भारत के इतिहासकार — सम्पूर्ण नोट्स · UPSC · PSC · NTA NET
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भारत के इतिहासकार — सम्पूर्ण नोट्स प्राचीन · मध्यकालीन · आधुनिक · राष्ट्रवादी · मार्क्सवादी · सबाल्टर्न · महिला इतिहासकार

मेगस्थनीज · कौटिल्य · कल्हण · अल-बिरूनी · अबुल फ़ज़ल · जेम्स मिल · कनिंघम · सरकार · मजुमदार · कोसांबी · शर्मा · गुहा · थापर
प्राचीनमध्यकालीनआधुनिक 22+ अध्याय25 MCQ15 PYQ 10 स्मरण सूत्रUPSCPSCNET
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विषय-सूची — भारत के इतिहासकार
22 अध्याय · स्रोत · पद्धति · विद्यालय · महत्वपूर्ण कृतियाँ · MCQ · PYQ
📢 UPSC/PSC/NET के लिए सम्पूर्ण सामग्री: 22 अध्याय — प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक, राष्ट्रवादी, मार्क्सवादी, सबाल्टर्न, महिला इतिहासकार, स्रोत, पद्धति, विद्यालय, MCQ, PYQ और स्मरण सूत्र।
01
इतिहास लेखन — परिचय एवं पद्धति
Historiography · Introduction
02
प्राचीन भारत के इतिहासकार — मेगस्थनीज · कौटिल्य · कल्हण
Ancient Historians · Megasthenes · Kautilya · Kalhana
03
मध्यकालीन इतिहासकार — अल-बिरूनी · बरनी · अबुल फ़ज़ल
Medieval Historians · Al-Biruni · Barani · Abul Fazl
04
आधुनिक इतिहासकार — जेम्स मिल · कनिंघम · सरकार
Modern Historians · Mill · Cunningham · Sarkar
05
राष्ट्रवादी इतिहासकार — मजुमदार · मुंशी · अयंगर
Nationalist · Majumdar · Munshi · Iyengar
06
मार्क्सवादी इतिहासकार — कोसांबी · शर्मा · हबीब
Marxist · Kosambi · Sharma · Habib
07
सबाल्टर्न इतिहासकार — गुहा · चक्रवर्ती · पंडित
Subaltern · Guha · Chakravarty · Pandit
08
महिला इतिहासकार — थापर · सरकार · चौधुरी
Women Historians · Thapar · Sarkar · Chaudhuri
09
स्रोत — पुरातात्विक · साहित्यिक · विदेशी
Sources · Archaeological · Literary · Foreign
10
अभिलेख एवं मुद्राशास्त्र — विशेषज्ञ
Epigraphy & Numismatics
11
पुरातत्त्वविद् — कनिंघम · मार्शल · व्हीलर
Archaeologists · Cunningham · Marshall · Wheeler
12
विदेशी यात्री एवं उनके वृत्तांत
Foreign Travelers · Accounts
13
इतिहास-लेखन की परम्पराएँ
Historiographical Traditions
14
प्रमुख बहसें — आर्य · मौर्य · गुप्त · मुगल
Key Debates · Aryan · Mauryan · Gupta · Mughal
15
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कृतियाँ
Major Historical Works
16
इतिहास की पद्धति — स्रोत-आलोचना · व्याख्या
Historical Method · Source Criticism · Interpretation
17
30 महत्वपूर्ण एक-पंक्ति तथ्य
30 Important One-Liners
18
15 पिछले परीक्षा प्रश्न
15 Previous Year Questions
19
25 अभ्यास MCQ
25 Practice MCQs
20
10 स्मरण सूत्र + स्कोर
10 Mnemonics + Score
21
समयरेखा — इतिहासकार एवं कृतियाँ
Timeline · Historians & Works
22
इतिहास-लेखन के विद्यालय
Schools of Historiography
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अध्याय 01 · Introduction
इतिहास लेखन — परिचय एवं पद्धति
इतिहास-लेखन का अर्थ · महत्व · स्रोत · आलोचना · व्याख्या · उद्देश्य
इतिहास-लेखन (Historiography) — परिभाषा
इतिहास-लेखन = अतीत की घटनाओं का अध्ययन, उनका विश्लेषण एवं व्याख्या करके उन्हें लिखित रूप में प्रस्तुत करना।
महत्व: यह हमें बताता है कि अतीत को कैसे देखा गया, किन दृष्टिकोणों से, और किस उद्देश्य से।
पद्धति: स्रोतों की खोज → आलोचना (बाह्य/आंतरिक) → साक्ष्यों का संकलन → व्याख्या → निष्कर्ष → लेखन।
इतिहासकार का कार्य: तथ्यों का चयन, व्याख्या, और कथा-निर्माण — वस्तुनिष्ठता एवं निष्पक्षता का प्रयास।
स्रोत-आलोचना (Source Criticism)
बाह्य आलोचना (External Criticism): स्रोत की प्रामाणिकता — लेखक, समय, स्थान, भाषा, शैली, सामग्री — जालसाजी की जाँच।
आंतरिक आलोचना (Internal Criticism): स्रोत की विश्वसनीयता — तथ्यों की सत्यता, पूर्वाग्रह, विरोधाभास, साक्ष्यों का मूल्यांकन।
सहायक विज्ञान: पुरातत्त्व, अभिलेखशास्त्र, मुद्राशास्त्र, साहित्यिक आलोचना, भाषाविज्ञान — स्रोतों को समझने में सहायक।
इतिहास-लेखन के प्रमुख दृष्टिकोण (Approaches)
राजनीतिक इतिहास: राजाओं, युद्धों, प्रशासन पर केन्द्रित — पारम्परिक इतिहास।
आर्थिक इतिहास: अर्थव्यवस्था, व्यापार, कृषि, उद्योग — मार्क्सवादी इतिहासकारों का जोर।
सामाजिक इतिहास: समाज, जाति, वर्ग, महिलाएँ, दलित — सबाल्टर्न और नारीवादी इतिहास।
सांस्कृतिक इतिहास: कला, साहित्य, धर्म, विचारधारा — विशेष संस्कृतियों का अध्ययन।
पर्यावरणीय इतिहास: प्राकृतिक पर्यावरण और मानव समाज के बीच सम्बन्ध — नवीन दृष्टिकोण।
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अध्याय 02 · Ancient Historians
प्राचीन भारत के इतिहासकार — मेगस्थनीज · कौटिल्य · कल्हण
यूनानी, भारतीय, चीनी यात्री — इंडिका, अर्थशास्त्र, राजतरंगिणी
यूनानी
मेगस्थनीज (Megasthenes)
Indica · 302–298 ई.पू.
सेल्यूकस का राजदूत
चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी राजदूत
रचना: ‘इंडिका’ (Indica) — 7 खंड (मूल लुप्त, उद्धरण मिलते हैं)
वर्णन — मौर्य प्रशासन, पाटलिपुत्र, जाति व्यवस्था, कृषि, सेना
भारत को 7 जातियों में विभाजित किया (दार्शनिक, किसान, सैनिक, आदि)
महत्व: मौर्य काल का सबसे प्रारम्भिक विदेशी वर्णन
भारतीय
कौटिल्य (चाणक्य)
अर्थशास्त्र · 4–3 शताब्दी ई.पू.
प्रधानमंत्री · मौर्य
‘अर्थशास्त्र’ — राज्य-प्रशासन, अर्थव्यवस्था, कूटनीति, युद्ध-नीति
15 खंड, 180 प्रकरण — 6000 श्लोक
सप्तांग सिद्धान्त — स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दण्ड, मित्र
प्राचीन भारत में राजनीति-शास्त्र का सबसे प्राचीन ग्रन्थ
चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु एवं सलाहकार
कश्मीरी
कल्हण (Kalhana)
राजतरंगिणी · 1148–1149 ई.
12वीं शताब्दी
‘राजतरंगिणी’ — कश्मीर का इतिहास (संस्कृत में)
8 खंड — 7826 श्लोक — प्राचीनतम पूर्ण ऐतिहासिक काव्य
पौराणिक काल से 1149 ई. तक कश्मीर के राजाओं का वर्णन
स्रोत: पूर्ववर्ती ग्रन्थ, अभिलेख, मुद्राएँ, परम्पराएँ
महत्व: प्राचीन भारत का प्रथम विश्वसनीय ऐतिहासिक ग्रन्थ
अन्य प्राचीन इतिहासकार/यात्री
फाह्यान (399–414 ई.): चीनी यात्री — गुप्त काल — ‘फो-क्यू-की’ (बौद्ध धर्म, मगध, तक्षशिला)।
ह्वेन-त्सांग (630–645 ई.): चीनी यात्री — हर्षवर्धन काल — ‘सी-यू-की’ (विद्यालय, बौद्ध, राजनीति)।
इत्सिंग (671–695 ई.): चीनी यात्री — बौद्ध धर्म, नालंदा, तक्षशिला।
स्कन्दगुप्त (गुप्त काल): अभिलेखों में उल्लेख — गुप्त साम्राज्य के विस्तार का वर्णन।
प्राचीन स्रोत — महत्व
महाभारत/रामायण: पौराणिक इतिहास — सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्रोत।
पुराण (विष्णु, भागवत, मत्स्य): राजवंशों की सूची — कालनिर्धारण में सहायक।
बौद्ध ग्रन्थ (तिपिटक): मौर्य काल — धर्म, अर्थव्यवस्था, समाज।
जैन ग्रन्थ (आगम): प्राचीन भारत की जातियाँ, व्यापार, नगर।
मुद्राएँ एवं अभिलेख: अशोक के शिलालेख, हरिषेण के प्रयाग प्रशस्ति — प्रत्यक्ष प्रमाण।
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अध्याय 03 · Medieval Historians
मध्यकालीन इतिहासकार — अल-बिरूनी · बरनी · अबुल फ़ज़ल
अरबी · फ़ारसी · तुर्की · दरबारी इतिहास · सूफी · विदेशी यात्री
अरब-फ़ारसी
अल-बिरूनी (Al-Biruni)
तहक़ीक़-ए-हिन्द · 1030 ई.
महमूद गज़नवी का दरबारी
रचना: ‘तहक़ीक़-ए-हिन्द’ (भारत का विवरण) — अरबी में
80 अध्याय — धर्म, दर्शन, खगोल, गणित, रसायन, सामाजिक रीति-रिवाज
भारतीयों को ‘विद्वान’ कहा — हिन्दू-मुस्लिम संबंधों पर निष्पक्ष
“भारत की सभ्यता की अद्भुत समझ”
वैज्ञानिक दृष्टिकोण — तुलनात्मक अध्ययन
दरबारी
ज़ियाउद्दीन बरनी
तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही · 1357
तुग़लक़ दरबार
‘तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही’ — 14वीं शताब्दी का इतिहास
अलाउद्दीन ख़िलजी, मुहम्मद तुग़लक़, फ़िरोज़ तुग़लक़ का वर्णन
‘फतवा-ए-जहाँदारी’ — राजनीति-शास्त्र
दरबारी इतिहास का उत्कृष्ट उदाहरण
मुगल
अबुल फ़ज़ल
अकबरनामा · आइन-ए-अकबरी · 1602
अकबर के नवरत्न
‘अकबरनामा’ — अकबर का शासन (3 खंड)
‘आइन-ए-अकबरी’ — अकबर का प्रशासन, राजस्व, सेना, समाज
फ़ारसी में लिखा — शासकीय प्रशंसा
स्रोत: दरबारी अभिलेख, मौखिक जानकारी
महत्व: मुगल काल का सबसे विस्तृत इतिहास
मध्यकालीन अन्य इतिहासकार
इब्न बतूता (1333–1342): मोरक्को का यात्री — ‘रिहला’ — मुहम्मद तुग़लक़ के दरबार में — भारतीय समाज, व्यापार, प्रशासन।
शम्स-ए-सिराज अफ़ीफ़: ‘तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही’ (दूसरा) — 14वीं सदी।
गुलबदन बेगम: ‘हुमायूँनामा’ — हुमायूँ की बहन — प्रारम्भिक मुगल इतिहास।
बदायूँनी: ‘मुंतखब-उत-तवारीख’ — अकबर की आलोचनात्मक समीक्षा।
फ़िरिश्ता: ‘तारीख़-ए-फ़िरिश्ता’ — मुगल काल का सामान्य इतिहास (17वीं सदी)।
मध्यकालीन इतिहास-लेखन की विशेषताएँ
दरबारी इतिहास: शासकों की प्रशंसा — ‘नामा’ शैली।
फ़ारसी भाषा: प्रशासनिक एवं साहित्यिक भाषा।
इस्लामी दृष्टिकोण: इतिहास को ‘सुन्नत’ के अनुरूप प्रस्तुत करना।
विदेशी यात्रियों के वृत्तांत: अल-बिरूनी, इब्न बतूता, मार्को पोलो।
सूफी मक़तूबात: शेखों की पत्रियाँ — सामाजिक, धार्मिक परिस्थितियाँ।
हिन्दू स्रोत: वंशावलियाँ, दान-पत्र, मन्दिर अभिलेख।
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अध्याय 04 · Modern Historians
आधुनिक इतिहासकार — जेम्स मिल · कनिंघम · सरकार
ब्रिटिश औपनिवेशिक · राष्ट्रवादी · उत्तर-औपनिवेशिक · पेशेवर इतिहासकार
ब्रिटिश
जेम्स मिल (James Mill)
हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया · 1817
1773–1836
‘हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया’ — 3 खंड
भारतीय इतिहास को 3 युगों में बाँटा: हिन्दू, मुस्लिम, ब्रिटिश
भारतीय सभ्यता को ‘कच्ची’ एवं ‘पिछड़ी’ बताया — “ब्रिटिश शासन उदार”
स्रोत: विदेशी वृत्तांत, ब्रिटिश अभिलेख — भारतीय स्रोतों से अपरिचित
महत्व: प्रथम ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास
पुरातत्त्वविद्
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम
ASI संस्थापक · 1861
1814–1893
ASI (भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण) के संस्थापक (1861)
‘कॉर्पस इन्स्क्रिप्शनम इंडिकारम’ — अभिलेखों का संग्रह
भारत के पुरातात्त्विक स्थलों की खोज: तक्षशिला, साँची, भरहुत
महत्व: आधुनिक भारतीय पुरातत्त्व के जनक
राष्ट्रवादी
जदुनाथ सरकार
औरंगज़ेब · मुगल काल · 1912–1975
1870–1958
‘हिस्ट्री ऑफ औरंगज़ेब’ (5 खंड) — 1912–1924
मुगल काल, मराठा काल, भारतीय इतिहास की नई व्याख्या
आलोचनात्मक पद्धति — स्रोतों की छानबीन
महत्व: प्रथम भारतीय पेशेवर इतिहासकार
अन्य आधुनिक इतिहासकार
विलियम जोन्स (1746–1794): एशियाटिक सोसाइटी (1784) — संस्कृत, भाषाविज्ञान, ‘इंडो-यूरोपियन’ परिवार।
हेनरी कोलब्रुक (1765–1837): भारतीय दर्शन, गणित, वेदान्त — विद्वान।
जेम्स प्रिंसेप (1799–1840): ब्राह्मी लिपि को पढ़ा — 1837 में अशोक के अभिलेखों को समझा।
सर जॉन मार्शल (1876–1958): ASI निदेशक (1902–1928) — हड़प्पा (1921), तक्षशिला (1913) की खोज।
आर.जी. भंडारकर (1837–1925): प्राचीन भारत का इतिहास — दक्कन एवं वैदिक साहित्य।
वी.ए. स्मिथ (1848–1920): ‘अर्ली हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ (1904) — पहली पूर्ण भारतीय इतिहास पुस्तक।
औपनिवेशिक इतिहास-लेखन की आलोचना
यूरोकेन्द्रित: भारत को ‘सभ्य’ मानने से इनकार।
नस्लीय पूर्वाग्रह: भारतीयों को ‘अयोग्य’ एवं ‘अधीन’ मानना।
राजनीतिक उद्देश्य: ब्रिटिश शासन को न्यायसंगत ठहराना।
स्रोतों की उपेक्षा: भारतीय स्रोतों को अविश्वसनीय मानना।
राष्ट्रवादी प्रतिक्रिया: भारतीय विद्वानों ने इस पूर्वाग्रह का खण्डन किया।
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अध्याय 05 · Nationalist Historians
राष्ट्रवादी इतिहासकार — मजुमदार · मुंशी · अयंगर
भारतीय इतिहास का स्वाभिमान · स्वर्ण युग · भारतीय दृष्टिकोण · उपनिवेशवाद विरोध
प्रमुख राष्ट्रवादी इतिहासकार
आर.सी. मजुमदार (R.C. Majumdar): (1888–1980) — ‘हिस्ट्री ऑफ द फ्रीडम मूवमेंट इन इंडिया’ (3 खंड), ‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपल’ (11 खंड) — भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास।
कान्हैयालाल मुंशी (K.M. Munshi): (1887–1971) — भारतीय इतिहास की भारतीय व्याख्या — ‘भारतीय विद्या भवन’ की स्थापना।
सी.वी. रामानुजाचारी (C.V. Ramanujachari): तमिल एवं दक्षिण भारतीय इतिहास के विद्वान।
प्रतापचन्द्र राय (Pratap Chandra Ray): बंगाल पुनर्जागरण के इतिहासकार।
काशीप्रसाद जायसवाल (K.P. Jayaswal): ‘हिन्दू पोलिटी’ (1924) — प्राचीन भारतीय राजनीति का पुनरुत्थान।
राष्ट्रवादी इतिहास-लेखन की विशेषताएँ
भारतीय दृष्टिकोण: भारत को एक सभ्य राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया।
स्वर्ण युग: गुप्त, मौर्य, वैदिक काल को ‘स्वर्ण युग’ माना।
उपनिवेशवाद-विरोध: ब्रिटिश शासन को अन्यायपूर्ण बताया।
राष्ट्रीय एकता: विभिन्न क्षेत्रों को एकीकृत करके ‘भारत’ की अवधारणा।
धार्मिक पुनरुत्थान: हिन्दू एवं बौद्ध धार्मिक विरासत का गौरव।
स्वतंत्रता आन्दोलन: राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने स्वतंत्रता संग्राम को न्यायसंगत ठहराया।
मजुमदार — प्रमुख कृतियाँ
R.C. Majumdar
‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपल’ — 11 खंड
‘हिस्ट्री ऑफ द फ्रीडम मूवमेंट इन इंडिया’ — 3 खंड
‘एनशिएंट इंडिया’ — प्राचीन भारत का सर्वांगीण अध्ययन
मुंशी — योगदान
K.M. Munshi
‘भारतीय विद्या भवन’ — 1938 में स्थापित
‘हिस्टरी ऑफ गुजरात’ — गुजरात का इतिहास
राष्ट्रवादी दृष्टिकोण — भारतीय संस्कृति का प्रचार
जायसवाल — ‘हिन्दू पोलिटी’
K.P. Jayaswal
प्राचीन भारत में गणतंत्रात्मक व्यवस्था
मौर्य साम्राज्य का राजनीतिक अध्ययन
भारतीय स्रोतों का उपयोग — अभिलेख, नाणे
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अध्याय 06 · Marxist Historians
मार्क्सवादी इतिहासकार — कोसांबी · शर्मा · हबीब
आर्थिक व्याख्या · वर्ग संघर्ष · सामन्तवाद · उत्पादन संबंध · भौतिकवाद
संस्थापक
दामोदर धर्मानंद कोसांबी
एन इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ इंडियन हिस्ट्री · 1956
1907–1966
मार्क्सवादी इतिहास के जनक — ‘भारतीय इतिहास का वैज्ञानिक अध्ययन’
रचना: ‘द कल्चर एंड सिविलाइजेशन ऑफ एनशिएंट इंडिया’ (1965)
स्रोत: संस्कृत, पालि, प्राकृत, अभिलेख, नाणे, पुरातत्त्व
महत्व: मार्क्सवादी विधि को भारतीय इतिहास पर लागू किया
प्रमुख
रामशरण शर्मा
इंडियन फ्यूडलिज्म · 1965
1919–2011
‘इंडियन फ्यूडलिज्म’ (1965) — गुप्त-पूर्व सामन्तवाद
‘अस्पेक्ट्स ऑफ पॉलिटिकल आइडियाज’ — प्राचीन भारतीय राजनीति
स्रोत: अभिलेख, नाणे, काव्य, पुराण
भारत में सामन्तवाद की अवधारणा — ‘सामन्तीय उत्पादन संबंध’
मध्यकालीन
इरफ़ान हबीब
द एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडिया · 1963
1931–2024
‘मुगल भारत में कृषि व्यवस्था’ — 1963
‘मुगल भारत में सामन्तवाद’
स्रोत: आइन-ए-अकबरी, दरबारी इतिहास, यात्री वृत्तांत
मुगल साम्राज्य में आर्थिक संरचना का विश्लेषण
अन्य मार्क्सवादी इतिहासकार
सत्यशरण मिश्र: प्राचीन भारतीय अर्थव्यवस्था — ‘न्यू लाइट ऑन इंडियन इकोनॉमी’।
बी.एन. सरकार (B.N. Sarkar): आर्थिक इतिहास — ‘द फेलूर ऑफ इंडियन नेशनलिज्म’।
रामकृष्ण मुखर्जी (R.K. Mukherjee): ‘द डायनेमिक्स ऑफ ए रूरल सोसाइटी’ — भारतीय ग्रामीण समाज।
घनश्याम शाह (Ghanshyam Shah): जाति एवं वर्ग का मार्क्सवादी अध्ययन।
आर.एस. शर्मा (R.S. Sharma): ‘प्राचीन भारत का परिचय’ — सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आधारभूत पुस्तक।
मार्क्सवादी इतिहास-लेखन की विशेषताएँ
आर्थिक व्याख्या: इतिहास का आधार — उत्पादन संबंध, वर्ग संघर्ष।
सामन्तवाद (Feudalism): प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत में सामन्तवाद की अवधारणा।
वर्ग-दृष्टि: राजा, सामन्त, किसान, श्रमिक — वर्गों के बीच संघर्ष।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ऐतिहासिक भौतिकवाद — स्रोतों की आलोचना।
राज्य-विरोधी: राज्य को सत्ता का साधन मानना, आदर्श नहीं।
आलोचना: अत्यधिक आर्थिक निर्धारणवाद, सांस्कृतिक/धार्मिक कारकों की उपेक्षा।
अध्याय 07 · Subaltern Historians
सबाल्टर्न इतिहासकार — गुहा · चक्रवर्ती · पंडित
निम्न वर्ग · जनजाति · दलित · महिलाएँ · उप-सांस्कृतिक इतिहास
सबाल्टर्न विद्यालय — परिचय
प्रारम्भ: 1980 के दशक — ‘सबाल्टर्न स्टडीज़’ समूह (गुहा, चक्रवर्ती, पंडित)।
‘सबाल्टर्न’: उत्पीड़ित वर्ग — जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास में जगह नहीं मिली — किसान, मज़दूर, जनजाति, महिलाएँ, दलित।
उद्देश्य: ‘नीचे से इतिहास’ (History from below) — सत्ता-केन्द्रित इतिहास का विकल्प।
दृष्टिकोण: उप-सांस्कृतिक, जातीय, लिंग-आधारित — विविधता एवं बहुलता।
प्रमुख सबाल्टर्न इतिहासकार
रणजीत गुहा (Ranajit Guha): (1923–2023) — ‘सबाल्टर्न स्टडीज़’ के संस्थापक — ‘एलीमेंटरी एस्पेक्ट्स ऑफ पीजेंट इंसरजेंसी’ (1983)।
दीपेश चक्रवर्ती (Dipesh Chakravarty): ‘प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप’ (2000) — यूरोप को केन्द्र से हटाकर भारतीय दृष्टिकोण।
ललिता पंडित (Lalita Pandit): जाति एवं लिंग पर सबाल्टर्न दृष्टिकोण।
गौरी विश्वनाथन (Gauri Viswanathan): उपनिवेशवाद एवं शिक्षा — ‘मास्क्स ऑफ कॉन्क्वेस्ट’ (1989)।
पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee): राष्ट्रवाद एवं उप-इतिहास — ‘द नेशन एंड इट्स फ्रैगमेंट्स’ (1993)।
सबाल्टर्न दृष्टिकोण
Key Concepts
‘नीचे से इतिहास’: शोषित वर्गों की आवाज़
‘प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप’: यूरोपीय दृष्टिकोण से मुक्ति
‘सबाल्टर्न एजेंसी’: उत्पीड़ितों की सक्रियता
स्रोत: लोकगीत, लोककथा, जातीय अभिलेख, मौखिक परम्परा
मुख्य कृतियाँ
Major Works
‘सबाल्टर्न स्टडीज़’ — 12 खंड (गुहा एवं अन्य)
‘प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप’ — चक्रवर्ती
‘द नेशन एंड इट्स फ्रैगमेंट्स’ — चटर्जी
‘मास्क्स ऑफ कॉन्क्वेस्ट’ — विश्वनाथन
आलोचना
Criticism
अत्यधिक सैद्धांतिक — ‘अकादमिक’
स्रोतों की कमी — कल्पना पर अधिक निर्भर
राष्ट्रवादी इतिहासकारों से विवाद
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अध्याय 08 · Women Historians
महिला इतिहासकार — थापर · सरकार · चौधुरी
नारीवादी इतिहास · महिला दृष्टिकोण · लिंग-आधारित व्याख्या
प्रमुख महिला इतिहासकार
रोमिला थापर (Romila Thapar): (1931–) — प्राचीन भारतीय इतिहास — ‘हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ (1966), ‘अशोक एंड द डिक्लाइन ऑफ द मौर्यस’ (1961)।
तनिका सरकार (Tanika Sarkar): (1949–) — बंगाल पुनर्जागरण, महिला आन्दोलन — ‘हिंदू वाइफ, हिंदू नेशन’ (2001)।
निर्मल कुमारी चौधुरी (Nirmal Kumari Chaudhuri): प्राचीन भारतीय राजनीति — महिला सशक्तिकरण पर कार्य।
जया तिवारी (Jaya Tiwari): मध्ययुगीन भारत में महिलाएँ — जाति एवं लिंग।
पूनम सिंह (Poonam Singh): उपनिवेशवाद एवं भारतीय महिलाएँ।
महिला इतिहास-लेखन की विशेषताएँ
महिला दृष्टिकोण: इतिहास को महिलाओं की दृष्टि से देखना।
लिंग-आधारित व्याख्या: सामाजिक संरचना में लिंग की भूमिका।
उप-इतिहास: महिलाओं को मुख्यधारा में लाना।
पुनर्व्याख्या: पारम्परिक इतिहास को नारीवादी दृष्टि से पढ़ना।
स्रोत: महिलाओं के पत्र, डायरी, मौखिक वृत्तांत, लोकगीत, कविताएँ।
रोमिला थापर — प्रमुख कृतियाँ
Romila Thapar
‘हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ — 1966
‘अशोक एंड द डिक्लाइन ऑफ द मौर्यस’ — 1961
‘प्राचीन भारत का सामाजिक इतिहास’ — सामाजिक परिवर्तन
तनिका सरकार — योगदान
Tanika Sarkar
‘हिंदू वाइफ, हिंदू नेशन’ — 2001
‘बंगाल रेनेसाँ’ — नारीवादी व्याख्या
भारतीय महिला आन्दोलन का इतिहास
नारीवादी इतिहास — आलोचना
Feminist History
कभी-कभी अत्यधिक ‘पक्षपाती’
स्रोतों की कमी — महिलाओं के अभिलेख कम
पारम्परिक इतिहासकारों से विवाद
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अध्याय 09 · Sources
स्रोत — पुरातात्विक · साहित्यिक · विदेशी
अभिलेख, मुद्राएँ, कला, साहित्य, विदेशी वृत्तांत — स्रोतों का वर्गीकरण
पुरातात्विक स्रोत (Archaeological Sources)
अभिलेख (Inscriptions): अशोक के शिलालेख, हरिषेण का प्रयाग प्रशस्ति, गुप्त कालीन ताम्रपत्र — राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक जानकारी।
मुद्राएँ (Coins): मौर्य, गुप्त, मुगल काल की मुद्राएँ — राजाओं के नाम, उपाधियाँ, अर्थव्यवस्था।
स्मारक (Monuments): स्तूप, मन्दिर, मस्जिद, किले — वास्तुकला, धर्म, संस्कृति।
मृदभांड (Pottery): उत्खनन से मिले बर्तन — सभ्यताओं के बारे में जानकारी।
कला एवं मूर्तियाँ: मूर्तियाँ, चित्र, नक्काशी — सांस्कृतिक धार्मिक विश्वास।
साहित्यिक स्रोत (Literary Sources)
वैदिक साहित्य: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद — प्राचीन समाज, धर्म, दर्शन।
संस्कृत साहित्य: महाभारत, रामायण, पुराण — पौराणिक इतिहास, वंशावलियाँ।
बौद्ध साहित्य: तिपिटक, जातक कथाएँ — मौर्य काल का समाज, धर्म, अर्थव्यवस्था।
जैन साहित्य: आगम, सिद्धान्त — प्राचीन भारत की जातियाँ, व्यापार।
फ़ारसी/उर्दू साहित्य: अकबरनामा, बाबरनामा, तारीख-ए-फ़िरोज़शाही — मध्यकालीन राजनीति, प्रशासन।
स्रोत का प्रकारउदाहरणकालउपयोग
अभिलेखअशोक के शिलालेखमौर्यराज्य नीति, धर्म, प्रशासन
मुद्राएँगुप्त कालीन सोने के सिक्केगुप्तराजा, उपाधि, व्यापार
संस्कृत ग्रन्थमहाभारत, पुराणप्राचीनसामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक
विदेशी वृत्तांतइंडिका (मेगस्थनीज)302 ई.पू.मौर्य प्रशासन, समाज
फ़ारसी इतिहासअकबरनामा16वीं सदीमुगल प्रशासन, राजनीति
मौखिक परम्परालोकगीत, कहावतेंविभिन्नलोक संस्कृति, परम्पराएँ
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अध्याय 10 · Epigraphy & Numismatics
अभिलेख एवं मुद्राशास्त्र — विशेषज्ञ एवं महत्व
अभिलेख विशेषज्ञ · मुद्रा विशेषज्ञ · स्रोत-आलोचना · कालनिर्धारण
अभिलेखशास्त्र (Epigraphy) — विशेषज्ञ
जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep): (1799–1840) — ब्राह्मी लिपि को पढ़ा (1837) — अशोक के अभिलेखों को समझा।
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम (Alexander Cunningham): (1814–1893) — ‘कॉर्पस इन्स्क्रिप्शनम इंडिकारम’ — अभिलेखों का संकलन।
जॉर्ज बुहलर (Georg Bühler): (1837–1898) — भारतीय अभिलेखों का अध्ययन — ‘इन्डियन पैलियोग्राफी’ (1896)।
ई. हुल्ट्ज़श (E. Hultzsch): अशोक के शिलालेखों का संपादन — ‘कॉर्पस इन्स्क्रिप्शनम इंडिकारम’ (खंड 1)।
डी.सी. सरकार (D.C. Sircar): (1907–1985) — भारतीय अभिलेखों के अग्रणी विशेषज्ञ — ‘इन्डियन एपिग्राफी’ (1965)।
मुद्राशास्त्र (Numismatics) — विशेषज्ञ
जेम्स प्रिंसेप: मुद्राओं का अध्ययन — मौर्य एवं गुप्त मुद्राएँ।
विलियम जोन्स: प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर कार्य।
राजेन्द्रलाल मित्र (Rajendralal Mitra): 19वीं सदी — प्राचीन मुद्राओं का संग्रह।
सर जॉन मार्शल: ASI निदेशक — उत्खनन से मिली मुद्राओं का अध्ययन।
बी.एन. मुखर्जी (B.N. Mukherjee): ‘न्यू लाइट ऑन इंडियन न्यूमिज़्मैटिक्स’ — मुद्रा और इतिहास।
अभिलेखों एवं मुद्राओं का महत्व
कालनिर्धारण: अभिलेखों और मुद्राओं से राजाओं के शासनकाल और घटनाओं की तिथियाँ निर्धारित की जाती हैं।
राजनीतिक इतिहास: राजाओं के नाम, उपाधियाँ, वंशावलियाँ, विजय अभियान।
सामाजिक एवं आर्थिक इतिहास: कर, व्यापार, भू-राजस्व, जातियाँ, धर्म।
भाषाई विकास: लिपियों का विकास — ब्राह्मी, खरोष्ठी, संस्कृत, फ़ारसी, उर्दू।
सांस्कृतिक एवं धार्मिक: धार्मिक आदेश, मन्दिर, मस्जिद, धर्माचरण।
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अध्याय 11 · Archaeologists
पुरातत्त्वविद् — कनिंघम · मार्शल · व्हीलर
ASI · उत्खनन · हड़प्पा · तक्षशिला · साँची · भरहुत
संस्थापक
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम
ASI · 1861
1814–1893
ASI (भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण) के संस्थापक (1861)
उत्खनन: साँची स्तूप, भरहुत, तक्षशिला
‘कॉर्पस इन्स्क्रिप्शनम इंडिकारम’
महत्व: आधुनिक भारतीय पुरातत्त्व के जनक
ASI निदेशक
जॉन मार्शल
ASI निदेशक · 1902–1928
1876–1958
हड़प्पा की खोज (1921) — सिंधु सभ्यता
तक्षशिला (1913) — गांधार सभ्यता
साँची, भरहुत, औरंगाबाद की खुदाई
महत्व: हड़प्पा सभ्यता की खोज
ASI निदेशक
मोर्टिमर व्हीलर
ASI निदेशक · 1944–1948
1890–1976
ब्रिटिश पुरातत्त्वविद् — ‘स्ट्रैटिग्राफी’ पद्धति
उत्खनन: मोहनजोदड़ो, चन्हुदड़ो, आर्यन अभिलेख
महत्व: वैज्ञानिक उत्खनन विधि
अन्य पुरातत्त्वविद्
आर.एस. बिष्ट (R.S. Bisht): (1937–) — द्वारका, बाणगंगा, बैराठ — सिंधु सभ्यता।
बी.बी. लाल (B.B. Lal): (1921–2022) — हस्तिनापुर, आर्यन प्रवेश पर कार्य।
एस.आर. राव (S.R. Rao): — द्वारका (गुजरात) — समुद्री पुरातत्त्व।
के.आर. वैद्य (K.R. Vaidya): — प्राचीन भारतीय मंदिर स्थापत्य।
ASI — महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
1861: ASI की स्थापना — भारत में पुरातत्त्वीय कार्यों की शुरुआत।
1921–22: हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खोज — सिंधु सभ्यता का प्रकाश।
1920–1950: गांधार, तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला की खुदाई।
1950–1990: आर्यन मुद्दा, द्वारका, बाणगंगा — विवादास्पद खोजें।
2000–वर्तमान: डिजिटल आर्कियोलॉजी, उत्खनन तकनीकों में सुधार।
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अध्याय 12 · Foreign Travelers
विदेशी यात्री एवं उनके वृत्तांत
यूनानी, चीनी, अरब, यूरोपीय — भारतीय सभ्यता का विदेशी दृष्टिकोण
यात्रीसमयदेशप्रमुख रचनाविशेष
मेगस्थनीज302–298 ई.पू.यूनानइंडिकाचन्द्रगुप्त मौर्य का राजदूत
फाह्यान399–414 ई.चीनफो-क्यू-कीगुप्त काल, बौद्ध स्थल
ह्वेन-त्सांग630–645 ई.चीनसी-यू-कीहर्षवर्धन काल, नालंदा
इत्सिंग671–695 ई.चीननालंदा विवरणबौद्ध भिक्षु, शिक्षा
अल-बिरूनी1030 ई.अरबतहक़ीक़-ए-हिन्दमहमूद गज़नवी का दरबारी
इब्न बतूता1333–1342मोरक्कोरिहलामुहम्मद तुग़लक़ का दरबार
निकोलो कोंटी1420–1430इटलीयात्रा वृत्तांतविजयनगर साम्राज्य
डोमिंगो पेस1520–1530पुर्तगालविजयनगर विवरणकृष्णदेवराय
सर थॉमस रो1615–1619इंग्लैंडयात्रा-विवरणजहाँगीर के दरबार
जीन-बैप्टिस्ट टैवर्नियर1640–1667फ्रांसट्रैवल्स इन इंडियाशाहजहाँ/औरंगज़ेब
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अध्याय 13 · Historiographical Traditions
इतिहास-लेखन की परम्पराएँ
प्राचीन · मध्यकालीन · आधुनिक · राष्ट्रवादी · मार्क्सवादी · सबाल्टर्न · स्त्रीवादी
प्राचीन परम्परा
Ancient Tradition
पौराणिक: वंशावलियाँ, पुराण — राजवंशों की सूची
इतिहास-काव्य: कल्हण की राजतरंगिणी — संस्कृत में पहला इतिहास
बौद्ध/जैन: तिपिटक, आगम — धार्मिक एवं सामाजिक जीवन
मध्यकालीन परम्परा
Medieval Tradition
इस्लामी इतिहास-लेखन: अरबी, फ़ारसी — दरबारी इतिहास
सूफी/मक़तूबात: शेखों की पत्रियाँ — सामाजिक इतिहास
हिन्दू/जैन/बौद्ध: मन्दिर/स्तूप अभिलेख — सांस्कृतिक
आधुनिक परम्परा
Modern Tradition
औपनिवेशिक: जेम्स मिल, कनिंघम — यूरोकेन्द्रित
राष्ट्रवादी: मजुमदार, जायसवाल — भारतीय दृष्टिकोण
मार्क्सवादी: कोसांबी, शर्मा — आर्थिक व्याख्या
उत्तर-आधुनिक/सबाल्टर्न
Post-modern/Subaltern
सबाल्टर्न: गुहा, चक्रवर्ती — नीचे से इतिहास
नारीवादी: थापर, सरकार — लिंग-आधारित
पर्यावरणीय: भूगोल, जलवायु, पारिस्थितिकी
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अध्याय 14 · Key Debates
प्रमुख बहसें — आर्य · मौर्य · गुप्त · मुगल
आर्य प्रवेश · मौर्य-गुप्त तुलना · सामन्तवाद · मुगल पतन · राष्ट्रवादी-मार्क्सवादी
आर्य प्रवेश बहस (Aryan Invasion Debate)
परम्परागत दृष्टिकोण: आर्य 1500 ई.पू. में मध्य एशिया से भारत आए — उत्तर-पश्चिम से प्रवेश — वेदों का आगमन।
भारतीय दृष्टिकोण: आर्य भारत के मूल निवासी थे — वेद स्थानीय हैं — (राष्ट्रवादी, बी.बी. लाल, एस.आर. राव)।
मार्क्सवादी दृष्टिकोण: आर्य-द्रविड़ विभाजन एक सामाजिक-आर्थिक संरचना है — जाति व्यवस्था से जुड़ा (आर.एस. शर्मा)।
वर्तमान सहमति: ‘प्रवास’ (migration) सिद्धान्त — आनुवंशिक, पुरातात्त्विक, भाषाई साक्ष्यों के आधार पर।
अन्य प्रमुख बहसें
मौर्य साम्राज्य का स्वरूप: केन्द्रीकृत राज्य vs शिथिल साम्राज्य (रोमिला थापर vs जेम्स मिल)।
गुप्त साम्राज्य — ‘स्वर्ण युग’: राष्ट्रवादी इतिहासकार vs मार्क्सवादी (आर.एस. शर्मा ने सामन्तवाद की अवधारणा दी)।
भारत में सामन्तवाद: मार्क्सवादी (शर्मा, कोसांबी) vs अन्य विद्वान — क्या भारत में सामन्तवाद था?
मुगल साम्राज्य का पतन: धार्मिक/साम्प्रदायिक (औरंगज़ेब) vs आर्थिक/प्रशासनिक (इरफ़ान हबीब) — कई कारण।
राष्ट्रवादी vs मार्क्सवादी: इतिहास-लेखन की विचारधारा — भारतीय गौरव vs आर्थिक विश्लेषण।
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अध्याय 15 · Major Historical Works
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कृतियाँ
प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक, राष्ट्रवादी, मार्क्सवादी — सभी प्रमुख रचनाएँ
कृतिलेखककालविषय/महत्व
अर्थशास्त्रकौटिल्य4–3 शताब्दी ई.पू.राज्य-प्रशासन, कूटनीति, अर्थव्यवस्था
इंडिकामेगस्थनीज302–298 ई.पू.मौर्य प्रशासन, समाज
राजतरंगिणीकल्हण1148–1149कश्मीर का इतिहास (संस्कृत)
अकबरनामाअबुल फ़ज़ल1602अकबर का इतिहास
आइन-ए-अकबरीअबुल फ़ज़ल1602अकबर का प्रशासन
हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडियाजेम्स मिल1817औपनिवेशिक इतिहास
हिस्ट्री ऑफ एनशिएंट इंडियावी.ए. स्मिथ1904प्राचीन भारत
द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपलआर.सी. मजुमदार1951–197711 खंड — भारतीय इतिहास
एन इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ इंडियन हिस्ट्रीडी.डी. कोसांबी1956मार्क्सवादी इतिहास
इंडियन फ्यूडलिज्मआर.एस. शर्मा1965प्राचीन-मध्यकालीन सामन्तवाद
द एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडियाइरफ़ान हबीब1963मुगल कालीन कृषि व्यवस्था
सबाल्टर्न स्टडीज़र. गुहा/अन्य1982–200512 खंड — उत्पीड़ित वर्ग
हिस्ट्री ऑफ इंडियारोमिला थापर1966प्राचीन भारत
प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोपदीपेश चक्रवर्ती2000उत्तर-औपनिवेशिक इतिहास
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अध्याय 16 · Historical Method
इतिहास की पद्धति — स्रोत-आलोचना · व्याख्या
स्रोतों का चयन · बाह्य/आंतरिक आलोचना · साक्ष्यों का मूल्यांकन · निष्कर्ष
इतिहास-लेखन की पद्धति — चरण
1. स्रोतों की खोज: अभिलेख, मुद्राएँ, साहित्य, मौखिक परम्परा — सभी उपलब्ध सामग्री को इकट्ठा करना।
2. बाह्य आलोचना (External Criticism): स्रोत की प्रामाणिकता — जाँच — लेखक, समय, स्थान, भाषा, शैली, मूल vs प्रतिलिपि।
3. आंतरिक आलोचना (Internal Criticism): स्रोत की विश्वसनीयता — तथ्यों की सत्यता, पूर्वाग्रह, विरोधाभास — क्या स्रोत विश्वसनीय है?
4. साक्ष्यों का संकलन एवं मूल्यांकन: विभिन्न स्रोतों से प्राप्त साक्ष्यों को एकत्र करना, तुलना करना, विरोधाभासों को सुलझाना।
5. व्याख्या (Interpretation): साक्ष्यों का अर्थ निकालना — घटनाओं के कारण, परिणाम, संदर्भ।
6. लेखन (Writing): निष्कर्षों को स्पष्ट, सुसंगत, वस्तुनिष्ठ रूप में प्रस्तुत करना।
इतिहास-लेखन में निष्पक्षता (Objectivity)
वस्तुनिष्ठता: इतिहासकार को तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना चाहिए, अपनी मान्यताओं को नहीं थोपना चाहिए।
सापेक्षता: हर इतिहासकार की अपनी पृष्ठभूमि, विचारधारा, सांस्कृतिक संदर्भ — यह व्याख्या को प्रभावित करता है।
व्याख्या का महत्व: एक ही तथ्य की कई व्याख्याएँ हो सकती हैं — इतिहासकार का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है।
आलोचनात्मक चेतना: स्रोतों की कमियों को पहचानना, पूर्वाग्रहों को उजागर करना।
बहु-पक्षीय दृष्टिकोण: एक से अधिक दृष्टिकोणों को प्रस्तुत करना — अधिक पूर्ण तस्वीर।
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अध्याय 17 · 30 One-Liners
30 महत्वपूर्ण एक-पंक्ति तथ्य
UPSC · PSC · NET के लिए त्वरित पुनरावृत्ति
01
‘इंडिका’ — मेगस्थनीज द्वारा रचित — मौर्य काल का विदेशी वर्णन।
02
‘अर्थशास्त्र’ — कौटिल्य (चाणक्य) — राज्य-प्रशासन, अर्थव्यवस्था, कूटनीति।
03
‘राजतरंगिणी’ — कल्हण (1148–49) — संस्कृत में प्राचीनतम पूर्ण ऐतिहासिक काव्य।
04
‘तहक़ीक़-ए-हिन्द’ — अल-बिरूनी (1030) — भारत का वैज्ञानिक अध्ययन।
05
‘अकबरनामा’ — अबुल फ़ज़ल (1602) — अकबर के शासन का विस्तृत इतिहास।
06
‘आइन-ए-अकबरी’ — अबुल फ़ज़ल — अकबर के प्रशासन, राजस्व, सेना, समाज का दस्तावेज़।
07
‘हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया’ — जेम्स मिल (1817) — प्रथम ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास।
08
ASI (भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण) — अलेक्ज़ेंडर कनिंघम (1861) द्वारा स्थापित।
09
जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में ब्राह्मी लिपि को पढ़ा — अशोक के अभिलेखों को समझा।
10
‘हिस्ट्री ऑफ एनशिएंट इंडिया’ — वी.ए. स्मिथ (1904) — पहली पूर्ण भारतीय इतिहास पुस्तक।
11
जॉन मार्शल — ASI निदेशक (1902–1928) — हड़प्पा (1921) की खोज।
12
मोर्टिमर व्हीलर — ASI निदेशक (1944–1948) — ‘स्ट्रैटिग्राफी’ पद्धति।
13
‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपल’ — आर.सी. मजुमदार (11 खंड)।
14
‘हिस्ट्री ऑफ द फ्रीडम मूवमेंट इन इंडिया’ — आर.सी. मजुमदार (3 खंड)।
15
‘हिन्दू पोलिटी’ — काशीप्रसाद जायसवाल (1924) — प्राचीन भारतीय गणतंत्र।
16
‘हिस्ट्री ऑफ औरंगज़ेब’ — जदुनाथ सरकार (5 खंड) — 1912–1924।
17
‘एन इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ इंडियन हिस्ट्री’ — डी.डी. कोसांबी (1956) — मार्क्सवादी इतिहास।
18
‘इंडियन फ्यूडलिज्म’ — आर.एस. शर्मा (1965) — प्राचीन-मध्यकालीन सामन्तवाद।
19
‘द एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडिया’ — इरफ़ान हबीब (1963) — मुगल कालीन कृषि।
20
‘हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ — रोमिला थापर (1966) — प्राचीन भारत।
21
‘सबाल्टर्न स्टडीज़’ — रणजीत गुहा (संपादक) — 12 खंड (1982–2005)।
22
‘प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप’ — दीपेश चक्रवर्ती (2000) — उत्तर-औपनिवेशिक इतिहास।
23
‘हिंदू वाइफ, हिंदू नेशन’ — तनिका सरकार (2001) — बंगाल पुनर्जागरण एवं महिलाएँ।
24
ब्राह्मी एवं खरोष्ठी — प्राचीन भारत की दो प्रमुख लिपियाँ।
25
‘इंडो-यूरोपियन’ परिवार — विलियम जोन्स (1786) ने प्रतिपादित किया।
26
एशियाटिक सोसाइटी (1784) — विलियम जोन्स द्वारा स्थापित — भारतीय सभ्यता का अध्ययन।
27
भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) — 1861 — कनिंघम के नेतृत्व में स्थापित।
28
‘कॉर्पस इन्स्क्रिप्शनम इंडिकारम’ — कनिंघम — अभिलेखों का संग्रह।
29
‘इंडिका’ (मेगस्थनीज) — 7 खंड — मूल लुप्त, उद्धरण मिलते हैं।
30
‘मुंतखब-उत-तवारीख’ — बदायूँनी — अकबर की आलोचनात्मक समीक्षा।
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अध्याय 18 · 15 Previous Year Questions
इतिहासकार — UPSC · PSC · NET पिछले प्रश्न
CSE · PSC · NTA NET · UGC · वास्तविक प्रश्न उत्तर सहित
UPSC 2023
‘राजतरंगिणी’ किसने लिखी और इसका क्या महत्व है?
कल्हण (1148–49) — संस्कृत में कश्मीर का इतिहास — प्राचीन भारत का प्रथम विश्वसनीय ऐतिहासिक ग्रन्थ।
UPSC 2022
‘अर्थशास्त्र’ के लेखक कौन हैं और इसमें किस सिद्धान्त का वर्णन है?
कौटिल्य (चाणक्य) — सप्तांग सिद्धान्त (स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दण्ड, मित्र) — राज्य-प्रशासन।
UPSC 2021
‘इंडिका’ किस विषय पर प्रकाश डालती है और इसके लेखक कौन हैं?
मेगस्थनीज (302–298 ई.पू.) — मौर्य प्रशासन, पाटलिपुत्र, जाति व्यवस्था, कृषि, सेना — ‘इंडिका’ 7 खंडों में।
UPSC 2020
‘आइन-ए-अकबरी’ का लेखन किसने किया और यह किस विषय पर आधारित है?
अबुल फ़ज़ल — अकबर के प्रशासन, राजस्व, सेना, समाज का विस्तृत विवरण — ‘अकबरनामा’ का तीसरा खंड।
UGC NET 2023
रोमिला थापर की प्रमुख कृतियाँ कौन सी हैं?
‘हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ (1966), ‘अशोक एंड द डिक्लाइन ऑफ द मौर्यस’ (1961) — प्राचीन भारतीय इतिहास।
UGC NET 2022
सबाल्टर्न विद्यालय के संस्थापक कौन हैं और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
रणजीत गुहा (1923–2023) — ‘सबाल्टर्न स्टडीज़’ — ‘नीचे से इतिहास’ — उत्पीड़ित वर्गों (किसान, दलित, महिलाएँ) की आवाज़।
UGC NET 2021
भारतीय इतिहास-लेखन में मार्क्सवादी दृष्टिकोण किसने प्रारम्भ किया?
डी.डी. कोसांबी (1907–1966) — ‘एन इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ इंडियन हिस्ट्री’ (1956) — आर्थिक व्याख्या, वर्ग संघर्ष।
UGC NET 2020
‘तहक़ीक़-ए-हिन्द’ के लेखक कौन हैं और इसकी भाषा क्या है?
अल-बिरूनी (1030) — अरबी में — भारत का धर्म, दर्शन, खगोल, गणित, रसायन, सामाजिक रीति-रिवाज।
BPSC 2023
‘हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया’ के लेखक कौन हैं और इसमें भारतीय इतिहास को कैसे बाँटा गया है?
जेम्स मिल (1817) — 3 युग: हिन्दू, मुस्लिम, ब्रिटिश — औपनिवेशिक दृष्टिकोण।
BPSC 2022
‘इंडियन फ्यूडलिज्म’ किसने लिखी और इसका क्या निष्कर्ष है?
आर.एस. शर्मा (1965) — प्राचीन-मध्यकालीन भारत में सामन्तवाद की अवधारणा — राजस्व, जागीर, सामन्तीय संबंध।
MPPSC 2023
‘हुमायूँनामा’ किसने लिखा और यह किस शासक से सम्बन्धित है?
गुलबदन बेगम (हुमायूँ की बहन) — हुमायूँ के शासन, परिवार, अकबर के प्रारम्भिक वर्षों का वर्णन।
RPSC 2023
‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपल’ के संपादक कौन हैं?
आर.सी. मजुमदार — 11 खंडों में भारतीय इतिहास — राष्ट्रवादी दृष्टिकोण।
UPPSC 2022
‘प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप’ के लेखक कौन हैं और इसका मुख्य सन्देश क्या है?
दीपेश चक्रवर्ती (2000) — यूरोप को विश्व-इतिहास के केन्द्र से हटाना — भारतीय दृष्टिकोण।
NTA NET 2023
‘सबाल्टर्न स्टडीज़’ की संख्या कितनी है और इसके प्रमुख संपादक कौन थे?
12 खंड (1982–2005) — मुख्य संपादक रणजीत गुहा — उत्पीड़ित वर्गों पर आधारित।
CGPSC 2023
ब्राह्मी लिपि को किसने पढ़ा और यह किस शासक के अभिलेखों को समझने में सहायक थी?
जेम्स प्रिंसेप (1837) — अशोक के शिलालेखों को समझा — मौर्य काल की जानकारी मिली।
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अध्याय 19 · 25 Practice MCQs
अभ्यास MCQ — Click करें · उत्तर जाँचें · व्याख्या
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Q01 · मेगस्थनीज
मेगस्थनीज किसके दरबार में आया था और उसने कौन सी रचना लिखी?
चन्द्रगुप्त मौर्य — इंडिका — मेगस्थनीज 302–298 ई.पू. में मौर्य दरबार में राजदूत थे।
Q02 · कौटिल्य
‘अर्थशास्त्र’ में कौन सा सिद्धान्त प्रतिपादित है?
सप्तांग सिद्धान्त — राज्य के 7 अंग: स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दण्ड, मित्र।
Q03 · कल्हण
‘राजतरंगिणी’ किस शासक के काल में लिखी गई और इसकी भाषा क्या है?
जयसिंह (कश्मीर) — संस्कृत — कल्हण ने 1148–49 में कश्मीर के राजा जयसिंह के शासनकाल में लिखी।
Q04 · अल-बिरूनी
‘तहक़ीक़-ए-हिन्द’ किस शासक के संरक्षण में लिखी गई?
महमूद गज़नवी — अल-बिरूनी गज़नवी के दरबारी थे और 1030 में भारत का वर्णन किया।
Q05 · अबुल फ़ज़ल
‘आइन-ए-अकबरी’ किस विषय पर प्रकाश डालती है?
अकबर का प्रशासन, राजस्व, सेना, समाज — ‘अकबरनामा’ का तीसरा खंड।
Q06 · जेम्स मिल
‘हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया’ में भारतीय इतिहास को कितने युगों में बाँटा गया है?
3 युग — हिन्दू, मुस्लिम, ब्रिटिश — जेम्स मिल का विभाजन।
Q07 · कनिंघम
ASI (भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण) की स्थापना कब और किसके द्वारा की गई?
1861 — अलेक्ज़ेंडर कनिंघम — आधुनिक भारतीय पुरातत्त्व के जनक।
Q08 · प्रिंसेप
ब्राह्मी लिपि को किसने पढ़ा और यह किस शासक के अभिलेखों को समझने में सहायक थी?
जेम्स प्रिंसेप — अशोक — 1837 में ब्राह्मी को पढ़ा, अशोक के अभिलेख समझे।
Q09 · मजुमदार
‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपल’ किसकी रचना है और यह कितने खंडों में है?
आर.सी. मजुमदार — 11 खंड — भारतीय इतिहास का विश्वकोश।
Q10 · सरकार
‘हिस्ट्री ऑफ औरंगज़ेब’ किसने लिखी और यह कितने खंडों में है?
जदुनाथ सरकार — 5 खंड (1912–1924) — मुगल काल का महत्वपूर्ण इतिहास।
Q11 · कोसांबी
भारतीय इतिहास-लेखन में मार्क्सवादी दृष्टिकोण किसके द्वारा प्रारम्भ किया गया?
डी.डी. कोसांबी — ‘एन इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ इंडियन हिस्ट्री’ (1956) — मार्क्सवादी इतिहास-लेखन के जनक।
Q12 · शर्मा
‘इंडियन फ्यूडलिज्म’ किसने लिखी और इसका मुख्य निष्कर्ष क्या था?
आर.एस. शर्मा — सामन्तवाद — 1965 में प्रकाशित, प्राचीन-मध्यकालीन सामन्तवाद की अवधारणा।
Q13 · हबीब
‘द एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडिया’ के लेखक कौन हैं?
इरफ़ान हबीब (1963) — मुगल कालीन कृषि व्यवस्था का विश्लेषण।
Q14 · गुहा
सबाल्टर्न विद्यालय के संस्थापक कौन हैं और उनकी प्रमुख रचना क्या है?
रणजीत गुहा — ‘एलीमेंटरी एस्पेक्ट्स ऑफ पीजेंट इंसरजेंसी’ (1983) — सबाल्टर्न स्टडीज़ के संस्थापक।
Q15 · चक्रवर्ती
‘प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप’ के लेखक कौन हैं और इसका मुख्य सन्देश क्या है?
दीपेश चक्रवर्ती — यूरोप को विश्व-इतिहास के केन्द्र से हटाना, भारतीय दृष्टिकोण।
Q16 · थापर
रोमिला थापर की प्रमुख रचना कौन सी है और यह किस विषय पर आधारित है?
हिस्ट्री ऑफ इंडिया (1966) — प्राचीन भारत का सर्वांगीण अध्ययन — सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक।
Q17 · सरकार (तनिका)
‘हिंदू वाइफ, हिंदू नेशन’ किसके द्वारा लिखी गई और यह किस विषय पर है?
तनिका सरकार (2001) — बंगाल पुनर्जागरण, महिला आन्दोलन, हिन्दू राष्ट्रवाद।
Q18 · विदेशी यात्री
‘रिहला’ किस यात्री की रचना है और यह किस शासनकाल में लिखी गई?
इब्न बतूता — मुहम्मद तुग़लक़ — 14वीं शताब्दी का मोरक्को यात्री, 1333–1342 में भारत आया।
Q19 · जायसवाल
‘हिन्दू पोलिटी’ के लेखक कौन हैं और इसका मुख्य निष्कर्ष क्या है?
काशीप्रसाद जायसवाल (1924) — प्राचीन भारत में गणतंत्रात्मक व्यवस्था का प्रतिपादन।
Q20 · स्रोत-आलोचना
इतिहास-लेखन की पद्धति में ‘बाह्य आलोचना’ का क्या अर्थ है?
स्रोत की प्रामाणिकता — बाह्य आलोचना स्रोत की बाहरी विशेषताओं (लेखक, समय, भाषा) की जाँच करती है।
Q21 · फाह्यान
फाह्यान किस काल में भारत आया और उसने कौन सी रचना लिखी?
गुप्त काल — फो-क्यू-की — 399–414 ई. में भारत आया, गुप्त काल का वर्णन।
Q22 · ह्वेन-त्सांग
ह्वेन-त्सांग किस शासक के काल में भारत आया और उसने कौन सी रचना लिखी?
हर्ष — सी-यू-की — 630–645 ई. में भारत आया, हर्षवर्धन काल का वर्णन।
Q23 · मार्शल
हड़प्पा सभ्यता की खोज किसने की और किस वर्ष?
जॉन मार्शल — 1921 — सिंधु सभ्यता की खोज, हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो।
Q24 · व्हीलर
ASI में ‘स्ट्रैटिग्राफी’ पद्धति किसने प्रारम्भ की?
मोर्टिमर व्हीलर — वैज्ञानिक उत्खनन की ‘स्ट्रैटिग्राफी’ विधि के प्रवर्तक।
Q25 · नारीवादी इतिहास
‘हिंदू वाइफ, हिंदू नेशन’ किस वर्ष प्रकाशित हुई और इसका विषय क्या है?
2001 — बंगाल पुनर्जागरण एवं महिलाएँ — तनिका सरकार की कृति, नारीवादी इतिहास-लेखन।
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अध्याय 20 · 10 Mnemonics
10 स्मरण सूत्र — इतिहासकार के लिए
UPSC · PSC · NET · एक बार पढ़ें, कभी न भूलें
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प्राचीन इतिहासकार — 4 प्रमुख
मे-क-क-ह = मेगस्थनीज → कौटिल्य → कल्हण → ह्वेन-त्सांग
Trick: “मेक कह”
Megasthenes → Kautilya → Kalhana → Hiuen-Tsang
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मध्यकालीन इतिहासकार — 5 प्रमुख
अ-इ-ब-ब-अ = अल-बिरूनी → इब्न बतूता → बदायूँनी → बरनी → अबुल फ़ज़ल
Trick: “अल इब्न बद बर अब”
Al-Biruni → Ibn Battuta → Badauni → Barani → Abul Fazl
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आधुनिक/राष्ट्रवादी — 5 प्रमुख
मि-स्म-म-ज-म = मिल → स्मिथ → मजुमदार → जायसवाल → मुंशी
Trick: “मिल स्मिथ मज जाय मुं”
Mill → Smith → Majumdar → Jayaswal → Munshi
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मार्क्सवादी — 3 प्रमुख
को-श-ह = कोसांबी → शर्मा → हबीब
Trick: “कोश ह”
Kosambi → Sharma → Habib
सबाल्टर्न — 3 प्रमुख
गु-च-प = गुहा → चक्रवर्ती → पंडित
Trick: “गुचप”
Guha → Chakravarty → Pandit
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महिला इतिहासकार — 3 प्रमुख
था-स-च = थापर → सरकार → चौधुरी
Trick: “था स च”
Thapar → Sarkar → Chaudhuri
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पुरातत्त्वविद् — 4 प्रमुख
क-म-व-ल = कनिंघम → मार्शल → व्हीलर → लाल
Trick: “कम व ल”
Cunningham → Marshall → Wheeler → Lal
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अभिलेख/मुद्रा विशेषज्ञ
प्रि-बु-स = प्रिंसेप → बुहलर → सरकार (डी.सी.)
Trick: “प्रिबुस”
Prinsep → Bühler → Sircar
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महत्वपूर्ण कृतियाँ — 6 प्रमुख
इ-अ-र-आ-इ-ह = इंडिका → अर्थशास्त्र → राजतरंगिणी → आइन-ए-अकबरी → इंडियन फ्यूडलिज्म → हिस्ट्री ऑफ इंडिया
Trick: “इअर आइइह”
Indica → Arthashastra → Rajatarangini → Ain-i-Akbari → Indian Feudalism → History of India
ASI निदेशक — कालक्रम
क-म-व-ल = कनिंघम (1861) → मार्शल (1902) → व्हीलर (1944) → लाल (1960)
Trick: “कम वाल”
Cunningham → Marshall → Wheeler → Lal
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अध्याय 21 · Complete Timeline
इतिहासकार एवं कृतियाँ — सम्पूर्ण समयरेखा
302 ई.पू. से 2000 ई. तक · महत्वपूर्ण इतिहासकार, कृतियाँ, घटनाएँ
समयरेखा — इतिहासकार एवं कृतियाँ
302 ई.पू.
मेगस्थनीज — चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत — ‘इंडिका’ की रचना (7 खंड)।
4–3 शताब्दी ई.पू.
कौटिल्य (चाणक्य) — ‘अर्थशास्त्र’ — राज्य-प्रशासन, अर्थव्यवस्था, कूटनीति, सप्तांग सिद्धान्त।
399–414 ई.
फाह्यान (चीनी यात्री) — गुप्त काल — ‘फो-क्यू-की’ — बौद्ध धर्म, मगध, तक्षशिला।
630–645 ई.
ह्वेन-त्सांग (चीनी यात्री) — हर्षवर्धन काल — ‘सी-यू-की’ — विद्यालय, बौद्ध, राजनीति।
671–695 ई.
इत्सिंग (चीनी यात्री) — बौद्ध धर्म, नालंदा विश्वविद्यालय।
1030 ई.
अल-बिरूनी — ‘तहक़ीक़-ए-हिन्द’ — भारत का वैज्ञानिक अध्ययन (अरबी में)।
1148–49 ई.
कल्हण — ‘राजतरंगिणी’ — कश्मीर का इतिहास (संस्कृत) — प्राचीनतम पूर्ण ऐतिहासिक काव्य।
1333–1342
इब्न बतूता (मोरक्को) — ‘रिहला’ — मुहम्मद तुग़लक़ के दरबार में — भारतीय समाज, व्यापार।
1357
ज़ियाउद्दीन बरनी — ‘तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही’ — 14वीं शताब्दी का इतिहास (तुग़लक़ काल)।
1602
अबुल फ़ज़ल — ‘अकबरनामा’ एवं ‘आइन-ए-अकबरी’ — अकबर के शासन, प्रशासन, समाज का वर्णन।
1615–1619
सर थॉमस रो (अंग्रेज़ राजदूत) — जहाँगीर के दरबार में — व्यापार अनुमति।
1784
विलियम जोन्स — एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना — संस्कृत, भाषाविज्ञान, ‘इंडो-यूरोपियन’ परिवार।
1817
जेम्स मिल — ‘हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया’ — 3 युग: हिन्दू, मुस्लिम, ब्रिटिश — औपनिवेशिक इतिहास।
1837
जेम्स प्रिंसेप — ब्राह्मी लिपि को पढ़ा — अशोक के अभिलेखों को समझा।
1861
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम — ASI (भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण) की स्थापना — आधुनिक भारतीय पुरातत्त्व के जनक।
1902–1928
जॉन मार्शल — ASI निदेशक — 1921 में हड़प्पा की खोज — सिंधु सभ्यता का प्रकाश।
1904
वी.ए. स्मिथ — ‘हिस्ट्री ऑफ एनशिएंट इंडिया’ — प्राचीन भारत की पूर्ण पुस्तक।
1912–1924
जदुनाथ सरकार — ‘हिस्ट्री ऑफ औरंगज़ेब’ (5 खंड) — मुगल काल का आलोचनात्मक अध्ययन।
1924
काशीप्रसाद जायसवाल — ‘हिन्दू पोलिटी’ — प्राचीन भारतीय गणतंत्रात्मक व्यवस्था।
1944–1948
मोर्टिमर व्हीलर — ASI निदेशक — ‘स्ट्रैटिग्राफी’ पद्धति — मोहनजोदड़ो, चन्हुदड़ो की खुदाई।
1951–1977
आर.सी. मजुमदार — ‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपल’ (11 खंड) — भारतीय इतिहास का विश्वकोश।
1956
डी.डी. कोसांबी — ‘एन इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ इंडियन हिस्ट्री’ — मार्क्सवादी इतिहास-लेखन की नींव।
1963
इरफ़ान हबीब — ‘द एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडिया’ — मुगल कालीन कृषि व्यवस्था।
1965
आर.एस. शर्मा — ‘इंडियन फ्यूडलिज्म’ — भारत में सामन्तवाद की अवधारणा।
1966
रोमिला थापर — ‘हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ — प्राचीन भारत का सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक अध्ययन।
1982–2005
रणजीत गुहा (संपादक) — ‘सबाल्टर्न स्टडीज़’ (12 खंड) — उत्पीड़ित वर्गों का इतिहास।
2000
दीपेश चक्रवर्ती — ‘प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप’ — यूरोप को केन्द्र से हटाना।
2001
तनिका सरकार — ‘हिंदू वाइफ, हिंदू नेशन’ — बंगाल पुनर्जागरण एवं महिला आन्दोलन।
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अध्याय 22 · Schools of Historiography
इतिहास-लेखन के विद्यालय
राष्ट्रवादी · मार्क्सवादी · सबाल्टर्न · नारीवादी · उत्तर-आधुनिक
राष्ट्रवादी विद्यालय
Nationalist School
उद्देश्य: भारतीय गौरव, स्वर्ण युग, स्वतंत्रता आन्दोलन
प्रमुख: आर.सी. मजुमदार, कान्हैयालाल मुंशी, काशीप्रसाद जायसवाल
कृतियाँ: हिस्ट्री एंड कल्चर, हिन्दू पोलिटी
मार्क्सवादी विद्यालय
Marxist School
उद्देश्य: आर्थिक व्याख्या, वर्ग संघर्ष, सामन्तवाद
प्रमुख: डी.डी. कोसांबी, आर.एस. शर्मा, इरफ़ान हबीब
कृतियाँ: इंडियन फ्यूडलिज्म, एग्रेरियन सिस्टम
सबाल्टर्न विद्यालय
Subaltern School
उद्देश्य: उत्पीड़ित वर्गों की आवाज़, नीचे से इतिहास
प्रमुख: रणजीत गुहा, दीपेश चक्रवर्ती, पार्थ चटर्जी
कृतियाँ: सबाल्टर्न स्टडीज़, प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप
नारीवादी विद्यालय
Feminist School
उद्देश्य: लिंग-आधारित व्याख्या, महिला दृष्टिकोण
प्रमुख: रोमिला थापर, तनिका सरकार, निर्मल कुमारी चौधुरी
कृतियाँ: हिंदू वाइफ, हिस्ट्री ऑफ इंडिया
उत्तर-आधुनिक विद्यालय
Post-modern School
उद्देश्य: सत्य की सापेक्षता, भाषा, वक्तृत्व
प्रमुख: दीपेश चक्रवर्ती, गौरी विश्वनाथन
कृतियाँ: प्रोविंशियलाइज़िंग यूरोप, मास्क्स ऑफ कॉन्क्वेस्ट
पर्यावरणीय विद्यालय
Environmental School
उद्देश्य: मानव-प्रकृति सम्बन्ध, जलवायु, पारिस्थितिकी
प्रमुख: उभरते विद्वान — पर्यावरणीय इतिहास
कृतियाँ: क्रमिक रूप से विकसित हो रही हैं
भारत के इतिहासकार — सम्पूर्ण नोट्स · Complete Notes · 22 अध्याय · 25 MCQ · 15 PYQ · 10 Mnemonics · 2025
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