पेपर 2 · इतिहास · Comprehensive History of Chhattisgarh
प्राचीन छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक नाम 'दक्षिण कोशल' था। यह क्षेत्र महानदी, शिवनाथ, अरपा, खरून नदियों के मैदान में स्थित है। रामायण-महाभारत काल में यह कोशल साम्राज्य का दक्षिणी भाग था।
🔹 सिरपुर (श्रीपुर) — प्राचीन राजधानी:
सिरपुर (महानदी के किनारे) सरभापुरिया वंश
(4थी-6वीं शताब्दी) की राजधानी थी। यहाँ लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध स्तूप, जैन मंदिर
मिले हैं। शिलालेख (सरभापुरिया, पांडुवंशी) — प्राचीन इतिहास के
महत्वपूर्ण स्रोत। अर्जुनगढ़ में भी प्राचीन अवशेष मिले हैं।
🔹 प्राचीन राजवंश:
नागवंशी (कालिंग-कोशल क्षेत्र) — 3री-4थी शताब्दी।
सरभापुरिया (4थी-6वीं शताब्दी) — सिरपुर, अर्जुनगढ़ के शिलालेख।
पांडुवंशी (6वीं-8वीं शताब्दी) — कवर्धा, राजनांदगांव क्षेत्र।
बाणवंशी (कोशल-कलिंग क्षेत्र) — 7वीं-8वीं शताब्दी।
🔹 सांस्कृतिक प्रभाव:
बौद्ध धर्म — सिरपुर, बस्तर, अर्जुनगढ़ में बौद्ध स्तूप और विहार।
जैन धर्म — सिरपुर, रायपुर, बिलासपुर में जैन मंदिर और मूर्तियाँ।
हिंदू धर्म — लक्ष्मण मंदिर, भोरमदेव मंदिर (गुप्तकालीन स्थापत्य)।
• एच.सी. रे — 'Dynastic History of Northern India'
• आर.के. त्रिपाठी — 'Ancient Chhattisgarh'
• डी.सी. सरकार — 'Select Inscriptions' (शिलालेख संग्रह)
• ए.के. शर्मा — 'History of Chhattisgarh'
• सिरपुर — प्राचीन राजधानी (महानदी तट)
• अर्जुनगढ़ — प्राचीन स्थल (रायपुर-सिरपुर मार्ग)
• भोरमदेव — मंदिर (गुप्तकालीन स्थापत्य)
• तालागाँव — प्राचीन स्थल (बिलासपुर)
• आम्रपुर — प्राचीन शिलालेख (राजनांदगांव)
मध्यकालीन छत्तीसगढ़ में कलचुरि, गोंड, मराठा, ब्रिटिश शासन रहे। छत्तीसगढ़ नाम की उत्पत्ति '36 गढ़' से हुई, जो कलचुरि काल में छत्तीसगढ़ के 36 राज्यों (गढ़ों) को दर्शाता है।
🔹 कलचुरि वंश (10वीं-18वीं शताब्दी):
रतनपुर कलचुरियों की राजधानी थी (वर्तमान जिला — रतनपुर, बिलासपुर के पास)।
प्रथम कलचुरि — कोकल्लदेव I (9वीं शताब्दी)।
रतनदेव (11वीं शताब्दी) — महान शासक।
जाजल्लदेव — 12वीं शताब्दी।
कलचुरि काल में कला, साहित्य, स्थापत्य का विकास —
भोरमदेव मंदिर, देवबलोदा मंदिर।
🔹 गोंड राज्य (14वीं-18वीं शताब्दी):
गोंडवाना — गोंड साम्राज्य (मध्य भारत, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना)।
बस्तर — गोंड राज्य (1600-1750) — दलपत शाह, पृथ्वी देव।
खैरागढ़ — गोंड राज्य (16वीं-18वीं शताब्दी)।
गोंड कला और संस्कृति — मंदिर, किले, लोक-कला, नृत्य-संगीत।
🔹 मराठा शासन (1741-1818):
1741 में मराठों ने कलचुरियों को पराजित किया।
भोसले (नागपुर) का अधिकार। कर-व्यवस्था —
चौथ, सरदेशमुखी। प्रशासनिक सुधार — मराठा प्रशासन।
1818 में ब्रिटिशों ने मराठों को पराजित किया।
🔹 ब्रिटिश शासन (1818-1947):
ब्रिटिश शासन में छत्तीसगढ़ रियासतों में विभाजित था —
बस्तर, खैरागढ़, कोरिया, सरगुजा, रायगढ़, जशपुर — 19 रियासतें।
प्रशासनिक केंद्र — रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर।
अंग्रेज़ों का शोषण — जंगल, खनिज, कृषि, कर-व्यवस्था।
• जदुनाथ सरकार — 'History of Marathas' (मराठा शासन)
• एच.सी. रेचौधरी — 'History of Kalachuris'
• एस.एल. हीरा — 'Gond Kingdoms of Central India'
• डी.आर. पांडे — 'Medieval Chhattisgarh'
• छत्तीसगढ़ — 'छत्तीस' (36) + 'गढ़' (राज्य/किले)
• कलचुरि काल में 36 गढ़ — रतनपुर, खैरागढ़, बस्तर, सरगुजा, कोरिया, रायगढ़, जशपुर, आदि
• प्रत्येक गढ़ का अपना शासक और प्रशासन
आधुनिक छत्तीसगढ़ में मराठा, ब्रिटिश, रियासतें, राष्ट्रीय आंदोलन का इतिहास शामिल है। 1741 से 1818 तक मराठा शासन, 1818 से 1947 तक ब्रिटिश शासन।
🔹 मराठा शासन (1741-1818):
1741 में मराठों ने कलचुरियों को पराजित किया।
भोसले (नागपुर) के अधीन छत्तीसगढ़। कर-व्यवस्था —
चौथ (25%), सरदेशमुखी (10%)। प्रशासनिक सुधार — न्याय, राजस्व, सेना।
1818 में ब्रिटिशों ने मराठों को हराया (तीसरी एंग्लो-मराठा युद्ध)।
🔹 ब्रिटिश शासन (1818-1947):
1818 के बाद छत्तीसगढ़ रियासतों में विभाजित था —
बस्तर, खैरागढ़, कोरिया, सरगुजा, रायगढ़, जशपुर, सारंगढ़, साकटी, नंदगाँव, आदि (19 रियासतें)।
प्रत्यक्ष ब्रिटिश शासन — रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ (Central Provinces)।
🔹 1857 का विद्रोह:
1857 के विद्रोह में छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बस्तर — गोंड शासकों ने अंग्रेज़ों का विरोध किया।
सरगुजा, रायपुर, बिलासपुर में विद्रोह।
ब्रिटिश शासन ने विद्रोह को कुचला और कठोर दंड दिए।
🔹 आर्थिक शोषण:
ब्रिटिश शासन में जंगल, खनिज, कृषि का शोषण हुआ।
लोहा, बॉक्साइट, कोयला का खनन। कृषि कर
— ज़मींदारी व्यवस्था। आदिवासियों का जंगलों से विस्थापन।
सड़क, रेल का विकास (रायपुर-बिलासपुर-नागपुर)।
• ए.बी. सिंह — 'Modern Chhattisgarh: A Study'
• जदुनाथ सरकार — 'History of Marathas'
• एच.आर. पटेल — 'Chhattisgarh in the 19th Century'
• के.के. निगम — 'British Rule in Central Provinces'
छत्तीसगढ़ के जनजातीय आंदोलन गोंड, हल्बा, मुरिया, बस्तर के आदिवासियों ने ब्रिटिश शासन, ज़मींदारी, कर-व्यवस्था, जंगल अधिकार के विरुद्ध चलाए। ये आंदोलन 19वीं सदी से 20वीं सदी तक चले।
🔹 बस्तर विद्रोह (19वीं सदी):
बस्तर क्षेत्र (वर्तमान बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर) में गोंड और हल्बा
आदिवासियों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह किया। जंगल, ज़मीन, कर-व्यवस्था
मुख्य मुद्दे थे। ब्रिटिशों ने विद्रोह को कुचला और कठोर दंड दिए।
🔹 गोंड आंदोलन (1900-1920):
भीमराव और पृथ्वी देव ने गोंड राज्य
(गोंडवाना) को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया। गोंड महासभा
का गठन (1910)। आदिवासी अधिकार, ज़मीन, स्वायत्तता की मांग।
आंदोलन को ब्रिटिशों ने दबा दिया।
🔹 हल्बा विद्रोह:
हल्बा आदिवासियों ने बस्तर में ब्रिटिशों के विरुद्ध विद्रोह किया।
ज़मींदारी, कर-व्यवस्था, जंगल अधिकार मुख्य मुद्दे।
ब्रिटिश-विरोधी आंदोलन में हल्बाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🔹 मुरिया आंदोलन (20वीं सदी):
बस्तर में मुरिया आदिवासियों ने पारंपरिक प्रशासन
की पुनर्स्थापना की मांग की। स्वायत्तता, आत्म-प्रशासन
की मांग। आंदोलन को ब्रिटिश और बस्तर राज्य ने दबा दिया।
🔹 नक्सलवादी आंदोलन (1960-वर्तमान):
बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर —
नक्सलवादी आंदोलन का केंद्र। भूमि-अधिकार,
सामाजिक न्याय, आदिवासी अधिकार मुख्य मुद्दे। भारत सरकार संयुक्त सैन्य अभियान
और विकास योजनाएँ चला रही है।
• के.एस. सिंह — 'Tribal Movements in India'
• एस.सी. दुबे — 'Gonds of Central India'
• ए.के. मुखर्जी — 'Tribal Uprisings in Chhattisgarh'
• वी.के. मिश्रा — 'Naxalite Movement in Bastar'
छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रीय आंदोलनों, क्रांतिकारी गतिविधियों, सामाजिक सुधार का अभिन्न अंग था। छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों ने गाँधी, नेहरू, सुभाष के आह्वान पर आंदोलन किए।
🔹 असहयोग आंदोलन (1920-22):
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रतनपुर में आंदोलन।
गाँधीजी के आह्वान पर असहयोग
— अंग्रेज़ी स्कूल, कचहरी, कपड़े का बहिष्कार। खादी का प्रचार।
चौरी-चौरा घटना (1922) के बाद आंदोलन स्थगित।
🔹 नमक सत्याग्रह (1930):
दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर में नमक कानून का विरोध।
सत्याग्रह — बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
अंग्रेज़ों ने कई सत्याग्रहियों को गिरफ़्तार किया।
'नमक सत्याग्रह' ने छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय चेतना को बढ़ाया।
🔹 भारत छोड़ो आंदोलन (1942):
1942 का आंदोलन छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा था।
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर, रतनपुर में आंदोलन।
हड़ताल, धरना, जुलूस — अंग्रेज़ों ने कई कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया।
छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानी —
पं. सुंदर लाल शर्मा, पं. रामचंद्र शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, पं. द्वारकाप्रसाद मिश्रा।
🔹 1950 — मध्य प्रदेश में विलय:
1947 में स्वतंत्रता के बाद छत्तीसगढ़
1950 में मध्य प्रदेश
का भाग बना। रियासतों का विलय — बस्तर, खैरागढ़, कोरिया, सरगुजा,
रायगढ़, जशपुर — 1948 में विलय। रायपुर जिला केंद्र बना।
• बिपिन चंद्र — 'India's Struggle for Independence'
• एस.आर. बख्शी — 'Freedom Fighters of Chhattisgarh'
• के.पी. मिश्रा — 'National Movement in Central Provinces'
• आर.के. मुखर्जी — 'Chhattisgarh in Freedom Struggle'
छत्तीसगढ़ की संस्कृति आदिवासी, सतनामी, कृषक, कलात्मक परंपराओं का संगम है। यहाँ की लोक-कला, नृत्य, संगीत, त्योहार, शिल्प विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
🔹 लोक-नृत्य:
पंथी — सतनामी समुदाय, भक्ति-भाव, ढोल-मंजीरा के साथ।
सुआ — कृषि परंपरा, तोते के नृत्य की नकल।
कर्मा — गोंड और बैगा आदिवासी, वृक्ष-पूजा।
जावरा — गोंड, विवाह और त्योहारों पर।
राउत — ग्वाला (यादव) समुदाय, गाय-बैल की नकल।
🔹 लोक-संगीत:
गौरा-गौरी — शिव-पार्वती भक्ति, विवाह-गीत।
भरथरी — गोंड की वीर-गाथा।
पंडवानी — महाभारत की कथा, वीर-रस।
चंदैनी — प्रेम-गीत, छत्तीसगढ़ी लोक-शैली।
वाद्य यंत्र — ढोल, मंजीरा, तबला, हारमोनियम, बाँसुरी।
🔹 बस्तर दशहरा:
बस्तर दशहरा — 75 दिन चलने वाला
दुनिया का सबसे बड़ा दशहरा। रथ यात्रा, देवी-देवताओं की पूजा।
बस्तर का शासक (जगदलपुर) — यहाँ के महत्वपूर्ण त्योहार।
🔹 कला और शिल्प:
धोकरा — मूर्ति निर्माण (पीतल, कांस्य)।
बस्तर लकड़ी कला — मूर्तियाँ, बर्तन, खिलौने।
चांदी जड़ित — आदिवासी आभूषण।
बांस कला — टोकरी, चटाई, बर्तन।
• वीरभान सिंह — 'Folk Culture of Chhattisgarh'
• एस.एल. डोंगरे — 'Tribal Culture of Bastar'
• रमा राव — 'Chhattisgarh: Art and Culture'
• आर.एस. मिश्रा — 'Folk Dances of Chhattisgarh'
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन 1980 में शुरू हुआ और 2000 में सफल हुआ। यह आंदोलन संस्कृतिक, आर्थिक, प्रशासनिक असमानता के कारण शुरू हुआ।
🔹 पृथक राज्य की मांग (1980):
छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का एक जिला था।
प्रशासनिक उपेक्षा, आर्थिक पिछड़ापन, सांस्कृतिक अलगाव
— मुख्य मुद्दे। 1980 में पृथक राज्य
की मांग शुरू हुई। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा — पिछड़ापन।
🔹 राज्य विधेयक (1994):
1994 में अटल बिहारी वाजपेयी
सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य विधेयक पारित किया।
बस्तर, सरगुजा, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कांकेर, जशपुर, कोरिया, सरगुजा, आदि
— 16 जिले शामिल। रायपुर — राजधानी।
🔹 1 नवंबर 2000 — राज्य स्थापना:
1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ भारत का
26वाँ राज्य बना। पं. अजीत जोगी
— प्रथम मुख्यमंत्री। डॉ. डी.एन. साहनी — प्रथम राज्यपाल।
छत्तीसगढ़ — देश का 9वाँ सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल)।
🔹 विकास एवं प्रगति (2000-वर्तमान):
छत्तीसगढ़ खनिज संपदा — लोहा, बॉक्साइट, कोयला, टिन, कैल्साइट, संगमरमर।
कृषि — चावल (धान), गेहूँ, मक्का, तिलहन।
उद्योग — भिलाई इस्पात संयंत्र, बल्को, NTPC।
बस्तर, सरगुजा — आदिवासी विकास, पर्यटन, जंगल संरक्षण।
🔹 वर्तमान जिले (2024):
छत्तीसगढ़ में 33 जिले हैं।
2023 में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
और मोहला-मानपुर — 2 नए जिले बने।
बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर —
आदिवासी-प्रधान, नक्सल प्रभावित क्षेत्र।
• के.के. निगम — 'Chhattisgarh: A New State'
• ए.के. सिंह — 'State Formation in India'
• एस.एस. राव — 'Chhattisgarh: State and Society'
• राज्य निर्माण आंदोलन के दस्तावेज़ — सरकारी रिकॉर्ड