- तिथि : 28 फरवरी 2026 – केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने बोत्सवाना से 9 चीतों (6 मादा + 3 नर) को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पृथकवास बाड़ों में छोड़ा।
- G2G समझौता : यह तीसरा बैच भारत–बोत्सवाना सरकारी समझौते का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य आनुवंशिक रूप से विविध मुक्त-विचरण आबादी स्थापित करना है।
- कुल आयात : अब तक तीनों बैचों से 29 वयस्क चीते (8+12+9) भारत लाए जा चुके हैं।
भारत में चीता पुनर्वास : अद्यतन आँकड़े (2026)
📘 परिचयात्मक सिद्धांत – संपूर्ण पृष्ठभूमि एवं वर्तमान आँकड़े
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमिभारत में चीता पुनर्वास परियोजना विश्व की प्रथम अंतरमहाद्वीपीय बड़े मांसाहारी स्थानांतरण परियोजना है। वर्ष 1952 में एशियाई चीता (Acinonyx jubatus venaticus) को भारत से आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया। जनवरी 2022 में MoEF-CC ने NTCA की 19वीं बैठक में “भारत में चीता पुनर्वास के लिए कार्ययोजना” जारी की, जिसके बाद सितंबर 2022 में पहला बैच भारत पहुँचा।
🗓️ स्थानांतरण समय-रेखा (तीनों बैच)- 17 सितंबर 2022 – 🇳🇦 नामीबिया से 8 चीते (5 मादा + 3 नर) – प्रथम बैच (PM मोदी के जन्मदिन पर)
- फरवरी 2023 – 🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते (7 नर + 5 मादा) – द्वितीय बैच
- 28 फरवरी 2026 – 🇧🇼 बोत्सवाना से 9 चीते (6 मादा + 3 नर) – तृतीय बैच (G2G समझौता)
कुल आयातित वयस्क : 29 (8+12+9)
🐾 भारत में जन्मे शावक (Cubs) एवं वर्तमान जनसंख्याभारतीय मिट्टी पर अब तक कुल 33 शावकों का जन्म 10 अलग-अलग लिटर (बार) में हो चुका है। प्रथम शावक मार्च 2023 में नामीबियाई मादा चीता ‘ज्वाला’ (सियाया) से 4 शावकों के रूप में जन्मे थे। इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि भारत में जन्मी दूसरी पीढ़ी (Second Generation) के चीतों ने भी कूनो पार्क में नए शावकों को जन्म दिया।
वर्तमान जीवित चीतों की संख्या : 53 – (29 आयातित वयस्क + 33 जन्मे शावक) में से 9 चीतों (वयस्क + शावक) की प्राकृतिक कारणों एवं जंगली वातावरण में ढलने की चुनौतियों के कारण मृत्यु हो चुकी है।
✅ गणना : 29 + 33 - 9 = 53
बोत्सवाना भारत को चीते देने वाला तीसरा अफ्रीकी देश बना। वैश्विक आबादी (~7,100) का 24% यहाँ है, और 76.9% चीते संरक्षित क्षेत्रों के बजाय सामुदायिक एवं वाणिज्यिक फार्म क्षेत्रों में निवास करते हैं, अतः वे मानव-पशुधन सह-अस्तित्व हेतु अनुकूलित हैं – जो भारतीय परिदृश्य के लिए अत्यंत लाभदायक है।
🏛️ संचालन ढाँचाNTCA (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) कार्यान्वयन एजेंसी है, जो मध्य प्रदेश वन विभाग एवं WII के साथ कार्य करती है। 350+ ‘चीता मित्र’ सामुदायिक जागरूकता एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण में सक्रिय हैं।
⚡ परीक्षा दृष्टि : ‘अनुकूलन’, ‘अंतर्राष्ट्रीय सहयोग’, ‘द्वितीय पीढ़ी का सफल प्रजनन’ तथा ‘जनसंख्या प्रबंधन’ – GS (पर्यावरण) हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण।
- वैज्ञानिक नाम : Acinonyx jubatus (एकमात्र जीवित सदस्य वंश Acinonyx का)
- उपप्रजातियाँ : A. j. jubatus (अफ्रीकी) और A. j. venaticus (एशियाई – विलुप्तप्राय)
- विशेषताएँ : विश्व का सबसे तेज़ स्थलीय स्तनधारी (3 सेकंड में 110 किमी/घंटा); एक छलांग 7 मीटर; दिन में शिकार (अन्य शिकारियों से बचाव), पीछा 200–300 मीटर तक।
- पारिस्थितिक भूमिका : सवाना-घास के मैदानों में ‘कीस्टोन प्रजाति’ एवं शीर्ष शिकारी।
- अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस : प्रतिवर्ष 4 दिसंबर।
🐆 अफ्रीकी चीता (A. j. jubatus)
- त्वचा : हल्की भूरी/सुनहरी, चेहरे पर मोटे धब्बे
- वितरण : पूरे अफ्रीका महाद्वीप में
- IUCN : सुभेद्य (Vulnerable)
🐆 एशियाई चीता (A. j. venaticus)
- त्वचा : हल्की पीली, पेट पर अधिक बाल, आकार में छोटा
- वितरण : केवल ईरान (~12 जीवित) – भारत में 1952 में विलुप्त
- IUCN : घोर संकटप्रस्त (CR)
- IUCN रेडलिस्ट : सुभेद्य (Vulnerable) – जनसंख्या घट रही है।
- CITES : परिशिष्ट-I (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सर्वोच्च प्रतिबंध)
- एशियाई उपप्रजाति : Critically Endangered (केवल ईरान में)
- भारत : 1952 में विलुप्त, अब ‘प्रोजेक्ट चीता’ चल रहा है।
- 1970 के दशक : ईरान एवं केन्या के साथ चर्चा।
- 2009 : अफ्रीका से चीते लाने का प्रस्ताव; सर्वोच्च न्यायालय ने 2020 में पायलट कार्यक्रम की अनुमति दी।
- जनवरी 2022 : MoEF-CC ने NTCA की 19वीं बैठक में कार्ययोजना जारी की (पहले 2009 में भी प्रस्तावित)।
- 17 सितंबर 2022 : नामीबिया MoU – पहला बैच (8) कुनो पहुँचा।
- फरवरी 2023 : दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों का दूसरा बैच।
33 शावक (जन्म)
53 जीवित
- मुख्य आवास : कुनो राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश) – यहाँ अधिकांश शावकों का जन्म हुआ है।
- द्वितीय आवास : गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य (म.प्र.) – मार्च 2026 से तीन चीते यहाँ स्थानांतरित।
- भविष्य : नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य (म.प्र.) को विस्तार हेतु चिह्नित।
- सर्वोच्च रेटिंग : सर्वेक्षण में सबसे उपयुक्त पाया गया।
- विशाल परिदृश्य : ≈ 6,800 वर्ग किमी अविच्छिन्न क्षेत्र – आबादी विस्तार हेतु पर्याप्त।
- आवास अनुकूलता : उपयुक्त भू-भाग एवं प्रचुर शिकार संसाधन (चीतल, नीलगाय)।
- वन वर्गीकरण : ‘उत्तरी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन’ (चैंपियन एवं सेठ, 1968)।
- वैश्विक आबादी (~7,100) का ≈ 24% बोत्सवाना में।
- 76.9% चीते संरक्षित क्षेत्रों के बजाय सामुदायिक एवं वाणिज्यिक फार्म क्षेत्रों में – मानव–पशुधन सह-अस्तित्व हेतु अनुकूलित।
- यह भारतीय परिदृश्य के लिए अत्यंत सामयिक एवं रणनीतिक है।
- सर्वाधिक : नामीबिया – ‘विश्व की चीता राजधानी’
- अन्य : बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, अंगोला, मोजाम्बिक, ज़ाम्बिया
⚠️ चुनौतियाँ
- उच्च शावक मृत्यु दर – प्रथम वर्ष में 50% तक मृत्यु (9 में से कुछ शावक इसी कारण)
- रोग एवं अनुकूलन – भारतीय जलवायु एवं स्थानीय बीमारियों से सामंजस्य
- मानव-वन्यजीव संघर्ष – ग्रामीण इलाकों में संभावित टकराव
- शिकार आधार की कमी – प्राकृतिक शिकार (चीतल, नीलगाय) की उपलब्धता
- अन्य शिकारियों से प्रतिस्पर्धा – तेंदुआ, सियार, लकड़बग्घा
📚 परिभाषा कोश (Glossary)
- इन-सीटू (In-situ) – प्राकृतिक आवास में संरक्षण
- एक्स-सीटू (Ex-situ) – आवास के बाहर (जैसे चिड़ियाघर) संरक्षण
- ट्रांसलोकेशन (Translocation) – किसी प्रजाति का एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण
- पुनर्वास (Reintroduction) – किसी विलुप्त प्रजाति को उसके पूर्व आवास में वापस लाना
- G2G समझौता – दो सरकारों के बीच आधिकारिक सहमति
- द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) – भारत में जन्मे चीतों द्वारा पुनः प्रजनन
📝 UPSC Mains अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)
- “प्रोजेक्ट चीता” भारत के संरक्षण इतिहास में एक मील का पत्थर है। इस परियोजना की वर्तमान स्थिति (53 चीते, द्वितीय पीढ़ी) एवं चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। (GS-3, 15 Marks)
- बोत्सवाना से 28 फरवरी 2026 को चीतों के स्थानांतरण को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है? (GS-2, 10 Marks)
- अफ्रीकी चीता और एशियाई चीता के बीच तुलनात्मक अध्ययन करें। भारत में अफ्रीकी उपप्रजाति को लाने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट करें। (GS-3, 10 Marks)
- कुनो राष्ट्रीय उद्यान को चीता पुनर्वास हेतु सबसे उपयुक्त स्थल क्यों चुना गया? (GS-1, 10 Marks)