चीता पुनर्वास – UPSC/PSC (अद्यतन 2026)
📌 UPSC / PSC स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस + MoEF-CC पर्यावरण · जैव विविधता

भारत में चीता पुनर्वास : अद्यतन आँकड़े (2026)

एशियाई चीता (1952) विलुप्त – विश्व का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़े मांसाहारी पुनर्स्थापन

📘 परिचयात्मक सिद्धांत – संपूर्ण पृष्ठभूमि एवं वर्तमान आँकड़े

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में चीता पुनर्वास परियोजना विश्व की प्रथम अंतरमहाद्वीपीय बड़े मांसाहारी स्थानांतरण परियोजना है। वर्ष 1952 में एशियाई चीता (Acinonyx jubatus venaticus) को भारत से आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया। जनवरी 2022 में MoEF-CC ने NTCA की 19वीं बैठक में “भारत में चीता पुनर्वास के लिए कार्ययोजना” जारी की, जिसके बाद सितंबर 2022 में पहला बैच भारत पहुँचा।

🗓️ स्थानांतरण समय-रेखा (तीनों बैच)
  • 17 सितंबर 2022 – 🇳🇦 नामीबिया से 8 चीते (5 मादा + 3 नर) – प्रथम बैच (PM मोदी के जन्मदिन पर)
  • फरवरी 2023 – 🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते (7 नर + 5 मादा) – द्वितीय बैच
  • 28 फरवरी 2026 – 🇧🇼 बोत्सवाना से 9 चीते (6 मादा + 3 नर) – तृतीय बैच (G2G समझौता)

कुल आयातित वयस्क : 29 (8+12+9)

🐾 भारत में जन्मे शावक (Cubs) एवं वर्तमान जनसंख्या

भारतीय मिट्टी पर अब तक कुल 33 शावकों का जन्म 10 अलग-अलग लिटर (बार) में हो चुका है। प्रथम शावक मार्च 2023 में नामीबियाई मादा चीता ‘ज्वाला’ (सियाया) से 4 शावकों के रूप में जन्मे थे। इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि भारत में जन्मी दूसरी पीढ़ी (Second Generation) के चीतों ने भी कूनो पार्क में नए शावकों को जन्म दिया।

वर्तमान जीवित चीतों की संख्या : 53 – (29 आयातित वयस्क + 33 जन्मे शावक) में से 9 चीतों (वयस्क + शावक) की प्राकृतिक कारणों एवं जंगली वातावरण में ढलने की चुनौतियों के कारण मृत्यु हो चुकी है।
✅ गणना : 29 + 33 - 9 = 53

🌍 बोत्सवाना एवं अन्य रणनीतिक पहलू

बोत्सवाना भारत को चीते देने वाला तीसरा अफ्रीकी देश बना। वैश्विक आबादी (~7,100) का 24% यहाँ है, और 76.9% चीते संरक्षित क्षेत्रों के बजाय सामुदायिक एवं वाणिज्यिक फार्म क्षेत्रों में निवास करते हैं, अतः वे मानव-पशुधन सह-अस्तित्व हेतु अनुकूलित हैं – जो भारतीय परिदृश्य के लिए अत्यंत लाभदायक है।

🏛️ संचालन ढाँचा

NTCA (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) कार्यान्वयन एजेंसी है, जो मध्य प्रदेश वन विभाग एवं WII के साथ कार्य करती है। 350+ ‘चीता मित्र’ सामुदायिक जागरूकता एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण में सक्रिय हैं।

परीक्षा दृष्टि : ‘अनुकूलन’, ‘अंतर्राष्ट्रीय सहयोग’, ‘द्वितीय पीढ़ी का सफल प्रजनन’ तथा ‘जनसंख्या प्रबंधन’ – GS (पर्यावरण) हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण।

53कुल जीवित चीते (भारत)
33कुल जन्मे शावक
29आयातित वयस्क (3 देश)
24%बोत्सवाना में वैश्विक आबादी
76.9%बोत्सवाना (खुले क्षेत्र)
1 बोत्सवाना से 9 चीते – तृतीय बैच (28 फरवरी 2026)
  • तिथि : 28 फरवरी 2026 – केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने बोत्सवाना से 9 चीतों (6 मादा + 3 नर) को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पृथकवास बाड़ों में छोड़ा।
  • G2G समझौता : यह तीसरा बैच भारत–बोत्सवाना सरकारी समझौते का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य आनुवंशिक रूप से विविध मुक्त-विचरण आबादी स्थापित करना है।
  • कुल आयात : अब तक तीनों बैचों से 29 वयस्क चीते (8+12+9) भारत लाए जा चुके हैं।
2 वैज्ञानिक वर्गीकरण एवं विशेषताएँ
  • वैज्ञानिक नाम : Acinonyx jubatus (एकमात्र जीवित सदस्य वंश Acinonyx का)
  • उपप्रजातियाँ : A. j. jubatus (अफ्रीकी) और A. j. venaticus (एशियाई – विलुप्तप्राय)
  • विशेषताएँ : विश्व का सबसे तेज़ स्थलीय स्तनधारी (3 सेकंड में 110 किमी/घंटा); एक छलांग 7 मीटर; दिन में शिकार (अन्य शिकारियों से बचाव), पीछा 200–300 मीटर तक।
  • पारिस्थितिक भूमिका : सवाना-घास के मैदानों में ‘कीस्टोन प्रजाति’ एवं शीर्ष शिकारी।
  • अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस : प्रतिवर्ष 4 दिसंबर।
3 अफ्रीकी vs एशियाई – तुलनात्मक अध्ययन

🐆 अफ्रीकी चीता (A. j. jubatus)

  • त्वचा : हल्की भूरी/सुनहरी, चेहरे पर मोटे धब्बे
  • वितरण : पूरे अफ्रीका महाद्वीप में
  • IUCN : सुभेद्य (Vulnerable)

🐆 एशियाई चीता (A. j. venaticus)

  • त्वचा : हल्की पीली, पेट पर अधिक बाल, आकार में छोटा
  • वितरण : केवल ईरान (~12 जीवित) – भारत में 1952 में विलुप्त
  • IUCN : घोर संकटप्रस्त (CR)
📌 ध्यान दें : भारत में लाए गए सभी चीते अफ्रीकी उपप्रजाति के हैं।
4 संरक्षण स्थिति (वैश्विक एवं राष्ट्रीय)
  • IUCN रेडलिस्ट : सुभेद्य (Vulnerable) – जनसंख्या घट रही है।
  • CITES : परिशिष्ट-I (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सर्वोच्च प्रतिबंध)
  • एशियाई उपप्रजाति : Critically Endangered (केवल ईरान में)
  • भारत : 1952 में विलुप्त, अब ‘प्रोजेक्ट चीता’ चल रहा है।
5 पुनर्वास के प्रयास (1970–2022)
  • 1970 के दशक : ईरान एवं केन्या के साथ चर्चा।
  • 2009 : अफ्रीका से चीते लाने का प्रस्ताव; सर्वोच्च न्यायालय ने 2020 में पायलट कार्यक्रम की अनुमति दी।
  • जनवरी 2022 : MoEF-CC ने NTCA की 19वीं बैठक में कार्ययोजना जारी की (पहले 2009 में भी प्रस्तावित)।
  • 17 सितंबर 2022 : नामीबिया MoU – पहला बैच (8) कुनो पहुँचा।
  • फरवरी 2023 : दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों का दूसरा बैच।
6 स्थानांतरण टाइमलाइन (तीनों बैच)
17 सितंबर 2022
🇳🇦 नामीबिया 8
फरवरी 2023
🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका 12
28 फरवरी 2026
🇧🇼 बोत्सवाना 9
कुल (2026)
29 आयातित
33 शावक (जन्म)
53 जीवित
7 प्रोजेक्ट चीता – रूपरेखा एवं संचालन
📅 आरंभ : 2022 (प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत)
🎯 उद्देश्य : 1952 में विलुप्त चीतों को पुनः स्थापित करना
🌍 विशिष्टता : विश्व का पहला अंतरमहाद्वीपीय जंगली मांसाहारी पुनर्स्थापन
🏛️ संचालन : NTCA (कार्यान्वयन) + म.प्र. वन विभाग + WII
📋 स्टीयरिंग कमेटी : 2023 में गठित
🤝 सामुदायिक : 350+ ‘चीता मित्र’ – जागरूकता एवं संघर्ष न्यूनीकरण
📌 NTCA : राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (2006), MoEF-CC के अधीन सांविधिक निकाय
8 चीता आवास – वर्तमान एवं भावी
  • मुख्य आवास : कुनो राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश) – यहाँ अधिकांश शावकों का जन्म हुआ है।
  • द्वितीय आवास : गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य (म.प्र.) – मार्च 2026 से तीन चीते यहाँ स्थानांतरित।
  • भविष्य : नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य (म.प्र.) को विस्तार हेतु चिह्नित।
9 कुनो का चयन – कारण एवं विशेषताएँ
  • सर्वोच्च रेटिंग : सर्वेक्षण में सबसे उपयुक्त पाया गया।
  • विशाल परिदृश्य : ≈ 6,800 वर्ग किमी अविच्छिन्न क्षेत्र – आबादी विस्तार हेतु पर्याप्त।
  • आवास अनुकूलता : उपयुक्त भू-भाग एवं प्रचुर शिकार संसाधन (चीतल, नीलगाय)।
  • वन वर्गीकरण : ‘उत्तरी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन’ (चैंपियन एवं सेठ, 1968)।
10 बोत्सवाना में चीतों का विशेष महत्व
  • वैश्विक आबादी (~7,100) का ≈ 24% बोत्सवाना में।
  • 76.9% चीते संरक्षित क्षेत्रों के बजाय सामुदायिक एवं वाणिज्यिक फार्म क्षेत्रों में – मानव–पशुधन सह-अस्तित्व हेतु अनुकूलित।
  • यह भारतीय परिदृश्य के लिए अत्यंत सामयिक एवं रणनीतिक है।
11 वैश्विक वितरण – प्रमुख देश
  • सर्वाधिक : नामीबिया – ‘विश्व की चीता राजधानी’
  • अन्य : बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, अंगोला, मोजाम्बिक, ज़ाम्बिया
12 प्रमुख चुनौतियाँ एवं महत्वपूर्ण शब्दावली

⚠️ चुनौतियाँ

  • उच्च शावक मृत्यु दर – प्रथम वर्ष में 50% तक मृत्यु (9 में से कुछ शावक इसी कारण)
  • रोग एवं अनुकूलन – भारतीय जलवायु एवं स्थानीय बीमारियों से सामंजस्य
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष – ग्रामीण इलाकों में संभावित टकराव
  • शिकार आधार की कमी – प्राकृतिक शिकार (चीतल, नीलगाय) की उपलब्धता
  • अन्य शिकारियों से प्रतिस्पर्धा – तेंदुआ, सियार, लकड़बग्घा

📚 परिभाषा कोश (Glossary)

  • इन-सीटू (In-situ) – प्राकृतिक आवास में संरक्षण
  • एक्स-सीटू (Ex-situ) – आवास के बाहर (जैसे चिड़ियाघर) संरक्षण
  • ट्रांसलोकेशन (Translocation) – किसी प्रजाति का एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण
  • पुनर्वास (Reintroduction) – किसी विलुप्त प्रजाति को उसके पूर्व आवास में वापस लाना
  • G2G समझौता – दो सरकारों के बीच आधिकारिक सहमति
  • द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) – भारत में जन्मे चीतों द्वारा पुनः प्रजनन

📝 UPSC Mains अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

  1. “प्रोजेक्ट चीता” भारत के संरक्षण इतिहास में एक मील का पत्थर है। इस परियोजना की वर्तमान स्थिति (53 चीते, द्वितीय पीढ़ी) एवं चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। (GS-3, 15 Marks)
  2. बोत्सवाना से 28 फरवरी 2026 को चीतों के स्थानांतरण को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है? (GS-2, 10 Marks)
  3. अफ्रीकी चीता और एशियाई चीता के बीच तुलनात्मक अध्ययन करें। भारत में अफ्रीकी उपप्रजाति को लाने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट करें। (GS-3, 10 Marks)
  4. कुनो राष्ट्रीय उद्यान को चीता पुनर्वास हेतु सबसे उपयुक्त स्थल क्यों चुना गया? (GS-1, 10 Marks)
📘
परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण (Key Takeaways) : 📊 53 जीवित (29+33-9) 🌍 तीसरा देश – बोत्सवाना (28 Feb 2026) 🧬 द्वितीय पीढ़ी (Second Gen) सफल 🏛️ NTCA + WII संचालन 🌳 कुनो (शुष्क पर्णपाती वन) 🤝 350+ चीता मित्र
📌 UPSC / PSC · पर्यावरण · जैव विविधता · संरक्षण 🔄 अद्यतन : 28 फरवरी 2026 (बोत्सवाना बैच) | v3.0 (अंतिम)
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