20+ अध्याय · राजनीतिक इतिहास · प्रशासन · संस्कृति · शिवाजी · MCQ · PYQ
📢 UPSC/PSC/NET के लिए सम्पूर्ण सामग्री: 20+ अध्याय — मुगल शासक, प्रशासन (मनसबदारी, जागीरदारी, ज़ब्त, दहसाला), मुगल संस्कृति, शिवाजी का उत्थान, मराठा प्रशासन, MCQ, PYQ और स्मरण सूत्र।
जन्म: 14 फरवरी 1483 (अन्दिजान, मध्य एशिया) | मृत्यु: 26 दिसम्बर 1530 (आगरा)। वंश: तैमूर (पिता) और चंगेज़ ख़ान (माता) — “तैमूरी-चंगेज़ी” वंश। मुख्य युद्ध: पानीपत का प्रथम युद्ध (1526) — इब्राहिम लोदी पराजित, मुगल साम्राज्य की स्थापना। खानवा का युद्ध (1527): राणा सांगा को हराया — राजपूत शक्ति का अन्त। चंदेरी का युद्ध (1528): मेदिनी राय को हराया — मालवा पर अधिकार। बाबरनामा: उसकी आत्मकथा — चग़ताई तुर्की में — बादशाहों की पहली आत्मकथा। ‘तुज़ुक-ए-बाबरी’: फ़ारसी अनुवाद — अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना (अकबर के समय)।
पानीपत का प्रथम युद्ध (1526)
तिथि: 21 अप्रैल 1526 | स्थान: पानीपत (हरियाणा)। प्रतिद्वंद्वी: बाबर (मुगल) vs इब्राहिम लोदी (लोदी वंश)। सेना: बाबर ~12,000 सैनिक, तोपें; इब्राहिम ~1,00,000 सैनिक, हाथी। रणनीति:तुलुगमा (अर्ध-चन्द्राकार) और उम्मीदी (घेराव) युद्ध-व्यूह। परिणाम: इब्राहिम लोदी मारा गया — मुगल साम्राज्य की स्थापना। तोपों का प्रयोग: उस्ताद अली और मुस्तफ़ा ने तोपख़ाने का नेतृत्व किया।
खानवा का युद्ध (1527)
तिथि: 16 मार्च 1527 | स्थान: खानवा (राजस्थान)। प्रतिद्वंद्वी: बाबर vs राणा साँगा (मेवाड़) + राजपूत संघ। परिणाम: बाबर की निर्णायक जीत — राजपूत शक्ति का अन्त। महत्व: बाबर ने “जिहाद” की घोषणा की और शराब पीना छोड़ा। बाबर की उपाधि:“ग़ाज़ी” — इस युद्ध के बाद।
नासिरुद्दीन हुमायूँ · शेरशाह सूरी · बिहार · बंगाल · दिल्ली
हुमायूँ (1530–1540, 1555–1556)
जन्म: 6 मार्च 1508 (काबुल) | मृत्यु: 27 जनवरी 1556 (दिल्ली)। पहला शासन: 1530–1540 (10 वर्ष) | दूसरा शासन: 1555–1556 (1 वर्ष)। चौसा का युद्ध (1539): शेरशाह ने हुमायूँ को हराया। कन्नौज का युद्ध (1540): शेरशाह की निर्णायक जीत — हुमायूँ को निर्वासन। निर्वासन: 1540–1555 — ईरान में (शाह तहमास्प से सहायता ली)। सिंध काल: 1542 — अकबर का जन्म (उमरकोट, सिंध)। पुनः विजय: 1555 — माचीवाड़ा (जुलाई) और सरहिंद (जून) के युद्धों में जीत।
शेरशाह सूरी (1540–1545)
जन्म: 1486 (सासाराम, बिहार) — मृत्यु: 22 मई 1545 (कालिंजर)। वंश: सूर वंश — अफ़गान (पश्तून)। प्रशासनिक सुधार:
• राजस्व: ज़ब्ती प्रणाली — भूमि माप, फसलों का अंकन — “पट्टा-क़बूलियत”।
• सड़कें:ग्रैंड ट्रंक रोड (सड़क-ए-आज़म) — सोनारगाँव से पेशावर तक।
• मुद्रा:रुपया — चाँदी का सिक्का — बाद में मुगलों ने अपनाया।
• न्याय: फौजदारी और दीवानी न्यायालय — क़ाज़ी।
• सेना: दाग़ (घोड़ों पर निशान) और चेहरा (सैनिकों का रजिस्टर) — हलाल-ए-सिपाही।
जन्म: 15 अक्टूबर 1542 (उमरकोट, सिंध) | मृत्यु: 27 अक्टूबर 1605 (आगरा)। शासनकाल: 1556–1605 (49 वर्ष) — सबसे लम्बा शासन। पानीपत का द्वितीय युद्ध (1556): हेमू को हराया — बैरम ख़ान की सहायता से। प्रशासन: मनसबदारी, ज़ब्ती, दहसाला (तोदरमल)। धार्मिक नीति: सुलह-ए-कुल, इबादतख़ाना (1575), दीन-ए-इलाही (1582)। राजपूत नीति: राजपूतों से विवाह — जोधाबाई, राजपूतों को उच्च पद। नवरत्न: 9 रत्न — अबुल फ़ज़ल, फ़ैज़ी, राजा बीरबल, तानसेन, मान सिंह, टोडरमल, रहीम, आज़म ख़ान, अबुल कासिम।
प्रमुख अभियान
पानीपत II (1556): हेमू पराजित — मुगल पुनर्स्थापना। हल्दीघाटी (1576): महाराणा प्रताप से युद्ध — मुगल जीत। गुजरात (1572–1573): मुजफ़्फ़रशाह को हराया। बंगाल (1576): दाऊद ख़ान कररानी पराजित। कश्मीर (1586): यूसुफ़ ख़ान को हराया। दक्कन (1591–1601): अहमदनगर, खानदेश, बरार पर अधिकार।
प्रशासनिक सुधार
मनसबदारी: सेना और प्रशासन को जोड़ा — ज़ात (निजी) और सवार (घुड़सवार) रैंक। जागीर: मनसबदारों को वेतन के बदले जागीर (भूमि) दी जाती थी। राजस्व:दहसाला प्रणाली (तोदरमल) — 10 वर्ष के औसत पर आधारित। सुबा: 12 सूबे (प्रांत) — दीवान, सिपहसालार, काज़ी। फ़तहपुर सीकरी: नई राजधानी — 1571–1585 (बाद में आगरा वापस)।
शासन: 1605–1627 (22 वर्ष) — ‘इकबाल-नामा-ए-जहाँगीरी’ (संस्मरण)। नूरजहाँ: प्रभावशाली पत्नी — सिक्कों पर नाम, शिकार, प्रशासन। अंग्रेज़ों का आगमन: सर थॉमस रो (1615) — व्यापार अनुमति। चित्रकला का स्वर्ण काल: उस्ताद मंसूर — प्राकृतिक चित्रण, पशु-पक्षी। ‘ज़ंजीर-ए-आदिल’: न्याय की श्रृंखला — आगरा किले पर।
शाहजहाँ (1628–1658)
शासन: 1628–1658 (30 वर्ष) — “स्वर्ण काल”। ताजमहल: 1632–1653 — मुमताज़ महल की याद में — विश्व धरोहर। लाल किला (दिल्ली): 1638–1648 — नई राजधानी शाहजहाँनाबाद। जामा मस्जिद (दिल्ली): 1650–1656 — भारत की सबसे बड़ी मस्जिद। पेट्रा दुरा (संगमरमर): सफ़ेद संगमरमर को लोकप्रिय बनाया।
जन्म: 3 नवम्बर 1618 (दाहोद, गुजरात) | मृत्यु: 3 मार्च 1707 (अहमदनगर)। उत्तराधिकार युद्ध (1658): दारा शिकोह, शुजा, मुराद को हराया — पिता शाहजहाँ को कैद किया। उपाधि:“आलमगीर” (विश्व-विजेता)। धार्मिक नीति: जज़िया (1679), मन्दिर विध्वंस (वाराणसी, मथुरा), सिख गुरुओं से शत्रुता। दक्कन नीति: 1686–1689 — बीजापुर, गोलकुंडा पर विजय — मराठों से 25 वर्ष का युद्ध। फतवा-ए-आलमगीरी: हनफ़ी फ़िक़्ह (इस्लामी कानून) का विश्वकोश — 500+ खंड।
प्रमुख युद्ध और संघर्ष
• उत्तराधिकार युद्ध (1658): ख़ुर्दा, सामूगढ़, देवराई — दारा शिकोह की हार।
• मराठा युद्ध (1659–1707): शिवाजी से 1659, संभाजी से 1689 — मराठों पर कभी पूरा नियंत्रण नहीं।
• बीजापुर (1686): आदिल शाही वंश का अन्त।
• गोलकुंडा (1687): कुतुब शाही वंश का अन्त।
• राजपूत विद्रोह (1679–1681): मेवाड़, मारवाड़ — जज़िया के कारण।
पतन के कारण
• दक्कन युद्ध: 25 वर्ष का युद्ध — कोष खाली, सेना थकी।
• जज़िया: हिन्दू-मुस्लिम विभाजन — राजपूतों, सिखों, मराठों का विद्रोह।
• उत्तराधिकारी: बहादुर शाह I (1707–1712) — कमज़ोर शासक।
• साम्राज्य विघटन: 1707 के बाद — सय्यद बंधु, निज़ाम-उल-मुल्क, बंगाल के नवाब।
• विदेशी आक्रमण: नादिरशाह (1739) — दिल्ली लूट।
शुरुआत: अकबर (1571) — सेना और नागरिक प्रशासन को जोड़ा। मनसब: पद/रैंक — “ज़ात” (व्यक्तिगत वेतन) और “सवार” (घुड़सवारों की संख्या) — दोहरी रैंक। उदाहरण: 5000/5000 ज़ात/सवार = 5000 रैंक, 5000 घुड़सवार। वेतन: नकद (नक़दी) या जागीर (भूमि) — अधिकतर जागीर। भर्ती: राजपूत, मुसलमान, हिन्दू, पठान — सभी जातियाँ/धर्म। सवारों का रखरखाव: घोड़ों पर दाग (दाग़) और सैनिकों का चेहरा (चेहरा) — हलाल-ए-सिपाही।
मनसबदारी — महत्व एवं पतन
महत्व:
• सैन्य और प्रशासनिक एकीकरण।
• विभिन्न समुदायों (राजपूत, पठान, हिन्दू) को एकीकृत किया।
• केंद्रीकृत शासन व्यवस्था को मजबूती मिली। पतन: औरंगज़ेब के बाद मनसबदारी भ्रष्ट हो गई — सैनिकों की संख्या घटी, जागीरों का संकट बढ़ा — साम्राज्य कमज़ोर हुआ।
जागीर: मनसबदार को वेतन के बदले दी गई भूमि — जागीरदार राजस्व का एक हिस्सा रखता, बाकी बादशाह को भेजता। ख़ालसा: सीधे बादशाह के अधीन भूमि — राजस्व सीधे शाही कोष में। प्रकार:
• मशरूत (Conditional): विशेष शर्तों पर दी जाती थी।
• ग़ैर-मशरूत (Unconditional): बिना शर्त। स्थानान्तरण: जागीरें वंशानुगत नहीं थीं — मनसबदार की मृत्यु पर वापस ले ली जाती थीं — सामन्तीय शक्ति को नियंत्रित करने के लिए।
जागीर — कर एवं प्रशासन
कर:
• माल (कर): भूमि राजस्व — फसल का 1/3 से 1/2 तक।
• अबवाब (अतिरिक्त कर): स्थानीय शुल्क, यातायात कर, बाज़ार कर। जागीरदार:
• राजस्व का एक हिस्सा रखता था (निजी आय)।
• स्थानीय प्रशासन, न्याय, पुलिस का प्रबंधन।
• सेना (सवार) का रखरखाव करता था। जागीरों का संकट: औरंगज़ेब के बाद जागीरों की संख्या सीमित हो गई, कई मनसबदारों को नकद वेतन दिया गया — असंतोष बढ़ा।
ज़ब्त (Zabt): भूमि माप (जरीब/बिघा) — फसलों का आकलन — नकद या वस्तु में कर। दहसाला (Dahsala — तोदरमल, 1580): 10 वर्ष के औसत पर आधारित राजस्व — सबसे प्रसिद्ध प्रणाली। बटाई (मुक़ासमा): फसल का बँटवारा (50%, 60%) — किसान और राज्य के बीच। नक़दी (माल-ए-वजीबी): नकद में कर — किसानों को भुगतान करना पड़ता। शेरशाह की ज़ब्ती: भूमि माप, फसलों का अंकन — ‘पट्टा-क़बूलियत’ — अकबर ने इसे विकसित किया।
तोदरमल — राजस्व सुधार
दहसाला प्रणाली (1580):
• भूमि का वर्गीकरण — पोलाज (सिंचित), पारती (बारानी), चाचर (परती), बंजर।
• माप: “जरीब” (रस्सी) से भूमि नाप — बिघा, गज, मुरब्बा।
• उपज का अनुमान: पिछले 10 वर्षों की औसत उपज — कीमतों का औसत — नकद या वस्तु।
• लाभ: किसानों को स्थिरता, राज्य को नियमित आय।
• प्रभाव: बाद के शासकों (शाहजहाँ, औरंगज़ेब) ने भी इस प्रणाली को अपनाया।
ईरानी प्रभाव · लघुचित्र · प्राकृतिक चित्रण · यूरोपीय प्रभाव
मुगल चित्रकला — विकास
अकबर (1560–1605): चित्रकला को शाही संरक्षण — मीर सैय्यद अली, अब्दुस समद — ईरानी प्रभाव। जहाँगीर (1605–1627):“चित्रकला का स्वर्ण काल” — उस्ताद मंसूर, अबुल हसन — प्राकृतिक चित्रण, पशु-पक्षी। शाहजहाँ (1628–1658): लघुचित्र, पोर्ट्रेट, दरबारी दृश्य — कीमती पत्थरों का उपयोग। औरंगज़ेब (1658–1707): चित्रकला को कम संरक्षण — साम्राज्य के पतन के साथ कला का ह्रास।
चित्रकला की विशेषताएँ
• ईरानी प्रभाव: लघुचित्र, पृष्ठभूमि, रंग, परिप्रेक्ष्य।
• भारतीय तत्व: राजपूत रंग, वनस्पति, पशु, पौराणिक विषय — समन्वय।
• यूरोपीय प्रभाव: जहाँगीर के समय — परिप्रेक्ष्य, छाया, प्राकृतिक चित्रण।
• प्राकृतिक चित्रण: जहाँगीर — 'देखने की आँख' — पशु-पक्षी, वनस्पति का सटीक चित्रण।
• दरबारी चित्र: राजा, दरबारी, युद्ध, शिकार — शक्ति का प्रदर्शन।
• अबुल फ़ज़ल: 'अकबरनामा', 'आइन-ए-अकबरी' — अकबर के शासन का विस्तृत वर्णन।
• फ़ैज़ी: 'नल-दमयन्ती' — संस्कृत से फ़ारसी अनुवाद।
• दारा शिकोह: 'मजमा-उल-बहरैन' (दो समुद्रों का संगम) — हिन्दू-मुस्लिम एकता।
• बदायूँनी: 'मुंतखब-उत-तवारीख' — अकबर की आलोचनात्मक समीक्षा।
• जहाँगीर: 'तुज़ुक-ए-जहाँगीरी' — उसके संस्मरण।
हिन्दी एवं उर्दू साहित्य
• हिन्दी (ब्रज/अवधी): तुलसीदास — 'रामचरितमानस' (अवधी), सूरदास — 'सूर सागर' (ब्रज), मीराबाई — भक्ति कविता।
• उर्दू: मुगल दरबार में विकास — 18वीं शताब्दी में — वली दक्कनी (प्रथम उर्दू कवि)।
• अनुवाद: फ़ारसी से संस्कृत, संस्कृत से फ़ारसी — सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
• संरक्षण: अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ ने फ़ारसी कवियों, विद्वानों को संरक्षण दिया।
शिवाजी — उत्थान, स्वराज्य, अफजलखान, शायिस्ता, मुगल-मराठा संघर्ष
छत्रपति शिवाजी · 1627–1680 · स्वराज्य · मराठा साम्राज्य
शिवाजी — जीवन एवं उपलब्धियाँ
जन्म: 19 फरवरी 1627 (शिवनेरी) | मृत्यु: 3 अप्रैल 1680 (रायगढ़)। पिता: शाहजी भोंसले (मराठा सरदार) | माता: जीजाबाई। गुरु: समर्थ रामदास (संत) — नैतिक, धार्मिक शिक्षा। स्वराज्य (Swarajya): 1645 में मावल क्षेत्र (पुणे) में स्वतंत्र राज्य की स्थापना — 'स्वराज्य' का आदर्श। राज्याभिषेक: 1674 (रायगढ़) — छत्रपति की उपाधि। महत्व: मराठा साम्राज्य के संस्थापक — मुगलों, बीजापुर, गोलकुंडा से संघर्ष — हिन्दू स्वराज्य का प्रतीक।
प्रमुख युद्ध एवं घटनाएँ
• प्रतापगढ़ (1659): अफजलखान (बीजापुर) को मारा — गुरिल्ला युद्ध कौशल।
• शायिस्ता खान (1663): पुणे में रात्रि आक्रमण — शायिस्ता की उँगलियाँ कट गईं।
• सूरत (1664): अंग्रेज़ों से व्यापार केंद्र सूरत को लूटा — धन की प्राप्ति।
• पुरंदर (1665): जय सिंह I (राजपूत) ने घेरा — संधि की, 23 किले मुगलों को दिए।
• दिल्ली (1666): औरंगज़ेब के दरबार में उपस्थिति — 'सीधे खड़े' रहे — नजरबंदी, फिर भागे।
• सिंहगढ़ (1670): किला पुनः प्राप्त किया — गुरिल्ला युद्ध में निपुणता।
शिवाजी — प्रशासन एवं विरासत
प्रशासन: अष्टप्रधान (8 मंत्री) — मंत्रीपरिषद — न्याय, राजस्व, सैन्य, धार्मिक मामले। राजस्व: सरदेशमुखी (अतिरिक्त कर), चौथ (मुगल क्षेत्रों से संरक्षण कर) — आय का मुख्य स्रोत। सेना: गुरिल्ला युद्ध, मावल (पहाड़ी) सैनिक, हल्की पैदल सेना, घुड़सवार — किलों पर नियंत्रण। विरासत: मराठा साम्राज्य की नींव — स्वराज्य, हिन्दू धर्म, गुरिल्ला युद्ध कला — 18वीं सदी में मराठा शक्ति का विस्तार।
• पेशवा (Peshwa): प्रधानमंत्री — सैन्य एवं प्रशासनिक मुखिया — बाद में सबसे शक्तिशाली।
• अमात्य (Amatya): राजस्व मंत्री — आय, व्यय, कोष।
• मंत्री (Mantri): लेखा-जोखा, दस्तावेज़, पत्र-व्यवहार।
• सचिव (Sachiv): राजकीय पत्र, शाही आदेश, संधियाँ।
• सुमंत (Sumant): विदेशी मामले, राजनय।
• सेनापति (Senapati): सेना प्रमुख — युद्ध प्रबंधन।
• न्यायाधीश (Nyayadhish): न्याय, विवाद समाधान (धार्मिक/सिविल)।
• धर्माधिकारी (Dharmadhikari): धार्मिक मामले, दान, तीर्थ।
राजस्व एवं सेना
राजस्व:
• चौथ (Chauth): मुगल/अन्य क्षेत्रों से संरक्षण कर — 25% राजस्व (सैन्य सुरक्षा के बदले)।
• सरदेशमुखी (Sardeshmukhi): अतिरिक्त 10% कर — सरदेशमुखी (मुखिया) को दिया जाता था।
• भू-राजस्व: किसानों से फसल का 1/3 से 1/2 — सिंचाई, सड़कें, पशुपालन — कृषि प्रधान। सेना:
• गुरिल्ला युद्ध (गणिमा): शत्रु को चकमा देना, पीछे हटना, आक्रमण — मुगल/अफजलखान पर विजय।
• मावल (पहाड़ी) सैनिक: पैदल सेना, हल्की, तेज़, किले पर अधिकार।
• घुड़सवार: तेज़ हमले, पीछा करना — गुरिल्ला रणनीति का अंग।
• किले: प्रतापगढ़, रायगढ़, सिंहगढ़, तोरणा — सामरिक महत्व।
शिवाजी के बाद · संभाजी · पेशवा · 18वीं शताब्दी · पानीपत III
शासक/पेशवा
काल
मुख्य घटनाएँ
शिवाजी
1627–1680
स्वराज्य की स्थापना, राज्याभिषेक (1674), अष्टप्रधान
संभाजी (शिवाजी के पुत्र)
1680–1689
मुगलों से युद्ध, औरंगज़ेब ने पकड़ा और मार डाला (1689)
राजाराम
1689–1700
मुगलों से प्रतिरोध, किलों का बचाव
ताराबाई (रानी)
1700–1707
मुगलों से गुरिल्ला युद्ध, साम्राज्य की रक्षा
शाहू I (छत्रपति)
1707–1749
पेशवा बालाजी विश्वनाथ, बाजीराव I — मराठा विस्तार का स्वर्ण युग
बाजीराव I (पेशवा)
1720–1740
मालवा, गुजरात, बुंदेलखंड, दक्कन पर अधिकार — 'बाजीराव की गाथा'
बालाजी बाजीराव (नाना साहेब)
1740–1761
पानीपत का तृतीय युद्ध (1761) — अब्दाली से हार — मराठा शक्ति का क्षय
पेशवा काल — विस्तार एवं संकट
बाजीराव I (1720–1740): मराठा साम्राज्य का सबसे सफल पेशवा — उत्तर भारत (मालवा, गुजरात, बुंदेलखंड) में विस्तार — दक्कन पर नियंत्रण। बालाजी बाजीराव (1740–1761): विस्तार जारी — परन्तु पानीपत III (1761) में अहमदशाह अब्दाली से पराजय — मराठा शक्ति का सबसे बड़ा झटका — साम्राज्य का पतन शुरू। पतन: अब्दाली से हार, सैन्य कमज़ोरी, आंतरिक विभाजन, ब्रिटिश विस्तार — 1818 में अंतिम पेशवा (बाजीराव II) ब्रिटिशों से हार गए।