छत्तीसगढ़ का वृहद इतिहास — CGPSC · Vyapam · State Exams | ExamCG
ExamCG · छत्तीसगढ़ इतिहास श्रृंखला

छत्तीसगढ़ का वृहद इतिहास

CGPSC (Pre + Mains), Vyapam और State Exams के लिए विश्लेषणात्मक अध्याय नोट्स — प्राचीन काल से लेकर राज्य निर्माण तक का संपूर्ण इतिहास।

अध्याय 01 · आरंभिक इतिहास

प्रागैतिहासिक एवं प्राचीन काल (पाषाण काल से गुप्त साम्राज्य तक)

पाषाण कालसिंघनपुर एवं कबरा पहाड़ में शैलचित्र
रामायण कालदक्षिण कोसल एवं दंडकारण्य का उल्लेख
मौर्य कालजोगीमारा गुफा (सरगुजा) में अशोक कालीन लेख
सातवाहन कालकिरारी का काष्ठ स्तंभ, गुंजी (ऋषभतीर्थ) अभिलेख
गुप्त काल (350 ई.)समुद्रगुप्त का दक्षिणापथ अभियान (महेंद्र और व्याघ्रराज की हार)

मुख्य विषय

छत्तीसगढ़ में पाषाण युगीन बस्तियां, महाकाव्य काल में दक्षिण कोसल की भौगोलिक स्थिति, और मौर्य, सातवाहन व गुप्त साम्राज्यों के अधीन क्षेत्र का महत्व।

प्रमुख शब्दावली

शैलचित्र (Rock Art) · सिंघनपुर · जोगीमारा गुफा · सुतनुका-देवदत्त · किरारी काष्ठ स्तंभ · प्रयाग प्रशस्ति · महाकान्तार।

परीक्षक इसे क्यों पसंद करते हैं

CGPSC में अक्सर पुरातात्विक स्थलों की खोज और उनसे संबंधित काल (जैसे मध्य पाषाण काल = कबरा पहाड़) का सीधा मिलान पूछा जाता है।

अत्यधिक महत्वपूर्ण: CGPSC Pre & Mains (Paper 3) · Vyapam Exams

1. प्रागैतिहासिक काल (पाषाण काल)

  • पूर्व पाषाण काल: सिंघनपुर गुफा (रायगढ़) — यहाँ से हस्तचलित कुदाल (Hand Axe) और सीढ़ीनुमा मानवाकृति के शैलचित्र मिले हैं। खोजकर्ता: एंडरसन (1910)।
  • मध्य पाषाण काल: कबरा पहाड़ (रायगढ़) — सर्वाधिक शैलचित्र यहीं से प्राप्त हुए हैं (लाल रंग की छिपकली, घड़ियाल, सांभर)। यहाँ से अर्धचंद्राकार लघु पाषाण औज़ार (Microliths) भी मिले हैं।
  • उत्तर पाषाण काल: धनपुर (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) और महानदी घाटी क्षेत्र।
  • नव पाषाण काल: टेरम (रायगढ़), अर्जुनी (दुर्ग), चितवाडोंगरी (राजनांदगांव) — यहाँ से छिद्रित पत्थर के औज़ार प्राप्त हुए हैं।
  • महापाषाण काल (Megalithic): बालोद ज़िले के करहीभदर, चिरचारी, सोरर और कोंडागांव के गढ़धनोरा (500 से अधिक पाषाण घेरे)।

2. रामायण एवं महाभारत काल

रामायण काल

  • इस क्षेत्र को दक्षिण कोसल (राजधानी: कुशस्थली) और बस्तर क्षेत्र को दंडकारण्य कहा जाता था।
  • मान्यता है कि राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय दंडकारण्य में बिताया। प्रमुख स्थल: रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (शबरी आश्रम), वाल्मीकि आश्रम (तुरतुरिया)।

महाभारत काल

  • इस क्षेत्र को प्राक्-कोसल और बस्तर क्षेत्र को कांतार कहा गया।
  • प्रमुख स्थल: चित्रांगदपुर (सिरपुर - बभ्रुवाहन की राजधानी), रतनपुर (मणिपुर - मोरध्वज की राजधानी), खल्लारी (लाक्षागृह)।

3. मौर्य एवं सातवाहन काल

  • मौर्य काल: सरगुजा ज़िले की जोगीमारा गुफा से अशोक कालीन (पाली भाषा और ब्राह्मी लिपि) अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जिसमें नर्तक देवदत्त और नर्तकी सुतनुका की प्रेम गाथा का वर्णन है। अकलतरा, ठठारी और बार से मौर्यकालीन आहत मुद्राएँ (Punch marked coins) मिली हैं।
  • सातवाहन काल:
    • शक्ति ज़िले के गुंजी (ऋषभतीर्थ) से कुमारदत्त का शिलालेख मिला है (राजा अपीलक का उल्लेख)।
    • सक्ती के किरारी ग्राम से 1921 में एक काष्ठ स्तंभ (Wooden Pillar) प्राप्त हुआ (वर्तमान में महंत घासीदास संग्रहालय, रायपुर में सुरक्षित) जिसमें सातवाहन कालीन अधिकारियों के नाम हैं।
    • चकरबेड़ा (बिलासपुर) से रोम के स्वर्ण सिक्के मिले हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को दर्शाते हैं।

4. गुप्त काल और वाकाटक वंश

  • हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति: इसके अनुसार, गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त ने अपने दक्षिणापथ अभियान के दौरान कोसल के राजा महेन्द्र और महाकान्तार (बस्तर) के राजा व्याघ्रराज को हराया था।
  • बानाबरद (दुर्ग) और पिटाईवल (रायपुर) से गुप्तकालीन सिक्के प्राप्त हुए हैं।
  • वाकाटक वंश: इनकी राजधानी नंदीवर्धन (नागपुर) थी। प्रवरसेन, महेंद्रसेन और पृथ्वीसेन प्रमुख शासक थे। वाकाटकों और गुप्तों के बीच वैवाहिक संबंध थे (प्रभावती गुप्त का विवाह रुद्रसेन द्वितीय से हुआ)।
  • कवि कालिदास ने वाकाटक नरेश प्रवरसेन द्वितीय के दरबार में यात्रा की थी और सरगुजा के रामगढ़ की पहाड़ियों में मेघदूतम् की रचना की थी।
PYQ रडार
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ExamCG · छत्तीसगढ़ इतिहास श्रृंखला — परीक्षा से एक दिन पहले प्रत्येक अध्याय की टाइमलाइन स्ट्रिप को दोहराएं।
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