सिंधु घाटी सभ्यता | Indus Valley Civilization
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सिंधु घाटी सभ्यता Indus Valley (Harappan) Civilization

विश्व की चार प्राचीनतम नगर-सभ्यताओं में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी — और सबसे रहस्यमयी भी, क्योंकि उसकी लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी। खोज से लेकर पतन के सिद्धांतों तक, यह पूरा अध्याय एक ही पृष्ठ पर।

1921 ई.हड़प्पा का उत्खनन — दयाराम साहनी
2600–1900 ई.पू.परिपक्व हड़प्पा चरण
लगभग 2,000अब तक ज्ञात स्थल
लगभग 13 लाख वर्ग किमीविस्तार — समकालीन सभ्यताओं में सर्वाधिक

01खोज, नामकरण एवं विस्तार Discovery, Naming and Extent

इस सभ्यता की खोज-कथा लगभग एक शताब्दी लंबी है — 1826 में हड़प्पा के टीलों का पहला उल्लेख करने वाले चार्ल्स मैसन से लेकर 1924 में विश्व के सामने आधिकारिक घोषणा करने वाले जॉन मार्शल तक।

1826चार्ल्स मैसन — हड़प्पा टीलों का उल्लेख
1853–56कनिंघम का सर्वेक्षण; रेल-लाइन में ईंटों का उपयोग
1921दयाराम साहनी — हड़प्पा उत्खनन
1922राखालदास बनर्जी — मोहनजोदड़ो
1924जॉन मार्शल — सभ्यता की आधिकारिक घोषणा

चूँकि इस संस्कृति का पहला उत्खनित स्थल हड़प्पा था, पुरातत्त्व की परिपाटी के अनुसार इसे हड़प्पा सभ्यता कहना अधिक शुद्ध माना जाता है — "सिंधु घाटी" नाम अब संकीर्ण पड़ता है, क्योंकि बाद की खोजों ने दिखाया कि स्थल सिंधु से बहुत दूर — गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक — फैले हैं। बड़ी संख्या में स्थल घग्गर-हाकरा (सूख चुकी नदी, जिसे अनेक विद्वान वैदिक सरस्वती से जोड़ते हैं) के किनारे मिले हैं।

विस्तार की चार सीमाएँ · परीक्षा का प्रिय प्रश्न
  • उत्तर — मांडा (जम्मू, चिनाब तट) · दक्षिण — दाइमाबाद (महाराष्ट्र, प्रवरा तट)।
  • पूर्व — आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश, हिंडन तट) · पश्चिम — सुत्कागेंडोर (पाकिस्तान-ईरान सीमा, दाश्क तट)।
  • आकृति लगभग त्रिभुजाकार; क्षेत्रफल मिस्र एवं मेसोपोटामिया दोनों से बड़ा।
  • वर्तमान में सर्वाधिक स्थल भारत में; सबसे बड़े स्थलों में राखीगढ़ी (हरियाणा) भारत का सबसे बड़ा हड़प्पा-स्थल।

02कालक्रम एवं चरण Chronology and Phases

रेडियोकार्बन तिथियों के आधार पर सभ्यता तीन चरणों में बाँटी जाती है। परीक्षा में प्रायः परिपक्व चरण की तिथि पूछी जाती है — लगभग 2600–1900 ई.पू.

चरणकाल (लगभग)विशेषताएँ
पूर्व-हड़प्पा पृष्ठभूमि7000–3300 ई.पू.मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) — उपमहाद्वीप में कृषि-पशुपालन का प्राचीनतम साक्ष्य; नवपाषाणिक गाँव से नगर की ओर यात्रा का आरंभ-बिंदु।
आरंभिक हड़प्पा3300–2600 ई.पू.कोटदीजी, आमरी, कालीबंगा-I जैसी संस्कृतियाँ; किलेबंदी, प्रारंभिक लिपि-चिह्न एवं ग्राम-नगर संक्रमण।
परिपक्व हड़प्पा2600–1900 ई.पू.पूर्ण नगरीकरण — योजनाबद्ध नगर, मानक ईंटें, मुहरें, माप-तौल, दूर-व्यापार। यही "सभ्यता" का मुख्य काल है।
उत्तर हड़प्पा1900–1300 ई.पू.नगरों का क्षय, लिपि-मुहरों का लोप, ग्रामीण संस्कृतियों में विलय; गुजरात एवं पूर्वी क्षेत्रों में निरंतरता।

तालिका दाएँ-बाएँ स्क्रॉल की जा सकती है।

यह सभ्यता कांस्ययुगीन (Bronze Age) है — ताँबे में टिन मिलाकर काँसा बनाना इन्हें आता था, किन्तु लोहे का ज्ञान नहीं था। मिस्र एवं मेसोपोटामिया की यह समकालीन है, और मेसोपोटामियाई अभिलेखों में जिस "मेलुहा" से व्यापार का उल्लेख है, उसे अधिकांश विद्वान सिंधु क्षेत्र ही मानते हैं।

03प्रमुख स्थल एवं उनकी पहचान Major Sites and Their Signatures

परीक्षा का सबसे अंक-दायक खंड यही है — कौन-सी वस्तु किस स्थल से मिली। नीचे की तालिका को जोड़ी-रूप में याद करें।

स्थल (नदी)खोजप्रमुख उपलब्धियाँ
हड़प्पा (रावी)दयाराम साहनी, 1921अन्नागारों की दो पंक्तियाँ (6+6), श्रमिक-आवास, R-37 क़ब्रिस्तान, लाल जैस्पर पुरुष-धड़, स्वस्तिक-चिह्न वाली मुहरें।
मोहनजोदड़ो (सिंधु)राखालदास बनर्जी, 1922विशाल स्नानागार, विशालतम अन्नागार, सभा-भवन, कांस्य नर्तकी, पुरोहित-राजा (पशुपति मुहर भी यहीं); "मृतकों का टीला"।
चन्हूदड़ो (सिंधु)एन.जी. मजूमदार, 1931एकमात्र दुर्गविहीन प्रमुख नगर; मनका-निर्माण की कार्यशाला; ईंट पर बिल्ली का पीछा करते कुत्ते के पंजों के निशान।
लोथल (भोगवा)एस.आर. राव, 1954–55गोदीबाड़ा (dockyard) — विश्व का प्राचीनतम ज्ञात; युग्मित समाधि, फ़ारस की खाड़ी की मुहर, चावल की भूसी के साक्ष्य, अग्नि-वेदिकाएँ।
कालीबंगा (घग्गर)अमलानंद घोष, 1953; उत्खनन बी.बी. लाल एवं बी.के. थापरजुते हुए खेत का प्राचीनतम साक्ष्य, अग्नि-वेदिकाएँ, भूकंप के प्राचीनतम प्रमाणों में से एक; अर्थ — "काले रंग की चूड़ियाँ"।
धोलावीरा (कच्छ, खदिर द्वीप)जे.पी. जोशी, 1967–68; उत्खनन आर.एस. बिष्टतीन भागों में विभाजित नगर, विशाल जल-संचयन प्रणाली, दस बड़े चिह्नों वाला "साइनबोर्ड", पत्थर का प्रचुर उपयोग; UNESCO विश्व धरोहर (2021)
बनावली (घग्गर, हरियाणा)आर.एस. बिष्ट, 1974मिट्टी का हल-प्रतिरूप; यहाँ जल-निकासी प्रणाली अनुपस्थित — नियम का अपवाद।
राखीगढ़ी (हरियाणा)उत्खनन 1990s से; अमरेन्द्र नाथ, वसंत शिंदेभारत का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल; DNA-अध्ययन (2019) से चर्चित।
सुरकोटदा (कच्छ)जे.पी. जोशी, 1964घोड़े की अस्थियों का दावा (विवादित); अंडाकार क़ब्रें।
रोपड़ / रूपनगर (सतलुज)यज्ञदत्त शर्मा, 1953स्वतंत्र भारत में उत्खनित प्रथम हड़प्पा स्थल; मानव के साथ कुत्ते का दफ़न
आलमगीरपुर (हिंडन)1958पूर्वी सीमा-बिंदु; बुनाई की छाप वाला बर्तन।
सुत्कागेंडोर (दाश्क)ऑरेल स्टाइन का सर्वेक्षणपश्चिमी सीमा-बिंदु; समुद्री व्यापार-मार्ग की चौकी माना जाता है।
दाइमाबाद (प्रवरा)1958दक्षिणी सीमा-बिंदु; कांस्य रथ-चालक सहित "दाइमाबाद निधि" (संबद्धता पर मतभेद)।
कोटदीजी (सिंधु)एफ़.ए. ख़ान, 1955आरंभिक हड़प्पा संस्कृति का प्रतिनिधि स्थल; रक्षा-प्राचीर।
मेहरगढ़ (बोलन दर्रा)ज़ाँ-फ़्रांस्वा जारीज, 1974कृषि (जौ-गेहूँ) एवं पशुपालन का प्राचीनतम साक्ष्य; सभ्यता की "जड़"।
स्मरण-सूत्र · "कहाँ से क्या"
  • स्नानागार-नर्तकी-पशुपति — मोहनजोदड़ो · जुता खेत — कालीबंगा · गोदीबाड़ा — लोथल
  • जल-प्रबंधन एवं साइनबोर्ड — धोलावीरा · मनका-कारख़ाना — चन्हूदड़ो · हल-प्रतिरूप — बनावली
  • घोड़े का विवादित दावा — सुरकोटदा; कुत्ते का दफ़न — रोपड़; DNA-चर्चा — राखीगढ़ी

04नगर-योजना एवं वास्तुकला Town Planning and Architecture

हड़प्पा सभ्यता की पहचान उसका नियोजन है — समकालीन मिस्र पिरामिड बना रहा था, मेसोपोटामिया ज़िगुरात; हड़प्पावासी नालियाँ बना रहे थे। स्मारक के बजाय नागरिक सुविधा — यही इस सभ्यता का चरित्र है।

नगर की संरचना

  • दो भाग — पश्चिम में ऊँचा दुर्ग (citadel), पूर्व में निचला नगर; धोलावीरा में तीन भाग (मध्यम नगर अतिरिक्त)।
  • सड़कों का ग्रिड-विन्यास — एक-दूसरे को समकोण पर काटती सड़कें।
  • ईंटों का मानक अनुपात 1 : 2 : 4 (मोटाई : चौड़ाई : लंबाई) — पूरे क्षेत्र में एकरूप।
  • पकी ईंटों का व्यापक उपयोग (मेसोपोटामिया में मुख्यतः कच्ची ईंटें); कालीबंगा में कच्ची ईंटें अधिक।

जल एवं स्वच्छता

  • ढकी हुई नालियाँ — सफ़ाई हेतु मैनहोल; घर-घर से जुड़ी निकासी। प्राचीन विश्व में अद्वितीय।
  • लगभग हर घर में कुआँ एवं स्नानघर; मोहनजोदड़ो में 700 से अधिक कुएँ।
  • विशाल स्नानागार (मोहनजोदड़ो) — 11.88 × 7.01 मी; जलरोधन हेतु बिटुमन (डामर) का प्रयोग; अनुष्ठानिक स्नान से जोड़ा जाता है।
  • धोलावीरा — विशाल जलाशयों की शृंखला; मरुस्थलीय जल-प्रबंधन का शिखर।

घर आँगन-केन्द्रित थे और उनके दरवाज़े मुख्य सड़क पर नहीं, गलियों में खुलते थे — निजता की स्पष्ट चेतना। महत्वपूर्ण नकारात्मक साक्ष्य भी याद रखें: सम्पूर्ण सभ्यता में कोई निर्विवाद मंदिर, महल या भव्य राज-समाधि नहीं मिली है — यह बात इसे मिस्र-मेसोपोटामिया से मौलिक रूप से अलग करती है।

05कृषि एवं पशुपालन Agriculture and Animal Husbandry

कृषि

  • मुख्य फ़सलें — गेहूँ एवं जौ; साथ में मटर, तिल, सरसों, खजूर।
  • कपास — विश्व में सर्वप्रथम यहीं उगाई गई; यूनानियों ने इसे "सिन्डन" कहा।
  • चावल के साक्ष्य — लोथल एवं रंगपुर (गुजरात) से।
  • जुते खेत का साक्ष्य — कालीबंगा (एक साथ दो फ़सलों की आड़ी-खड़ी जुताई); हल-प्रतिरूप — बनावली।
  • बाढ़-कृषि आधारित अर्थव्यवस्था; नहर-सिंचाई के स्पष्ट साक्ष्य सीमित (शोर्तुगई से नहर के संकेत)।

पशुपालन

  • पालतू — बैल, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर, कुत्ता, बिल्ली, गधा, ऊँट।
  • कूबड़ वाला साँड़ मुहरों का सबसे प्रिय पशु।
  • घोड़ा — निर्विवाद साक्ष्य अनुपस्थित; सुरकोटदा का दावा विवादित। यही "आर्य-प्रश्न" की बहस से जुड़ता है।
  • हाथी एवं गैंडा मुहरों पर अंकित — आर्द्र जलवायु का संकेत।

06शिल्प, उद्योग एवं मुहरें Crafts, Industry and Seals

हड़प्पाई शिल्पी विशेषज्ञता की उस सीढ़ी पर थे जहाँ नगर-नगर की अपनी पहचान थी — चन्हूदड़ो मनकों का, बालाकोट चूड़ियों का, लोथल हाथीदाँत का केन्द्र।

शिल्प / वस्तुसामग्री-तकनीकटिप्पणी
मुहरें (मुद्राएँ)मुख्यतः सेलखड़ी (steatite)प्रायः वर्गाकार; एक पंक्ति लिपि + पशु-आकृति। सर्वाधिक अंकित पशु — एक-शृंगी (unicorn)। उपयोग — व्यापारिक छाप एवं संभवतः पहचान।
कांस्य-ढलाईलुप्त-मोम (lost wax / cire perdue) विधिकांस्य नर्तकी इसी विधि से; ताँबा राजस्थान (खेतड़ी) से, टिन संभवतः अफ़ग़ानिस्तान से।
मनका-उद्योगकार्नीलियन, अगेट, जैस्पर, सेलखड़ीचन्हूदड़ो एवं लोथल कार्यशालाएँ; लंबे कार्नीलियन मनके मेसोपोटामिया तक निर्यात।
मृद्भांडचाक-निर्मित, लाल पृष्ठभूमि पर काला चित्रणपीपल-पत्र, मछली-शल्क, वृत्त-चित्र प्रमुख अलंकरण।
फ़ायन्स (faience)कृत्रिम काचाभ सामग्रीचूड़ियाँ, मनके, लघु-मूर्तियाँ।
वस्त्रकपास एवं ऊनमोहनजोदड़ो से बुने कपड़े की छाप; तकलियाँ (spindle whorls) सर्वत्र।

धातु-ज्ञान की सीमा स्पष्ट रखें — ताँबा, काँसा, सोना, चाँदी ज्ञात; लोहा अज्ञात। सोना संभवतः कर्नाटक (कोलार) से, चाँदी ईरान-अफ़ग़ानिस्तान से।

07व्यापार एवं माप-तौल Trade, Weights and Measures

व्यापार-तंत्र

  • विनिमय-आधारित (वस्तु-विनिमय); धातु-मुद्रा अनुपस्थित
  • आंतरिक व्यापार — कच्चे माल के स्रोतों से नगरों तक: शंख (गुजरात), लाजवर्द (अफ़ग़ानिस्तान — शोर्तुगई उपनिवेश), ताँबा (खेतड़ी)।
  • विदेश व्यापार — मेसोपोटामिया (मेलुहा नाम से), दिलमुन (बहरीन) एवं मकान (ओमान) मार्ग-स्थल।
  • मेसोपोटामियाई नगरों (उर, किश, सुसा) से हड़प्पाई मुहरें प्राप्त; लोथल से फ़ारस की खाड़ी शैली की मुहर।
  • अकेडियन सम्राट सारगोन के अभिलेख में मेलुहा के जहाज़ों का उल्लेख।

माप-तौल

  • बाट प्रायः चर्ट (chert) पत्थर के, घनाकार।
  • तौल-क्रम द्विआधारी (1, 2, 4, 8, 16, 32...) छोटे मानों में; बड़े मानों में दशमलव-गुणक। 16 का अनुपात केन्द्रीय।
  • लंबाई-मापन — मोहनजोदड़ो से सीप का तथा लोथल से हाथीदाँत का पैमाना
  • माप-तौल की एकरूपता पूरे क्षेत्र में — किसी केन्द्रीय मानकीकरण का संकेत।

08समाज, शासन एवं धर्म Society, Polity and Religion

क · समाज एवं शासन Society and Polity

लिपि अपठित होने से शासन-प्रणाली पर केवल अनुमान संभव है। नगर-योजना, मानक ईंटें और एकरूप माप-तौल किसी सशक्त समन्वयकारी सत्ता का संकेत देते हैं, पर महल एवं राज-समाधि की अनुपस्थिति उसे मिस्र जैसे राजतंत्र से अलग करती है। विद्वानों में मत विभाजित हैं — पुरोहित-वर्ग का शासन, व्यापारी-नियंत्रण, या अनेक स्वतंत्र नगर-राज्य। समाज संभवतः शिल्प-आधारित वर्गों में बँटा था, और मकानों के आकार-भेद आर्थिक स्तरीकरण दिखाते हैं — पर युद्ध-चित्रण एवं भारी शस्त्र-भंडार की अनुपस्थिति इसे प्राचीन विश्व की अपेक्षाकृत शांतिप्रिय सभ्यता सिद्ध करती है।

ख · धर्म Religion

साक्ष्यस्थलव्याख्या
पशुपति मुहरमोहनजोदड़ोयोग-मुद्रा में त्रिमुखी आकृति, चारों ओर हाथी-बाघ-गैंडा-भैंसा, नीचे हिरण। मार्शल ने "आद्य-शिव" कहा — व्याख्या आज भी बहस में।
मातृदेवी मृण्मूर्तियाँअधिकांश स्थलउर्वरता-पूजा का संकेत; एक मुहर पर स्त्री-गर्भ से निकलता पौधा — पृथ्वी-देवी की संभावना।
अग्नि-वेदिकाएँकालीबंगा, लोथल, बनावलीअनुष्ठानिक अग्नि-पूजा का संकेत — केवल कुछ स्थलों पर, सार्वभौमिक नहीं।
पीपल, कूबड़दार साँड़, नागमुहरें-मृद्भांडवृक्ष एवं पशु-पूजा; पीपल-देवता के समक्ष उपासक की मुहर प्रसिद्ध।
स्वस्तिक चिह्नमुहरेंपरवर्ती भारतीय परंपरा से निरंतरता का बहु-उद्धृत उदाहरण।
शवाधानहड़प्पा R-37, लोथल, सुरकोटदाप्रायः उत्तर-दक्षिण दिशा में पूर्ण समाधि; लोथल में युग्मित समाधि; कालीबंगा में वृत्ताकार-अंडाकार क़ब्रें। भव्य राज-समाधि अनुपस्थित।

सावधानी: मंदिर-भवन का कोई निर्विवाद साक्ष्य नहीं मिला है, इसलिए धर्म-सम्बन्धी हर कथन "संकेत" है, "प्रमाण" नहीं — मुख्य परीक्षा के उत्तर में यही भाषा अंक दिलाती है।

09कला की प्रमुख कृतियाँ Masterpieces of Harappan Art

कृतिसामग्री · स्थलविशेषता
नर्तकी (Dancing Girl)कांस्य · मोहनजोदड़ोलुप्त-मोम विधि; लगभग 10.5 सेमी; बाएँ हाथ में चूड़ियों की पंक्ति — आत्मविश्वासपूर्ण मुद्रा।
पुरोहित-राजा (Priest-King)सेलखड़ी · मोहनजोदड़ोतिपतिया (trefoil) अलंकरण वाला वस्त्र; अधखुली आँखें — ध्यान-मुद्रा की व्याख्या।
पुरुष-धड़लाल जैस्पर · हड़प्पाशारीरिक यथार्थ का उत्कृष्ट अंकन; प्राचीनता पर कुछ विद्वानों का संदेह भी।
पशु-मुहरेंसेलखड़ी · सर्वत्रएक-शृंगी, साँड़, हाथी, गैंडा, बाघ; सूक्ष्म उत्कीर्णन का शिखर।
मृण्मूर्तियाँ एवं खिलौनेपकी मिट्टी · सर्वत्रचलने वाले सिर वाला साँड़, पहियेदार गाड़ियाँ, सीटियाँ — दैनिक जीवन की झलक।
चित्रित भांडमृत्तिका · सर्वत्रलाल पर काला; लोथल-भांड पर चालाक लोमड़ी जैसी कथा-छवियों की पहचान की जाती है।

10लिपि एवं भाषा का प्रश्न The Script Question

लगभग एक शताब्दी के प्रयासों के बाद भी हड़प्पाई लिपि अपठित है — और यही एक तथ्य इस सभ्यता के इतिहास को "प्रागैतिहासिक" एवं "ऐतिहासिक" के बीच की श्रेणी — आद्य-ऐतिहासिक (proto-historic) — में रखता है।

लिपि के ज्ञात तथ्य

  • भावचित्रात्मक (logo-syllabic मानी जाती है); चिह्न-संख्या लगभग 400–600 — वर्णमाला होने के लिए बहुत अधिक।
  • लेखन-दिशा प्रायः दाएँ से बाएँ; कुछ में बूस्ट्रोफ़ेडन (सर्पिल — पंक्ति बदलते ही दिशा उलट)।
  • अभिलेख अत्यंत छोटे — औसतन 5 चिह्न; सबसे लंबा लगभग 26 चिह्न।
  • धोलावीरा साइनबोर्ड — दस बड़े चिह्न; सार्वजनिक लेखन का दुर्लभ उदाहरण।

न पढ़े जाने के कारण

  • कोई द्विभाषिक अभिलेख (रोसेटा-पत्थर जैसा) नहीं मिला।
  • अभिलेख बहुत छोटे — सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए अपर्याप्त।
  • अधोभाषा अज्ञात — द्रविड़, इंडो-आर्य एवं अन्य दावों में कोई सर्वमान्य नहीं।
  • परिणाम — शासकों के नाम, विधि, साहित्य — सब मौन; इतिहास केवल वस्तुओं से पढ़ना पड़ता है।

11पतन के सिद्धांत एवं उत्तरजीविता Theories of Decline and Legacy

लगभग 1900 ई.पू. के बाद नगर उजड़ने लगे — पर "पतन" का अर्थ विनाश नहीं, नगरीकरण का क्षय था; संस्कृति ग्रामीण रूपों में जीवित रही।

सिद्धांतप्रस्तावकस्थिति
आर्य आक्रमणमॉर्टिमर व्हीलरमोहनजोदड़ो के कंकालों को "नरसंहार" कहा; अब अस्वीकृत — कंकाल भिन्न कालों के हैं, विध्वंस-स्तर अनुपस्थित।
बाढ़जॉन मार्शल, अर्नेस्ट मैकेमोहनजोदड़ो में गाद-स्तर; स्थानीय व्याख्या के रूप में मान्य, सर्वव्यापी कारण नहीं।
नदी-मार्ग परिवर्तन एवं घग्गर-हाकरा का सूखनाअनेक भू-वैज्ञानिक अध्ययनसरस्वती-तटीय स्थलों के उजड़ने की प्रबल व्याख्या; वर्तमान शोध में केन्द्रीय।
जलवायु-परिवर्तन (मानसून का दुर्बल होना)आधुनिक जलवायु-अध्ययनलगभग 2000 ई.पू. के वैश्विक शुष्कन से मेल; वर्तमान में सर्वाधिक स्वीकृत दिशा
पारिस्थितिक क्षरणफ़ेयरसर्विस आदिवनों की कटाई (ईंट पकाने हेतु), अति-चराई, भूमि की उर्वरता-हानि।
व्यापार-पतनमेसोपोटामिया से व्यापार का ह्रास — नगर-अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूटना।
उत्तरजीविता · हड़प्पा से आज तक
  • आज का शोध एक-कारण के बजाय बहु-कारण व्याख्या (जलवायु + नदी + व्यापार) को मानता है — मुख्य परीक्षा में यही निष्कर्ष लिखें।
  • निरंतरता के उदाहरण — बैलगाड़ी का रूप, कपास-वस्त्र परंपरा, माप-तौल में 16 का अनुपात, पीपल-पूजा, स्वस्तिक, चूड़ी-परंपरा, संभावित योग-मुद्राएँ।
  • उत्तर हड़प्पा संस्कृतियाँ — गुजरात में रंगपुर-रोजड़ी, हरियाणा-पंजाब में क़ब्रिस्तान-H संस्कृति — नगर से गाँव की वापसी।

12स्वयं जाँच Self Test — 15 Questions

प्रत्येक प्रश्न का एक ही प्रयास मिलेगा। अंक 0 / 15
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