वैदिक काल — ऋग्वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल | 24 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (व्याख्या + रैपिड रिवीजन) | examcg.com
EXAMCG.COM  •  भारतीय इतिहास — वस्तुनिष्ठ प्रश्न श्रृंखला  •  अध्याय 3

वैदिक काल

( ऋग्वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल : व्याख्या सहित हल प्रश्न-पत्र )

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★ परीक्षा-दृष्टि : वैदिक काल से प्रतिवर्ष 3–5 प्रश्न आते हैं। प्रमुख फोकस — ऋग्वेद के मंडल, नदियाँ व उनकी प्राचीन नाम, देवता (इन्द्र, अग्नि, वरुण, सोम), सभा-समिति, दशराज्ञ युद्ध, वर्ण व्यवस्था का विकास, लोहे का प्रयोग, राजसूय-अश्वमेध, उपनिषद एवं दार्शनिक अवधारणाएँ। प्रत्येक प्रश्न की व्याख्या और स्मरण-सूत्र ध्यानपूर्वक पढ़ें।

1 ऋग्वेद में कुल कितने मंडल (Mandala) हैं?

(a) 8(b) 10 (c) 12(d) 15

उत्तर : (b) 10 [UPSC / UPPCS]

व्याख्या : ऋग्वेद में 10 मंडल, 1028 सूक्त (ह्यूम्स) तथा लगभग 10,600 ऋचाएँ हैं। मंडल 2 से 7 को ‘पारिवारिक मंडल’ (Family Books) कहा जाता है — ये सबसे प्राचीन हैं। मंडल 1, 8, 9 एवं 10 अपेक्षाकृत बाद के हैं।

✦ स्मरण-सूत्र : ऋग्वेद = 10 मंडल + 1028 सूक्त।

2 गायत्री मंत्र का रचयिता कौन है?

(a) वसिष्ठ(b) विश्वामित्र (c) भारद्वाज(d) अत्रि

उत्तर : (b) विश्वामित्र [MPPSC / UPPCS]

व्याख्या : गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तृतीय मंडल (3.62.10) में मिलता है। इसका रचयिता ऋषि विश्वामित्र हैं। यह सवितृ (सूर्य) देवता को समर्पित है और बुद्धि की प्रेरक शक्ति के रूप में प्रसिद्ध है।

✦ स्मरण-सूत्र : गायत्री = विश्वामित्र (मंडल 3)।

3 ऋग्वैदिक काल में सर्वाधिक उल्लेखित नदी कौन-सी है?

(a) सरस्वती(b) सिंधु (c) गंगा(d) यमुना

उत्तर : (b) सिंधु [UPSC (Pre)]

व्याख्या : ऋग्वेद में सिंधु नदी का सर्वाधिक बार उल्लेख हुआ है। सरस्वती को ‘नदीतमा’ (नदियों में श्रेष्ठ) कहा गया है। गंगा एवं यमुना का उल्लेख बहुत कम (क्रमशः 1 एवं 3 बार) हुआ है।

✦ स्मरण-सूत्र : सिंधु = सबसे ज्यादा; सरस्वती = नदीतमा।

4 ऋग्वेद में ‘परुष्णी’ किस नदी का नाम है?

(a) रावी(b) झेलम (c) चिनाब(d) सतलुज

उत्तर : (a) रावी [UPPCS / RPSC]

व्याख्या : परुष्णी = रावी। दशराज्ञ युद्ध (दस राजाओं का युद्ध) परुष्णी नदी के तट पर लड़ा गया था जिसमें भरत राजा सुदास ने दस कबीलों के संघ को पराजित किया।

✦ स्मरण-सूत्र : परुष्णी = रावी = दशराज्ञ युद्ध।

5 ऋग्वैदिक देवताओं में सर्वाधिक सूक्त किस देवता को समर्पित हैं?

(a) अग्नि(b) इन्द्र (c) वरुण(d) सोम

उत्तर : (b) इन्द्र [SSC / UPPCS]

व्याख्या : इन्द्र (वर्षा व युद्ध के देवता) को लगभग 250 सूक्त समर्पित हैं — सर्वाधिक। अग्नि को लगभग 200, सोम को 120 तथा वरुण को कम सूक्त मिले हैं। इन्द्र को ‘पुरंदर’ (किले तोड़ने वाला) भी कहा गया है।

✦ स्मरण-सूत्र : इन्द्र (250) > अग्नि (200) > सोम (120)।

6 ‘सोमा’ को समर्पित सम्पूर्ण मंडल कौन-सा है?

(a) सप्तम(b) अष्टम (c) नवम(d) दशम

उत्तर : (c) नवम [NTA NET / UPPCS]

व्याख्या : ऋग्वेद का पूरा नौवाँ मंडल सोम पवमान को समर्पित है। इसमें सोम रस के निचोड़ने एवं शुद्धिकरण संबंधी 114 सूक्त हैं। सोम एक पवित्र पेय था जिसे देवताओं का प्रिय माना जाता था।

7 ऋग्वैदिक काल में धन का प्रमुख मापदंड क्या था?

(a) भूमि(b) सोना (c) गाय(d) अनाज

उत्तर : (c) गाय [UPSC आधारित]

व्याख्या : ऋग्वैदिक समाज मुख्यतः पशुपालक था। गाय को ‘अघन्या’ (न मारने योग्य) कहा गया। राजा को ‘गोपति’ (गायों का स्वामी) कहा जाता था। ‘गविष्टि’ शब्द गायों की खोज (युद्ध) के लिए प्रयुक्त होता था।

✦ स्मरण-सूत्र : गोपति = राजा; अघन्या = गाय।

8 ऋग्वैदिक काल की दो महत्वपूर्ण जनसभाएँ कौन-सी थीं?

(a) सभा एवं समिति(b) विदथ एवं गण (c) दोनों (a) व (b)(d) केवल समिति

उत्तर : (c) दोनों (a) व (b) [CGPSC / UPPCS]

व्याख्या : ऋग्वेद में सभा, समिति, विदथ एवं गण का उल्लेख मिलता है। सभा व समिति सबसे महत्वपूर्ण थीं। समिति राजनीतिक मामलों में भाग लेती थी जबकि सभा अधिक कुलीन/न्याय संबंधी थी। राजा को इनका समर्थन आवश्यक था।

✦ स्मरण-सूत्र : सभा + समिति = ऋग्वैदिक लोकतंत्र की झलक।

9 ‘पुरुष सूक्त’ में वर्ण व्यवस्था का उल्लेख किस वेद में मिलता है?

(a) सामवेद(b) यजुर्वेद (c) ऋग्वेद(d) अथर्ववेद

उत्तर : (c) ऋग्वेद [UPSC (Pre)]

व्याख्या : पुरुष सूक्त ऋग्वेद के 10वें मंडल में है। इसमें बताया गया है कि ब्राह्मण पुरुष के मुख से, क्षत्रिय भुजाओं से, वैश्य जंघाओं से तथा शूद्र पैरों से उत्पन्न हुए। यह वर्ण व्यवस्था का सबसे प्राचीन उल्लेख है।

10 दशराज्ञ युद्ध में भरत राजा सुदास का पुरोहित कौन था?

(a) विश्वामित्र(b) वसिष्ठ (c) अत्रि(d) भारद्वाज

उत्तर : (b) वसिष्ठ [UPPCS]

व्याख्या : दशराज्ञ युद्ध (ऋग्वेद मंडल 7) में सुदास (भरत) की ओर से वसिष्ठ पुरोहित थे जबकि विरोधी पक्ष का समर्थन विश्वामित्र कर रहे थे। सुदास की विजय के बाद भरत कबीला सर्वाधिक शक्तिशाली बन गया।

✦ स्मरण-सूत्र : सुदास + वसिष्ठ = विजेता; विश्वामित्र = विरोधी।

11 निम्नलिखित में से कौन-सा वेद संगीत का मूल स्रोत माना जाता है?

(a) ऋग्वेद(b) यजुर्वेद (c) सामवेद(d) अथर्ववेद

उत्तर : (c) सामवेद [SSC CGL / NET]

व्याख्या : सामवेद को ‘संगीत का वेद’ कहा जाता है। इसमें अधिकांश मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं जिन्हें गाने योग्य बनाया गया है। उद्गाता नामक पुरोहित सामगान करता था। भारतीय शास्त्रीय संगीत की जड़ें सामवेद में मानी जाती हैं।

12 जादू-टोना, तंत्र-मंत्र एवं रोग-निवारण संबंधी मंत्र किस वेद में अधिक हैं?

(a) ऋग्वेद(b) सामवेद (c) यजुर्वेद(d) अथर्ववेद

उत्तर : (d) अथर्ववेद [UPPCS / MPPSC]

व्याख्या : अथर्ववेद को ‘ब्राह्मणों का वेद’ भी कहा जाता है। इसमें जादू, तंत्र, रोग-नाशक मंत्र, औषधि ज्ञान तथा दैनिक जीवन संबंधी विषय प्रमुख हैं। गोपथ ब्राह्मण अथर्ववेद से संबंधित है।

13 उत्तर वैदिक काल में लोहे के प्रयोग का सबसे प्रमुख पुरातात्विक प्रमाण किस संस्कृति से जुड़ा है?

(a) उत्तरी काले चमकीले मृद्भांड (NBPW) (b) चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) (c) काले एवं लाल मृद्भांड (d) गेरू रंग के मृद्भांड (OCP)

उत्तर : (b) चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) [UPSC]

व्याख्या : चित्रित धूसर मृद्भांड संस्कृति (लगभग 1200–600 ई.पू.) उत्तर वैदिक काल एवं प्रारंभिक लौह युग से जुड़ी है। हस्तिनापुर, अतरंजीखेड़ा, आलमगीरपुर आदि स्थलों से PGW एवं लौह उपकरण मिले हैं।

✦ स्मरण-सूत्र : PGW = उत्तर वैदिक + लोहा।

14 राजसूय, अश्वमेध एवं वाजपेय यज्ञ मुख्यतः किस उद्देश्य से किए जाते थे?

(a) कृषि उत्पादन बढ़ाने हेतु (b) राजा की शक्ति एवं वैधता बढ़ाने हेतु (c) वर्ण व्यवस्था सुदृढ़ करने हेतु (d) व्यापार वृद्धि हेतु

उत्तर : (b) राजा की शक्ति एवं वैधता बढ़ाने हेतु [CGPSC / UPPCS]

व्याख्या : उत्तर वैदिक काल में जनपदों के उदय के साथ राजा की शक्ति बढ़ी। राजसूय (राज्याभिषेक), अश्वमेध (साम्राज्य विस्तार) एवं वाजपेय (रथ दौड़ वाला यज्ञ) राजा की सर्वोच्चता स्थापित करने वाले प्रमुख यज्ञ थे।

15 ‘उपनिषद्’ शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?

(a) ज्ञान का भंडार(b) पास बैठकर सीखना (c) रहस्यमय ज्ञान(d) वेदों का अंत

उत्तर : (b) पास बैठकर सीखना [NTA NET]

व्याख्या : उप + नि + सद् = पास बैठकर (गुरु के समीप) ज्ञान प्राप्त करना। उपनिषद वेदांत (वेदों का अंतिम भाग) कहलाते हैं। इनमें आत्मा, ब्रह्म, मोक्ष, कर्म एवं पुनर्जन्म जैसे दार्शनिक विषयों की चर्चा है।

16 नचिकेता एवं यम का प्रसिद्ध संवाद किस उपनिषद में मिलता है?

(a) छांदोग्य(b) बृहदारण्यक (c) कठोपनिषद(d) केन

उत्तर : (c) कठोपनिषद [UPPCS]

व्याख्या : कठोपनिषद में नचिकेता यमराज से मृत्यु, आत्मा एवं मोक्ष के विषय में प्रश्न पूछता है। यह उपनिषद वैराग्य एवं आत्मज्ञान का उत्कृष्ट उदाहरण है।

17 उत्तर वैदिक काल में कर वसूलने वाला अधिकारी क्या कहलाता था?

(a) संग्रहीतृ(b) भागदुघ (c) सूत(d) अक्षवाप

उत्तर : (b) भागदुघ [MPPSC]

व्याख्या : भागदुघ राजस्व (भाग) एकत्र करने वाला अधिकारी था। संग्रहीतृ कोषाध्यक्ष, सूत सारथि एवं मंत्री, अक्षवाप जुआ एवं लेखा संबंधी अधिकारी होता था।

18 ऋग्वैदिक समाज की मूल इकाई क्या थी?

(a) जन(b) विश (c) कुल / गृह(d) ग्राम

उत्तर : (c) कुल / गृह [UPSC आधारित]

व्याख्या : परिवार (कुल/गृह) समाज की मूल इकाई था। परिवार का मुखिया ‘गृहपति’ कहलाता था। कई परिवार मिलकर ग्राम, ग्राम मिलकर विश तथा विश मिलकर जन बनाते थे। जन का मुखिया ‘राजन’ होता था।

✦ स्मरण-सूत्र : कुल → ग्राम → विश → जन → राष्ट्र (उत्तर वैदिक)।

19 ‘सत्यमेव जयते’ वाक्य किस उपनिषद से लिया गया है?

(a) कठ(b) मुंडक (c) छांदोग्य(d) बृहदारण्यक

उत्तर : (b) मुंडक [SSC / UPPCS]

व्याख्या : ‘सत्यमेव जयते’ मुंडकोपनिषद से लिया गया है। यह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक का मूल मंत्र है।

20 ऋग्वैदिक आर्यों का मुख्य भोजन क्या था?

(a) चावल एवं दाल (b) जौ, गेहूँ एवं दूध-उत्पाद (c) केवल मांस (d) फल-फूल

उत्तर : (b) जौ, गेहूँ एवं दूध-उत्पाद [CGPSC]

व्याख्या : यव (जौ) सबसे महत्वपूर्ण अनाज था। दूध, दही, घी, मक्खन प्रमुख खाद्य थे। सोम एवं सुरा मादक पेय थे। चावल का उल्लेख उत्तर वैदिक काल में बढ़ता है।

21 निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित है?

(a) वितस्ता – रावी (b) अस्किनी – चिनाब (c) परुष्णी – झेलम (d) शुतुद्री – व्यास

उत्तर : (b) अस्किनी – चिनाब [UPPCS]

व्याख्या : सही मिलान — वितस्ता = झेलम, अस्किनी = चिनाब, परुष्णी = रावी, शुतुद्री = सतलुज, विपाशा = व्यास, सिंधु = सिंधु, सरस्वती = सरस्वती।

✦ स्मरण-सूत्र : वि-झे, अ-चि, प-रा, शु-स, वि-व्या।

22 उत्तर वैदिक काल में समाज की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता क्या थी?

(a) मातृसत्तात्मक व्यवस्था (b) वर्ण व्यवस्था का कठोर एवं वंशानुगत होना (c) स्त्रियों की स्थिति में सुधार (d) पशुपालन का पूर्णतः समाप्त होना

उत्तर : (b) वर्ण व्यवस्था का कठोर एवं वंशानुगत होना [UPSC आधारित]

व्याख्या : ऋग्वैदिक काल में वर्ण अपेक्षाकृत लचीला था, किंतु उत्तर वैदिक काल में यह जन्मना (वंशानुगत) एवं कठोर हो गया। ब्राह्मण एवं क्षत्रिय विशेषाधिकार युक्त हो गए तथा शूद्र सेवा के लिए बाध्य हो गए।

23 ‘त्रयी’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त होता था?

(a) तीन देवता(b) तीन वेद (c) तीन आश्रम(d) तीन ऋण

उत्तर : (b) तीन वेद [NET / UPPCS]

व्याख्या : ऋग्वेद, यजुर्वेद एवं सामवेद को सामूहिक रूप से ‘त्रयी’ कहा जाता था। अथर्ववेद को बाद में जोड़ा गया।

24 वैदिक साहित्य का सही कालक्रम क्या है?

(a) संहिता → ब्राह्मण → आरण्यक → उपनिषद (b) संहिता → उपनिषद → ब्राह्मण → आरण्यक (c) ब्राह्मण → संहिता → आरण्यक → उपनिषद (d) संहिता → आरण्यक → ब्राह्मण → उपनिषद

उत्तर : (a) संहिता → ब्राह्मण → आरण्यक → उपनिषद [UPSC / NET]

व्याख्या : वेद संहिता सबसे प्राचीन हैं। ब्राह्मण ग्रंथ यज्ञ संबंधी व्याख्या करते हैं। आरण्यक वन में अध्ययन के लिए हैं तथा उपनिषद दार्शनिक चिंतन (वेदांत) प्रस्तुत करते हैं।

✦ स्मरण-सूत्र : संहिता → ब्राह्मण → आरण्यक → उपनिषद (ज्ञान का क्रम)।

⚡ रैपिड रिवीजन — 1 : ऋग्वैदिक नदियाँ
आधुनिक नामऋग्वैदिक नामविशेष टिप्पणी
सिंधुसिंधुसर्वाधिक उल्लेखित नदी
झेलमवितस्ता
चिनाबअस्किनी / असिक्नी
रावीपरुष्णी / इरावतीदशराज्ञ युद्ध का स्थान
व्यासविपाशा
सतलुजशुतुद्री
सरस्वतीसरस्वतीनदीतमा (सबसे पवित्र)
घग्गर / दृषद्वतीदृषद्वती
⚡ रैपिड रिवीजन — 2 : ऋग्वैदिक बनाम उत्तर वैदिक
विषयऋग्वैदिक कालउत्तर वैदिक काल
समयलगभग 1500–1000 ई.पू.लगभग 1000–600 ई.पू.
क्षेत्रसप्तसिंधु (पंजाब)गंगा-यमुना दोआब
अर्थव्यवस्थापशुपालन प्रधानकृषि प्रधान + लोहा
राजनीतिक इकाईजन (कबीला)जनपद / राष्ट्र
राजा की शक्तिसीमित (सभा-समिति)अधिक शक्तिशाली
वर्ण व्यवस्थालचीलीकठोर एवं जन्मना
देवताइन्द्र, अग्नि, वरुण, सोमप्रजापति, रुद्र, विष्णु का उदय
महिला स्थितिअपेक्षाकृत बेहतरगिरावट (सती, बाल-विवाह संकेत)
यज्ञसरलजटिल (राजसूय, अश्वमेध)
साहित्यऋग्वेद संहितासाम, यजु, अथर्व + ब्राह्मण + उपनिषद
⚡ रैपिड रिवीजन — 3 : महत्वपूर्ण शब्दावली
शब्दअर्थ / संदर्भ
गोपति / जनस्य गोपाराजा (गायों / जन का रक्षक)
गविष्टिगायों की खोज (युद्ध)
अघन्यागाय (न मारने योग्य)
पुरंदरइन्द्र (किले तोड़ने वाला)
भागदुघकर वसूलने वाला अधिकारी
संग्रहीतृकोषाध्यक्ष
उद्गातासामवेद का गायक पुरोहित
अध्वर्युयजुर्वेद संबंधी कर्मकांडी पुरोहित
होताऋग्वेद का आह्वान करने वाला पुरोहित
पुरुष सूक्तवर्ण व्यवस्था का प्राचीनतम उल्लेख (ऋग्वेद 10)

नोट : परीक्षा-टैग विगत परीक्षाओं की प्रवृत्ति दर्शाने हेतु संकेतात्मक हैं। © examcg.com — भारतीय इतिहास श्रृंखला

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