सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन
19वीं शताब्दी का भारतीय पुनर्जागरण — ब्रह्म समाज से आर्य समाज तक, सुधारकों एवं संगठनों का वह जागरण जिसने राष्ट्रीय चेतना की भूमि तैयार की।
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पृष्ठभूमि एवं कारण
19वीं शताब्दी में भारतीय समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त था — सती-प्रथा, बाल-विवाह, जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता, स्त्री-शिक्षा का अभाव। पाश्चात्य शिक्षा, तर्कवाद एवं ईसाई मिशनरियों की चुनौती के बीच अनेक सुधारकों ने धर्म एवं समाज को नवीन दृष्टि दी — इसे भारतीय पुनर्जागरण (Indian Renaissance) कहा जाता है।
सुधार आंदोलनों के प्रमुख कारण
- सामाजिक कुरीतियाँ — सती, बाल-विवाह, बहुविवाह, अस्पृश्यता।
- पाश्चात्य शिक्षा — तर्कवाद एवं उदार विचारों का प्रसार।
- ईसाई मिशनरियों की चुनौती — धर्मांतरण के विरुद्ध आत्मरक्षा।
- प्रेस एवं मुद्रण — विचारों का व्यापक प्रचार।
- प्राचीन गौरव का पुनर्बोध — वेद-उपनिषद की ओर वापसी की प्रेरणा।
दो व्यापक प्रवृत्तियाँ
- सुधारवादी (Reformist) — तर्क एवं आधुनिक मूल्यों के आधार पर सुधार (ब्रह्म समाज, अलीगढ़)।
- पुनरुत्थानवादी (Revivalist) — प्राचीन धर्म-परंपरा की श्रेष्ठता पर बल (आर्य समाज, दयानंद)।
राजा राममोहन राय एवं ब्रह्म समाज
राजा राममोहन राय (1772–1833) को 'भारतीय पुनर्जागरण का जनक' तथा 'आधुनिक भारत का जनक' कहा जाता है। उन्होंने धार्मिक रूढ़ियों एवं सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध तर्क का शस्त्र उठाया।
प्रमुख योगदान
- ब्रह्म समाज की स्थापना — 20 अगस्त 1828, कलकत्ता (पहले 'ब्रह्म सभा')।
- सती-प्रथा उन्मूलन — उनके प्रयासों से लॉर्ड विलियम बेंटिक ने 1829 में सती-प्रथा को अवैध घोषित किया।
- एकेश्वरवाद एवं मूर्तिपूजा-विरोध; उपनिषदों पर बल।
- पत्रिकाएँ — 'संवाद कौमुदी' (बांग्ला), 'मिरात-उल-अखबार' (फ़ारसी)।
- अंग्रेजी शिक्षा एवं स्त्री-शिक्षा के समर्थक; वेदांत कॉलेज की स्थापना।
- मुगल सम्राट अकबर द्वितीय ने उन्हें 'राजा' की उपाधि दी।
ब्रह्म समाज का विकास
| नेता | योगदान |
|---|---|
| राजा राममोहन राय | संस्थापक (1828); सती-उन्मूलन के प्रणेता। |
| देवेंद्रनाथ टैगोर | 1843 में नेतृत्व; समाज को संगठित रूप दिया। |
| केशवचंद्र सेन | व्यापक प्रचार; मतभेद के कारण 1866 में विभाजन। |
1866 का विभाजन: ब्रह्म समाज दो भागों में बँटा — आदि ब्रह्म समाज (देवेंद्रनाथ टैगोर) एवं भारतवर्षीय ब्रह्म समाज (केशवचंद्र सेन)। बाद में 1878 में साधारण ब्रह्म समाज भी बना।
प्रमुख हिन्दू सुधार संगठन
प्रार्थना समाज
1867 · मुंबई- संस्थापक — आत्माराम पांडुरंग।
- प्रेरणा — केशवचंद्र सेन।
- प्रमुख — एम. जी. रानाडे, आर. जी. भंडारकर।
- महाराष्ट्र में सामाजिक सुधार।
रामकृष्ण मिशन
1897 · बेलूर- संस्थापक — स्वामी विवेकानंद।
- प्रेरणा — रामकृष्ण परमहंस।
- 1898 — बेलूर मठ मुख्यालय।
- 'सेवा ही धर्म'; 1893 शिकागो भाषण।
यंग बंगाल आंदोलन
1826–31 · कलकत्ता- प्रवर्तक — हेनरी विवियन डेरोजियो।
- हिन्दू कॉलेज के युवाओं का आंदोलन।
- तर्कवाद एवं स्वतंत्र चिंतन।
- प्रेस-स्वतंत्रता के समर्थक।
थियोसोफिकल सोसाइटी
1875 · न्यूयॉर्क- संस्थापक — मैडम ब्लावात्स्की व कर्नल ऑल्कॉट।
- भारत में मुख्यालय — अड्यार, मद्रास (1882)।
- बाद में नेतृत्व — एनी बेसेंट।
- प्राचीन भारतीय दर्शन का प्रचार।
आर्य समाज एवं स्वामी दयानंद
स्वामी दयानंद सरस्वती (1824–1883) ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की। वे पुनरुत्थानवादी धारा के प्रमुख सुधारक थे।
प्रमुख तथ्य
- मूल नाम — मूलशंकर; जन्म — गुजरात (टंकारा, 1824)।
- गुरु — स्वामी विरजानंद (मथुरा)।
- प्रसिद्ध नारा — "वेदों की ओर लौटो" (Back to the Vedas)।
- प्रमुख ग्रंथ — 'सत्यार्थ प्रकाश' (हिन्दी में); 'ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका'।
- शुद्धि आंदोलन — धर्मांतरितों की हिन्दू धर्म में वापसी।
- मूर्तिपूजा, बाल-विवाह, जातिवाद, अस्पृश्यता का विरोध; स्त्री-शिक्षा व विधवा-विवाह का समर्थन।
- 1886 में लाहौर में दयानंद एंग्लो-वैदिक (DAV) विद्यालय की स्थापना (उनके अनुयायियों द्वारा)।
- ब्रह्म समाज बनाम आर्य समाज — ब्रह्म समाज वेदों को अचूक नहीं मानता था; आर्य समाज वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक मानता था।
- 'सत्यार्थ प्रकाश' दयानंद की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति है, जो हिन्दी में लिखी गई।
मुस्लिम एवं सिख सुधार आंदोलन
मुस्लिम सुधार
| आंदोलन | प्रवर्तक / विवरण |
|---|---|
| अलीगढ़ आंदोलन | सर सैयद अहमद खान; 1875 में MAO कॉलेज, अलीगढ़ (बाद में AMU)। मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा। |
| देवबंद आंदोलन | 1866, दारुल उलूम देवबंद; पारंपरिक इस्लामी शिक्षा; मुहम्मद कासिम ननौतवी। |
| वहाबी आंदोलन | सैयद अहमद बरेलवी; इस्लाम के शुद्ध रूप की वापसी। |
सिख एवं पारसी सुधार
- सिंह सभा आंदोलन (1873, अमृतसर) — सिख धर्म में सुधार एवं शिक्षा।
- कूका/नामधारी आंदोलन — प्रवर्तक गुरु राम सिंह।
- रहनुमाई माज़दयासनन सभा (1851) — पारसी सुधार; दादाभाई नौरोजी आदि।
जाति-विरोधी एवं क्षेत्रीय सुधार
| सुधारक | योगदान |
|---|---|
| ज्योतिबा फुले | सत्यशोधक समाज (1873); स्त्री एवं दलित शिक्षा; 'गुलामगिरी' पुस्तक। |
| ईश्वरचंद्र विद्यासागर | विधवा-पुनर्विवाह अधिनियम 1856; स्त्री-शिक्षा के प्रबल समर्थक। |
| बी. आर. अंबेडकर | दलित अधिकार; बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1924)। |
| नारायण गुरु | केरल में SNDP योगम; 'एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर'। |
| ई. वी. रामास्वामी (पेरियार) | आत्म-सम्मान आंदोलन; तमिलनाडु। |
↔ तालिका को क्षैतिज रूप से स्क्रॉल किया जा सकता है
ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से 1856 का विधवा-पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ — यह तिथि बार-बार पूछी जाती है।
छत्तीसगढ़ में सुधार आंदोलन
सतनाम पंथ एवं गुरु घासीदास
- गुरु घासीदास (1756–1836) — छत्तीसगढ़ के महान समाज-सुधारक एवं संत; सतनाम पंथ के प्रवर्तक।
- जन्म — गिरौदपुरी (वर्तमान बलौदाबाजार-भाटापारा जिला)।
- "सतनाम" (सत्य ही ईश्वर है) का संदेश; मूर्तिपूजा, जातिगत भेदभाव एवं अस्पृश्यता का विरोध।
- मांस-मदिरा त्याग, समानता एवं सादगी पर बल; समाज के वंचित वर्गों को आत्म-सम्मान दिया।
- गिरौदपुरी धाम एवं विश्व का सबसे ऊँचा 'जैतखाम' (सतनाम स्तंभ) आज प्रमुख तीर्थ हैं।
अन्य बिंदु
- सतनाम पंथ ने छत्तीसगढ़ में सामाजिक समता की जो चेतना जगाई, वह आगे राष्ट्रीय आंदोलन में जन-भागीदारी का आधार बनी।
- आर्य समाज एवं अन्य सुधार संगठनों की शाखाएँ भी 19वीं–20वीं सदी में छत्तीसगढ़ के नगरों में सक्रिय रहीं।
CGPSC के लिए अनिवार्य: गुरु घासीदास — जन्म गिरौदपुरी, सतनाम पंथ के प्रवर्तक, 'मनखे-मनखे एक समान' का संदेश, जैतखाम का प्रतीक। छत्तीसगढ़ शासन 'गुरु घासीदास जयंती' मनाता है एवं उनके नाम पर विश्वविद्यालय (बिलासपुर) है।
महत्व एवं मूल्यांकन
सकारात्मक प्रभाव
- सामाजिक कुरीतियों (सती, बाल-विवाह, अस्पृश्यता) पर प्रहार।
- स्त्री-शिक्षा एवं स्त्री-सशक्तीकरण को बढ़ावा।
- तर्कवाद एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास।
- राष्ट्रीय चेतना एवं आत्म-गौरव का जागरण — स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक भूमि।
- लोकभाषाओं एवं आधुनिक शिक्षा का विस्तार।
सीमाएँ
- अधिकांश आंदोलन शहरी एवं शिक्षित वर्ग तक सीमित रहे।
- कुछ पुनरुत्थानवादी प्रवृत्तियों ने सांप्रदायिक विभाजन को भी बढ़ावा दिया।
- ग्रामीण जनता तक सीमित पहुँच।
त्वरित पुनरावृत्ति — संगठन एक नज़र में
| संगठन | वर्ष | संस्थापक |
|---|---|---|
| ब्रह्म समाज | 1828 | राजा राममोहन राय |
| यंग बंगाल | 1826–31 | हेनरी डेरोजियो |
| प्रार्थना समाज | 1867 | आत्माराम पांडुरंग |
| सत्यशोधक समाज | 1873 | ज्योतिबा फुले |
| आर्य समाज | 1875 | स्वामी दयानंद |
| अलीगढ़ आंदोलन | 1875 | सर सैयद अहमद खान |
| थियोसोफिकल सोसाइटी | 1875 | ब्लावात्स्की व ऑल्कॉट |
| रामकृष्ण मिशन | 1897 | स्वामी विवेकानंद |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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