Auguste Comte ( ऑगस्ते कम्ते ) एक फ्रान्सिसी दार्शनिक व समाजशास्त्री थे जिन्होने यह व्याख्या सर्व प्रथम की थी.
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उत्तर- आपत्तियाँ और मूल्याँकन इन विद्वानों प्रमुख रूप से प्रायः निम्नलिखित आपत्तियाँ उठाई हैं –
1. सामाजिक घटनाएँ जटिल और निरन्तर परिवर्तनशील प्रकृति की होती है।
2. सामाजिक घटनाओं के अध्ययन में वैज्ञानिक तटस्थता सम्भव नहीं है।
3. समाजशास्त्र के पास प्रयोगशालाओं का अभाव है।
4. सामाजिक घटनाओं को मापने में कठिनाई होती है।
5. समाजशास्त्र यथार्थ विज्ञान नहीं है।
6. समाजशास्त्र भविष्यवाणी नहीं कर सकता।
उत्तर- समाजशास्त्र एक विज्ञान है। समाजशास्त्र अपने अध्ययन में वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग करता है। परिकल्पना के निर्माण से लेकर सामान्य नियमों के प्रतिपादन तक सम्पूर्ण प्रक्रिया समाजशास्त्र में व्यवस्थित और सुनिश्चित तरीके से अपनाई जाती है। सर्वप्रथम किसी सामाजिक विषय पर एक परिकल्पना का निर्माण किया जाता है। तथ्यों का संकलन करने के लिए समाजशास्त्र में अनेक यंत्रों, प्रविधियों का प्रयोग किया जाता है, जिससे वे यथार्थ बन सकें। तथ्यों का वर्गीकरण करके सावधानीपूर्वक कार्यकारण सम्बन्ध खोजे जाते हैं। परीक्षण के द्वारा प्राप्त निष्कर्षों को सत्यापित किया जाता है और जब परिकल्पना सत्यापित हो जाती है तो वह सामाजिक नियमों का रूप ले लेती है। प्रत्येक विज्ञान अपनी प्रकृति के अनुरूप अपनी विशिष्ट पद्धति का निर्माण करता है, जैसे जीव विज्ञान में चीर फाड, रसायनशास्त्र में घोलों का सम्मिश्रण आदि। समाजशास्त्र में अध्ययन को वैज्ञानिक बनाने के लिये अनेक विशिष्ट पद्धतियों का निर्माण किया है जैसे - सामाजिक सर्वेक्षण पद्धति समाजमिति आदि। अतः सिद्ध हो जाता है कि समाजशास्त्र एक विज्ञान है।