04 उग्रपंथी युग एवं क्रांतिकारी आंदोलन
01 · परिचय एवं पृष्ठभूमि (Introduction & Background) Background
उग्रपंथी (गरमदल) युग (1905-1919) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का वह चरण था जब नरमपंथियों की संविधानिक विधियों से असंतुष्ट होकर एक नए समूह ने अधिक सक्रिय, प्रत्यक्ष एवं क्रांतिकारी तरीकों को अपनाया। 1905 में बंगाल विभाजन इस युग का प्रमुख उत्प्रेरक था।
इस युग के प्रमुख कारण थे — बंगाल विभाजन (1905), ब्रिटिश नीतियों की विफलता, नरमपंथियों की सीमित उपलब्धियाँ, एवं राष्ट्रवादी भावना का तीव्र उभार। उग्रपंथियों ने 'स्वदेशी', 'बहिष्कार', 'सविनय अवज्ञा' जैसे हथियारों का उपयोग किया। ग्रीज्ड कारतूस (greased cartridges) के बाद यह दूसरा बड़ा जन-आंदोलन था।
इस काल में कई क्रांतिकारी संगठन भी सक्रिय हुए, जिन्होंने सशस्त्र प्रतिरोध का मार्ग अपनाया। लखनऊ समझौता (1916) ने नरम-उग्र विभाजन को समाप्त किया।
- समय सीमा — 1905 से 1919 (लगभग 14 वर्ष)
- मुख्य नेता — लोकमान्य तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविंद घोष
- मुख्य विधियाँ — स्वदेशी, बहिष्कार, शिक्षा बहिष्कार, सविनय अवज्ञा
- लक्ष्य — पूर्ण स्वराज (Swaraj)
02 · बंगाल विभाजन (1905) — कारण एवं प्रभाव (Partition of Bengal — Causes & Effects) Partition
16 अक्टूबर 1905 को लॉर्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन की घोषणा की। इस विभाजन ने बंगाल को 'पूर्वी बंगाल एवं असम' (मुस्लिम-बहुल) तथा 'पश्चिमी बंगाल' (हिंदू-बहुल) में बाँट दिया। भागीरथी नदी को पूर्वी और पश्चिमी बंगाल के बीच भौगोलिक विभाजक के रूप में निर्धारित किया गया था।
विभाजन के कारण (Causes)
- प्रशासनिक सुविधा — बंगाल अत्यधिक बड़ा था (1,89,000 वर्ग मील), इसलिए उसे विभाजित करना आवश्यक था (सरकारी तर्क)।
- 'फूट डालो और राज करो' — अंग्रेजों का वास्तविक उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ना था।
- राष्ट्रवाद का दमन — बंगाल राष्ट्रवाद का गढ़ था; विभाजन से उसे कमज़ोर करने का प्रयास।
- उग्रपंथियों को कमज़ोर करना — बंगाल में उग्रपंथी गतिविधियाँ बढ़ रही थीं, इसलिए विभाजन से उन्हें रोकने का प्रयास।
प्रभाव (Effects)
- व्यापक विरोध — पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन हुए; 'बंग-भंग आंदोलन' का शुभारंभ हुआ।
- स्वदेशी आंदोलन का जन्म — विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का आह्वान।
- नरम-उग्र एकता — प्रारंभ में दोनों गुट एकजुट हुए, परंतु बाद में मतभेद बढ़े।
- 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना — अंग्रेजों ने मुसलमानों को प्रोत्साहित करके मुस्लिम लीग बनवाई।
- स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा — बंगाल में स्वदेशी कपड़ा, बैंक, बीमा कंपनियाँ स्थापित हुईं।
- वर्ष — 1905 (लॉर्ड कर्जन)
- तिथि — 16 अक्टूबर 1905
- विरोध — 'बंग-भंग आंदोलन'
- परिणाम — 1911 में विभाजन रद्द किया गया
- भौगोलिक विभाजक — भागीरथी नदी
03 · स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन (Swadeshi & Boycott Movement) Swadeshi & Boycott
बंगाल विभाजन के विरोध में 1905 में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई। 'स्वदेशी' शब्द का प्रयोग सबसे पहले विश्वनाथ नारायण मंडलिक ने 1905 में किया। 'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' को पहली बार संघर्ष की पद्धति के रूप में बंगाल विभाजन के विरुद्ध अपनाया गया।
मुख्य पहलू (Key Aspects)
- विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार — सार्वजनिक रूप से विदेशी कपड़ों को जलाना, भारतीय खादी को बढ़ावा देना।
- शिक्षा बहिष्कार — सरकारी स्कूलों, कॉलेजों का बहिष्कार; राष्ट्रीय शिक्षा परिषदों की स्थापना।
- अदालतों का बहिष्कार — ब्रिटिश अदालतों में जाने से इनकार करना।
- स्वदेशी उद्योग — स्वदेशी वस्त्र, माचिस, साबुन, चीनी आदि के उद्योगों को बढ़ावा देना।
- 'वंदे मातरम्' का प्रयोग — यह गीत स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक बना और विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार से जुड़ा।
परिणाम (Outcomes)
- भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन — स्वदेशी कपड़ा उद्योग, बैंक, बीमा कंपनियाँ स्थापित हुईं।
- राष्ट्रीय शिक्षा — 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (बंगाल) और 'नेशनल कॉलेज' (कलकत्ता) की स्थापना।
- ब्रिटिश सरकार द्वारा दमन — कई नेताओं को गिरफ़्तार किया गया।
- आत्मनिर्भरता की भावना — भारतीयों में स्वावलंबन और स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
- आरंभ — 1905 (बंगाल विभाजन के विरोध में)
- 'स्वदेशी' शब्द — विश्वनाथ नारायण मंडलिक (1905)
- मुख्य केंद्र — बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब
- प्रमुख नेता — तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय
04 · प्रमुख उग्रपंथी नेता (Prominent Extremist Leaders) Leaders
1. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक (1856-1920)
- 'भारतीय अशांति का जनक' (Father of Indian Unrest) — ब्रिटिशों ने यह उपाधि दी
- प्रसिद्ध नारा — "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।"
- पत्रिकाएँ — 'केसरी' (मराठी) और 'मराठा' (अंग्रेजी)
- 1893 में गणपति उत्सव और 1895 में शिवाजी उत्सव का आरंभ — जन-जागरण के लिए
- 1908 — मंडाले (बर्मा) में 6 वर्ष कारावास (बाल गंगाधर तिलक केस)
- 1916 — होम रूल लीग (पुणे शाखा) की स्थापना
2. बिपिन चंद्र पाल (1858-1932)
- 'बंगाल के राष्ट्रवादी चिंतक' — 'भारत में क्रांतिकारी विचारों के जनक' के रूप में भी जाने जाते हैं
- 1906 में कांग्रेस अध्यक्ष (कलकत्ता अधिवेशन)
- पत्रिकाएँ — 'न्यू इंडिया', 'द सोवरेन'
- शिक्षा सुधार — 'नेशनल कॉलेज' (कलकत्ता) के सह-संस्थापक
3. लाला लाजपत राय (1865-1928)
- 'पंजाब केसरी' (Lion of Punjab) कहलाए
- 1928 — साइमन कमीशन के विरोध में लाहौर में प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज में घायल होकर मृत्यु
- उनकी मृत्यु पर भगत सिंह ने सॉन्डर्स की हत्या करके बदला लिया
- पुस्तक — 'इंग्लैंड एंड इंडिया'
- 1920 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गए
4. अरविंद घोष (1872-1950)
- 'क्रांतिकारी से महायोगी'
- पत्रिका — 'वंदे मातरम्' (अंग्रेजी पत्रिका)
- 1907 — अलीपुर षड्यंत्र केस में गिरफ़्तार (बरी हो गए)
- 1910 — पांडिचेरी चले गए और आध्यात्मिक साधना में लीन हो गए
5. 'लाल-बाल-पाल' त्रिमूर्ति
- लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल को सामूहिक रूप से 'लाल-बाल-पाल' के नाम से जाना जाता है।
- ये तीनों उग्रपंथी विचारधारा के प्रतीक थे और 1905-1918 की अवधि में सक्रिय रहे।
- इन्होंने स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा पर जोर दिया।
- तिलक — 'लोकमान्य', 'भारतीय अशांति का जनक'
- लाजपत राय — 'पंजाब केसरी'
- बिपिन चंद्र पाल — 'भारत में क्रांतिकारी विचारों के जनक'
- अरविंद — 'क्रांतिकारी से महायोगी'
05 · नरम-उग्र विभाजन (सूरत अधिवेशन 1907) (Surat Split — 1907) Surat Split
1907 में सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रपंथियों के बीच स्पष्ट विभाजन हो गया। सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन हुआ और उग्रपंथियों को बाहर कर दिया गया।
विभाजन के कारण (Causes)
- उद्देश्यों में अंतर — नरमपंथी 'स्वशासन' चाहते थे, उग्रपंथी 'पूर्ण स्वराज'।
- तरीकों में मतभेद — नरमपंथी याचिका/ज्ञापन में विश्वास रखते थे, उग्रपंथी बहिष्कार/स्वदेशी चाहते थे।
- 1906 के कलकत्ता अधिवेशन — तिलक के अध्यक्ष पद के प्रस्ताव को नरमपंथियों ने अस्वीकार कर दिया।
- अध्यक्ष पद को लेकर विवाद — नरमपंथियों ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनाया, जिससे उग्रपंथी नाराज हुए।
सूरत अधिवेशन (1907)
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| स्थान | सूरत (गुजरात) |
| अध्यक्ष | रास बिहारी घोष (नरमपंथी) |
| परिणाम | कांग्रेस दो भागों में विभाजित — 'नरमपंथी' और 'उग्रपंथी' |
| प्रमुख उग्रपंथी नेता | तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल |
- 1916 तक कांग्रेस विभाजित रही
- तिलक को 1908 में मंडाले (बर्मा) निर्वासित किया गया
- उग्रपंथियों ने स्वदेशी आंदोलन को जारी रखा
- नरमपंथियों ने संविधानिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया
06 · मार्ले-मिंटो सुधार (1909) (Morley-Minto Reforms — 1909) Morley-Minto
1909 में लॉर्ड मार्ले (भारत सचिव) और लॉर्ड मिंटो (वायसराय) ने 'भारतीय परिषद अधिनियम' (Indian Councils Act 1909) पारित किया। इस सुधार ने पहली बार अलग निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorate) — मुसलमानों के लिए — की शुरुआत की।
मुख्य प्रावधान (Key Provisions)
- विधान परिषदों का विस्तार — केंद्रीय एवं प्रांतीय विधान परिषदों में सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई।
- अलग निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorate) — मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र
- भारतीयों को विधान परिषदों में प्रतिनिधित्व — हालाँकि सीमित एवं अप्रत्यक्ष
- मुस्लिम लीग को मान्यता — इस सुधार ने मुस्लिम लीग को संवैधानिक मान्यता प्रदान की।
- 1909 — मुस्लिमों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की शुरुआत
- 1919 — सिख, अंग्रेजी-भारतीय आदि को भी अलग निर्वाचन क्षेत्र मिले
- 1935 — इस व्यवस्था को और विस्तारित किया गया
- इस सुधार ने सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया — यह ब्रिटिश 'फूट डालो और राज करो' की नीति का हिस्सा था
07 · क्रांतिकारी आंदोलन (Revolutionary Movement) Revolutionary
उग्रपंथी आंदोलन के साथ-साथ क्रांतिकारी (Revolutionary) गतिविधियाँ भी शुरू हुईं, जिन्होंने सशस्त्र प्रतिरोध का मार्ग अपनाया। क्रांतिकारी आंदोलन ने युवाओं में आत्म-बलिदान की भावना को जगाया।
क्रांतिकारी संगठन — भारत में (Revolutionary Organizations in India)
| संगठन | स्थान | संस्थापक / नेता | विशेषता |
|---|---|---|---|
| अनुशीलन समिति | कलकत्ता (बंगाल) | प्रमथ चौधरी, जतिन्द्रनाथ बनर्जी (1902) | सबसे पुराना क्रांतिकारी संगठन |
| युगांतर | बंगाल | विप्लवी समिति (1906) | अनुशीलन से अलग होकर बना |
| अभिनव भारत | महाराष्ट्र | विनायक दामोदर सावरकर (1904) | 'अभिनव भारत' का गठन किया था |
| लंदन इंडिया हाउस | लंदन | श्यामजी कृष्ण वर्मा (1905) | विदेश में क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र |
प्रमुख क्रांतिकारी गतिविधियाँ (Major Incidents)
- 1908 — मुजफ्फरपुर बम कांड — खुदीराम बोस को फाँसी
- 1908 — अलीपुर षड्यंत्र केस — अरविंद घोष बरी
- 1909 — कर्जन वाइली की हत्या — मदनलाल धींगरा (फाँसी)
- 1912 — दिल्ली बम कांड — राशबिहारी बोस, सचिंद्र सान्याल
- खुदीराम बोस — 1908, मुजफ्फरपुर बम कांड
- मदनलाल धींगरा — 1909, कर्जन वाइली हत्याकांड
- राशबिहारी बोस — 1912, दिल्ली बम कांड
- विनायक दामोदर सावरकर — 'अभिनव भारत' के संस्थापक
08 · गदर पार्टी एवं विदेशी क्रांतिकारी गतिविधियाँ (Gadar Party & Foreign Activities) Gadar & Foreign
गदर पार्टी (1913)
- स्थापना — 1913, सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में लाला हरदयाल ने की
- उद्देश्य — भारत में ब्रिटिश शासन को सशस्त्र क्रांति के माध्यम से उखाड़ फेंकना
- सदस्य — मुख्यतः पंजाबी सिख, हिंदू, मुस्लिम
- पत्रिका — 'गदर' (उर्दू, पंजाबी, अंग्रेजी में)
- प्रमुख नेता — लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा
- 1914 — कोमागाटा मारू घटना ने गदर आंदोलन को और तीव्र किया
- 1915 — गदर विद्रोह विफल
- गदर पार्टी का प्रभाव — इसने भारतीय प्रवासियों में राष्ट्रवाद की भावना को जगाया
बर्लिन समिति (1914)
- स्थापना — प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बर्लिन (जर्मनी) में
- नेता — वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय
- उद्देश्य — जर्मनी की मदद से भारत में विद्रोह कराना
- स्थापना — 1913 (सैन फ्रांसिस्को)
- संस्थापक — लाला हरदयाल
- पत्रिका — 'गदर'
- प्रमुख घटना — 1914 कोमागाटा मारू
09 · लखनऊ समझौता (1916) — पुनः एकीकरण (Lucknow Pact — 1916) Lucknow Pact
1916 में लखनऊ में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जहाँ नरमपंथी और उग्रपंथी पुनः एकजुट हुए। यह 'लखनऊ समझौता' कहलाता है। यह समझौता कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच भी हुआ, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक था।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ (Key Features)
- कांग्रेस का एकीकरण — तिलक और नरमपंथी नेताओं (गोखले, मालवीय) के प्रयासों से
- मुस्लिम लीग के साथ समझौता — कांग्रेस-लीग संयुक्त माँगें
- संयुक्त कार्यक्रम — दोनों दलों ने संयुक्त रूप से संविधानिक सुधारों की माँग की
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्वशासन की माँग — यह समझौता युद्ध के बाद के संविधानिक सुधारों के लिए एक संयुक्त मोर्चा था
लखनऊ अधिवेशन — प्रमुख तथ्य (Key Facts)
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| स्थान | लखनऊ |
| वर्ष | 1916 |
| अध्यक्ष | अम्बिका चरण मजुमदार |
| उपलब्धि | नरम-उग्र एकीकरण; कांग्रेस-लीग समझौता |
| प्रमुख नेता | तिलक, मालवीय, जिन्ना |
- नरम-उग्र विभाजन समाप्त — कांग्रेस पुनः एकजुट हुई
- हिंदू-मुस्लिम एकता — कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने संयुक्त माँगें रखीं
- यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अगले चरण (गांधी युग) का आधार बना
- इस समझौते ने 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया
10 · पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ संग्रह) (Previous Year Questions — Compilation) PYQ
निम्नलिखित प्रश्न विभिन्न परीक्षाओं (UPSC, CGPSC, UPPCS, NET) में पूछे गए हैं — प्रत्येक प्रश्न के साथ उत्तर अगली पंक्ति में दिया गया है।
-
"सर्वप्रथम किसने कहा: 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा'?"
UPSC Prelims 1979
उत्तर: बाल गंगाधर तिलक -
"गदर पार्टी की स्थापना किसने और कहाँ की?"
UPSC Prelims 2010
उत्तर: लाला हरदयाल, सैन फ्रांसिस्को (1913) -
"बंगाल का विभाजन (1905) कब तक जारी रहा?"
UPSC Prelims 2014
उत्तर: 1911 में विभाजन रद्द कर दिया गया -
"मार्ले-मिंटो सुधार (1909) में किसके लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई?"
UPSC Prelims 2015
उत्तर: मुसलमानों -
"लखनऊ समझौता (1916) किस वर्ष हुआ?"
UPSC Prelims 2019
उत्तर: 1916 -
"क्रांतिकारियों के एक गुप्त समाज 'अभिनव भारत' का गठन किसने किया था?"
CGPSC / State PSC
उत्तर: विनायक दामोदर सावरकर -
"लखनऊ समझौता (1916) किनके संयुक्त प्रयासों से संपन्न हो सका?"
UPPSC / State PSC
उत्तर: तिलक एवं जिन्ना -
"खुदीराम बोस को किस वर्ष फाँसी दी गई?"
NET History 2017
उत्तर: 1908 (मुजफ्फरपुर बम कांड) -
"'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' को पहली बार संघर्ष की पद्धति के रूप में किस घटना के विरुद्ध अपनाया गया?"
UPSC Prelims
उत्तर: बंगाल विभाजन (1905) -
"किन स्वतंत्रता सेनानियों को 'लाल-बाल-पाल' के नाम से जाना जाता है?"
UPSC / CGPSC
उत्तर: लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल -
"भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का सूरत अधिवेशन (1907) किस कारण से महत्वपूर्ण है?"
UPSC Prelims
उत्तर: नरमपंथियों और उग्रपंथियों के बीच विभाजन -
"'वंदे मातरम्' गीत को स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक कब बनाया गया?"
State PSC
उत्तर: 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान
11 · अभ्यास प्रश्न (MCQ) (Practice — MCQ) Practice
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। (उत्तर नीचे दिए गए हैं।)
- बंगाल विभाजन किस वर्ष हुआ?
- 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' यह कथन किसका है?
- 1907 का सूरत अधिवेशन किस कारण से प्रसिद्ध है?
- मार्ले-मिंटो सुधार (1909) में किसके लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की गई?
- गदर पार्टी की स्थापना कहाँ हुई?
- लखनऊ समझौता किस वर्ष हुआ?
- बाल गंगाधर तिलक को 1908 में किस स्थान पर निर्वासित किया गया?
- 'पंजाब केसरी' किसे कहा जाता है?
- खुदीराम बोस को किस वर्ष फाँसी दी गई?
- स्वदेशी शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया?
- 'अभिनव भारत' के संस्थापक कौन थे?
- (अ) 1905
- (ब) लोकमान्य तिलक
- (ब) नरम-उग्र विभाजन
- (ब) मुसलमानों
- (स) सैन फ्रांसिस्को
- (स) 1916
- (ब) मंडाले
- (ब) लाला लाजपत राय
- (ब) 1908
- (ब) विश्वनाथ नारायण मंडलिक
- (ब) विनायक दामोदर सावरकर
12 · वन-लाइनर सारांश (वर्गीकृत) (Grouped One-Liner Summary) Summary
- 📅 खंड 01 · कालक्रम — तिथि एवं घटना (तथ्य 01–20)
- • जुलाई 1905 — लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन की घोषणा; घोषित कारण प्रशासनिक सुविधा, वास्तविक उद्देश्य बंगाली राष्ट्रवाद का विभाजन। UPSC CGPSC
- • 16 अक्टूबर 1905 — विभाजन लागू; इसी दिन रवींद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर 'रक्षाबंधन दिवस' व शोक दिवस मनाया गया।
- • 7 अगस्त 1905 — कलकत्ता टाउन हॉल से स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन का औपचारिक शुभारंभ।
- • 1906 — कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन, अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी; पहली बार 'स्वराज' को लक्ष्य घोषित किया गया।
- • 30 दिसंबर 1906 — मुस्लिम लीग की स्थापना, ढाका (नवाब सलीमुल्ला + आगा खाँ)।
- • 1907 — सूरत अधिवेशन: कांग्रेस का नरम दल व गरम दल में विभाजन; अध्यक्ष रासबिहारी घोष। CGPSC UPPCS
- • 30 अप्रैल 1908 — मुजफ्फरपुर बम कांड — खुदीराम बोस व प्रफुल्ल चाकी; लक्ष्य किंग्सफोर्ड चूक गया। NET 2017
- • 11 अगस्त 1908 — खुदीराम बोस को फाँसी; भारत के सबसे कम आयु (18 वर्ष) के शहीदों में।
- • 1908 — अलीपुर बम कांड — अरविंद घोष व बारीन्द्र कुमार घोष गिरफ्तार; क्रांतिकारियों पर पहला बड़ा मुकदमा।
- • 1908 — तिलक को 6 वर्ष की सजा तथा मंडाले (बर्मा) निर्वासन; बंबई के मिल-मजदूरों की ऐतिहासिक हड़ताल।
- • 1909 — मॉर्ले-मिंटो सुधार (भारतीय परिषद अधिनियम): मुसलमानों हेतु पृथक निर्वाचन मंडल। UPSC 2015
- • 1 जुलाई 1909 — लंदन में मदनलाल ढींगरा द्वारा कर्जन वाइली की हत्या; अगस्त 1909 में फाँसी।
- • 1911 — बंगाल विभाजन रद्द; राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित (दिल्ली दरबार)।
- • 23 दिसंबर 1912 — दिल्ली षड्यंत्र (बम) कांड — वायसराय हार्डिंग के जुलूस पर बम; नेतृत्व रासबिहारी बोस।
- • 1913 — गदर पार्टी की स्थापना, सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका); संस्थापक लाला हरदयाल। UPSC 2010
- • 1914 — कोमागाटा मारू घटना — जहाज के प्रमुख बाबा गुरदित सिंह; कलकत्ता के निकट बज-बज गोलीकांड।
- • 1915 — गदर विद्रोह की योजना विफल; रासबिहारी बोस जापान चले गए, जो आगे आजाद हिंद फौज का बीज बना।
- • 1916 — होमरूल लीग — तिलक (अप्रैल, पूना) तथा एनी बेसेंट (सितंबर, मद्रास)।
- • दिसंबर 1916 — लखनऊ समझौता: कांग्रेस-लीग एकता एवं नरम-गरम दल का पुनर्मिलन; कांग्रेस अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार। UPSC 2019
- • 1919 — रौलट एक्ट एवं जलियाँवाला बाग कांड — उग्रपंथी युग का समापन, गांधी युग का आरंभ।
- 🌟 खंड 02 · व्यक्तित्व — उपनाम, कथन एवं योगदान (तथ्य 21–35)
- • बाल गंगाधर तिलक — 'लोकमान्य'; वैलेंटाइन शिरोल ने इन्हें 'भारतीय अशांति का जनक' कहा।
- • तिलक का नारा — "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।" UPSC 1979
- • तिलक के पत्र — केसरी (मराठी) व मराठा (अंग्रेजी); मंडाले जेल में 'गीता रहस्य' की रचना; गणपति व शिवाजी उत्सव के प्रवर्तक।
- • बिपिन चंद्र पाल — 'भारत में क्रांतिकारी विचारों के जनक'; बंगाल के प्रमुख राष्ट्रवादी चिंतक; पत्र — 'न्यू इंडिया'।
- • लाला लाजपत राय — 'पंजाब केसरी'; 1928 में साइमन कमीशन विरोध के दौरान लाठी प्रहार से निधन।
- • अरविंद घोष — 'क्रांतिकारी से महायोगी'; अलीपुर केस के बाद राजनीति त्यागकर पांडिचेरी प्रस्थान।
- • लाल-बाल-पाल — लाला लाजपत राय + बाल गंगाधर तिलक + बिपिन चंद्र पाल; उग्रवाद की त्रिमूर्ति। State PSC
- • लाला हरदयाल — गदर पार्टी के संस्थापक; 'गदर' साप्ताहिक (उर्दू व पंजाबी) के प्रकाशक।
- • विनायक दामोदर सावरकर — 'अभिनव भारत' के संस्थापक; ग्रंथ — '1857 का प्रथम भारतीय स्वातंत्र्य समर'। CGPSC
- • रासबिहारी बोस — दिल्ली बम कांड के सूत्रधार; जापान में भारतीय स्वतंत्रता संघ के संस्थापक।
- • श्यामजी कृष्ण वर्मा — लंदन में 'इंडिया हाउस' (1905) तथा 'इंडियन सोशियोलॉजिस्ट' पत्र।
- • मैडम भीकाजी कामा — 1907 में स्टटगार्ट (जर्मनी) के अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में भारतीय ध्वज फहराया।
- • अश्विनी कुमार दत्त — बारीसाल में 'स्वदेश बांधव समिति'; स्वदेशी आंदोलन के जनाधार निर्माता।
- • प्रफुल्ल चाकी — मुजफ्फरपुर कांड में सहभागी; गिरफ्तारी से बचने हेतु आत्मबलिदान।
- • अनंत लक्ष्मण कान्हेरे — 1909 नासिक षड्यंत्र में कलेक्टर जैक्सन की हत्या; अभिनव भारत से संबद्ध।
- 💣 खंड 03 · क्रांतिकारी संगठन एवं प्रमुख कांड (तथ्य 36–45)
- • अनुशीलन समिति — 1902, कलकत्ता; संस्थापक प्रमथनाथ मित्र; बंगाल के क्रांतिकारियों का प्रथम संगठित मंच।
- • युगांतर दल — बारीन्द्र कुमार घोष व भूपेंद्रनाथ दत्त; 'युगांतर' पत्रिका का प्रकाशन।
- • अभिनव भारत — 1904, नासिक; सावरकर बंधुओं द्वारा गठित गुप्त क्रांतिकारी संस्था।
- • इंडिया हाउस, लंदन — विदेश में भारतीय क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र; सावरकर व ढींगरा यहीं सक्रिय रहे।
- • युगांतर आश्रम, सैन फ्रांसिस्को — गदर पार्टी का मुख्यालय; प्रवासी पंजाबी सिख इसका मुख्य आधार।
- • मुस्लिम लीग — ढाका में स्थापित; पृथक निर्वाचन की माँग यहीं से उठी जो 1909 में स्वीकृत हुई।
- • नासिक षड्यंत्र केस (1909) — सावरकर की गिरफ्तारी व आजीवन कारावास (कालापानी) का आधार।
- • दिल्ली-लाहौर षड्यंत्र (1912–15) — रासबिहारी बोस व सचिन्द्रनाथ सान्याल का संयुक्त अभियान।
- • हिंदू-जर्मन षड्यंत्र (1914–17) — प्रथम विश्वयुद्ध में गदर पार्टी + बर्लिन समिति की सशस्त्र योजना।
- • बंगाल नेशनल कॉलेज (1906) — राष्ट्रीय शिक्षा का प्रतीक; प्रथम प्राचार्य अरविंद घोष।
- 📌 खंड 04 · अवधारणाएँ एवं शब्दावली (तथ्य 46–55)
- • गरम दल (उग्रवाद) — लक्ष्य 'स्वराज', साधन आत्मनिर्भरता व संघर्ष; नरम दल की याचना-नीति का विरोध।
- • चतुःसूत्री कार्यक्रम — स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा एवं निष्क्रिय प्रतिरोध।
- • स्वदेशी — भारतीय वस्तुओं का उपयोग; इस शब्द के प्रयोग का श्रेय विश्वनाथ नारायण मंडलिक को।
- • बहिष्कार — विदेशी वस्तुओं, सरकारी विद्यालयों, न्यायालयों तथा उपाधियों का त्याग।
- • 'वंदे मातरम्' — बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास 'आनंदमठ' से; स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक-गीत।
- • 'आमार सोनार बांग्ला' — रवींद्रनाथ टैगोर की रचना; विभाजन-विरोध का प्रमुख गीत (आज बांग्लादेश का राष्ट्रगान)।
- • पृथक निर्वाचन मंडल — साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व की नींव; आगे चलकर विभाजन की राजनीति का आधार।
- • निष्क्रिय प्रतिरोध — तिलक व अरविंद द्वारा प्रतिपादित; सरकार से असहयोग की पूर्व-गांधी पद्धति।
- • सूरत विभाजन का कारण — अध्यक्ष पद तथा स्वदेशी-बहिष्कार प्रस्तावों के विस्तार पर मतभेद।
- • क्रांतिकारी राष्ट्रवाद — व्यक्तिगत वीरता व बलिदान पर आधारित पद्धति; जनांदोलन का अभाव इसकी सीमा रही।
- 🎯 खंड 05 · परीक्षा-कुंजी एवं सूत्र (तथ्य 56–60 + Mnemonics)
- • सर्वाधिक दोहराए जाने वाले वर्ष — 1905 · 1907 · 1909 · 1913 · 1916; इन्हें रटना पूरे अध्याय का 70% कवर कर देता है।
- • लखनऊ समझौते में मुस्लिम लीग की ओर से मुख्य भूमिका मोहम्मद अली जिन्ना की, जिन्हें तब 'हिंदू-मुस्लिम एकता का दूत' कहा गया।
- • प्रश्न-प्रवृत्ति — 'संस्था + संस्थापक + वर्ष + स्थान' के मिलान (Matching) वाले प्रश्न सर्वाधिक पूछे जाते हैं।
- • क्रांतिकारी आंदोलन की सबसे बड़ी देन — युवाओं में आत्म-बलिदान व निर्भयता की भावना का संचार।
- • उग्रपंथी विरासत — 'स्वराज' की यही माँग आगे चलकर 1929 के 'पूर्ण स्वराज' प्रस्ताव की वैचारिक पृष्ठभूमि बनी।
- 🧠 याद रखने के सूत्र (Mnemonics)
- • लाल-बाल-पाल → लाला लाजपत राय · बाल गंगाधर तिलक · पाल — बिपिन चंद्र पाल।
- • "बम का क्रम" — 8-9-12 → 1908 मुजफ्फरपुर · 1909 कर्जन वाइली (लंदन) · 1912 दिल्ली।
- • "5-7-9-11" → 1905 विभाजन · 1907 सूरत फूट · 1909 मॉर्ले-मिंटो · 1911 विभाजन रद्द।
- • चतुःसूत्री = "स्व-ब-रा-नि" → स्वदेशी · बहिष्कार · राष्ट्रीय शिक्षा · निष्क्रिय प्रतिरोध।
- • "तीन विदेशी ठिकाने" → लंदन (इंडिया हाउस) · सैन फ्रांसिस्को (गदर) · बर्लिन (बर्लिन समिति)।
- उग्रपंथी युग (1905-1919) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का वह चरण था जिसने 'पूर्ण स्वराज' की माँग को स्पष्ट किया।
- इस युग में स्वदेशी, बहिष्कार, शिक्षा बहिष्कार जैसे नए हथियारों का उपयोग किया गया, जो आगामी आंदोलनों के लिए प्रेरणा बने।
- क्रांतिकारी आंदोलन ने युवाओं में आत्म-बलिदान की भावना को जगाया और ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।
- 1905 से 1916 तक का काल — सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में सर्वाधिक पूछा जाने वाला विषय