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2. कहपण क्या था? (02 अंक)

   What was the Kahapana? (02 Marks)

कहपण (जिसे कर्षापण भी कहा जाता है) प्राचीन भारत का एक प्रमुख आहत (पंच-चिह्नित) सिक्का था, जो मुख्य रूप से चांदी या तांबे का होता था।मुख्य बिंदु:
  • काल: यह महाजनपद काल से लेकर मौर्य काल तक भारत में व्यापार और विनिमय का मुख्य माध्यम था।
  • बनावट: ये सिक्के नियमित आकार के नहीं होते थे। धातु के चपटे टुकड़ों पर विशेष प्रतीक (जैसे सूर्य, चंद्र, पेड़, जीव-जंतु) ठप्पे से उकेरे (पंच) जाते थे।
  • महत्व: प्राचीन भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापारिक लेन-देन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

भारत की प्रागैतिहासिक जातियों के बारे में डॉ. जे. एच. हट्टन के क्या विचार थे?

प्रसिद्ध ब्रिटिश मानवविज्ञानी और 1931 की जनगणना के आयुक्त डॉ. जे. एच. हट्टन (Dr. J. H. Hutton) ने भारत की प्रागैतिहासिक जातियों और उनके प्रवासन (migration) के संबंध में एक विस्तृत और व्यवस्थित सिद्धांत प्रस्तुत किया था। उनकी पुस्तक 'कौस्ट इन इंडिया' (Caste in India) में भारतीय आबादी के नस्लीय वर्गीकरण और उनकी प्राचीन पृष्ठभूमि का विवरण मिलता है। भारत की प्रागैतिहासिक जातियों के उद्भव और विकास के संबंध में डॉ. हट्टन के मुख्य विचार निम्नलिखित थे: 
    • नेग्रिटो (Negrito) - भारत के मूल निवासी: डॉ. हट्टन का मानना था कि भारत के सबसे प्राचीन प्रागैतिहासिक निवासी नेग्रिटो नस्ल के लोग थे। यद्यपि वर्तमान भारत में इनके बहुत कम अवशेष बचे हैं (जैसे कि दक्षिण भारत की कुछ पहाड़ी जनजातियों और अंडमान द्वीप समूह में), लेकिन हट्टन के अनुसार, वे ही सबसे पहले दक्षिण-पूर्वी एशिया और भारत में आकर बसे थे।
    • प्रोटो-ऑस्ट्रेलॉयड (Proto-Austroloid): नेग्रिटो के बाद भारत में प्रोटो-ऑस्ट्रेलॉयड नस्ल के लोगों का आगमन हुआ। मध्य और दक्षिण भारत की कई आधुनिक जनजातियों के शारीरिक लक्षणों को उन्होंने इसी प्रागैतिहासिक जाति से जुड़ा हुआ माना।
    • भूमध्यसागरीय जाति (Mediterranean Race) की प्रारंभिक शाखा: इसके बाद भूमध्यसागरीय क्षेत्र से एक प्रारंभिक नस्ल भारत आई जो एक विशिष्ट (agglutinative) भाषा बोलती थी, जिससे वर्तमान 'ऑस्ट्रो-एशियाई' (Austro-Asiatic) भाषा परिवार का विकास हुआ। हट्टन के अनुसार, इन्हीं लोगों ने भारत में प्रारंभिक कृषि और महापाषाण संस्कृति (Megalithic Cult) की नींव रखी थी।
    • भूमध्यसागरीय प्रवासन की उत्तरवर्ती लहर (Later Mediterranean Wave): पूर्वी यूरोप और निकट पूर्व से भूमध्यसागरीय लोगों की एक और अधिक विकसित लहर भारत पहुंची। ये लोग धातुओं के ज्ञान से लैस थे और हट्टन का मानना था कि भारत में शुरुआती नगर राज्यों (City States) और सिंधु घाटी जैसी सभ्यताओं के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान था।
    • अल्पाइन शाखा (Alpine/Armenoid Element): भारत की प्रागैतिहासिक आबादी में जो चौड़े सिर वाले (broad-headed) लक्षण पाए जाते हैं, उनके बारे में हट्टन का विचार था कि इन्हें अल्पाइन नस्ल की आर्मेनॉइड शाखा से जोड़ा जा सकता है, जो बाद के कालखंड में भारत आई थी। [1]

डॉ. हट्टन का यह स्पष्ट मानना था कि भारत की आधुनिक जाति व्यवस्था और जनजातीय संस्कृतियों के मूल बीज इन्हीं प्रागैतिहासिक जातियों के सांस्कृतिक और नस्लीय मिश्रण से उपजे हैं।

Answer: अकबरNotes: अकबर ने अब्दुल कादिर बदायूनी, नकीब खान और शेख सुल्तान थानेसर जैसे कई विद्वानों को संरक्षण दिया। उन्होंने भारत की हिंदू बहुसंख्यक आबादी पर इस्लाम अपनाने का दबाव नहीं डाला बल्कि उन्हें भूमि प्रदान की और गैर-मुसलमानों पर लगाया जाने वाला जज़िया कर समाप्त कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने हिंदी साहित्य का अनुवाद किया और फतेहपुर सीकरी में हिंदू त्योहारों में भी भाग लिया। फतेहपुर सीकरी को अकबर ने फारसी शैली में डिजाइन किया था, जहां उन्होंने एक मंदिर बनवाया और हिंदू, ईसाई, पारसी और मुस्लिम सहित विभिन्न धर्मों के विद्वानों को आमंत्रित किया।

  1. नागभट्ट प्रथम 
  2. वत्सराज
  3. महेंद्रपाल प्रथम 
  4. मिहिरभोज

    सही उत्तर नागभट्ट प्रथम है।

    Key Points

      • नागभट्ट प्रथम गुर्जर-प्रतिहार वंश के संस्थापक थे। उसने अपनी राजधानी जालौर में स्थापित की।
      • उनके वंशज मिहिर भोज के ग्वालियर शिलालेख में उन्हें शाही गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के संस्थापक के रूप में भी नामित किया गया है।
      • उन्होंने वर्तमान मध्य प्रदेश में अवंती (या मालवा) क्षेत्र पर शासन किया।
      • ग्वालियर शिलालेख से पता चलता है कि वह ककुस्थ और देवराज के उत्तराधिकारी थे, जो उसके अनाम भाई के पुत्र थे।

      Additional Information

          • वत्सराज
              • वह गुर्जर-प्रतिहार वंश के सम्राट थे।

              • वह नागभट्ट प्रथम के पोते थे।

              • वह कन्नौज और बंगाल के सुदूर क्षेत्रों पर विजय प्राप्त करने वाले राजस्थान के पहले शासक थे।

          • महेंद्रपाल प्रथम 
              • वह मिहिर भोज प्रथम के पुत्र थे।

              • महेंद्रपाल प्रथम भी प्रतिहार वंश के शासक थे।

              • बिहार के हजारीबाग जिले के इटखोरी में रामगया में खोजे गए शिलालेखों में उनके शासनकाल का वर्णन है।

              • उन्होंने पलास को हराकर बंगाल के कुछ हिस्सों को भी अपने साम्राज्य में शामिल कर लिया।

        • मिहिर भोज
            • वह गुर्जर-प्रतिहार वंश के एक राजा थे।

            • वह विष्णु के भक्त थे और उन्होंने आदिवराह की उपाधि धारण की थी जो उनके कुछ सिक्कों पर अंकित है।

            • उनका साम्राज्य दक्षिण में नर्मदा नदी, उत्तर पश्चिम में सतलज नदी और पूर्व में बंगाल तक फैला हुआ था।
            • उनका उत्तराधिकारी उसका पुत्र महेंद्रपाल प्रथम था।

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