आधुनिक भारतीय इतिहास · कांग्रेस स्थापना एवं नरमपंथी युग
कांग्रेस स्थापना · नरमपंथी युग

कांग्रेस स्थापना एवं नरमपंथी युग अध्याय ०३

🏛️ 1885 – 1905 🗓️ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का आरंभ 📍 INC · नरमपंथी 🎯 UPSC · CGPSC · UPPCS · NET

📜 01 · परिचय एवं पृष्ठभूमि

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना 1885 में हुई थी। यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण संगठन बना। कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों (1885-1905) को 'नरमपंथी युग' (Moderate Era) कहा जाता है।

इस युग के नेताओं का मानना था कि ब्रिटिश सरकार से संविधानिक एवं शांतिपूर्ण तरीकों से सुधार माँगे जा सकते हैं। उन्होंने याचिकाएँ, ज्ञापन, प्रस्ताव के माध्यम से अपनी माँगें रखीं। उन्होंने भारतीयों को स्वशासन दिलाने का प्रयास किया।

नरमपंथी युग — मुख्य विशेषताएँ
  • समय सीमा — 1885 से 1905 (लगभग 20 वर्ष)।
  • मुख्य नेतादादाभाई नौरोजी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता
  • मुख्य विधियाचिका, ज्ञापन, प्रस्ताव, स्मारक
  • उद्देश्यसंविधानिक सुधार, शिक्षा, प्रशासनिक सुधार

🏛️ 02 · भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुई। इसके संस्थापक ए. ओ. ह्यूम (एलन ऑक्टेवियन ह्यूम) थे, जो एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक थे।

कांग्रेस की स्थापना के कारण

  • राष्ट्रीय चेतना का विकास — सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों, प्रेस, शिक्षा ने भारतीयों में एकता एवं राष्ट्रवाद को बढ़ाया।
  • प्रशासनिक असन्तोष — अंग्रेजों की नीतियों (व्यपगत, अवध विलय) से उत्पन्न असंतोष।
  • ब्रिटिश सरकार की सुरक्षा — ह्यूम ने कांग्रेस को 'सुरक्षा-वाल्व' (Safety Valve) के रूप में स्थापित किया — भारतीयों के असंतोष को शांतिपूर्ण दिशा देने के लिए।
  • पेशेवर वर्ग का उदय — वकील, डॉक्टर, पत्रकार, शिक्षक जैसे पेशेवरों ने राजनीतिक आंदोलन को बल दिया।
  • अखिल भारतीय मंच की आवश्यकता — विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों को एक मंच पर लाने की आवश्यकता।

प्रथम अधिवेशन (1885, बॉम्बे)

विवरणतथ्य
तिथि28 दिसंबर 1885
स्थानगोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बॉम्बे
प्रथम अध्यक्षडब्ल्यू. सी. बनर्जी (व्योमेश चंद्र बनर्जी) — पहले भारतीय अध्यक्ष
सदस्य72 प्रतिनिधि (सभी हिंदू)
प्रमुख प्रस्तावभारतीयों को सरकारी सेवाओं में अधिक प्रतिनिधित्व, शिक्षा विस्तार, प्रशासनिक सुधार
प्रमुख तथ्य — कांग्रेस स्थापना
  • संस्थापकए. ओ. ह्यूम (सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक)।
  • प्रथम अध्यक्षडब्ल्यू. सी. बनर्जी
  • स्थान — बॉम्बे (मुंबई)।
  • तिथि28 दिसंबर 1885

🎯 03 · नरमपंथी — उद्देश्य एवं कार्यप्रणाली

नरमपंथी (Moderates) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक नेता थे। उन्होंने संविधानिक एवं शांतिपूर्ण तरीकों से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास किया।

नरमपंथियों के मुख्य उद्देश्य

  • भारतीयों को स्वशासन (Self-Government) दिलाना — ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत स्वायत्तता।
  • प्रशासनिक सुधार — सिविल सेवाओं में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाना।
  • शिक्षा का विस्तार — प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाना।
  • आर्थिक सुधार — कर-व्यवस्था में सुधार, व्यापार को प्रोत्साहन।
  • सामाजिक सुधार — जाति-व्यवस्था, अस्पृश्यता, स्त्री-शिक्षा में सुधार।

नरमपंथियों की कार्यप्रणाली (तरीके)

  • याचिकाएँ (Petitions) — ब्रिटिश अधिकारियों, संसद, महारानी को ज्ञापन भेजना।
  • प्रस्ताव (Resolutions) — कांग्रेस अधिवेशनों में प्रस्ताव पारित कर माँगों को सामने रखना।
  • स्मारक (Memorials) — सरकार को सुधारों से संबंधित स्मारक प्रस्तुत करना।
  • प्रेस एवं पत्रिकाएँ — समाचार-पत्रों के माध्यम से जनमत तैयार करना।
  • विधान परिषदों में भागीदारी — सीमित विधान परिषदों में सुधारवादी प्रस्ताव रखना।
  • शांतिपूर्ण जन-जागरण — सार्वजनिक सभाएँ, व्याख्यान, एवं पुस्तिकाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक करना।
परीक्षा बिंदु — नरमपंथी तरीके
  • तीन 'P'Petition (याचिका), Prayer (प्रार्थना), Protest (विरोध) — ये नरमपंथियों के मुख्य औजार थे।
  • इन्हें 'याचिकाकर्ता' (Mendicant) की संज्ञा उग्रपंथियों ने दी।

🌟 04 · प्रमुख नरमपंथी नेता

1. दादाभाई नौरोजी (1825-1917)

  • 'भारत के वृद्ध राजनेता' (Grand Old Man of India) कहलाए।
  • तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष (1886, 1893, 1906)।
  • 'पोस्टल वोट' की पहल की।
  • उन्होंने 'भारत का आर्थिक शोषण' सिद्धांत प्रतिपादित किया (पुस्तक — 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया')।
  • ब्रिटिश संसद सदस्य (1892-95) — पहले भारतीय सांसद।
  • इन्होंने 'धन-निष्कासन' (Drain Theory) का सिद्धांत दिया।

2. सुरेंद्रनाथ बनर्जी (1848-1925)

  • 'भारतीय राष्ट्रवाद के जनक' में से एक।
  • 1883 में 'इंडियन एसोसिएशन' (कलकत्ता) की स्थापना — जो बाद में कांग्रेस में विलीन हुई।
  • 1885 में कांग्रेस के संस्थापक सदस्य।
  • दो बार कांग्रेस अध्यक्ष (1895, 1902)।
  • पत्रिका — 'द बेंगाली'
  • सिविल सेवा परीक्षा में भारतीयों के लिए आयु सीमा बढ़ाने का आंदोलन किया।

3. गोपाल कृष्ण गोखले (1866-1915)

  • 'नरमपंथियों के सबसे सुविचारित नेता' (महात्मा गांधी ने उन्हें 'गुरु' माना)।
  • 1899 में 'सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसायटी' (पुणे) की स्थापना — राष्ट्र सेवा एवं शिक्षा के लिए।
  • 1905 में 'डेक्कन एजुकेशन सोसायटी' की स्थापना (फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे)।
  • बार-बार कांग्रेस अध्यक्ष (1905 में अध्यक्ष — बनारस अधिवेशन)।
  • शिक्षा एवं राजकोषीय सुधारों पर बल।
  • महात्मा गांधी ने उन्हें 'राजनीतिक गुरु' माना।

4. फिरोजशाह मेहता (1845-1915)

  • 'बॉम्बे के शेर' (Lion of Bombay) कहलाए।
  • 1890 में कांग्रेस अध्यक्ष (कलकत्ता अधिवेशन)।
  • स्थानीय स्वशासन (म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) के प्रबल समर्थक।
  • मुंबई नगर निगम में महत्वपूर्ण भूमिका।
  • ब्रिटिशों के विरुद्ध कानूनी लड़ाई में सक्रिय।

5. अन्य प्रमुख नेता

  • पी. आनंद चार्लू — 1891 में अध्यक्ष (नागपुर अधिवेशन), मद्रास से।
  • रहमतुल्ला सयानी — 1896 में अध्यक्ष (कलकत्ता), मुस्लिम नेता।
  • मदनमोहन मालवीय — 1909, 1918 में अध्यक्ष, शिक्षा सुधारक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (1916) के संस्थापक।
प्रमुख नरमपंथी नेता — एक नज़र में
नेताउपाधि/पहचान
दादाभाई नौरोजी'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया'
सुरेंद्रनाथ बनर्जी'भारतीय राष्ट्रवाद के जनक'
गोपाल कृष्ण गोखलेगांधी के 'राजनीतिक गुरु'
फिरोजशाह मेहता'बॉम्बे के शेर'

📈 05 · नरमपंथियों की उपलब्धियाँ

  • राष्ट्रीय चेतना का विकास — उन्होंने भारतीयों में 'भारत' की एकता का बोध कराया; कांग्रेस को अखिल भारतीय मंच बनाया।
  • ब्रिटिश नीतियों को उजागर किया — नौरोजी ने 'धन-निष्कासन' (Drain Theory) सिद्धांत दिया, जिसमें बताया कि ब्रिटेन भारत का आर्थिक शोषण कर रहा है।
  • प्रशासनिक सुधार — सिविल सेवा में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाने, आयु सीमा में ढील देने के लिए आंदोलन (कठोर) किया।
  • शिक्षा का विस्तार — उन्होंने प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए जोर दिया; अनेक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना।
  • कर-व्यवस्था में सुधार — उन्होंने किसानों एवं व्यापारियों के लिए उचित कर-व्यवस्था की माँग रखी।
  • विधान परिषदों में प्रतिनिधित्व — 1892 के भारतीय परिषद अधिनियम में भारतीयों को विधान परिषदों में सीमित प्रतिनिधित्व दिया गया, जो कांग्रेस की माँग का परिणाम था।
  • अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आवाज — नौरोजी ने ब्रिटिश संसद में भारत की दशा पर जोरदार वक्तव्य दिए।
उपलब्धि — 1892 का अधिनियम
  • 1892भारतीय परिषद अधिनियम के तहत भारतीयों को विधान परिषदों में प्रतिनिधित्व मिला (हालाँकि सीमित और अप्रत्यक्ष रूप से)।
  • यह नरमपंथियों की प्रमुख सफलता थी।

📝 06 · नरमपंथियों की प्रमुख माँगें

नरमपंथियों ने अपने विभिन्न अधिवेशनों में अनेक माँगें रखीं। इन माँगों को उन्होंने शांतिपूर्ण तरीकों से सरकार के समक्ष रखा।

राजनीतिक माँगें

  • स्वशासन (Self-Government) — ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारतीयों को स्वायत्तता।
  • विधान परिषदों का विस्तार — भारतीयों को अधिक सीटें, सीधे चुनाव की व्यवस्था।
  • सिविल सेवा में भारतीयों की भागीदारी — ICS परीक्षा भारत में भी आयोजित हो, आयु सीमा में ढील।
  • सैन्य खर्च में कमी — ब्रिटिश सैन्य खर्च पर नियंत्रण, भारतीय करदाताओं पर बोझ कम करना।

आर्थिक माँगें

  • कर-व्यवस्था में सुधार — किसानों पर कर-बोझ कम करना, भू-राजस्व प्रणाली में सुधार।
  • स्वदेशी उद्योगों को संरक्षण — भारतीय उद्योगों पर शुल्क कम करना, विदेशी वस्तुओं पर कर बढ़ाना।
  • 'धन-निष्कासन' (Drain Theory) का समाधान — भारत से धन के बहिर्गमन को रोकना।
  • न्यूनतम मज़दूरी — कारखानों में मज़दूरों के लिए न्यूनतम मज़दूरी की माँग।

प्रशासनिक एवं सामाजिक माँगें

  • शिक्षा का विस्तार — प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य, उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाना।
  • सामाजिक सुधार — जातिवाद, अस्पृश्यता, बाल-विवाह, सती-प्रथा के विरुद्ध कानूनी सुधार।
  • प्रेस-स्वतंत्रता — भारतीय प्रेस पर प्रतिबंध हटाना।
नरमपंथियों की माँगों का उद्देश्य
  • ब्रिटिश शासन के भीतर ही स्वशासन प्राप्त करना।
  • भारतीयों को आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक रूप से सशक्त बनाना।
  • ये माँगें संविधानिक एवं कानूनी थीं।

⚔️ 07 · नरमपंथी-उग्रपंथी विभाजन

1905 के बाद कांग्रेस में नरमपंथियों (Moderates) एवं उग्रपंथियों (Extremists) के बीच मतभेद बढ़ गए। इस विभाजन के कारण 1907 में कांग्रेस सूरत अधिवेशन में स्पष्ट विभाजन हुआ।

नरमपंथी बनाम उग्रपंथी — तुलना

पहलूनरमपंथीउग्रपंथी
लक्ष्यब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत स्वशासनपूर्ण स्वराज (Purna Swaraj)
तरीकेसंविधानिक, शांतिपूर्ण (याचिका, ज्ञापन)बहिष्कार, स्वदेशी, सविनय अवज्ञा
विश्वासब्रिटिश सरकार सुधारों की ओर सहमत होगीब्रिटिश सरकार पर अविश्वास
नेतानौरोजी, गोखले, बनर्जी, मेहतालोकमान्य तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविंद घोष
प्रेरणाब्रिटिश उदारवादस्वदेशी, भारतीय पुनर्जागरण

विभाजन के कारण

  • उद्देश्यों में अंतर — नरमपंथी स्वशासन चाहते थे, उग्रपंथी पूर्ण स्वराज।
  • तरीकों में मतभेद — नरमपंथी संविधानिक विधियों में विश्वास रखते थे, उग्रपंथी बहिष्कार, स्वदेशी, प्रत्यक्ष कार्रवाई चाहते थे।
  • 1905 के बंगाल विभाजन — नरमपंथियों ने विरोध किया परंतु शांतिपूर्ण तरीकों से; उग्रपंथियों ने व्यापक आंदोलन (बहिष्कार, स्वदेशी) शुरू किया।
  • 1907 का सूरत अधिवेशन — विभाजन स्पष्ट हुआ; राष्ट्रीय कांग्रेस दो भागों में विभाजित हो गई (1907-1916 तक यह स्थिति रही)।
सूरत अधिवेशन (1907) — प्रमुख तथ्य
  • स्थान — सूरत (गुजरात)।
  • अध्यक्षरास बिहारी घोष (नरमपंथी)।
  • विभाजन — कांग्रेस 'नरमपंथी' और 'उग्रपंथी' में बँट गई।
  • तिलक ने अध्यक्ष पद के लिए प्रस्ताव रखा, परंतु नरमपंथियों ने उसे अस्वीकार कर दिया।
परीक्षा बिंदु — विभाजन
  • 1907 — सूरत अधिवेशन में विभाजन।
  • 1916 — लखनऊ समझौते (Lucknow Pact) द्वारा पुनः एकीकरण।
  • मुख्य विवाद'स्वशासन' बनाम 'पूर्ण स्वराज'

⚠️ 08 · सीमाएँ एवं आलोचना

  • सीमित आधार — कांग्रेस के अधिकांश सदस्य शहरी, शिक्षित, उच्च-मध्यम वर्ग के थे; ग्रामीण जनता, किसान, मज़दूर, आदिवासी कांग्रेस से दूर थे।
  • संविधानिक विधियाँ — उनकी याचिका-ज्ञापन नीति उग्रपंथियों को 'भिक्षावृत्ति' लगती थी।
  • सीमित उपलब्धियाँ — वे कोई बड़ा कानूनी सुधार प्राप्त करने में असफल रहे; 1892 का अधिनियम बहुत सीमित था।
  • सामाजिक सुधारों की उपेक्षा — उन्होंने मुख्यतः राजनीतिक माँगें रखीं; जाति, स्त्री-शिक्षा, अस्पृश्यता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
  • सांप्रदायिकता — कुछ नेताओं ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर ध्यान नहीं दिया, जिससे सांप्रदायिक विभाजन बढ़ा (मुस्लिम लीग 1906 में स्थापित हुई)।
  • समय की बर्बादी — आलोचकों के अनुसार नरमपंथियों ने 20 वर्षों में कोई ठोस परिणाम नहीं निकाला।
तिलक की आलोचना
  • लोकमान्य तिलक ने नरमपंथियों को 'याचिकाकर्ता' (Mendicant) कहा।
  • उन्होंने कहा कि नरमपंथियों की विधि 'अंग्रेजों के सामने हाथ फैलाने' जैसी है, जो स्वाभिमानी भारतीयों के लिए उचित नहीं है।

📜 09 · नरमपंथी युग का महत्व

  • राष्ट्रीय एकता का आधार — कांग्रेस ने विभिन्न क्षेत्रों, जातियों, धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाया।
  • ब्रिटिश नीतियों को उजागर किया — नौरोजी के 'धन-निष्कासन' सिद्धांत ने ब्रिटिश शोषण को स्पष्ट किया।
  • संविधानिक राष्ट्रवाद की नींव — उन्होंने यह सिद्ध किया कि भारतीय संविधानिक माँगों के द्वारा परिवर्तन ला सकते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता — नौरोजी ने ब्रिटिश संसद में भारत की बात उठाई, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भारत की स्थिति से अवगत हुआ।
  • आगामी आंदोलनों के लिए प्लेटफॉर्म — उग्रपंथियों एवं गांधी युग के आंदोलनों ने कांग्रेस के इस मंच का ही उपयोग किया।
  • शिक्षा एवं प्रेस का विकास — उन्होंने शिक्षा, प्रेस एवं साहित्य को प्रोत्साहित किया।
निष्कर्ष
  • नरमपंथी युग भारतीय राष्ट्रवाद का प्रारंभिक चरण था, जिसने आधुनिक भारतीय राजनीति की नींव रखी।
  • यद्यपि यह युग सीमित रहा, लेकिन इसने राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया।

📝 10 · अभ्यास प्रश्न (MCQ)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें। (उत्तर नीचे दिए गए हैं।)

  1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई?
    (अ) 1885 (ब) 1886 (स) 1892 (द) 1905
  2. कांग्रेस का प्रथम अध्यक्ष कौन था?
    (अ) दादाभाई नौरोजी (ब) डब्ल्यू. सी. बनर्जी (स) सुरेंद्रनाथ बनर्जी (द) ए. ओ. ह्यूम
  3. कांग्रेस के संस्थापक कौन थे?
    (अ) लॉर्ड डलहौजी (ब) ए. ओ. ह्यूम (स) लॉर्ड कैनिंग (द) लॉर्ड मिंटो
  4. 'भारत के वृद्ध राजनेता' (Grand Old Man of India) किसे कहा जाता है?
    (अ) गोपाल कृष्ण गोखले (ब) दादाभाई नौरोजी (स) सुरेंद्रनाथ बनर्जी (द) फिरोजशाह मेहता
  5. नरमपंथियों का मुख्य उपकरण क्या था?
    (अ) सत्याग्रह (ब) याचिका एवं ज्ञापन (स) बहिष्कार (द) सशस्त्र विद्रोह
  6. 'धन-निष्कासन' (Drain Theory) का सिद्धांत किसने दिया?
    (अ) गोपाल कृष्ण गोखले (ब) सुरेंद्रनाथ बनर्जी (स) दादाभाई नौरोजी (द) फिरोजशाह मेहता
  7. 1892 का भारतीय परिषद अधिनियम किस माँग का परिणाम था?
    (अ) पूर्ण स्वराज (ब) विधान परिषदों में भारतीयों का प्रतिनिधित्व (स) सती-प्रथा उन्मूलन (द) स्वदेशी
  8. कांग्रेस का सूरत अधिवेशन किस वर्ष हुआ जिसमें नरमपंथी-उग्रपंथी विभाजन स्पष्ट हुआ?
    (अ) 1905 (ब) 1906 (स) 1907 (द) 1908
  9. नरमपंथियों को उग्रपंथियों ने क्या कहा?
    (अ) क्रांतिकारी (ब) याचिकाकर्ता (Mendicant) (स) स्वदेशी (द) अहिंसक
  10. कांग्रेस की स्थापना किस स्थान पर हुई?
    (अ) कलकत्ता (ब) बॉम्बे (स) मद्रास (द) दिल्ली
उत्तर
  1. (अ) 1885
  2. (ब) डब्ल्यू. सी. बनर्जी
  3. (ब) ए. ओ. ह्यूम
  4. (ब) दादाभाई नौरोजी
  5. (ब) याचिका एवं ज्ञापन
  6. (स) दादाभाई नौरोजी
  7. (ब) विधान परिषदों में भारतीयों का प्रतिनिधित्व
  8. (स) 1907
  9. (ब) याचिकाकर्ता (Mendicant)
  10. (ब) बॉम्बे

📝 11 · वन-लाइनर सारांश

कांग्रेस स्थापना एवं नरमपंथी युग — 50 अति-महत्वपूर्ण तथ्य
  • 28 दिसंबर 1885 — कांग्रेस की स्थापना (बॉम्बे)।
  • संस्थापक — ए. ओ. ह्यूम (सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी)।
  • प्रथम अध्यक्ष — डब्ल्यू. सी. बनर्जी।
  • नरमपंथी युग — 1885 से 1905।
  • दादाभाई नौरोजी — 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया'।
  • नौरोजी ने 'धन-निष्कासन' (Drain Theory) का सिद्धांत दिया।
  • नौरोजी की पुस्तक — 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल'।
  • सुरेंद्रनाथ बनर्जी — 'इंडियन एसोसिएशन' (1883)।
  • सुरेंद्रनाथ — पत्रिका 'द बेंगाली'।
  • गोपाल कृष्ण गोखले — 'सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसायटी' (1899)।
  • गोखले — गांधी के 'राजनीतिक गुरु'।
  • फिरोजशाह मेहता — 'बॉम्बे के शेर'।
  • नरमपंथी तरीके — याचिका, ज्ञापन, प्रस्ताव, स्मारक।
  • उग्रपंथियों ने नरमपंथियों को 'याचिकाकर्ता' (Mendicant) कहा।
  • 1892 — भारतीय परिषद अधिनियम (विधान परिषदों में प्रतिनिधित्व)।
  • नरमपंथी — 'स्वशासन' (ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत) चाहते थे।
  • उग्रपंथी — 'पूर्ण स्वराज' चाहते थे।
  • 1905 — बंगाल विभाजन ने नरम-उग्र विभाजन को बढ़ाया।
  • 1907 — सूरत अधिवेशन में स्पष्ट विभाजन।
  • 1907 अधिवेशन के अध्यक्ष — रास बिहारी घोष।
  • विभाजन का कारण — उद्देश्यों और तरीकों में मतभेद।
  • 1916 — लखनऊ समझौते से पुनः एकीकरण।
  • नरमपंथियों ने प्रेस, शिक्षा, प्रशासनिक सुधार पर बल दिया।
  • नरमपंथी — सीमित आधार (शहरी, शिक्षित मध्यम वर्ग)।
  • 1885 में 72 सदस्य (सभी हिंदू) थे।
  • 1886 — दादाभाई नौरोजी प्रथम बार अध्यक्ष बने (कलकत्ता)।
  • 1893 — नौरोजी दूसरी बार अध्यक्ष (लाहौर)।
  • 1906 — नौरोजी तीसरी बार अध्यक्ष (कलकत्ता)।
  • 1905 में गोखले अध्यक्ष (बनारस अधिवेशन)।
  • नरमपंथियों ने सिविल सेवा परीक्षा में भारतीयों की आयु सीमा बढ़ाने की माँग की।
  • उन्होंने सैन्य खर्च में कमी, भू-राजस्व सुधार की माँग की।
  • 'स्वदेशी' शब्द का प्रयोग सबसे पहले नरमपंथी विश्वनाथ नारायण मंडलिक ने किया? (विवादित)।
  • कांग्रेस की स्थापना का मुख्य कारण — 'सुरक्षा-वाल्व' (Safety Valve) सिद्धांत।
  • सुरक्षा-वाल्व सिद्धांत — ब्रिटिशों ने कांग्रेस बनाई ताकि भारतीय असंतोष शांतिपूर्ण दिशा में जाए।
  • 1892 अधिनियम — नरमपंथियों की पहली बड़ी उपलब्धि।
  • 1892 अधिनियम ने विधान परिषदों में अप्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत की।
  • नरमपंथियों ने सामाजिक सुधारों (जाति, स्त्री) पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया।
  • कांग्रेस ने 1885-1905 तक लगभग 20 अधिवेशन किए।
  • 1887 — कांग्रेस का मद्रास अधिवेशन (अध्यक्ष — बदरुद्दीन तैयब जी — पहले मुस्लिम अध्यक्ष)।
  • 1889 — कांग्रेस का मुंबई अधिवेशन (अध्यक्ष — सर विलियम वेडरबर्न — ब्रिटिश सहानुभूतिकर्ता)।
  • 1903 — कांग्रेस का मद्रास अधिवेशन (अध्यक्ष — लाल मोहन घोष)।
  • नरमपंथी नेताओं ने ब्रिटिश संसद में भारत की समस्या उठाई।
  • सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने 'इंडियन एसोसिएशन' से 'इंडियन नेशनल कांग्रेस' में संक्रमण किया।
  • गोखले ने 1905 में 'डेक्कन एजुकेशन सोसायटी' की स्थापना (फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे)।
  • नरमपंथियों ने किसानों, मज़दूरों की अपेक्षा शिक्षित वर्ग पर अधिक जोर दिया।
  • 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना — नरमपंथियों की सांप्रदायिकता की आलोचना।
  • 1907 का विभाजन कांग्रेस के इतिहास का सबसे बड़ा संकट था।
  • 1916 में लखनऊ समझौते ने कांग्रेस को पुनः एकजुट किया।
  • नरमपंथी युग भारतीय राष्ट्रवाद का आधार है।
  • यह अध्याय UPSC, CGPSC, UPPCS, NET हेतु पूर्ण है।
💡 निष्कर्ष — कांग्रेस स्थापना एवं नरमपंथी युग
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई, जिसने आधुनिक भारतीय राजनीति की नींव रखी।
  • नरमपंथियों ने संविधानिक, शांतिपूर्ण तरीकों से स्वशासन की माँग की।
  • यद्यपि वे सीमित रहे, उन्होंने राष्ट्रीय चेतना, शिक्षा, प्रेस को बढ़ावा दिया और उग्रपंथियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
  • यह अध्याय UPSC, CGPSC, UPPCS, NET सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आधारभूत है।
📖 कांग्रेस स्थापना एवं नरमपंथी युग (आधुनिक भारतीय इतिहास) — संपूर्ण अध्याय 03 | UPSC · CGPSC · UPPCS · NET हेतु संकलित
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