिला।
राक्षसभुवन का युद्ध1763 ई.माधवराव प्रथम बनाम निज़ामपानीपत के बाद मराठा शक्ति की पुनर्स्थापना का आरंभ।
दिल्ली पर पुनः अधिकार1771 ई.महादजी शिंदे · मराठाशाह आलम द्वितीय को मराठा संरक्षण में दिल्ली लौटाया गया।

07यूरोपीय प्रतिद्वंद्विता एवं कंपनी की विजय European Rivalry and Company Conquest

प्लासी ने कंपनी को धन दिया, बक्सर ने वैधता। इसीलिए अनेक इतिहासकार बक्सर को प्लासी से अधिक निर्णायक मानते हैं।

युद्धवर्षपक्षपरिणाम एवं महत्त्व
प्रथम कर्नाटक युद्ध1746–48 ई.फ़्रांसीसी बनाम अंग्रेज़सेंट थोमे के युद्ध में फ़्रांसीसियों ने कर्नाटक नवाब की सेना हराई; एक्स-ला-शापेल की संधि से मद्रास अंग्रेज़ों को वापस।
द्वितीय कर्नाटक युद्ध1749–54 ई.फ़्रांसीसी बनाम अंग्रेज़ (उत्तराधिकार विवाद)अंग्रेज़ समर्थित मुहम्मद अली कर्नाटक का नवाब बना; डुप्ले को वापस बुलाया गया।
वांडीवाश का युद्ध1760 ई.सर आयरकूट (अंग्रेज़) बनाम काउंट लाली (फ़्रांसीसी)तृतीय कर्नाटक युद्ध का निर्णायक मोड़; भारत में फ़्रांसीसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा समाप्त।
प्लासी का युद्ध1757 ई.रॉबर्ट क्लाइव बनाम सिराजुद्दौलामीर जाफ़र के विश्वासघात से निर्णय हुआ; वास्तविक युद्ध नाममात्र। बंगाल की संपदा पर कंपनी का नियंत्रण।
बक्सर का युद्ध1764 ई.हेक्टर मुनरो बनाम मीर क़ासिम, शुजाउद्दौला एवं शाह आलम द्वितीयतीन शक्तियों का संयुक्त मोर्चा पराजित; 1765 की इलाहाबाद संधि से बंगाल-बिहार-उड़ीसा की दीवानी मिली — कंपनी शासन की वैधानिक शुरुआत।
बंगाल में द्वैध शासन1765–72 ई.कंपनी बनाम नवाबदीवानी कंपनी के पास, निज़ामत नवाब के पास; उत्तरदायित्वहीन सत्ता से 1770 का भीषण अकाल।
प्लासी बनाम बक्सर · अंतर स्पष्ट रखें
  • प्लासी (1757) — षड्यंत्र से जीता गया; परिणाम आर्थिक — बंगाल का धन।
  • बक्सर (1764) — वास्तविक युद्ध; परिणाम वैधानिक — मुग़ल बादशाह से दीवानी का अधिकार।
  • बक्सर में कंपनी ने एक साथ बंगाल के नवाब, अवध के नवाब एवं मुग़ल बादशाह — तीनों को हराया, इसीलिए इसे अधिक निर्णायक कहा जाता है।

08आंग्ल-मैसूर, आंग्ल-मराठा एवं आंग्ल-सिख युद्ध Anglo-Mysore, Anglo-Maratha and Anglo-Sikh Wars

क · आंग्ल-मैसूर युद्ध Anglo-Mysore Wars

युद्धवर्षपक्षपरिणाम
प्रथम आंग्ल-मैसूर1767–69 ई.हैदर अली बनाम अंग्रेज़हैदर मद्रास के द्वार तक पहुँचा; मद्रास की संधि — यथास्थिति एवं पारस्परिक सहायता।
द्वितीय आंग्ल-मैसूर1780–84 ई.हैदर अली एवं टीपू बनाम अंग्रेज़पोर्टोनोवो में अंग्रेज़ों की सफलता; युद्ध के बीच हैदर की मृत्यु (1782)। मंगलौर की संधि — अनिर्णायक।
तृतीय आंग्ल-मैसूर1790–92 ई.कॉर्नवॉलिस बनाम टीपू सुल्तानश्रीरंगपट्टनम की संधि — टीपू का आधा राज्य एवं भारी क्षतिपूर्ति; दो पुत्र बंधक।
चतुर्थ आंग्ल-मैसूर1799 ई.वेलेजली बनाम टीपू सुल्तानश्रीरंगपट्टनम में टीपू वीरगति को प्राप्त; मैसूर वाडियार वंश को लौटाकर सहायक संधि में बाँधा गया।

ख · आंग्ल-मराठा युद्ध Anglo-Maratha Wars

युद्धवर्षपक्षपरिणाम
प्रथम आंग्ल-मराठा1775–82 ई.मराठा बनाम अंग्रेज़वडगाँव की संधि (1779) में अंग्रेज़ों की अपमानजनक स्थिति; अंततः सालबाई की संधि (1782) — बीस वर्ष की शांति। एकमात्र युद्ध जिसमें मराठा पराजित नहीं हुए।
द्वितीय आंग्ल-मराठा1803–05 ई.अंग्रेज़ बनाम शिंदे, भोंसले एवं होल्करपेशवा बाजीराव द्वितीय ने बसीन की संधि (1802) से सहायक संधि स्वीकारी; असई एवं लासवाड़ी में मराठा पराजय।
तृतीय आंग्ल-मराठा1817–18 ई.हेस्टिंग्स बनाम मराठा संघखड़की, सीताबल्डी एवं महिदपुर में पराजय; पेशवा पद समाप्त, मराठा संघ का अंत, कंपनी सर्वोच्च शक्ति बनी।

ग · आंग्ल-सिख युद्ध Anglo-Sikh Wars

युद्धवर्षप्रमुख संघर्षपरिणाम
प्रथम आंग्ल-सिख1845–46 ई.मुदकी, फ़िरोज़शाह, अलीवाल, सबराँवअंग्रेज़ विजयी; लाहौर की संधि — जालंधर दोआब का विलय एवं भारी क्षतिपूर्ति। भैरोवाल की संधि से रेजिडेंट नियुक्त।
द्वितीय आंग्ल-सिख1848–49 ई.रामनगर, चिलियाँवाला, गुजरातचिलियाँवाला में अंग्रेज़ों को भारी क्षति, पर गुजरात के युद्ध में निर्णायक विजय; डलहौज़ी ने पंजाब का विलय कर लिया।

09सीमांत युद्ध एवं 1857 Frontier Wars and 1857

युद्धवर्षपक्षपरिणाम
आंग्ल-नेपाल (गोरखा) युद्ध1814–16 ई.अंग्रेज़ बनाम नेपालसुगौली की संधि — गढ़वाल, कुमाऊँ एवं सिक्किम का क्षेत्र मिला; गोरखा भर्ती आरंभ।
प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध1824–26 ई.अंग्रेज़ बनाम बर्मायंडाबू की संधि — असम, अराकान एवं तेनासरिम का अधिग्रहण।
प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध1839–42 ई.अंग्रेज़ बनाम दोस्त मुहम्मदअंग्रेज़ों की भीषण पराजय एवं काबुल से विनाशकारी वापसी; अग्रगामी नीति की विफलता।
सिंध की विजय1843 ई.चार्ल्स नेपियर बनाम अमीरमियानी एवं दब्बो के युद्ध; सिंध का विलय — औचित्यहीन आक्रमण के रूप में आलोचित।
द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध1852 ई.डलहौज़ी बनाम बर्मानिचला बर्मा (पेगू) ब्रिटिश अधिकार में।
1857 का विद्रोह1857–58 ई.भारतीय सैनिक एवं जनता बनाम कंपनीमेरठ से आरंभ; दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, झाँसी, बरेली, आरा प्रमुख केन्द्र। दमन के बाद कंपनी शासन समाप्त एवं ताज का प्रत्यक्ष शासन (1858)।
द्वितीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध1878–80 ई.अंग्रेज़ बनाम शेर अलीगंडमक की संधि (1879) — अफ़ग़ान विदेश-नीति ब्रिटिश नियंत्रण में।
तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध1885 ई.अंग्रेज़ बनाम थिबॉसम्पूर्ण बर्मा का विलय।
1857 · प्रमुख केन्द्र एवं नेतृत्व
  • दिल्ली — बहादुरशाह ज़फ़र एवं बख़्त ख़ान · कानपुर — नाना साहब एवं तात्या टोपे।
  • लखनऊ — बेगम हज़रत महल · झाँसी — रानी लक्ष्मीबाई · ग्वालियर — तात्या टोपे एवं रानी।
  • बरेली — ख़ान बहादुर ख़ान · आरा (बिहार) — कुँवर सिंह · फ़ैज़ाबाद — मौलवी अहमदुल्ला शाह।
  • विद्रोह का तात्कालिक कारण — चर्बी वाले कारतूस; प्रथम शहीद — मंगल पांडे (बैरकपुर, 29 मार्च 1857)।

10स्वतंत्र भारत के युद्ध Wars of Independent India

युद्ध / अभियानवर्षपक्षपरिणाम
प्रथम भारत-पाक युद्ध (कश्मीर)1947–48भारत बनाम पाकिस्तानमहाराजा हरि सिंह द्वारा विलय-पत्र पर हस्ताक्षर; संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम, नियंत्रण रेखा बनी।
ऑपरेशन पोलो (हैदराबाद)1948भारत बनाम हैदराबाद रियासतपुलिस कार्रवाई; हैदराबाद का भारत में विलय।
ऑपरेशन विजय (गोवा)1961भारत बनाम पुर्तगालगोवा, दमन एवं दीव की मुक्ति; भारत में पुर्तगाली उपस्थिति समाप्त।
भारत-चीन युद्ध1962भारत बनाम चीननेफ़ा एवं लद्दाख में भारत को गहरा आघात; चीन का एकतरफ़ा युद्धविराम। रक्षा-नीति की व्यापक पुनर्समीक्षा।
द्वितीय भारत-पाक युद्ध1965भारत बनाम पाकिस्तानऑपरेशन जिब्राल्टर विफल; असल उत्तर का टैंक-युद्ध निर्णायक। ताशकंद समझौता (जनवरी 1966)।
भारत-पाक युद्ध एवं बांग्लादेश मुक्ति1971भारत बनाम पाकिस्तान13 दिन में निर्णायक विजय; लगभग 93,000 सैनिकों का आत्मसमर्पण एवं बांग्लादेश का उदय। शिमला समझौता (1972)।
ऑपरेशन मेघदूत1984भारत · सियाचिनविश्व के सर्वोच्च युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण।
कारगिल युद्ध (ऑपरेशन विजय)1999भारत बनाम पाकिस्तानटाइगर हिल एवं तोलोलिंग की पुनःप्राप्ति; नियंत्रण रेखा पार किए बिना विजय — 26 जुलाई कारगिल विजय दिवस।

11प्रमुख संधियाँ — किस युद्ध के बाद Treaties and Their Wars

परीक्षा में युद्ध और संधि प्रायः अलग-अलग पूछे जाते हैं, पर याद एक साथ करने पर ही टिकते हैं।

संधिवर्षकिनके बीचमुख्य प्रावधान
पुरंदर की संधि1665शिवाजी एवं जयसिंह (मुग़ल)शिवाजी ने 23 किले सौंपे; पुत्र शंभाजी को मुग़ल मनसब।
इलाहाबाद की संधि1765क्लाइव, शाह आलम द्वितीय एवं शुजाउद्दौलाबंगाल-बिहार-उड़ीसा की दीवानी कंपनी को; बक्सर के बाद।
मद्रास की संधि1769हैदर अली एवं अंग्रेज़प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद; यथास्थिति एवं पारस्परिक सहायता।
सूरत की संधि1775रघुनाथराव एवं अंग्रेज़प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का तात्कालिक कारण।
वडगाँव की संधि1779मराठा एवं अंग्रेज़अंग्रेज़ों की अपमानजनक शर्तें; बाद में अस्वीकृत।
सालबाई की संधि1782महादजी शिंदे एवं अंग्रेज़प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का अंत; बीस वर्ष की शांति।
मंगलौर की संधि1784टीपू सुल्तान एवं अंग्रेज़द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध का अनिर्णायक अंत।
श्रीरंगपट्टनम की संधि1792टीपू सुल्तान एवं कॉर्नवॉलिसतृतीय आंग्ल-मैसूर के बाद; आधा राज्य एवं क्षतिपूर्ति।
बसीन की संधि1802पेशवा बाजीराव द्वितीय एवं अंग्रेज़सहायक संधि की स्वीकृति; द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध का कारण।
सुगौली की संधि1816नेपाल एवं अंग्रेज़आंग्ल-नेपाल युद्ध का अंत; कुमाऊँ-गढ़वाल का अधिग्रहण।
यंडाबू की संधि1826बर्मा एवं अंग्रेज़प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध का अंत; असम एवं अराकान मिले।
लाहौर की संधि1846सिख दरबार एवं अंग्रेज़प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध के बाद; जालंधर दोआब का विलय।
गंडमक की संधि1879याक़ूब ख़ान एवं अंग्रेज़द्वितीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध; अफ़ग़ान विदेश-नीति पर नियंत्रण।
ताशकंद समझौता1966भारत एवं पाकिस्तान1965 युद्ध के बाद; सोवियत मध्यस्थता, लाल बहादुर शास्त्री की वहीं मृत्यु।
शिमला समझौता1972इंदिरा गांधी एवं ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो1971 युद्ध के बाद; द्विपक्षीय समाधान का सिद्धांत, युद्धविराम रेखा "नियंत्रण रेखा" बनी।

12स्वयं जाँच Self Test — 15 Questions

प्रत्येक प्रश्न का एक ही प्रयास मिलेगा। अंक 0 / 15
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