सिंधु घाटी सभ्यता Indus Valley Civilization
भारत की प्राचीनतम नगर-सभ्यता — हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, नगर-योजना, व्यापार, धर्म, लिपि और रहस्यमय पतन। पूर्ण सिद्धांत, तालिकाएँ, PYQ और स्वयं-जाँच एक ही पृष्ठ पर।
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01सिंधु सभ्यता — एक दृष्टि Indus Civilization — An Overview
सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) विश्व की चार प्राचीनतम नगर-सभ्यताओं में से एक है — मिस्र, मेसोपोटामिया और चीन के समकालीन। यह अपनी अद्भुत नगर-योजना, जल-निकासी व्यवस्था, मानकीकृत ईंटों और शांतिप्रिय समाज के लिए जानी जाती है।
इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, क्योंकि इसका प्रथम स्थल हड़प्पा (पाकिस्तान) में 1921 में खोजा गया था। यह सभ्यता लगभग 3300 ई.पू. से 1900 ई.पू. तक फली-फूली, और इसका विस्तार उत्तर-पश्चिमी भारत एवं पूर्वी पाकिस्तान में था।
नगर-योजना
- आयताकार सड़कें (ग्रिड पैटर्न)
- सीवरेज एवं जल-निकासी
- पकी ईंटों का प्रयोग
- ऊँचा दुर्ग (सिटाडेल)
- निचला नगर (लोअर टाउन)
अर्थव्यवस्था
- कृषि — गेहूँ, जौ, कपास
- पशुपालन — गाय, भैंस, सूअर
- व्यापार — मेसोपोटामिया, ईरान
- बाट-माप — मानकीकृत
- हस्तशिल्प — मनके, बर्तन
धर्म एवं संस्कृति
- मातृदेवी — उर्वरता की देवी
- पशुपति — योग मुद्रा में
- पीपल, नीम — वृक्ष-पूजा
- नाग-देवता का प्रमाण
- लिंग-पूजा के संकेत
- काल-सीमा — 3300–1900 ई.पू. (प्रारंभिक 3300–2600, परिपक्व 2600–1900, उत्तर-हड़प्पा 1900–1300)
- विस्तार क्षेत्र — उत्तर में मांडा (जम्मू) से दक्षिण में दैमाबाद (महाराष्ट्र) तक; पश्चिम में सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान) से पूर्व में आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) तक।
- सर्वाधिक उत्खनित स्थल — मोहनजोदड़ो (सिंध) एवं हड़प्पा (पंजाब)।
- अद्वितीय विशेषता — स्नानागार (Great Bath) — मोहनजोदड़ो में विशाल जल-कुंड, धार्मिक स्नान हेतु।
- जीवन-शैली — शांतिप्रिय, कोई स्पष्ट सैन्य-साक्ष्य नहीं; हथियारों की तुलना में कृषि-उपकरण अधिक मिले हैं।
- अज्ञात — लिपि अब तक अपठित है; इसलिए राजा, धर्म-ग्रंथ एवं प्रशासनिक संरचना के बारे में निश्चित जानकारी नहीं है।
02खोज का इतिहास Discovery and Excavation
सिंधु सभ्यता की खोज आधुनिक भारतीय पुरातत्त्व के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। यह खोज संयोग से हुई, परिणामस्वरूप इतिहास का एक पूरा अध्याय पुनः लिखा गया।
| सन् | उत्खनन / खोज | विवरण |
|---|---|---|
| 1856 | ब्रदर्स ईस्टविक — हड़प्पा रेलवे ट्रैक | लाहौर-मुल्तान रेलवे के लिए बलुआ पत्थर की ईंटों का उपयोग; सभ्यता के अवशेष पहली बार दिखे। |
| 1875 | अलेक्जेंडर कनिंघम | हड़प्पा की मुहरें एकत्र कीं, पर तिथि निर्धारण में गलती (लगभग 300 ईस्वी) की। |
| 1921 | राय बहादुर दयाराम साहनी | हड़प्पा में प्रथम नियोजित उत्खनन; सभ्यता की प्राचीनता का संकेत मिला। |
| 1922–1924 | राखालदास बनर्जी | मोहनजोदड़ो का उत्खनन; 'कुषाणकालीन स्तूप' समझा, पर प्राचीनता स्पष्ट हुई। |
| 1924 | जॉन मार्शल | ASI महानिदेशक ने इलस्ट्रेटेड लंदन न्यूज़ में घोषणा की — 'एक अज्ञात सभ्यता'। |
| 1925–1931 | ई. जे. एच. मैके | मोहनजोदड़ो का व्यवस्थित उत्खनन; स्तरीकरण, स्नानागार, अन्नागार की पहचान। |
| 1940–1960 | मोर्टिमर व्हीलर | हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो में सैन्य-स्थापत्य का सिद्धांत; उत्खनन-तकनीकों में सुधार। |
| 1980–1990 | एस. आर. राव | लोथल, धौलावीरा, कालीबंगा में उत्खनन; समुद्री व्यापार एवं जल-प्रबंधन का प्रमाण। |
| 2010–2018 | राखीगढ़ी (भारत) में निरंतर कार्य | हड़प्पा कालीन सबसे बड़ा स्थल (224 हेक्टेयर); नगर-योजना एवं कारखानों के अवशेष। |
- सिंधु सभ्यता के प्रथम उत्खननकर्ता — राय बहादुर दयाराम साहनी (हड़प्पा, 1921)।
- मोहनजोदड़ो के प्रथम उत्खननकर्ता — राखालदास बनर्जी (1922)।
- सिंधु सभ्यता के 'जनक' — जॉन मार्शल (उन्होंने ही विश्व को इस सभ्यता से परिचित कराया)।
- सर्वाधिक स्थल खोजने वाले — एस. आर. राव (लोथल, धौलावीरा सहित अनेक)।
- व्हीलर ने सैन्य-आधारित व्याख्या दी, पर बाद के अनुसंधानों ने सभ्यता के शांतिप्रिय स्वरूप को अधिक समर्थन दिया।
03प्रमुख स्थल Major Sites
अब तक 1400 से अधिक सिंधु-स्थल खोजे जा चुके हैं। इनमें से कुछ प्रमुख स्थलों ने इस सभ्यता के नगर-जीवन, अर्थव्यवस्था, धर्म एवं दैनिक जीवन के बारे में सबसे महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की हैं।
विशेषता: सिंधु सभ्यता का प्रथम खोजा गया स्थल। दो टीले — पश्चिमी दुर्ग एवं पूर्वी नगर।
- छह अन्नागार (ग्रेनरी) — व्यवस्थित खाद्य-भंडारण
- कार्नेलियन मनकों की कारखाना-शैली की उत्पादन-इकाई
- विशाल श्मशान-स्थल (R-37) — 57 कब्रें, लाल मिट्टी के बर्तन
- मुहरों पर 'हड़प्पा लिपि' एवं बैल-चिह्न
- स्तूप (बौद्ध कालीन) — सबसे ऊँचे टीले पर
विशेषता: सबसे बड़ा एवं सर्वाधिक उत्खनित स्थल। 'मुर्दों का टीला' (सिंधी में अर्थ)।
- विशाल स्नानागार (Great Bath) — 12×7 मीटर, जल-रोधी ईंटें
- अन्नागार — 27 खण्डों वाला विशाल भवन
- पशुपति मुहर — योग मुद्रा में देवता, तीन मुख, सींग
- नर्तकी की कांस्य-प्रतिमा — 'डांसिंग गर्ल' (लगभग 10 सेमी)
- पुजारी-राजा की प्रतिमा — स्टीटाइट, दाढ़ी, बाँधा केश
- नालियाँ, सीवरेज, ईंट-प्लेटफार्म — उन्नत जल-प्रबंधन
विशेषता: एकमात्र गोदी-बाड़ा (dockyard) — समुद्री व्यापार का प्रमाण।
- गोदी — 218×37 मीटर, ईंटों से निर्मित, ज्वार-भाटा से जुड़ी
- चावल की भूसी — यहाँ से चावल का सबसे प्राचीन प्रमाण
- बाट-माप — चर्ट पत्थर, सभी स्थलों पर मानकीकृत
- अग्निकुण्ड — धार्मिक अनुष्ठान हेतु
- मनकों एवं ताँबे की वस्तुओं की कारखानाएँ
विशेषता: सबसे अद्वितीय जल-प्रबंधन — 16 बड़े जलाशय, बाँधें एवं जल-मार्ग।
- जलाशय — पत्थर-कटे, मानसूनी जल को संग्रहित करने हेतु
- दुर्ग-भाग — तीन स्तरीय (ऊँचा, मध्य, निचला)
- शिलालेख — दस बड़े प्रतीक-चिह्न, लिपि का महत्वपूर्ण नमूना
- बहु-स्तरीय बाँध — दो नदियों (मांसर नदी) का जल रोकने हेतु
- विशाल कार्यशालाएँ — मनके, पत्थर के औज़ार
विशेषता: सिंधु एवं सरस्वती नदियों के मध्य स्थित। जुते खेत — विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत।
- जुताई के खाँचे — क्रॉस-पैटर्न में (गेहूँ एवं जौ बोने हेतु)
- मिट्टी के बर्तनों पर अर्ध-चंद्राकार चिह्न (अब तक अपठित)
- अग्नि-वेदी — धार्मिक अनुष्ठान
- ताँबे की वस्तुएँ एवं मनके
विशेषता: सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल (224 हेक्टेयर)।
- विशाल गढ़ — दीवारों, प्राचीरों एवं बुर्जों के अवशेष
- कारखाने — मनके, शंख, हड्डी के उपकरण निर्माण
- सिंधु-गंगा संपर्क — पूर्वी सीमा पर स्थित
- मानकीकृत ईंटें (3:2:1 अनुपात)
- सात टीले — एक साथ सात बस्तियाँ
- सबसे बड़ा स्थल — राखीगढ़ी (हरियाणा) → 224 हेक्टेयर
- सबसे छोटा स्थल — कालीबंगा (राजस्थान) → लगभग 12 हेक्टेयर
- गोदी-बाड़ा वाला एकमात्र स्थल — लोथल (गुजरात) — समुद्री व्यापार का प्रमाण
- सर्वाधिक उत्खनित स्थल — मोहनजोदड़ो — 'मुर्दों का टीला'
- सिंधु-सरस्वती सभ्यता — अधिकांश स्थल (राखीगढ़ी, कालीबंगा, बनावली, धौलावीरा) सरस्वती (घग्गर-हकरा) नदी-तट पर हैं।
04नगर-योजना एवं वास्तु Urban Planning and Architecture
सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धि उसकी नगर-योजना है। ग्रिड-पैटर्न सड़कें, मानकीकृत ईंटें, सीवरेज एवं जल-निकासी — ये सभी उस समय अद्वितीय थे जब मिस्र में पिरामिड बन रहे थे और मेसोपोटामिया में मंदिर-नगर विकसित हो रहे थे।
नगर-निर्माण Grid Pattern
- ग्रिड-प्रणाली — सड़कें पूर्व-पश्चिम एवं उत्तर-दक्षिण में समानांतर, नगर को खण्डों (blocks) में विभाजित।
- ईंटें — 3:2:1 अनुपात में, पकी हुई (बिल्कुल मानकीकृत)।
- दो भाग — ऊँचा दुर्ग (Citadel) (पश्चिम) एवं निचला नगर (पूर्व) — संभवतः प्रशासनिक-धार्मिक केन्द्र।
- दीवार — नगर चारों ओर विशाल प्राचीर से घिरा था (सुरक्षा एवं बाढ़-नियंत्रण)।
जल-प्रबंधन Water Management
- स्नानागार — मोहनजोदड़ो में 'Great Bath' — धार्मिक स्नान हेतु, जल-रोधी ईंटों एवं डामर से निर्मित।
- नालियाँ — घरों से सड़कों तक जल-निकासी; मिट्टी एवं पत्थर के ढक्कन।
- जलाशय — धौलावीरा में 16 बड़े जलाशय — वर्षा-जल संचयन।
- कुँए — प्रत्येक मोहल्ले में सार्वजनिक कुँए, घरों में निजी कुँए।
वास्तु एवं भवन Architecture
- अन्नागार (Granary) — हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो में विशाल भवन, संभवतः खाद्य-भंडारण एवं कर-संग्रह केन्द्र।
- सभागार — हड़प्पा में स्तंभ-युक्त विशाल हॉल।
- आवास — प्रत्येक घर में कमरे, आँगन, कुँआ, नाली; दो-मंजिला घरों के संकेत।
- सार्वजनिक भवन — विशाल स्तंभ-हॉल (सभाएँ, व्यापारिक गतिविधियाँ)।
सीवरेज एवं स्वच्छता Sanitation
- प्रत्येक घर से नाली — ढकी हुई, मिट्टी के पाइप से जुड़ी।
- सड़कों पर मुख्य नालियाँ — मैला-पानी नगर के बाहर बहा दिया जाता था।
- स्नान-कक्ष — प्रत्येक घर में स्नान-स्थल, जल-निकासी की व्यवस्था।
- शौचालय — कुछ घरों में शौच-कूप (cesspit) मिले हैं — विश्व की प्राचीनतम स्वच्छता-प्रणाली।
- ईंटों का मानक अनुपात — 3:2:1 (लंबाई:चौड़ाई:ऊँचाई) — सभी स्थलों पर समान।
- दुर्ग (Citadel) — ऊँचे चबूतरे पर निर्मित, संभवतः प्रशासनिक-धार्मिक केन्द्र।
- विश्व की प्राचीनतम सीवरेज-प्रणाली — मोहनजोदड़ो (लगभग 2500 ई.पू.)।
- ग्रिड-प्रणाली — सिंधु सभ्यता की विशिष्ट पहचान, यूनान एवं रोम से लगभग 2000 वर्ष पूर्व।
- सिंधु सभ्यता में मंदिर या राजमहल का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला — यह अद्वितीय है।
05अर्थव्यवस्था एवं व्यापार Economy and Trade
सिंधु सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी, पर व्यापार और हस्तशिल्प भी उतने ही महत्वपूर्ण थे। मानकीकृत बाट-माप प्रणाली से पता चलता है कि वाणिज्य कितना व्यवस्थित था।
कृषि एवं पशुपालन Agriculture & Animal Husbandry
- फसलें — गेहूँ, जौ, दाल, तिल, कपास, चावल (लोथल में प्रमाण) एवं खजूर।
- कपास — विश्व में सर्वप्रथम कपास-उत्पादक सभ्यता ('पाजामा' शब्द संस्कृत 'पाद' + 'जाम' से)।
- पशुपालन — गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर, कुत्ता, गधा, ऊँट (बाद में)।
- जुताई — कालीबंगा में विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत मिला (क्रॉस-पैटर्न)।
व्यापार एवं वाणिज्य Trade & Commerce
- आंतरिक व्यापार — सिंधु-सरस्वती क्षेत्र में मनके, ताँबा, शंख, सोना, चाँदी का विनिमय।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार — मेसोपोटामिया (दिलमुन), ईरान, अफगानिस्तान, मध्य एशिया।
- निर्यात — मनके, कपास, शंख, चाँदी, ताँबा, सुगंधित लकड़ी।
- आयात — लापीस लाजुली (अफगानिस्तान), सोना (दक्षिण भारत), चाँदी (ईरान)।
हस्तशिल्प एवं उद्योग Crafts & Industries
- मनके — कार्नेलियन, पीतल, शंख, पत्थर — मानकीकृत डिज़ाइन।
- धातु-कार्य — ताँबा, काँसा, सोना, चाँदी — ढलाई, पीटा गया, मोड़ा गया।
- कुम्हारी — चित्रित एवं सादे बर्तन, ताम्र-चिह्न।
- शंख-उद्योग — चूड़ियाँ, बटन, कटोरे — लोथल एवं मोहनजोदड़ो में।
बाट-माप प्रणाली Weights & Measures
- मानकीकृत बाट — चर्ट, स्टीटाइट, पत्थर — गोल एवं आयताकार।
- दशमलव प्रणाली — अनुपात 1:2:4:8:16:32:64 — अत्यंत व्यवस्थित।
- छोटे बाट — 1, 2, 4 ग्राम; बड़े बाट — 100, 200, 500 ग्राम।
- नाप — लकड़ी, बाँस, ताँबे के पैमाने, चिह्न अंकित।
- यह प्रणाली पूरे सिंधु-क्षेत्र में एक-सी थी — एकीकृत अर्थव्यवस्था का प्रमाण।
- विश्व में कपास का प्रथम उत्पादन — सिंधु सभ्यता; अंग्रेज़ी 'cotton' संस्कृत 'कार्पास' से।
- सिंधु-मेसोपोटामिया व्यापार — दिलमुन (बहरीन) मध्यवर्ती बंदरगाह था।
- लोथल की गोदी — ज्वार-भाटा आधारित, विशाल जहाजों के लिए उपयुक्त।
- मुद्रा — सिंधु सभ्यता में सिक्के नहीं मिले; विनिमय बाट-माप एवं वस्तु-विनिमय पर आधारित था।
- मुहरें — व्यापार-चिह्न के रूप में उपयोग; माल-भंडारण एवं व्यापार-अभिलेख।
06धर्म एवं सामाजिक जीवन Religion and Social Life
सिंधु सभ्यता का धर्म प्राकृतिक उपासना पर आधारित था। मातृदेवी, पशुपति, वृक्ष-पूजा एवं नाग-देवता — ये वे तत्व हैं जो बाद में हिंदू धर्म में विलीन हो गए।
पूजा-पद्धति एवं देवता Deities & Worship
- मातृदेवी (माँ देवी) — उर्वरता की देवी; खिलौनों एवं मूर्तियों में स्त्री-प्रधान प्रतिमा।
- पशुपति — 'प्रोटो-शिव' — मोहनजोदड़ो की मुहर पर योग-मुद्रा में, तीन मुख, सींग, सिर पर शिरोवेष्टन। चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा, भैंस, हिरण।
- वृक्ष-पूजा — पीपल, नीम — पवित्र वृक्ष; बाद में बौद्ध-हिंदू परंपरा में विलीन।
- नाग (सर्प) — मुहरों एवं बर्तनों पर सर्प-चिह्न — नाग-देवता की परंपरा।
धार्मिक अनुष्ठान Rituals & Practices
- स्नानागार — 'Great Bath' — धार्मिक स्नान (पवित्र स्नान) हेतु; बाद की तीर्थ-यात्रा परंपरा का आरंभ।
- अग्नि-वेदी — कालीबंगा एवं लोथल में — अग्नि-पूजा के प्रमाण।
- बलि-प्रथा — पशु-बलि के कुछ संकेत (हड्डियाँ), पर निश्चित नहीं।
- योग — पशुपति मुहर पर योग-मुद्रा — विश्व की प्राचीनतम योग-प्रतिमा।
सामाजिक जीवन Social Life
- वर्ग-भेद — ऊँचे दुर्ग में बड़े भवन (संभवतः शासक-वर्ग), निचले नगर में सामान्य जन।
- दैनिक जीवन — स्नान, आँगन, रसोई, बर्तन, खिलौने, संगीत (झाँझ, मृदंग)।
- खिलौने — मिट्टी के पहियेदार खिलौने, मूर्तियाँ — बच्चों पर ध्यान।
- खाद्य-पदार्थ — गेहूँ, जौ, दाल, मछली, मांस (गाय, भैंस, सूअर), फल (खजूर, अंजीर)।
कला एवं मनोरंजन Art & Entertainment
- मूर्तिकला — कांस्य 'डांसिंग गर्ल' (लगभग 10 सेमी), 'पुजारी-राजा' (स्टीटाइट), ताँबे की गाड़ी।
- मुहर-निर्माण — स्टीटाइट, हाथी, बाघ, गैंडा, बैल — कला का उत्कृष्ट नमूना।
- संगीत — मृदंग, झाँझ, वीणा (मुहरों पर संगीत-दृश्य)।
- खेल — पासे (छोटे घन), चेस/चौपड़ जैसे बोर्ड-खेल (चौकोर खण्ड)।
- पशुपति मुहर — सिंधु धर्म का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य; इसे प्रोटो-शिव कहा जाता है।
- मातृदेवी — सिंधु धर्म की प्रमुख देवी; उर्वरता-पूजा का प्रतीक।
- स्नानागार — धार्मिक स्नान का प्रथम प्रमाण; बाद की हिंदू-तीर्थ परंपरा से जोड़ा गया।
- लिंग-पूजा — मोहनजोदड़ो में पत्थर के लिंग-प्रतीक मिले हैं, पर स्पष्टता नहीं।
- सिंधु सभ्यता में कोई स्पष्ट मंदिर नहीं मिला — पूजा संभवतः खुले स्थानों या घरों में होती थी।
07लिपि — रहस्यमयी प्रतीक The Indus Script — An Unsolved Riddle
सिंधु सभ्यता की लिपि आज तक अपठित (undeciphered) है। लगभग 400 चिह्न (signs) पहचाने गए हैं, पर उनका अर्थ अज्ञात है। यदि लिपि पढ़ी जाती है, तो सभ्यता के राजा, धर्म, इतिहास एवं पतन के कारणों का पता चल सकता है।
लिपि की विशेषताएँ Characteristics
- चिह्नों की संख्या — लगभग 400; सबसे अधिक उपयोग लगभग 100–200 चिह्न।
- दिशा — सामान्यतः दाएँ से बाएँ (boustrophedon — एक पंक्ति दाएँ, दूसरी बाएँ)।
- लिखावट — मुहरों, बर्तनों, ताँबे की पट्टियों, एवं हड्डी के औजारों पर।
- प्रतीक — पशु (बैल, गैंडा, हाथी), मनुष्य (पशुपति), पौधे, ज्यामितीय चिह्न।
- अब तक लिपि का कोई 'रोसेटा स्टोन' नहीं मिला — इसलिए पठन असंभव।
प्रमुख सिद्धांत Theories
- द्रविड़ियन सिद्धांत — आईरावथम महादेवन के अनुसार लिपि प्राचीन तमिल या द्रविड़ भाषा थी।
- संस्कृत/इंडो-आर्यन सिद्धांत — कुछ विद्वान (शंकर, राव) इसे प्रारंभिक संस्कृत मानते हैं।
- मुंडा / ऑस्ट्रो-एशियाटिक — कुछ विशेषज्ञ इसे मुंडा भाषा-परिवार से जोड़ते हैं।
- सुमेरियन संबंध — कुछ प्रतीकों में सुमेरियन चित्रलिपि से समानता।
- अब तक कोई भी सिद्धांत पूर्णतः सिद्ध नहीं हो पाया है।
- लिपि के प्रथम शोधकर्ता — जॉन मार्शल (1924) ने लिपि को 'सिंधु लिपि' नाम दिया।
- सबसे बड़ा लिखित साक्ष्य — धौलावीरा में दस चिह्नों की एक लंबी पंक्ति।
- मुहरों पर चिह्न — अधिकतर 5–10 चिह्न; सबसे लंबा 26 चिह्न (लोथल)।
- लिपि पढ़ी नहीं गई, इसलिए सभ्यता का इतिहास, राजा, धर्म-ग्रंथ, विधान अज्ञात हैं।
- नवीनतम शोध — AI (मशीन लर्निंग) द्वारा चिह्नों की तुलना की जा रही है; अब तक सफलता नहीं।
08पतन के कारण Theories of Decline
लगभग 1900 ई.पू. से सिंधु सभ्यता का पतन आरंभ हुआ। शहरों का परित्याग, व्यापार में कमी, मानकीकरण का अंत — पर पतन के कारणों पर आज भी विद्वानों में मतभेद है।
पर्यावरणीय कारण Environmental
- नदी-परिवर्तन — सरस्वती (घग्गर-हकरा) नदी सूखी; जल-स्रोतों की कमी।
- जलवायु परिवर्तन — लगभग 2000 ई.पू. में मानसून कमज़ोर; सूखा।
- वन-विनाश — ईंट-निर्माण हेतु अत्यधिक वन-कटाई; पारिस्थितिकी असंतुलन।
- भूकंप — कुछ स्थलों (मोहनजोदड़ो) पर भूकंप के संकेत।
आर्थिक एवं सामाजिक Economic & Social
- व्यापार-मार्गों का बदलाव — मेसोपोटामिया से व्यापार घटा; आयात-निर्यात ठप।
- जनसंख्या-वृद्धि — संसाधनों पर अत्यधिक दबाव, नगरों की क्षमता समाप्त।
- सामाजिक विघटन — बाट-माप प्रणाली का अंत; मानकीकरण समाप्त।
- उत्तर-हड़प्पा काल — शहर छोटे गाँवों में परिवर्तित; सभ्यता का ह्रास।
आक्रमण सिद्धांत Invasion Theory
- मोर्टिमर व्हीलर का सिद्धांत — 'आर्य-आक्रमण' ने सभ्यता को नष्ट किया।
- साक्ष्य — मोहनजोदड़ो में मिली कंकाल-श्रृंखला (व्हीलर ने इसे 'हत्या-प्रमाण' माना)।
- पर बाद के शोधों में यह अस्वीकृत — कंकाल-श्रृंखला एक ही स्थान पर नहीं, बल्कि विभिन्न कालों की थी।
- आज अधिकांश विद्वान पर्यावरणीय पतन को प्रमुख कारण मानते हैं।
- प्रमुख पर्यावरणीय कारण — सरस्वती नदी का सूखना (पर्यावरणीय विज्ञान के अनुसार)।
- व्यापार-पतन — मेसोपोटामिया के साथ व्यापार लगभग 1800 ई.पू. में समाप्त।
- उत्तर-हड़प्पा काल — 1900–1300 ई.पू. — सभ्यता का अवशिष्ट काल, ग्रामीण संस्कृति।
- आक्रमण सिद्धांत — अब अप्रमाणिक माना जाता है; व्हीलर का सिद्धांत खण्डित।
- पतन एक क्रमिक प्रक्रिया थी, अचानक नहीं — यह 300–400 वर्षों में हुआ।
09पिछले वर्षों के प्रश्न Previous Year Questions
UPSC · संघ लोक सेवा आयोग
- सिंधु घाटी सभ्यता के किस स्थल पर 'गोदी-बाड़ा' (dockyard) मिला है? UPSC (अ) हड़प्पा · (ब) मोहनजोदड़ो · (स) लोथल · (द) धौलावीरा उत्तर: (स) लोथल — एकमात्र स्थल जहाँ समुद्री गोदी के अवशेष मिले हैं।
- सिंधु सभ्यता की लिपि का सबसे बड़ा नमूना कहाँ मिला है? UPSC (अ) हड़प्पा · (ब) मोहनजोदड़ो · (स) धौलावीरा · (द) कालीबंगा उत्तर: (स) धौलावीरा — दस चिह्नों की एक लंबी पंक्ति।
- 'पशुपति मुहर' किस स्थल से मिली थी? UPSC (अ) हड़प्पा · (ब) मोहनजोदड़ो · (स) लोथल · (द) राखीगढ़ी उत्तर: (ब) मोहनजोदड़ो — योग-मुद्रा में तीन मुख वाले देवता की मुहर।
CGPSC · MPPSC · UPPSC
- सिंधु सभ्यता के किस स्थल पर 'विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत' मिला है? CGPSC (अ) कालीबंगा · (ब) राखीगढ़ी · (स) धौलावीरा · (द) बनावली उत्तर: (अ) कालीबंगा — राजस्थान में क्रॉस-पैटर्न में जुताई के निशान।
- सिंधु सभ्यता के प्रथम उत्खननकर्ता कौन थे? UPPSC (अ) राखालदास बनर्जी · (ब) राय बहादुर दयाराम साहनी · (स) जॉन मार्शल · (द) मोर्टिमर व्हीलर उत्तर: (ब) राय बहादुर दयाराम साहनी — हड़प्पा, 1921।
NTA NET · SET
- 'डांसिंग गर्ल' (नर्तकी) की कांस्य-प्रतिमा किस स्थल से मिली है? NET (अ) हड़प्पा · (ब) मोहनजोदड़ो · (स) लोथल · (द) धौलावीरा उत्तर: (ब) मोहनजोदड़ो — लगभग 10 सेमी की प्रसिद्ध प्रतिमा।
- सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल कौन-सा है? NET (अ) मोहनजोदड़ो · (ब) हड़प्पा · (स) राखीगढ़ी · (द) धौलावीरा उत्तर: (स) राखीगढ़ी — 224 हेक्टेयर, हरियाणा में।
- सिंधु सभ्यता का पतन — आज सबसे अधिक स्वीकृत कारण क्या है? NET (अ) आर्य-आक्रमण · (ब) पर्यावरणीय परिवर्तन · (स) विदेशी आक्रमण · (द) सामाजिक विघटन उत्तर: (ब) पर्यावरणीय परिवर्तन — सरस्वती नदी का सूखना, मानसून-परिवर्तन।