विजयनगर एवं बहमनी साम्राज्य
Vijayanagara & Bahmani Empires (1336–1646 CE)
14वीं शताब्दी के मध्य में दक्षिण भारत में दो शक्तिशाली राज्यों का उदय हुआ — विजयनगर (हिन्दू) और बहमनी (मुस्लिम)। इन दोनों के बीच निरन्तर संघर्ष, फिर भी दोनों ने अपने-अपने क्षेत्रों में कला, साहित्य, स्थापत्य एवं प्रशासन के अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किए। कृष्णदेव राय एवं महमूद गवाँ इस युग के दो महान व्यक्तित्व थे।
इस पृष्ठ में
- 01पृष्ठभूमि · दक्षिण भारत 14वीं सदी
- 02विजयनगर — संगम वंश (1336–1485)
- 03कृष्णदेव राय — तुलुव वंश (1509–1529)
- 04प्रशासन — अय्यगर, दंडनायक
- 05अर्थव्यवस्था — कृषि, व्यापार, सिक्के
- 06कला · साहित्य — अष्टदिग्गज
- 07बहमनी — अलाउद्दीन हसन
- 08महमूद गवाँ — प्रधानमंत्री
- 09बहमनी — विभाजन (5 राज्य)
- 10तालिकोटा · विजयनगर का अंत
- 11तुलना · सांस्कृतिक योगदान
- 12स्वयं जाँच
01पृष्ठभूमि · दक्षिण भारत 14वीं सदी Background — South India in the 14th Century
14वीं शताब्दी के प्रारम्भ में दक्षिण भारत में तीन प्रमुख शक्तियाँ थीं — पांड्य, काकतीय, होयसल। अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316) एवं मलिक काफूर के आक्रमणों ने इन राज्यों को कमजोर कर दिया। इस राजनीतिक शून्यता में हरिहर एवं बुक्का ने 1336 में विजयनगर साम्राज्य स्थापित किया, जबकि उसी समय बहमनी सल्तनत का भी उदय हुआ।
- विदेशी यात्री — निकोलो कोंटी (इतालवी), अब्दुर्रज़्ज़ाक (फ़ारसी), डोमिंगो पेस (पुर्तगाली), फ़रिस्ता (विजयनगर-बहमनी युद्ध)।
- तेलुगु-तमिल साहित्य — अमुक्तमाल्यदा (कृष्णदेव राय), राजतरंगिणी (गुलाम साहित्य)।
- शिलालेख — 5000 से अधिक ताम्र-पत्र एवं शिलालेख (कन्नड़, तेलुगु, संस्कृत, तमिल)।
- बहमनी स्रोत — बुरहान-ए-मासीर (सैयद अली), तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही (बरनी)।
02विजयनगर — संगम वंश (1336–1485) Vijayanagara — Sangama Dynasty
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना हरिहर प्रथम एवं बुक्का प्रथम (संगम वंश) ने की। इन्हें विद्यारण्य (स्वामी माधव) का आशीर्वाद प्राप्त था। उन्होंने कृष्णा-तुंगभद्रा के मध्य विजयनगर (हम्पी) नगर बसाया — जो विश्व-धरोहर स्थल है।
प्रमुख शासक (संगम)
- हरिहर प्रथम (1336–1356) — संस्थापक; होयसलों एवं पांड्यों पर विजय।
- बुक्का प्रथम (1356–1377) — बहमनी सल्तनत के साथ प्रथम संघर्ष; तुंगभद्रा नदी को सीमा बनाया।
- हरिहर द्वितीय (1377–1404) — गोवा, दक्षिण कोंकण एवं कृष्णा-कावेरी डेल्टा पर अधिकार।
- देवराय प्रथम (1406–1422) — बहमनी युद्ध में पराजय; पर बाद में उबरे।
- देवराय द्वितीय (1422–1446) — विजयनगर का पहला महान शासक; मुस्लिम सेनाओं को पराजित किया; कवियों का संरक्षण।
उपलब्धियाँ
- तुंगभद्रा पर विशाल बाँध एवं सिंचाई व्यवस्था।
- विदेशी व्यापार — कालीकट, कैंबे, गोवा बंदरगाह से यूरोप-चीन।
- संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, तमिल साहित्य का संरक्षण।
- इस काल में विरूपाक्ष मंदिर एवं हजारा राम मंदिर का निर्माण हुआ।
03तुलुव वंश — कृष्णदेव राय (1509–1529) Tuluva Dynasty — Krishnadevaraya
तुलुव वंश के कृष्णदेव राय विजयनगर साम्राज्य के सबसे महानतम शासक थे। उन्होंने बहमनी सल्तनत (विशेषकर बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर) को पराजित किया, पूर्वी गंगा राज्यों पर अधिकार किया, और साम्राज्य को अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचाया। वे स्वयं एक कुशल लेखक (तेलुगु में अमुक्तमाल्यदा) एवं कलाप्रेमी थे।
- तेलुगु साहित्य — उन्होंने 'अमुक्तमाल्यदा' (तेलुगु) की रचना की — जो भगवान विष्णु के भक्ति-काव्य पर आधारित है।
- अष्टदिग्गज — उनके दरबार में 8 विद्वान (पेद्दन, तेनालीराम, मुक्कु तिम्मन आदि) — तेलुगु साहित्य का स्वर्ण-युग।
- पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस ने उनके शासन का विस्तार से वर्णन किया — 'चौल, दाबोल, गोवा' बंदरगाहों का वर्णन।
- उन्होंने हम्पी के विट्ठल मंदिर (संगीत-स्तम्भ) का निर्माण करवाया।
04विजयनगर प्रशासन — अय्यगर, दंडनायक Administration — Ayagar, Dandanayaka
विजयनगर प्रशासन विकेंद्रीकृत था, पर राजा की सर्वोच्च सत्ता थी। अय्यगर प्रणाली में गाँव-स्तर के 12 अधिकारी (पट्टेल, कर्णम, तलारी आदि) होते थे। प्रान्तों (राज्य) पर नायक/पलायगर (सरदार) शासन करते थे।
| पद | कार्य | टिप्पणी |
|---|---|---|
| महाराजा | सर्वोच्च शासक | दैवीय अधिकार; 'राय' की उपाधि। |
| मंत्रिपरिषद् | प्रधानमंत्री, सेनापति, कोशाध्यक्ष, पुरोहित | कृष्णदेव राय के समय अत्यंत प्रभावी। |
| प्रान्त (राज्य) | नायक/पलायगर | सामंत; कर-संग्रह एवं सेना रखरखाव; अर्ध-स्वायत्त। |
| विषय/नाडु | नाडुप्रभु | जिला-स्तर; 100-200 गाँव। |
| ग्राम (अय्यगर) | 12 अधिकारी | पट्टेल (ग्राम-मुखिया), कर्णम (लेखाकार), तलारी (पुलिस) आदि। |
नायक-व्यवस्था आगे चलकर महानायक के रूप में विकसित हुई, जो 17वीं सदी में स्वतंत्र राज्य बन गए।
05अर्थव्यवस्था — कृषि, व्यापार, सिक्के Economy — Agriculture, Trade, Coins
विजयनगर की अर्थव्यवस्था कृषि-प्रधान थी, पर समुद्री व्यापार ने इसे असीम समृद्धि दी। हम्पी एक विश्व-व्यापार केन्द्र था — यहाँ फ़ारसी, अरबी, पुर्तगाली, चीनी व्यापारी आते थे। सिक्के — धरण (सोना), तंका (चाँदी), जीताल (ताँबा) चलते थे।
कृषि एवं राजस्व
- सिंचाई — तुंगभद्रा, कृष्णा, कावेरी पर बाँध एवं नहरें।
- भूमि-कर — उपज का 1/4 से 1/3 (प्रान्त-स्तर पर निर्भर)।
- फ़सलें — चावल, गन्ना, मसाले, हल्दी, काली मिर्च (निर्यात हेतु)।
- देवदान — मंदिरों को भूमि-अनुदान (ब्राह्मण-दान)।
व्यापार एवं सिक्के
- निर्यात — मसाले, हाथीदाँत, मोती, रत्न, वस्त्र, चीनी (इक्षु)।
- आयात — उत्तम घोड़े (अरब/फारस), तांबा, रेशम, कश्मीरी शाल।
- बंदरगाह — गोवा, चौल, दाबोल, कोच्चि, कालीकट।
- धरण (सोना) — सर्वोच्च मुद्रा; तंका (चाँदी) एवं जीताल (ताँबा) आम-जन के लिए।
06कला एवं साहित्य — अष्टदिग्गज Art & Literature — Ashtadiggajas
विजयनगर काल दक्षिण भारतीय स्थापत्य एवं साहित्य का स्वर्ण-युग था। हम्पी के मंदिर (विट्ठल, विरूपाक्ष, हजारा राम) — अद्भुत नक्काशी एवं संगीत-स्तम्भों के लिए प्रसिद्ध हैं। कृष्णदेव राय के दरबार में अष्टदिग्गज (आठ विद्वान) थे — जिनमें तेनालीराम (हास्य-कवि) एवं पेद्दन (आमुक्तमाल्यदा के अनुवादक) प्रमुख थे।
- अल्लासानी पेद्दन — ‘आमुक्तमाल्यदा’ का आधार; ‘मनुचरित्र’ के रचयिता।
- तिम्मन — ‘पारिजातापहरण’ (तेलुगु)।
- तेनालीराम — हास्य-कवि; ‘पांडुरंग महात्म्य’ के रचयिता।
- रामराज भूषण — ‘वासुचरित्र’ के रचयिता।
- मुद्दुपलानी — ‘राधा-माधव’ नाटक।
- सूर्य कवि — संस्कृत में ‘नैषध’।
- कांची कवि — तमिल में ‘दशावतार’।
- नरहरि — संस्कृत व्याकरणकार।
07बहमनी सल्तनत — उदय (1347) Bahmani Sultanate — Rise
बहमनी सल्तनत की स्थापना अलाउद्दीन हसन बहमन शाह (हसन गंगु) ने 1347 में दिल्ली सल्तनत के विरुद्ध विद्रोह करके की। राजधानी गुलबर्गा (बाद में बीदर) थी। इस्लामी राज्य होते हुए भी इसमें हिन्दू-मुस्लिम दोनों का योगदान था — जो इसे विशिष्ट बनाता है।
प्रमुख शासक
- अलाउद्दीन हसन (1347–1358) — संस्थापक; दिल्ली से स्वतंत्रता; गुलबर्गा राजधानी।
- मुहम्मद शाह प्रथम (1358–1375) — विजयनगर के साथ निरन्तर युद्ध।
- फ़िरोज़ शाह (1397–1422) — गोलकुंडा क्षेत्र पर अधिकार; सिंचाई-तालाबों का निर्माण।
- अहमद शाह (1422–1436) — राजधानी बीदर स्थानांतरित की; सैयद-वंश से संबंध।
- हुमायूँ शाह (1458–1461) — ‘जालिम’ (अत्याचारी) की उपाधि; कठोर शासन।
विशेषताएँ
- बहमनी में ईरानी, तुर्क, अफ़ग़ान, हिन्दू — सभी समुदायों का मिश्रण।
- दक्कनी फ़ारसी भाषा का विकास (उर्दू का पूर्वगामी)।
- वास्तुकला — गोल गुम्बद (गोलकुंडा), बीदर किला, मदरसा — दक्कनी-इस्लामी शैली।
- महमूद गवाँ (1463–1481) — सबसे कुशल प्रधानमंत्री।
08महमूद गवाँ — प्रधानमंत्री एवं सुधारक Mahmud Gawan — Prime Minister & Reformer
महमूद गवाँ (1463–1481) बहमनी सल्तनत का सबसे महान प्रशासक था। उसने सैन्य, राजस्व एवं प्रशासनिक सुधार किए, मदरसा (बीदर) की स्थापना की, एवं विदेशी व्यापार को बढ़ावा दिया। उसका आदर्श वाक्य था — “शासक को प्रजा का पिता होना चाहिए।”
सुधार
- सैन्य सुधार — नियमित वेतन, दाग-हुलिया (अलाउद्दीन की तर्ज पर)।
- राजस्व सुधार — भूमि-सर्वेक्षण; कर-निर्धारण (नवीनतम)।
- शिक्षा — बीदर में विशाल मदरसा (ईरानी वास्तुकला)।
- व्यापार — गोवा, दाबोल, चौल बंदरगाहों को मजबूत किया।
पतन
- ईरानी अमीरों (दक्कनी गुट) ने उसके विरुद्ध षड्यंत्र रचा।
- उस पर राजा-विरोधी दस्तावेज़ जाली बनाने का झूठा आरोप लगाया गया।
- 1481 में सुल्तान मुहम्मद तृतीय ने उसे फाँसी देने का आदेश दिया।
- उसकी मृत्यु के साथ बहमनी सल्तनत का पतन प्रारम्भ हो गया।
09बहमनी — विभाजन एवं पतन (1527) Bahmani — Disintegration into 5 Sultanates
महमूद गवाँ की मृत्यु के बाद बहमनी सल्तनत में आपसी फूट बढ़ी। 1527 में यह सल्तनत पाँच स्वतंत्र राज्यों में विभाजित हो गई — बीजापुर (आदिलशाही), गोलकुंडा (कुतुबशाही), अहमदनगर (निज़ामशाही), बीदर (बरीदशाही), बरार (इमादशाही)। ये सभी आगे चलकर मुगलों द्वारा अधीन किए गए।
| शाखा (राज्य) | संस्थापक | राजधानी |
|---|---|---|
| बीजापुर (आदिलशाही) | यूसुफ आदिल शाह | बीजापुर (विजयपुर) |
| गोलकुंडा (कुतुबशाही) | कुली कुतुब शाह | गोलकुंडा (हैदराबाद) |
| अहमदनगर (निज़ामशाही) | मलिक अहमद | अहमदनगर |
| बीदर (बरीदशाही) | अमीर बरीद | बीदर |
| बरार (इमादशाही) | फ़तेह उल्लाह इमाद | बरार (अचलपुर) |
10तालिकोटा · विजयनगर का अंत (1565) Talikota — Fall of Vijayanagara
विजयनगर का अन्तिम महान शासक रामराय (अरविदु वंश) था। 1565 में तालिकोटा (राक्षसी-तंगड़ी) के युद्ध में बहमनी पाँच राज्यों (बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर, बीदर, बरार) की संयुक्त सेना ने विजयनगर को निर्णायक रूप से पराजित किया। रामराय मारा गया; साम्राज्य लूटा एवं जलाया गया — हम्पी का विनाश। इसके बाद विजयनगर क्षीण हो गया; 1646 में अन्तिम शासक (श्री रंग तृतीय) की मृत्यु के साथ यह साम्राज्य समाप्त हुआ।
- कारण — रामराय ने बहमनी राज्यों के आपसी संघर्ष में हस्तक्षेप किया; उन्होंने एकजुट होकर विजयनगर पर आक्रमण किया।
- परिणाम — विजयनगर का पतन; हम्पी नष्ट; साम्राज्य छिन्न-भिन्न।
- महत्व — दक्षिण भारत में हिन्दू सत्ता का अंत; मुगलों एवं दक्कनी सल्तनतों का उत्कर्ष।
- अन्तिम शासक — श्री रंग तृतीय (1646) — विजयनगर साम्राज्य का पूर्ण अंत।
11तुलना · सांस्कृतिक योगदान Comparison & Cultural Contributions
विजयनगर एवं बहमनी — दोनों ने दक्षिण भारत को अमूल्य धरोहर दी। विजयनगर ने हिन्दू-स्थापत्य (हम्पी), तेलुगु-कन्नड़ साहित्य, एवं भक्ति-आन्दोलन (हरिदास) को बढ़ावा दिया। बहमनी ने दक्कनी-इस्लामी संस्कृति, गोल गुम्बद, गोलकुंडा किला, एवं फ़ारसी-साहित्य को संरक्षण दिया। दोनों ने भारत की सांस्कृतिक बहुलता को समृद्ध किया।
विजयनगर
- हम्पी (विश्व-धरोहर)
- तेलुगु/कन्नड़ साहित्य
- अय्यगर प्रशासन
- भक्ति-हरिदास
- धरण/तंका सिक्के
बहमनी
- गोल गुम्बद, बीदर
- दक्कनी फ़ारसी
- महमूद गवाँ
- मदरसा-शिक्षा
- हिन्दू-मुस्लिम मिश्रण
समानता
- व्यापार-उन्मुख अर्थव्यवस्था
- समुद्री-व्यापार (गोवा/चौल)
- दोनों ने मुगलों का सामना किया
- स्थापत्य में नवाचार
- सांस्कृतिक संकरण