सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन अध्याय ०२
01 · पृष्ठभूमि एवं कारण Background
19वीं शताब्दी में भारतीय समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त था — सती-प्रथा, बाल-विवाह, जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता, स्त्री-शिक्षा का अभाव। पाश्चात्य शिक्षा, तर्कवाद एवं ईसाई मिशनरियों की चुनौती के बीच अनेक सुधारकों ने धर्म एवं समाज को नवीन दृष्टि दी — इसे 'भारतीय पुनर्जागरण' (Indian Renaissance) कहा जाता है।
सुधार आंदोलनों के प्रमुख कारण
- सामाजिक कुरीतियाँ — सती, बाल-विवाह, बहुविवाह, अस्पृश्यता, विधवाओं की दुर्दशा।
- पाश्चात्य शिक्षा — तर्कवाद, उदार विचार, विज्ञान एवं आधुनिकता का प्रसार (1813 के चार्टर अधिनियम के बाद अंग्रेजी शिक्षा का विस्तार)।
- ईसाई मिशनरियों की चुनौती — धर्मांतरण के विरुद्ध हिंदू समाज में आत्मरक्षा एवं आत्मविश्वास की भावना।
- प्रेस एवं मुद्रण — विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार; समाचार-पत्रों एवं पुस्तकों ने सुधारकों की बातों को जन-जन तक पहुँचाया।
- प्राचीन गौरव का पुनर्बोध — पाश्चात्य विद्वानों द्वारा वेद-उपनिषदों के अनुवाद से भारतीयों को अपनी प्राचीन विरासत का ज्ञान हुआ, जिससे आत्मगौरव बढ़ा।
- ब्रिटिश सरकार की तटस्थता — कंपनी प्रशासन ने प्रारंभ में सामाजिक सुधारों में हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे सुधारकों को स्वतंत्रता मिली।
दो व्यापक प्रवृत्तियाँ
- सुधारवादी (Reformist) — तर्क एवं आधुनिक मूल्यों के आधार पर सुधार; ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज, अलीगढ़ आंदोलन।
- पुनरुत्थानवादी (Revivalist) — प्राचीन धर्म-परंपरा की श्रेष्ठता पर बल; आर्य समाज, देवबंद आंदोलन, सिंह सभा।
- पुनर्जागरण — (Renaissance) — विचारों, कला, साहित्य, विज्ञान में नवजागरण।
- सुधारवाद — (Reformism) — मौजूदा व्यवस्था में सुधार, परंपरा को पूर्णतः नकारना नहीं।
- पुनरुत्थान — (Revivalism) — प्राचीन गौरव की वापसी, आधुनिकता के प्रति अविश्वास।
02 · कालक्रम — एक दृष्टि में Timeline
पूरे 19वीं सदी के सुधार आंदोलन को समय-क्रम में देखने से यह स्पष्ट होता है कि विचार कैसे एक-दूसरे से जुड़े और कैसे भिन्न धाराओं में बँटे।
| वर्ष | घटना / संगठन | प्रवर्तक |
|---|---|---|
| 1814 | आत्मीय सभा | राजा राममोहन राय |
| 1828 | ब्रह्म समाज (स्थापना) | राजा राममोहन राय |
| 1829 | सती-प्रथा उन्मूलन अधिनियम | लॉर्ड विलियम बेंटिक (राममोहन के प्रयास) |
| 1826–31 | यंग बंगाल आंदोलन | हेनरी विवियन डेरोजियो |
| 1851 | रहनुमाई माज़दयासनन सभा | दादाभाई नौरोजी आदि |
| 1856 | विधवा-पुनर्विवाह अधिनियम | ईश्वरचंद्र विद्यासागर (प्रयास) |
| 1866 | देवबंद आंदोलन | मुहम्मद कासिम ननौतवी |
| 1866 | ब्रह्म समाज का विभाजन | देवेंद्रनाथ व केशवचंद्र सेन |
| 1867 | प्रार्थना समाज | आत्माराम पांडुरंग |
| 1873 | सत्यशोधक समाज | ज्योतिबा फुले |
| 1875 | आर्य समाज | स्वामी दयानंद सरस्वती |
| 1875 | MAO कॉलेज (अलीगढ़) | सर सैयद अहमद खान |
| 1875 | थियोसोफिकल सोसाइटी | ब्लावात्स्की व ऑल्कॉट |
| 1897 | रामकृष्ण मिशन | स्वामी विवेकानंद |
1875 एक निर्णायक वर्ष रहा — आर्य समाज, अलीगढ़ एवं थियोसोफिकल सोसाइटी तीनों इसी वर्ष सक्रिय हुए, जो तीन अलग-अलग धाराओं (हिंदू पुनरुत्थान, मुस्लिम आधुनिकीकरण, वैश्विक आध्यात्मिकता) को दर्शाता है।
पृथक्करण (Separation): ब्रह्म समाज (सुधारवादी, वेद अचूक नहीं) एवं आर्य समाज (पुनरुत्थानवादी, वेद अचूक) — एक ही युग की दो भिन्न धाराएँ।
03 · राजा राममोहन राय एवं ब्रह्म समाज Brahmo Samaj
राजा राममोहन राय (1772–1833) को 'भारतीय पुनर्जागरण का जनक' तथा 'आधुनिक भारत का जनक' कहा जाता है। उन्होंने धार्मिक रूढ़ियों एवं सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध तर्क का शस्त्र उठाया।
प्रमुख योगदान
- ब्रह्म समाज की स्थापना — 20 अगस्त 1828, कलकत्ता (पहले 'ब्रह्म सभा')।
- सती-प्रथा उन्मूलन — उनके प्रयासों से लॉर्ड विलियम बेंटिक ने 1829 में सती-प्रथा को अवैध घोषित किया।
- एकेश्वरवाद एवं मूर्तिपूजा-विरोध — उपनिषदों पर आधारित, ईसाई व इस्लाम के एकेश्वरवाद से प्रभावित।
- पत्रिकाएँ — 'संवाद कौमुदी' (बांग्ला) एवं 'मिरात-उल-अखबार' (फ़ारसी)।
- शिक्षा सुधार — अंग्रेजी शिक्षा एवं स्त्री-शिक्षा के समर्थक; वेदांत कॉलेज (1825) की स्थापना।
- मुगल सम्राट अकबर द्वितीय ने उन्हें 'राजा' की उपाधि दी (1830)।
"मूर्तिपूजा एवं अंधविश्वास से मुक्त, तर्क एवं एकेश्वरवाद पर आधारित धर्म ही सच्चा धर्म है।"
— राजा राममोहन राय का मूल भाव
ब्रह्म समाज का विकास
| नेता | योगदान |
|---|---|
| राजा राममोहन राय | संस्थापक (1828); सती-उन्मूलन के प्रणेता; पहले आधुनिक राष्ट्रवादी विचारक। |
| देवेंद्रनाथ टैगोर | 1843 में नेतृत्व; समाज को संगठित रूप दिया; 'आदि ब्रह्म समाज' (1866) की स्थापना। |
| केशवचंद्र सेन | व्यापक प्रचार; 1866 में 'भारतवर्षीय ब्रह्म समाज' की स्थापना; बाद में 1878 में 'साधारण ब्रह्म समाज' बना। |
ब्रह्म समाज दो भागों में बँटा — आदि ब्रह्म समाज (देवेंद्रनाथ) एवं भारतवर्षीय ब्रह्म समाज (केशवचंद्र)।
04 · प्रमुख हिन्दू सुधार संगठन Organizations
प्रार्थना समाज (1867, मुंबई)
- संस्थापक — आत्माराम पांडुरंग।
- प्रेरणा — केशवचंद्र सेन (ब्रह्म समाज) से।
- प्रमुख — एम. जी. रानाडे (सुधारों के जनक), आर. जी. भंडारकर।
- महाराष्ट्र में सामाजिक सुधार — जातिगत भेद, बाल-विवाह, सती का विरोध, स्त्री-शिक्षा।
रामकृष्ण मिशन (1897, बेलूर)
- संस्थापक — स्वामी विवेकानंद (1893 शिकागो भाषण के बाद प्रेरित)।
- प्रेरणा — रामकृष्ण परमहंस (1836-1886), जिन्होंने सभी धर्मों में ईश्वर-साक्षात्कार किया।
- 1898 — बेलूर मठ मुख्यालय।
- 'सेवा ही धर्म' — चिकित्सालय, विद्यालय, अनाथालय, राहत कार्य।
- विवेकानंद ने वेदांत को पश्चिमी दुनिया में प्रचारित किया; राष्ट्रवाद को आध्यात्मिक आधार दिया।
यंग बंगाल आंदोलन (1826–31, कलकत्ता)
- प्रवर्तक — हेनरी विवियन डेरोजियो (हिन्दू कॉलेज के शिक्षक)।
- युवा छात्रों का तर्कवादी, स्वतंत्र चिंतन आंदोलन।
- प्रेस-स्वतंत्रता, महिला अधिकार, विज्ञान-सम्मत दृष्टिकोण का समर्थन।
- डेरोजियो को 'भारतीय राष्ट्रवाद का अग्रदूत' भी कहा जाता है।
थियोसोफिकल सोसाइटी (1875, न्यूयॉर्क)
- संस्थापक — मैडम एच. पी. ब्लावात्स्की व कर्नल एच. एस. ऑल्कॉट।
- भारत में मुख्यालय — अड्यार, मद्रास (1882)।
- बाद में नेतृत्व — एनी बेसेंट (1893) — होम रूल आंदोलन, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (1916) की स्थापना में सहयोग।
- प्राचीन भारतीय दर्शन (वेदांत, बौद्ध) का पश्चिमी दुनिया में प्रचार।
05 · आर्य समाज एवं स्वामी दयानंद Arya Samaj
स्वामी दयानंद सरस्वती (1824–1883) ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की। वे पुनरुत्थानवादी धारा के प्रमुख सुधारक थे, जिन्होंने हिंदू धर्म को वेदों के शुद्ध रूप में पुनः स्थापित करने का प्रयास किया।
प्रमुख तथ्य
- मूल नाम — मूलशंकर; जन्म — गुजरात (टंकारा, 1824)।
- गुरु — स्वामी विरजानंद (मथुरा)।
- प्रसिद्ध नारा — "वेदों की ओर लौटो" (Back to the Vedas) — वेद सभी सत्यों का स्रोत।
- प्रमुख ग्रंथ — 'सत्यार्थ प्रकाश' (हिन्दी में)।
- शुद्धि आंदोलन — धर्मांतरितों (मुसलमान/ईसाई) को हिंदू धर्म में पुनः प्रवेश दिलाना।
- सामाजिक सुधार — मूर्तिपूजा, बाल-विवाह, जातिवाद, अस्पृश्यता, बहुविवाह का विरोध; स्त्री-शिक्षा, विधवा-विवाह का समर्थन।
- 1886 में लाहौर में दयानंद एंग्लो-वैदिक (DAV) विद्यालय की स्थापना।
- आर्य समाज का प्रभाव — पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में गहरा; कई स्वतंत्रता सेनानी (लाला लाजपत राय, भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल) इससे प्रभावित हुए।
"वेदों की ओर लौटो।"
— स्वामी दयानंद सरस्वती
- ब्रह्म समाज — वेदों को अचूक नहीं मानता; सुधारवादी।
- आर्य समाज — वेदों को अपौरुषेय (ईश्वरीय) एवं अचूक मानता; पुनरुत्थानवादी।
06 · मुस्लिम एवं सिख सुधार आंदोलन Muslim & Sikh
मुस्लिम सुधार — तीन प्रमुख धाराएँ
| आंदोलन | प्रवर्तक / विवरण |
|---|---|
| अलीगढ़ आंदोलन | सर सैयद अहमद खान (1817-1898); 1875 में MAO कॉलेज, अलीगढ़ (बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय — AMU, 1920)। मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा, पश्चिमी विज्ञान एवं कुरान की तर्कसंगत व्याख्या। |
| देवबंद आंदोलन | 1866, दारुल उलूम देवबंद (सहारनपुर); प्रवर्तक — मुहम्मद कासिम ननौतवी व रशीद अहमद गंगोही। पारंपरिक इस्लामी शिक्षा, पश्चिमी प्रभाव का विरोध; बाद में जमीयत उलेमा-ए-हिंद। |
| वहाबी आंदोलन | सैयद अहमद बरेलवी (1786-1831) — इस्लाम के शुद्ध रूप की वापसी, ब्रिटिश विरोधी गतिविधियाँ; 1857 के विद्रोह में भूमिका। |
सिख एवं पारसी सुधार
- सिंह सभा आंदोलन (1873, अमृतसर) — बाबा दयाल सिंह, गुरमुख सिंह; सिख धर्म में सुधार, शिक्षा, गुरुद्वारा सुधार; अकाली आंदोलन की नींव।
- कूका/नामधारी आंदोलन — प्रवर्तक गुरु राम सिंह (1816-1885); ब्रिटिश विरोधी, सिख धर्म में शुद्धि और समाज सुधार।
- रहनुमाई माज़दयासनन सभा (1851, बंबई) — पारसी सुधार; दादाभाई नौरोजी, फुरदुंजी मार्जबान।
07 · जाति-विरोधी आंदोलन Anti-caste
| सुधारक | योगदान |
|---|---|
| ज्योतिबा फुले | सत्यशोधक समाज (1873, 24 सितंबर); स्त्री एवं दलित शिक्षा; 'गुलामगिरी' (1873) पुस्तक — जाति-व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य। |
| ईश्वरचंद्र विद्यासागर | विधवा-पुनर्विवाह अधिनियम 1856 (लॉर्ड कैनिंग द्वारा); स्त्री-शिक्षा के प्रबल समर्थक, कलकत्ता में महिला विद्यालय। |
| बी. आर. अंबेडकर | दलित अधिकार; बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1924); मंदिर-प्रवेश आंदोलन (1927, महाड); 1956 में बौद्ध धर्म की दीक्षा। |
| नारायण गुरु | केरल में SNDP योगम (1903); 'एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर' का नारा; मंदिर-प्रवेश आंदोलन के अग्रदूत। |
| ई. वी. रामास्वामी (पेरियार) | आत्म-सम्मान आंदोलन (1925, तमिलनाडु); ब्राह्मणवाद एवं जातिगत भेद का विरोध; द्रविड़ राष्ट्रवाद के जनक। |
- 1829 — सती-प्रथा उन्मूलन अधिनियम।
- 1856 — हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम।
- 1872 — नेटिव मैरिज एक्ट (बाल-विवाह विरोधी)।
- 1929 — सरदा अधिनियम (लड़कियों की विवाह-आयु 14 वर्ष)।
08 · महिला सुधार एवं स्त्री-शिक्षा Women
19वीं सदी में महिलाओं की दशा अत्यंत शोचनीय थी — पर्दा, बाल-विवाह, विधवाओं की अवहेलना, शिक्षा का अभाव। सुधारकों ने इस दिशा में अनेक प्रयास किए।
प्रमुख महिला सुधारक
- सावित्रीबाई फुले (1831-1897) — 'भारत की पहली महिला शिक्षिका'; 1848 में पुणे में बालिका विद्यालय खोला।
- पंडित रमाबाई (1858-1922) — संस्कृत पंडिता; 1889 में बंबई में 'शारदा सदन' — विधवाओं और अनाथ बालिकाओं के लिए आश्रम।
- कादंबिनी गांगुली (1861-1923) — भारत की 'प्रथम महिला चिकित्सक' (1892 में ग्रेजुएट)।
- रमाबाई रानाडे (1862-1924) — महिला शिक्षा, विधवा-विवाह, बाल-विवाह विरोध; 'सेवा सदन' (1908) की स्थापना (पुणे)।
- केशवचंद्र सेन, सर सैयद, एनी बेसेंट — सभी ने महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया।
महत्वपूर्ण कानून
| कानून | वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| विधवा-पुनर्विवाह अधिनियम | 1856 | हिंदू विधवाओं को पुनर्विवाह की अनुमति (ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयास)। |
| नेटिव मैरिज एक्ट (सिविल मैरिज) | 1872 | बाल-विवाह को हतोत्साहित, अंतर्जातीय विवाह की वैधता। |
| सरदा अधिनियम | 1929 | लड़कियों की विवाह-आयु 14 वर्ष (हर बिलास सरदा के प्रयास)। |
09 · महत्व एवं मूल्यांकन Impact
सकारात्मक प्रभाव
- सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार — सती (1829), बाल-विवाह (1929), अस्पृश्यता के विरुद्ध जागरूकता।
- स्त्री-शिक्षा एवं सशक्तीकरण — बालिका विद्यालय, महिला चिकित्सक, विधवा-पुनर्विवाह।
- तर्कवाद एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण — अंधविश्वासों का खंडन, पाश्चात्य विज्ञान एवं शिक्षा को बढ़ावा।
- राष्ट्रीय चेतना — स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक भूमि तैयार हुई।
- लोकभाषाओं का विकास — हिन्दी (दयानंद), बांग्ला (राममोहन), मराठी (फुले) में साहित्य।
सीमाएँ
- अधिकांश आंदोलन शहरी एवं शिक्षित वर्ग तक सीमित रहे, ग्रामीण जनता पर प्रभाव सीमित।
- कुछ पुनरुत्थानवादी प्रवृत्तियों ने सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दिया।
- महिला सुधारों की गति धीमी थी, समाज में व्यापक विरोध झेलना पड़ा।
- अधिकांश सुधारकों ने ब्रिटिश सरकार से संरक्षण लिया, जिससे वे कभी-कभी 'अंग्रेजों के समर्थक' कहे गए।
त्वरित पुनरावृत्ति — संगठन एक नज़र में
| संगठन | वर्ष | संस्थापक |
|---|---|---|
| ब्रह्म समाज | 1828 | राजा राममोहन राय |
| यंग बंगाल | 1826–31 | हेनरी डेरोजियो |
| प्रार्थना समाज | 1867 | आत्माराम पांडुरंग |
| सत्यशोधक समाज | 1873 | ज्योतिबा फुले |
| आर्य समाज | 1875 | स्वामी दयानंद |
| अलीगढ़ आंदोलन | 1875 (MAO कॉलेज) | सर सैयद अहमद खान |
| थियोसोफिकल सोसाइटी | 1875 | ब्लावात्स्की व ऑल्कॉट |
| रामकृष्ण मिशन | 1897 | स्वामी विवेकानंद |
10 · अभ्यास प्रश्न (MCQ) Practice
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। (उत्तर नीचे दिए गए हैं।)
- ब्रह्म समाज की स्थापना किसने और कब की?
(अ) दयानंद सरस्वती, 1875 (ब) राजा राममोहन राय, 1828 (स) विवेकानंद, 1897 (द) केशवचंद्र सेन, 1866 - 'भारतीय पुनर्जागरण का जनक' किसे कहा जाता है?
(अ) स्वामी दयानंद (ब) राजा राममोहन राय (स) स्वामी विवेकानंद (द) ईश्वरचंद्र विद्यासागर - 'वेदों की ओर लौटो' का नारा किसने दिया?
(अ) राजा राममोहन राय (ब) स्वामी दयानंद सरस्वती (स) स्वामी विवेकानंद (द) सर सैयद अहमद खान - आर्य समाज की स्थापना कब और कहाँ हुई?
(अ) 1828, कलकत्ता (ब) 1875, मुंबई (स) 1897, बेलूर (द) 1867, पुणे - सती-प्रथा को किस वर्ष अवैध घोषित किया गया?
(अ) 1828 (ब) 1829 (स) 1856 (द) 1872 - रामकृष्ण मिशन की स्थापना किसने की?
(अ) रामकृष्ण परमहंस (ब) स्वामी विवेकानंद (स) केशवचंद्र सेन (द) आत्माराम पांडुरंग - विधवा-पुनर्विवाह अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
(अ) 1829 (ब) 1856 (स) 1875 (द) 1891 - अलीगढ़ आंदोलन के प्रवर्तक कौन थे?
(अ) मुहम्मद कासिम ननौतवी (ब) सर सैयद अहमद खान (स) सैयद अहमद बरेलवी (द) दादाभाई नौरोजी - 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना किसने की?
(अ) नारायण गुरु (ब) ज्योतिबा फुले (स) पेरियार (द) अंबेडकर - 'सत्यार्थ प्रकाश' किसकी रचना है?
(अ) राजा राममोहन राय (ब) स्वामी दयानंद (स) विवेकानंद (द) सर सैयद
- (ब) राजा राममोहन राय, 1828
- (ब) राजा राममोहन राय
- (ब) स्वामी दयानंद सरस्वती
- (ब) 1875, मुंबई
- (ब) 1829
- (ब) स्वामी विवेकानंद
- (ब) 1856
- (ब) सर सैयद अहमद खान
- (ब) ज्योतिबा फुले
- (ब) स्वामी दयानंद
11 · वन-लाइनर सारांश Quick Revision
- • 1828 — ब्रह्म समाज (राजा राममोहन राय)।
- • 1829 — सती-प्रथा उन्मूलन अधिनियम।
- • 1856 — हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम।
- • 1875 — आर्य समाज (स्वामी दयानंद)।
- • 1875 — थियोसोफिकल सोसाइटी (ब्लावात्स्की, ऑल्कॉट)।
- • 1897 — रामकृष्ण मिशन (स्वामी विवेकानंद)।
- • 1867 — प्रार्थना समाज (मुंबई, आत्माराम पांडुरंग)।
- • 1873 — सत्यशोधक समाज (ज्योतिबा फुले)।
- • 1873 — सिंह सभा (अमृतसर)।
- • 1875 — MAO कॉलेज (अलीगढ़, सर सैयद)।
- • 1893 — शिकागो संसद में विवेकानंद।
- • 1929 — सरदा अधिनियम (बाल-विवाह विरोधी)।
- • सती-प्रथा — राजा राममोहन राय का मुख्य योगदान।
- • विधवा-पुनर्विवाह — ईश्वरचंद्र विद्यासागर।
- • बाल-विवाह विरोध — केशव चंद्र सेन, हर बिलास सरदा।
- • आर्य समाज — 'वेदों की ओर लौटो'।
- • ब्रह्म समाज — मूर्ति-पूजा विरोध, एकेश्वरवाद।
- • रामकृष्ण मिशन — 'मानव सेवा ही ईश्वर-पूजा'।
- • विवेकानंद — 'आधुनिक राष्ट्रवाद के जनक'।
- • राजा राममोहन राय — 'भारतीय पुनर्जागरण के जनक'।
- • दयानंद — 'सत्यार्थ प्रकाश' के लेखक।
- • सर सैयद — MAO कॉलेज (बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय)।
- • एनी बेसेंट — थियोसोफिकल, होम रूल आंदोलन।
- • ज्योतिबा फुले — 'गुलामगिरी' के लेखक।
- • डॉ. अंबेडकर — दलित उत्थान, बौद्ध दीक्षा (1956)।
- • नारायण गुरु — 'एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर'।
- • पेरियार — 'स्वाभिमान आंदोलन'।
- • सावित्रीबाई फुले — प्रथम महिला शिक्षिका (1848)।
- • पंडित रमाबाई — 'शारदा सदन' (बंबई, 1889)।
- • कादंबिनी गांगुली — भारत की प्रथम महिला चिकित्सक।
- • 1857 — अलीगढ़ आंदोलन प्रारंभ।
- • 1903 — SNDP (नारायण गुरु)।
- • 1925 — स्वाभिमान आंदोलन (पेरियार)।
- • 1927 — मंदिर-प्रवेश आंदोलन (अंबेडकर)।
- • 1956 — अंबेडकर का बौद्ध धर्म में परिवर्तन।
- • 1815 — आत्मीय सभा (राममोहन राय की प्रथम संस्था)।
- • ब्रह्म समाज का विभाजन (1866) — आदि ब्रह्म (देवेंद्रनाथ) एवं भारतीय ब्रह्म (केशव चंद्र)।
- • आर्य समाज का प्रभाव — पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश।
- • अलीगढ़ आंदोलन — मुस्लिम शिक्षा, आधुनिकीकरण।
- • थियोसोफिकल — हिंदू धर्मग्रंथों का अनुवाद।
- • रामकृष्ण मिशन — चिकित्सालय, विद्यालय, अनाथालय।
- • नेटिव मैरिज एक्ट (1872) — बाल-विवाह विरोधी कानून।
- • सरदा अधिनियम (1929) — विवाह की न्यूनतम आयु (14 वर्ष)।
- • इन आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम को बौद्धिक आधार दिया।
- • गोपाल कृष्ण गोखले — सुधार आंदोलनों के प्रमुख समर्थक।
- • लोकमान्य तिलक — आर्य समाज से प्रभावित।
- • महात्मा गांधी — रामकृष्ण-विवेकानंद से प्रेरित।
- • सुभाष चंद्र बोस — विवेकानंद को अपना गुरु मानते थे।
- • 1875 — तीन आंदोलन (आर्य, अलीगढ़, थियोसोफिकल) एक ही वर्ष।
- • यह अध्याय UPSC, CGPSC, UPPCS, NET हेतु पूर्ण है।
- 19वीं-20वीं शताब्दी के सुधार आंदोलन भारतीय पुनर्जागरण के प्रतीक हैं।
- इन्होंने सामाजिक कुरीतियों (सती, बाल-विवाह, जातिगत भेद) को चुनौती दी और आधुनिकता, तर्क, समानता को बढ़ावा दिया।
- इन्होंने राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया, जो अंततः स्वतंत्रता आंदोलन में परिवर्तित हुई।
- यह अध्याय UPSC, CGPSC, UPPCS, NET सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आधारभूत है।