सिंधु घाटी सभ्यता — 22 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (व्याख्या + रैपिड रिवीजन) | examcg.com
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सिंधु घाटी सभ्यता

( हड़प्पा सभ्यता : व्याख्या सहित हल प्रश्न-पत्र )

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★ परीक्षा-दृष्टि : इस अध्याय से प्रारम्भिक परीक्षाओं में प्रतिवर्ष 2–4 प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रमुख फोकस-क्षेत्र — स्थल व उनकी विशेष खोजें, खोजकर्ता व उत्खनन वर्ष, नदी-तट, नगर योजना, मुहरें, विदेशी व्यापार तथा पतन के सिद्धांत। नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न की व्याख्या एवं स्मरण-सूत्र अवश्य पढ़ें।

1. सिंधु घाटी सभ्यता के प्रथम खोजे गए स्थल 'हड़प्पा' का उत्खनन किसके निर्देशन में प्रारम्भ हुआ?

(a) राखालदास बनर्जी(b) दयाराम साहनी(c) जॉन मार्शल(d) माधोस्वरूप वत्स

उत्तर : (b) दयाराम साहनी [UPPCS (Pre.) 2016]

व्याख्या : 1921 ई. में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक सर जॉन मार्शल के कार्यकाल में दयाराम साहनी ने रावी नदी के तट पर स्थित हड़प्पा (जिला मोंटगोमरी/साहीवाल, पंजाब, पाकिस्तान) का उत्खनन किया। प्रथम खोजे गए स्थल के कारण ही इस सभ्यता को 'हड़प्पा सभ्यता' नाम दिया गया।

✦ स्मरण-सूत्र : हड़प्पा = दयाराम साहनी (1921), रावी तट।

2. 'मृतकों का टीला' (Mound of the Dead) के नाम से कौन-सा हड़प्पाई स्थल प्रसिद्ध है?

(a) हड़प्पा(b) कालीबंगा(c) मोहनजोदड़ो(d) लोथल

उत्तर : (c) मोहनजोदड़ो [MPPSC (Pre.) 2017]

व्याख्या : सिंधी भाषा में 'मोहनजोदड़ो' का अर्थ 'मृतकों का टीला' है। इसकी खोज 1922 ई. में राखालदास बनर्जी ने की थी। यह सिंधु नदी के तट पर लरकाना जिले (सिंध, पाकिस्तान) में स्थित है और सम्पूर्ण सभ्यता का सबसे बड़ा नगर था।

3. प्रसिद्ध 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) किस हड़प्पाई स्थल से प्राप्त हुआ है?

(a) हड़प्पा(b) मोहनजोदड़ो(c) धौलावीरा(d) रोपड़

उत्तर : (b) मोहनजोदड़ो [SSC CGL 2017]

व्याख्या : विशाल स्नानागार मोहनजोदड़ो के दुर्ग टीले से प्राप्त हुआ, जिसकी माप 11.88 × 7.01 मी. तथा गहराई 2.43 मी. है। इसमें जलरोधन हेतु पकी ईंटों एवं बिटुमेन (डामर) का प्रयोग हुआ। मार्शल ने इसे 'तत्कालीन विश्व का आश्चर्यजनक निर्माण' कहा। यहीं से विशाल अन्नागार, कांस्य नर्तकी एवं पशुपति मुहर भी मिली है।

✦ स्मरण-सूत्र : मोहनजोदड़ो = स्नानागार + अन्नागार + नर्तकी + पशुपति।

4. किस हड़प्पाई स्थल से जहाजों की गोदी (Dockyard) के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं?

(a) सुरकोटदा(b) कालीबंगा(c) लोथल(d) बनावली

उत्तर : (c) लोथल [CGPSC (Pre.) 2019]

व्याख्या : गुजरात में भोगवा नदी के तट पर स्थित लोथल (उत्खनन — एस.आर. राव, 1954-55) एक प्रमुख बंदरगाह नगर था। यहाँ से ईंटों से निर्मित गोदीवाड़ा, अग्नि-वेदिकाएँ, युग्मित शवाधान, फारस की मुहर तथा चावल की भूसी के साक्ष्य मिले हैं। समुद्री व्यापार का यह प्रमुख केन्द्र था।

✦ स्मरण-सूत्र : लोथल = 'लघु मोहनजोदड़ो' — गोदी + युग्मित समाधि।

5. 'जुते हुए खेत' का प्राचीनतम साक्ष्य किस स्थल से प्राप्त हुआ है?

(a) बनावली(b) कालीबंगा(c) राखीगढ़ी(d) आलमगीरपुर

उत्तर : (b) कालीबंगा [RPSC RAS (Pre.) 2018]

व्याख्या : राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्गर (प्राचीन सरस्वती) नदी के तट पर स्थित कालीबंगा से प्राक्-हड़प्पा स्तर पर जुते हुए खेत का साक्ष्य मिला है, जिसमें एक साथ दो फसलें बोने के प्रमाण हैं। 'कालीबंगा' का अर्थ है — 'काले रंग की चूड़ियाँ'। यहीं से भूकम्प का प्राचीनतम साक्ष्य तथा कच्ची ईंटों के चबूतरे भी मिले हैं।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राचीन नगर अपने उन्नत जल संचयन एवं प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है?

(a) ढोलावीरा(b) कालीबंगा(c) राखीगढ़ी(d) रोपड़

उत्तर : (a) ढोलावीरा [UPSC (Pre.) 2021]

व्याख्या : गुजरात के कच्छ जिले में खादिर द्वीप पर स्थित धौलावीरा (उत्खनन — आर.एस. बिष्ट, 1990) अपनी उत्कृष्ट जल-प्रबंधन प्रणाली (विशाल जलाशय, बाँध, नाले) हेतु विख्यात है। यह एकमात्र नगर है जो तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर, निचला नगर) में विभक्त था। यहीं से 10 बड़े चिह्नों वाला विश्व का प्राचीनतम 'साइनबोर्ड' मिला। 2021 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया।

✦ स्मरण-सूत्र : धौलावीरा = 3 भाग + जल प्रबंधन + साइनबोर्ड + UNESCO 2021।

7. मोहनजोदड़ो से प्राप्त पशुपति मुहर पर निम्नलिखित में से किस पशु का अंकन नहीं है?

(a) हाथी(b) गैंडा(c) सिंह(d) भैंसा

उत्तर : (c) सिंह [UPPCS (Pre.) 2005]

व्याख्या : सेलखड़ी (स्टिएटाइट) से निर्मित पशुपति मुहर पर योगमुद्रा में त्रिमुखी पुरुष (आद्य शिव) विराजमान है, जिसके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा एवं भैंसा तथा आसन के नीचे दो हिरण अंकित हैं। सिंह का अंकन इस मुहर पर नहीं है — सिंधु सभ्यता में सिंह के साक्ष्य अनुपस्थित हैं।

✦ स्मरण-सूत्र : पशुपति के पशु : 'हा-बा-गैं-भैं + 2 हिरण' (सिंह नहीं!)

8. प्रसिद्ध कांस्य 'नर्तकी की मूर्ति' किस स्थल से प्राप्त हुई तथा किस विधि से निर्मित है?

(a) हड़प्पा — ढलाई विधि(b) मोहनजोदड़ो — मधूच्छिष्ट विधि(c) चन्हूदड़ो — ठप्पा विधि(d) लोथल — मधूच्छिष्ट विधि

उत्तर : (b) मोहनजोदड़ो — मधूच्छिष्ट विधि [UPPCS (Mains) 2015]

व्याख्या : लगभग 10.5 सेमी ऊँची कांस्य नर्तकी मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई है, जो मधूच्छिष्ट/लुप्त-मोम (Lost Wax) विधि से बनाई गई। यह हड़प्पाई धातु-शिल्प की उत्कृष्टता का प्रमाण है। हड़प्पा से पत्थर की दो मूर्तियाँ (नर धड़) तथा मोहनजोदड़ो से पुरोहित (दाढ़ी वाले पुरुष) की सेलखड़ी प्रतिमा भी उल्लेखनीय है।

9. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग निम्नलिखित में से किस धातु से अपरिचित थे?

(a) ताँबा(b) स्वर्ण(c) लोहा(d) चाँदी

उत्तर : (c) लोहा [UPSC (Pre.) 1996]

व्याख्या : हड़प्पा सभ्यता कांस्ययुगीन (Bronze Age) सभ्यता थी। लोग ताँबे में टिन मिलाकर कांसा बनाते थे तथा सोना, चाँदी एवं ताँबे से परिचित थे, किन्तु लोहे का ज्ञान उन्हें नहीं था। भारत में लौह तकनीक का व्यापक प्रयोग उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ई.पू.) से मिलता है।

✦ स्मरण-सूत्र : हड़प्पावासी = कांसा हाँ, लोहा नहीं।

10. हड़प्पा सभ्यता का सर्वाधिक पूर्वी स्थल कौन-सा है?

(a) मांडा(b) आलमगीरपुर(c) सुत्कागेंडोर(d) दाइमाबाद

उत्तर : (b) आलमगीरपुर [UPPCS (Pre.) 2014]

व्याख्या : सभ्यता का विस्तार-चतुष्कोण : पूर्व में आलमगीरपुर (हिंडन नदी, मेरठ, उ.प्र.), पश्चिम में सुत्कागेंडोर (दाश्क नदी, बलूचिस्तान), उत्तर में मांडा (चिनाब नदी, जम्मू) तथा दक्षिण में दाइमाबाद (प्रवरा नदी, महाराष्ट्र)। सभ्यता का कुल क्षेत्रफल लगभग 12,99,600 वर्ग किमी. त्रिभुजाकार रूप में था।

✦ स्मरण-सूत्र : पूर्व-आलमगीरपुर, पश्चिम-सुत्कागेंडोर, उत्तर-मांडा, दक्षिण-दाइमाबाद।

11. वर्तमान भारत में स्थित सबसे बड़ा हड़प्पाकालीन स्थल कौन-सा है?

(a) धौलावीरा(b) कालीबंगा(c) राखीगढ़ी(d) लोथल

उत्तर : (c) राखीगढ़ी [HSSC / UPPCS (Pre.) 2021]

व्याख्या : हरियाणा के हिसार जिले में घग्गर-दृषद्वती घाटी में स्थित राखीगढ़ी (लगभग 350 हेक्टेयर) वर्तमान भारत का सबसे बड़ा हड़प्पाई स्थल है, जबकि समग्र सभ्यता का सबसे बड़ा नगर मोहनजोदड़ो (पाकिस्तान) है। राखीगढ़ी से 2015 के उत्खनन में मानव कंकालों का डीएनए विश्लेषण भी चर्चित रहा।

12. कौन-सा हड़प्पाई नगर दुर्ग (Citadel) रहित था तथा मनका (Bead) निर्माण का प्रमुख केन्द्र था?

(a) कोटदीजी(b) चन्हूदड़ो(c) अमरी(d) बालाकोट

उत्तर : (b) चन्हूदड़ो [UPSC (Pre.) 2013 आधारित]

व्याख्या : सिंध में स्थित चन्हूदड़ो (उत्खनन — गोपाल मजूमदार, 1931) एकमात्र ऐसा नगर था जिसमें दुर्ग का अभाव था। यह मनका निर्माण, सीप-शिल्प एवं मुहर-निर्माण का औद्योगिक केन्द्र था। यहीं से लिपस्टिक, वक्राकार ईंटें तथा बिल्ली का पीछा करते कुत्ते के पदचिह्न वाली ईंट मिली है। लोथल एवं चन्हूदड़ो दोनों में मनका कारखाने थे।

✦ स्मरण-सूत्र : चन्हूदड़ो = बिना दुर्ग का 'औद्योगिक नगर'।

13. रेडियोकार्बन (C-14) तिथि निर्धारण के अनुसार हड़प्पा सभ्यता का काल माना जाता है —

(a) 3250–2750 ई.पू.(b) 2350–1750 ई.पू.(c) 1500–1000 ई.पू.(d) 2800–2000 ई.पू.

उत्तर : (b) 2350–1750 ई.पू. [UPPCS (Pre.) 2019]

व्याख्या : C-14 पद्धति के आधार पर सभ्यता की तिथि 2350–1750 ई.पू. निर्धारित की गई है। सर जॉन मार्शल ने 3250–2750 ई.पू. तथा NCERT/सामान्य मान्यता के अनुसार परिपक्व अवस्था 2600–1900 ई.पू. मानी जाती है। यह आद्य-ऐतिहासिक (Proto-historic) काल की सभ्यता है, क्योंकि इसकी लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है।

14. मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र को किस नाम से जाना जाता था?

(a) दिलमुन(b) माकन(c) मेलुहा(d) निप्पुर

उत्तर : (c) मेलुहा [MPPSC (Pre.) 2016]

व्याख्या : मेसोपोटामियाई (सुमेरियाई/अक्कादी) अभिलेखों में सिंधु प्रदेश को 'मेलुहा' कहा गया है। सारगोन के अभिलेख में मेलुहा, दिलमुन (बहरीन) एवं माकन (मकरान तट/ओमान) के जहाजों का उल्लेख है — ये सिंधु-मेसोपोटामिया व्यापार के मध्यवर्ती केन्द्र थे। व्यापार का प्रमाण मेसोपोटामिया से प्राप्त हड़प्पाई मुहरें भी हैं।

✦ स्मरण-सूत्र : मेलुहा = सिंधु; दिलमुन = बहरीन; माकन = मकरान।

15. सूती वस्त्र के प्रयोग का प्राचीनतम साक्ष्य किस हड़प्पाई स्थल से मिला है?

(a) मोहनजोदड़ो(b) हड़प्पा(c) कालीबंगा(d) रंगपुर

उत्तर : (a) मोहनजोदड़ो [UPPCS (Pre.) 2010]

व्याख्या : मोहनजोदड़ो से बुने हुए सूती कपड़े का टुकड़ा एवं तकलियाँ प्राप्त हुई हैं। विश्व में सर्वप्रथम कपास की खेती सिंधु क्षेत्र में हुई, इसीलिए यूनानियों ने इसे 'सिन्डन' (Sindon) कहा। कपास उपजाने का प्राचीनतम साक्ष्य मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) से मिलता है।

✦ स्मरण-सूत्र : कपास → सिंधु → यूनानी 'सिन्डन'।

16. घोड़े की अस्थियों के साक्ष्य किस हड़प्पाई स्थल से प्राप्त हुए हैं?

(a) लोथल(b) सुरकोटदा(c) धौलावीरा(d) बनावली

उत्तर : (b) सुरकोटदा [UPPCS (Pre.) 2008]

व्याख्या : गुजरात के कच्छ जिले में स्थित सुरकोटदा (उत्खनन — जगपति जोशी, 1964) से घोड़े की अस्थियाँ प्राप्त हुई हैं, यद्यपि हड़प्पाई समाज में घोड़े की उपस्थिति विवादित है। यहाँ से कब्र को पत्थरों से ढकने (शवाधान की विशिष्ट पद्धति) के साक्ष्य भी मिले हैं।

17. हड़प्पा सभ्यता की नगर-योजना की सर्वाधिक विशिष्ट पहचान क्या थी?

(a) विशाल मंदिर(b) ग्रिड पद्धति एवं ढकी नालियाँ(c) लौह उपकरण(d) गोलाकार नगर

उत्तर : (b) ग्रिड पद्धति एवं ढकी नालियाँ [CGPSC (Pre.) 2016]

व्याख्या : नगर जाल/ग्रिड पद्धति (Grid Pattern) पर बसे थे — सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। पकी ईंटों (अनुपात 4:2:1) का प्रयोग तथा घर-घर से जुड़ी ढकी हुई पक्की नालियों की व्यवस्था विश्व में अद्वितीय थी। नगर प्रायः दो भागों — पश्चिमी दुर्ग टीला एवं पूर्वी निचला नगर — में विभक्त थे। मंदिर का कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिला है।

✦ स्मरण-सूत्र : ईंट अनुपात = 4 : 2 : 1 (लम्बाई : चौड़ाई : ऊँचाई)।

18. सिंधु लिपि के विषय में कौन-सा कथन सही है?

(a) यह पढ़ी जा चुकी है(b) यह वर्णमाला आधारित है(c) यह भावचित्रात्मक एवं अपठित है(d) यह केवल बाएँ से दाएँ लिखी जाती थी

उत्तर : (c) यह भावचित्रात्मक एवं अपठित है [NTA NET (इतिहास) 2020]

व्याख्या : सिंधु लिपि भावचित्रात्मक (Pictographic) है, जिसमें लगभग 400–600 चिह्न हैं और यह आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है। यह सामान्यतः दाएँ से बाएँ तथा अगली पंक्ति में बाएँ से दाएँ (सर्पिल/गोमूत्रिका शैली — Boustrophedon) लिखी जाती थी। लिपि का प्राचीनतम नमूना 1853 ई. में तथा सर्वाधिक चिह्न मुहरों पर मिले हैं।

19. हल से जोते खेत के अतिरिक्त, मिट्टी से बने 'हल के प्रतिरूप (खिलौने)' किस स्थल से प्राप्त हुए हैं?

(a) कालीबंगा(b) बनावली(c) रोपड़(d) कोटदीजी

उत्तर : (b) बनावली [HPSC / UPPCS (Pre.) 2018]

व्याख्या : हरियाणा के फतेहाबाद जिले में सरस्वती घाटी में स्थित बनावली (उत्खनन — आर.एस. बिष्ट, 1973-74) से मिट्टी के हल का प्रतिरूप (Terracotta Plough Model) तथा उत्तम किस्म के जौ के साक्ष्य मिले हैं। यहाँ प्राक्-हड़प्पा एवं परिपक्व हड़प्पा दोनों संस्कृतियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।

✦ स्मरण-सूत्र : कालीबंगा = जुता खेत (वास्तविक); बनावली = हल (खिलौना)।

20. सिंधु सभ्यता के धार्मिक जीवन के सम्बन्ध में कौन-सा साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है?

(a) मातृदेवी की पूजा(b) पीपल पूजा(c) स्वस्तिक चिह्न(d) मंदिर संरचना

उत्तर : (d) मंदिर संरचना [UPSC (Pre.) आधारित]

व्याख्या : हड़प्पाई धर्म में मातृदेवी (मिट्टी की स्त्री मृण्मूर्तियाँ), आद्य शिव/पशुपति, पीपल वृक्ष, कूबड़ वाला साँड़, नाग एवं स्वस्तिक तथा लिंग-योनि पूजा के संकेत मिलते हैं, किन्तु किसी मंदिर की संरचना का कोई स्पष्ट साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है। यह इस सभ्यता की धर्मनिरपेक्ष नगर-संरचना की विशिष्टता मानी जाती है।

21. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में उत्खनित प्रथम हड़प्पाई स्थल कौन-सा था, जहाँ से मनुष्य के साथ कुत्ते के शवाधान का साक्ष्य मिला?

(a) कालीबंगा(b) लोथल(c) रोपड़(d) आलमगीरपुर

उत्तर : (c) रोपड़ [Punjab PSC / UPPCS 2015]

व्याख्या : पंजाब में सतलुज नदी के तट पर स्थित रोपड़ (रूपनगर) स्वतंत्र भारत में उत्खनित (यज्ञदत्त शर्मा, 1953) प्रथम हड़प्पाई स्थल है। यहाँ से मनुष्य के साथ कुत्ते को दफनाने का अनोखा साक्ष्य मिला है — ऐसा साक्ष्य नवपाषाणिक बुर्जहोम (कश्मीर) से भी प्राप्त होता है।

22. हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों में निम्नलिखित में से किस विद्वान ने 'बाढ़' को उत्तरदायी माना है?

(a) गॉर्डन चाइल्ड(b) मार्टिमर व्हीलर(c) जॉन मार्शल एवं मैके(d) ऑरेल स्टाइन

उत्तर : (c) जॉन मार्शल एवं मैके [MPPSC (Pre.) 2019]

व्याख्या : पतन के प्रमुख मत — जॉन मार्शल, मैके एवं एस.आर. राव : बाढ़; मार्टिमर व्हीलर : आर्य आक्रमण (ऋग्वैदिक 'हरियूपिया' के आधार पर); ऑरेल स्टाइन व अमलानंद घोष : जलवायु परिवर्तन; एम.आर. साहनी : भू-तात्विक परिवर्तन; फेयर सर्विस : पारिस्थितिक असंतुलन। वर्तमान में क्रमिक पतन (नदी मार्ग परिवर्तन + पर्यावरणीय कारण) सर्वाधिक मान्य दृष्टिकोण है।

✦ स्मरण-सूत्र : व्हीलर = आक्रमण; मार्शल = बाढ़; स्टाइन = जलवायु।

⚡ रैपिड रिवीजन : प्रमुख स्थल एक दृष्टि में
स्थलनदीखोज / उत्खननप्रमुख विशेषता (परीक्षा-उपयोगी)
हड़प्पारावीदयाराम साहनी (1921)अन्नागार (6+6), R-37 कब्रिस्तान, नर धड़ मूर्ति
मोहनजोदड़ोसिंधुराखालदास बनर्जी (1922)विशाल स्नानागार, पशुपति मुहर, कांस्य नर्तकी
चन्हूदड़ोसिंधुगोपाल मजूमदार (1931)मनका उद्योग, दुर्गविहीन नगर, लिपस्टिक
कालीबंगाघग्गरअमलानंद घोष (1953)जुते खेत, अग्नि-वेदिकाएँ, भूकम्प साक्ष्य
रोपड़सतलुजयज्ञदत्त शर्मा (1953)मानव के साथ कुत्ते का शवाधान
लोथलभोगवाएस.आर. राव (1954)गोदीवाड़ा (बंदरगाह), युग्मित समाधि, फारसी मुहर
सुरकोटदाजगपति जोशी (1964)घोड़े की अस्थियाँ, पत्थर से ढकी कब्रें
बनावलीसरस्वतीआर.एस. बिष्ट (1973)मिट्टी का हल (खिलौना), उत्तम जौ
धौलावीरामानहर-मानसरआर.एस. बिष्ट (1990)जल-प्रबंधन, 3 भाग नगर, साइनबोर्ड, UNESCO 2021
राखीगढ़ीघग्गर-दृषद्वतीअमरेन्द्र नाथ (1997)भारत का सबसे बड़ा हड़प्पाई स्थल

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