विश्व इतिहास के प्रमुख कथन Famous Statements and Slogans of World History
एथेंस की अदालत से बर्लिन की दीवार तक — वे वाक्य जिन्होंने युग की दिशा तय की। हर प्रविष्टि तीन सूचनाएँ देती है: कथन का भाव, कहने वाला, और वह संदर्भ जिसके बिना कथन अधूरा है।
इस पृष्ठ में
- 01प्राचीन एवं मध्यकालीन विश्व
- 02पुनर्जागरण, धर्मसुधार एवं वैज्ञानिक क्रांति
- 03प्रबोधन एवं अमेरिकी क्रांति
- 04फ्रांसीसी क्रांति एवं नेपोलियन
- 05औद्योगिक क्रांति एवं समाजवाद
- 06राष्ट्रवाद एवं एकीकरण
- 07साम्राज्यवाद, प्रथम विश्वयुद्ध एवं रूसी क्रांति
- 08द्वितीय विश्वयुद्ध एवं शीतयुद्ध
- 09एशिया-अफ्रीका के जनांदोलन
- 10इतिहासकारों एवं चिंतकों के कथन
- 11स्वयं जाँच
01प्राचीन एवं मध्यकालीन विश्व Ancient and Medieval World
प्राचीन विश्व के कथन प्रायः दर्शन या सैन्य इतिहास से आते हैं। इनमें से अधिकांश हम तक बाद के लेखकों — प्लेटो, प्लूटार्क, सुएटोनियस — के माध्यम से पहुँचे हैं, इसलिए ये "अनुश्रुत कथन" हैं, शब्दशः अभिलेख नहीं।
| कथन का भाव | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| अपने आप को जानो | डेल्फ़ी का मंदिर · सुकरात द्वारा अपनाया | यूनानी दर्शन का मूल सूत्र; आत्म-परीक्षण की परंपरा। |
| अपरीक्षित जीवन जीने योग्य नहीं | सुकरात | 399 ई.पू., एथेंस की अदालत में अपने बचाव में — प्लेटो की अपोलॉजी से। |
| मनुष्य स्वभाव से एक राजनीतिक प्राणी है | अरस्तू · पॉलिटिक्स | राज्य को स्वाभाविक संस्था मानने का आधार। |
| जब तक दार्शनिक शासक न बनें, राज्य में न्याय संभव नहीं | प्लेटो · रिपब्लिक | दार्शनिक-राजा की अवधारणा। |
| मनुष्य सभी वस्तुओं का मापदंड है | प्रोटागोरस | सोफ़िस्ट परंपरा; सापेक्षतावाद का आरंभिक सूत्र। |
| पासा फेंका जा चुका है | जूलियस सीज़र | 49 ई.पू., रुबिकॉन नदी पार करते समय — गृहयुद्ध की अपरिवर्तनीय शुरुआत। |
| मैं आया, मैंने देखा, मैंने जीत लिया | जूलियस सीज़र | 47 ई.पू., ज़ेला के युद्ध के बाद रोमन सीनेट को भेजा संक्षिप्त संदेश। |
| तुम भी, ब्रूटस? | सीज़र से आरोपित | 44 ई.पू. की हत्या; लोकप्रिय रूप शेक्सपियर से आया — ऐतिहासिक प्रामाणिकता संदिग्ध। |
| जो स्वयं पर नहीं चाहते, वह दूसरों के साथ न करें | कन्फ़्यूशियस | चीनी नैतिक दर्शन का केन्द्रीय सूत्र — भाव-अनुवाद। |
| कोई भी स्वतंत्र व्यक्ति विधि की उचित प्रक्रिया के बिना बंदी नहीं बनाया जाएगा | मैग्ना कार्टा (1215) | राजा जॉन एवं बैरनों के बीच; विधि के शासन का आरंभ-बिंदु। |
| राजवंशों का उत्थान-पतन सामूहिक एकजुटता (असबिय्या) पर निर्भर है | इब्न ख़ल्दून · मुक़द्दमा (1377) | इतिहास-दर्शन एवं समाजशास्त्र का अग्रदूत। |
तालिका दाएँ-बाएँ स्क्रॉल की जा सकती है।
02पुनर्जागरण, धर्मसुधार एवं वैज्ञानिक क्रांति Renaissance, Reformation, Scientific Revolution
इस युग के कथन एक ही दिशा में संकेत करते हैं — सत्ता चाहे राजा की हो या चर्च की, उसे अब प्रमाण देना होगा। यही आधुनिक विश्व की जड़ है।
| कथन का भाव | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| शासक के लिए डर का पात्र होना प्रेम का पात्र होने से अधिक सुरक्षित है | निकोलो मैकियावेली · द प्रिंस (1513) | राजनीति को नैतिकता से अलग करने वाला प्रथम आधुनिक ग्रंथ। |
| साध्य साधन को उचित ठहराता है | मैकियावेली से आरोपित | यह वाक्य द प्रिंस में इसी रूप में नहीं है — यह उनके तर्क का लोकप्रिय सार है। |
| यहीं मैं खड़ा हूँ, मैं और कुछ नहीं कर सकता | मार्टिन लूथर | 1521, वर्म्स की डाइट में मत वापस लेने से इनकार — आरोपण परंपरागत। |
| 95 थीसिस — क्षमा-पत्रों (indulgences) का विरोध | मार्टिन लूथर | 1517, विटेनबर्ग; धर्मसुधार आंदोलन का प्रारंभ। |
| पृथ्वी नहीं, सूर्य केन्द्र में है | निकोलस कोपरनिकस | De Revolutionibus (1543); सूर्यकेन्द्रित सिद्धांत। |
| फिर भी यह घूमती है | गैलीलियो से आरोपित | 1633 में मत-त्याग के बाद कही मानी जाती है; समकालीन प्रमाण नहीं — किंवदंती। |
| ज्ञान ही शक्ति है | फ़्रांसिस बेकन | आगमनात्मक (inductive) वैज्ञानिक पद्धति के प्रवर्तक। |
| मैं सोचता हूँ, इसलिए मैं हूँ | रेने देकार्त | 1637; संदेह से निश्चय तक — आधुनिक दर्शन का आरंभ-बिंदु। |
| मैंने दूर तक इसलिए देखा क्योंकि मैं दिग्गजों के कंधों पर खड़ा था | आइज़क न्यूटन | 1675, हुक को पत्र — वैज्ञानिक परंपरा की संचयी प्रकृति। |
| मनुष्य ही सृष्टि का केन्द्र है | मानवतावादी चिंतन का सार | पिको देला मिरांडोला की Oration on the Dignity of Man इसका प्रतिनिधि ग्रंथ है। |
03प्रबोधन एवं अमेरिकी क्रांति Enlightenment and the American Revolution
मनुष्य स्वतंत्र जन्मा है, फिर भी वह सर्वत्र बेड़ियों में है।
ज्याँ-जाक रूसो · सामाजिक संविदा (1762) — भाव-अनुवाद| कथन का भाव | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| मनुष्य स्वतंत्र जन्मा है, पर सर्वत्र बेड़ियों में है | रूसो · सामाजिक संविदा | लोकप्रिय संप्रभुता एवं "सामान्य इच्छा" का सिद्धांत। |
| प्रकृति की ओर लौटो | रूसो से आरोपित | उनके चिंतन का सार; इन शब्दों में उन्होंने नहीं लिखा। |
| शक्तियों का पृथक्करण ही स्वतंत्रता की रक्षा करता है | मॉन्टेस्क्यू · Spirit of the Laws (1748) | अमेरिकी एवं अनेक आधुनिक संविधानों का आधार। |
| मैं तुम्हारी बात से असहमत हूँ, पर उसे कहने के अधिकार की रक्षा करूँगा | वॉल्टेयर को आरोपित | वास्तव में यह वाक्य उनकी जीवनीकार एवलिन बीट्रिस हॉल ने लिखा था। |
| यदि ईश्वर न होता तो उसका आविष्कार करना पड़ता | वॉल्टेयर | देववाद (deism) एवं संगठित धर्म की आलोचना। |
| सरकार शासितों की सहमति से ही वैध होती है | जॉन लॉक | प्राकृतिक अधिकार — जीवन, स्वतंत्रता एवं सम्पत्ति। |
| बिना प्रतिनिधित्व के कराधान अत्याचार है | अमेरिकी उपनिवेशवासियों का नारा | 1765 स्टाम्प एक्ट के विरोध में; क्रांति का केन्द्रीय तर्क। |
| मुझे स्वतंत्रता दो या मृत्यु दो | पैट्रिक हेनरी | 1775, वर्जीनिया कन्वेंशन। |
| सभी मनुष्य समान बनाए गए हैं | अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा (1776) | प्रारूपकार थॉमस जेफ़रसन; प्रबोधन-दर्शन का राजनीतिक रूपांतरण। |
| जनता की, जनता के द्वारा, जनता के लिए सरकार | अब्राहम लिंकन | 1863, गेटिसबर्ग संबोधन; लोकतंत्र की सर्वाधिक उद्धृत परिभाषा। |
| आधा दास, आधा स्वतंत्र रहकर यह राष्ट्र टिक नहीं सकता | अब्राहम लिंकन | 1858, "House Divided" भाषण — भाव-अनुवाद। |
04फ्रांसीसी क्रांति एवं नेपोलियन French Revolution and Napoleon
| कथन | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व | फ्रांसीसी क्रांति का उद्घोष | 1789; आज फ्रांस का राष्ट्रीय आदर्श-वाक्य। |
| मैं ही राज्य हूँ | लुई चौदहवाँ से आरोपित | निरंकुश राजतंत्र का प्रतीक-वाक्य; प्रामाणिकता विवादित। |
| मेरे बाद जल-प्रलय आए | लुई पंद्रहवाँ (या मादाम द पोम्पादूर) से आरोपित | बूर्बों शासन की गैर-ज़िम्मेदारी का प्रतीक। |
| यदि रोटी नहीं है तो केक खा लें | मैरी एंटोइनेट को आरोपित | निराधार — यह कथन रूसो के लेखन में उनसे वर्षों पहले मिलता है। |
| तृतीय एस्टेट ही सब कुछ है, अब तक वह कुछ भी नहीं था | अब्बे सीयेस | पुस्तिका What is the Third Estate? (1789)। |
| राष्ट्र की संप्रभुता जनता में निहित है | मानव एवं नागरिक अधिकार घोषणा | 26 अगस्त 1789; क्रांति का वैधानिक दस्तावेज़। |
| क्रांति अपनी ही संतानों को खा जाती है | ज़ॉर्ज दांतों से आरोपित | आतंक-राज (1793–94) का सार; दांतों स्वयं गिलोटिन पर चढ़े। |
| आतंक न्याय का ही त्वरित एवं कठोर रूप है | मैक्समिलियन रोब्सपियर | आतंक-राज का सैद्धांतिक औचित्य — भाव-अनुवाद। |
| मेरे शब्दकोश में "असंभव" शब्द नहीं है | नेपोलियन बोनापार्ट | परंपरागत रूप से आरोपित; उनकी इच्छाशक्ति का प्रतीक। |
| मैं ही क्रांति हूँ | नेपोलियन बोनापार्ट | स्वयं को क्रांति का उत्तराधिकारी एवं समापक दोनों घोषित करना। |
| इंग्लैण्ड दुकानदारों का राष्ट्र है | नेपोलियन (मूल विचार एडम स्मिथ का) | महाद्वीपीय व्यवस्था (Continental System) का तर्क। |
| स्पेन का नासूर मुझे खा गया | नेपोलियन | प्रायद्वीपीय युद्ध (1808–14) को अपनी सबसे बड़ी भूल बताया। |
परीक्षा-सूत्र: इस काल के कई "प्रसिद्ध कथन" वास्तव में बाद की गढ़ी हुई किंवदंतियाँ हैं। मैरी एंटोइनेट वाला वाक्य विशेष रूप से पूछा जाता है — उत्तर में "आरोपित, ऐतिहासिक रूप से निराधार" लिखना अधिक शुद्ध है।
05औद्योगिक क्रांति एवं समाजवाद Industrial Revolution and Socialism
दुनिया के मज़दूरो, एक हो — तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी बेड़ियों के सिवा कुछ नहीं।
कार्ल मार्क्स एवं फ़्रेडरिक एंगेल्स · कम्युनिस्ट घोषणापत्र (1848) — भाव-अनुवाद| कथन का भाव | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| अब तक का समस्त इतिहास वर्ग-संघर्ष का इतिहास है | मार्क्स-एंगेल्स · घोषणापत्र | 1848; ऐतिहासिक भौतिकवाद का प्रारंभिक सूत्र। |
| यूरोप में एक भूत मँडरा रहा है — साम्यवाद का भूत | मार्क्स-एंगेल्स · घोषणापत्र | घोषणापत्र की प्रसिद्ध आरंभिक पंक्ति — भाव-अनुवाद। |
| धर्म जनता की अफ़ीम है | कार्ल मार्क्स | 1844; धर्म को पीड़ा की अभिव्यक्ति एवं सांत्वना दोनों बताया। |
| प्रत्येक से उसकी क्षमता के अनुसार, प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार | कार्ल मार्क्स | गोथा कार्यक्रम की आलोचना (1875); साम्यवादी अवस्था का सूत्र। |
| दार्शनिकों ने विश्व की व्याख्या की है, प्रश्न उसे बदलने का है | कार्ल मार्क्स | फ़ायरबाख पर थीसिस — भाव-अनुवाद। |
| सम्पत्ति चोरी है | प्येर-ज़ोज़फ़ प्रूधों | 1840; अराजकतावादी परंपरा का प्रसिद्ध सूत्र। |
| अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख | जेरेमी बेंथम | उपयोगितावाद; ब्रिटिश सुधार एवं भारतीय प्रशासन दोनों पर प्रभाव। |
| समाजवाद क्रमिक एवं संवैधानिक मार्ग से आएगा | फ़ेबियन समाजवादी | 1884, फ़ेबियन सोसाइटी; क्रांति के बजाय सुधार। |
| पूँजीवाद अपने भीतर ही अपने विनाश के बीज बोता है | कार्ल मार्क्स · दास कैपिटल | आंतरिक अंतर्विरोध का सिद्धांत — भाव-अनुवाद। |
| श्रम-दिवस आठ घंटे का हो | शिकागो श्रमिक आंदोलन | 1886, हेमार्केट घटना; मई दिवस (1 मई) की पृष्ठभूमि। |
06राष्ट्रवाद एवं एकीकरण Nationalism and Unification
| कथन | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| जब फ़्रांस छींकता है, तो सारा यूरोप ज़ुकाम से पीड़ित हो जाता है | प्रिंस मेटरनिख | फ्रांसीसी क्रांति के यूरोपव्यापी प्रभाव पर। |
| इटली केवल एक भौगोलिक अभिव्यक्ति है | प्रिंस मेटरनिख | 1847; इटली की राष्ट्रीय एकता को नकारने वाला कथन। |
| युग की बड़ी समस्याएँ भाषणों से नहीं, रक्त एवं लौह से हल होंगी | ऑटो वॉन बिस्मार्क | 1862, प्रशा की संसद में — जर्मन एकीकरण की नीति। |
| राजनीति संभव का विज्ञान है | ऑटो वॉन बिस्मार्क | यथार्थ-राजनीति (Realpolitik) का सार। |
| तुर्की यूरोप का मरीज़ है | ज़ार निकोलस प्रथम | 1853; ऑटोमन साम्राज्य के क्षय एवं पूर्वी प्रश्न पर। |
| मैं तुम्हें भूख, प्यास, कठिनाई एवं मृत्यु के सिवा कुछ नहीं दे सकता | ज्यूसेपे गैरीबाल्डी | अपने स्वयंसेवकों को संबोधन — भाव-अनुवाद। |
| इटली का मस्तिष्क, हृदय एवं तलवार | प्रचलित वर्गीकरण | मस्तिष्क — कैवूर; हृदय — मैत्सिनी; तलवार — गैरीबाल्डी। |
| राष्ट्र ईश्वर की योजना है | ज्यूसेपे मैत्सिनी | "यंग इटली" (1831); रूमानी राष्ट्रवाद। |
| हमें भी सूर्य के नीचे स्थान चाहिए | जर्मन साम्राज्यवादी नीति (कैसर विलियम द्वितीय काल) | औपनिवेशिक हिस्सेदारी की माँग; विश्व-नीति (Weltpolitik)। |
| गोरे व्यक्ति का भार | रुडयार्ड किपलिंग | 1899; साम्राज्यवाद को "सभ्यता के दायित्व" के रूप में प्रस्तुत करना। |
07साम्राज्यवाद, प्रथम विश्वयुद्ध एवं रूसी क्रांति Imperialism, WWI and the Russian Revolution
| कथन का भाव | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| सारे यूरोप में दीपक बुझ रहे हैं; हम उन्हें अपने जीवनकाल में फिर जलते नहीं देखेंगे | सर एडवर्ड ग्रे | अगस्त 1914, युद्ध की पूर्वसंध्या पर — भाव-अनुवाद। |
| यह युद्ध सभी युद्धों को समाप्त कर देने वाला युद्ध है | एच.जी. वेल्स | 1914; बाद में यही वाक्य विडंबना का प्रतीक बन गया। |
| साम्राज्यवाद पूँजीवाद की सर्वोच्च अवस्था है | व्लादिमीर लेनिन | 1916; युद्ध की आर्थिक व्याख्या। |
| शांति, भूमि एवं रोटी | व्लादिमीर लेनिन | 1917, अप्रैल थीसिस एवं बोल्शेविक क्रांति का केन्द्रीय नारा। |
| सारी सत्ता सोवियतों को | बोल्शेविक नारा | 1917; अस्थायी सरकार के विरुद्ध। |
| साम्यवाद अर्थात् सोवियत सत्ता तथा सम्पूर्ण देश का विद्युतीकरण | व्लादिमीर लेनिन | 1920; तकनीकी आधुनिकीकरण पर बल — भाव-अनुवाद। |
| चौदह सूत्र — खुली संधियाँ एवं आत्मनिर्णय का अधिकार | वुड्रो विल्सन | जनवरी 1918; राष्ट्रसंघ (League of Nations) का आधार। |
| यह शांति नहीं, बीस वर्ष का युद्धविराम है | मार्शल फ़र्दिनांद फ़ॉश | 1919, वर्साय संधि पर टिप्पणी — 1939 में सत्य सिद्ध हुई। |
| वर्साय संधि एक "आरोपित शांति" (डिक्टेटेड पीस) थी | जर्मन प्रतिक्रिया | युद्ध-अपराध धारा (Article 231) से उपजा राष्ट्रीय आक्रोश। |
| राष्ट्रसंघ बिना दाँत वाला संगठन सिद्ध हुआ | समकालीन आलोचना | अमेरिका की अनुपस्थिति एवं सामूहिक सुरक्षा की विफलता। |
08द्वितीय विश्वयुद्ध एवं शीतयुद्ध WWII and the Cold War
मेरे पास देने को रक्त, श्रम, आँसू और पसीने के सिवा कुछ नहीं है।
विंस्टन चर्चिल · हाउस ऑफ़ कॉमन्स, 13 मई 1940 — भाव-अनुवाद| कथन का भाव | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| यह हमारे समय की शांति है | नेविल चेम्बरलेन | 1938, म्यूनिख समझौते के बाद — तुष्टीकरण नीति का प्रतीक-वाक्य। |
| रक्त, श्रम, आँसू एवं पसीना | विंस्टन चर्चिल | मई 1940, प्रधानमंत्री बनने पर प्रथम भाषण। |
| इतने लोगों ने इतने थोड़े लोगों का इतना ऋण कभी नहीं चुकाया | विंस्टन चर्चिल | 1940, ब्रिटेन का युद्ध — रॉयल एयर फ़ोर्स के पायलटों पर। |
| स्तेत्तिन से त्रिएस्ते तक महाद्वीप पर एक लौह-आवरण गिर चुका है | विंस्टन चर्चिल | मार्च 1946, फुल्टन (मिसौरी) भाषण — शीतयुद्ध की घोषणा। |
| "शीत युद्ध" शब्द का प्रयोग | बर्नार्ड बारूच (1947) · वाल्टर लिपमैन द्वारा प्रचलित | अमेरिका-सोवियत तनाव के लिए; मूल विचार जॉर्ज ऑरवेल का। |
| अमेरिका स्वतंत्र जनता की सहायता करेगा जो सशस्त्र अल्पसंख्यकों के दबाव में हैं | हैरी ट्रूमैन | 1947, ट्रूमैन सिद्धांत — नियंत्रण (containment) नीति। |
| मैं भी एक बर्लिनवासी हूँ | जॉन एफ़. केनेडी | 1963, पश्चिमी बर्लिन; दीवार के विरुद्ध एकजुटता। |
| इस दीवार को गिरा दीजिए | रोनाल्ड रीगन | 1987, ब्रांडेनबर्ग गेट; गोर्बाचेव को संबोधित। |
| ग्लासनोस्त एवं पेरेस्त्रोइका — खुलापन एवं पुनर्संरचना | मिखाइल गोर्बाचेव | 1985 से; सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया। |
| यह "इतिहास का अंत" है | फ़्रांसिस फ़ुकुयामा | 1989–92; उदार लोकतंत्र की अंतिम विजय की घोषणा। |
| अब संघर्ष विचारधाराओं का नहीं, सभ्यताओं का होगा | सैमुअल हंटिंगटन | 1993; फ़ुकुयामा की थीसिस का प्रत्युत्तर। |
- लौह-आवरण = चर्चिल, फुल्टन 1946 · ट्रूमैन सिद्धांत = 1947 · मार्शल योजना = 1948 — तीनों क्रम से याद रखें।
- "शीत युद्ध" पद — बारूच ने प्रयोग किया, वाल्टर लिपमैन ने लोकप्रिय बनाया।
- केनेडी = बर्लिन दीवार बनने के बाद (1963) · रीगन = दीवार गिरने से पहले (1987) — दो अलग क्षण।
- फ़ुकुयामा = इतिहास का अंत · हंटिंगटन = सभ्यताओं का संघर्ष — प्रायः एक-दूसरे से बदलकर पूछा जाता है।
09एशिया-अफ्रीका के जनांदोलन Movements of Asia and Africa
| कथन का भाव | कहने वाला | संदर्भ |
|---|---|---|
| राजनीतिक सत्ता बंदूक की नली से निकलती है | माओ त्से-तुंग | 1938; सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से क्रांति का सिद्धांत। |
| सौ फूल खिलने दो, सौ विचारधाराएँ प्रतिस्पर्धा करें | माओ त्से-तुंग | 1956, "सौ फूल अभियान" — अल्पकालिक वैचारिक खुलापन। |
| तीन जन-सिद्धांत — राष्ट्रवाद, लोकतंत्र एवं जन-जीविका | सुन यात-सेन | 1911 की चीनी क्रांति का वैचारिक आधार। |
| देश में शांति, विश्व में शांति | मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क | आधुनिक तुर्की की विदेश-नीति का सूत्र। |
| स्वतंत्रता कभी उपहार में नहीं मिलती, उसे माँगना पड़ता है | क्वामे न्क्रूमा (घाना) | अफ्रीकी उपनिवेश-मुक्ति का स्वर — भाव-अनुवाद। |
| परिवर्तन की आँधी पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में बह रही है | हैरॉल्ड मैकमिलन | 1960, केपटाउन — "Wind of Change" भाषण; उपनिवेश-मुक्ति की स्वीकृति। |
| मेरा एक सपना है | मार्टिन लूथर किंग जूनियर | 28 अगस्त 1963, वाशिंगटन मार्च; नागरिक अधिकार आंदोलन। |
| यह वह आदर्श है जिसके लिए मैं मरने को तैयार हूँ | नेल्सन मंडेला | 1964, रिवोनिया मुक़दमा; रंगभेद-विरोधी संघर्ष — भाव-अनुवाद। |
| शिक्षा वह सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे संसार बदला जा सकता है | नेल्सन मंडेला | स्वतंत्र दक्षिण अफ्रीका के पुनर्निर्माण पर — भाव-अनुवाद। |
| स्वतंत्रता एवं स्वाधीनता से बढ़कर कुछ भी मूल्यवान नहीं | हो ची मिन्ह | वियतनाम के स्वाधीनता संघर्ष का केन्द्रीय वाक्य। |
10इतिहासकारों एवं चिंतकों के कथन Historians and Thinkers on History
विश्व इतिहास की परीक्षा में इतिहास-दर्शन से भी प्रश्न आते हैं। ये कथन प्रायः भारतीय इतिहासलेखन वाले खंड से जुड़कर पूछे जाते हैं, इसलिए दोनों को साथ दोहराएँ।
| कथन का भाव | कहने वाला | निहितार्थ |
|---|---|---|
| इतिहासकार बताए कि वास्तव में जैसा घटित हुआ | लियोपोल्ड फ़ॉन रांके | प्रत्यक्षवादी, स्रोत-आलोचना आधारित वैज्ञानिक इतिहास। |
| इतिहास इतिहासकार एवं तथ्यों के बीच अनवरत संवाद है | ई.एच. कार | तथ्य एवं व्याख्या अविभाज्य। |
| समस्त इतिहास समकालीन इतिहास है | बेनेदेत्तो क्रोचे | वर्तमान की चिंता अतीत के प्रश्न तय करती है। |
| इतिहास अतीत के विचारों का पुनःअनुभवन है | आर.जी. कॉलिंगवुड | इतिहास मूलतः विचार का इतिहास। |
| सभ्यताएँ "चुनौती एवं प्रत्युत्तर" से उठती और गिरती हैं | अर्नाल्ड टॉयनबी · A Study of History | चक्रीय सभ्यता-सिद्धांत। |
| सभ्यताएँ जीव की भाँति जन्म, यौवन एवं क्षय से गुज़रती हैं | ओसवाल्ड स्पेंगलर · Decline of the West | जैविक रूपक पर आधारित इतिहास-दर्शन। |
| इतिहास से हम केवल यही सीखते हैं कि हम इतिहास से कुछ नहीं सीखते | जॉर्ज विल्हेम फ़्रेडरिक हेगेल | विडंबनात्मक टिप्पणी — भाव-अनुवाद। |
| जो अतीत को स्मरण नहीं रखते, वे उसे दोहराने के लिए अभिशप्त हैं | जॉर्ज संतायना | इतिहास-बोध की व्यावहारिक उपयोगिता। |
| इतिहास मृतकों पर खेला गया एक छल है | वॉल्टेयर को आरोपित | इतिहास-लेखन की व्याख्यात्मक प्रकृति पर व्यंग्य। |
| इतिहास मूलतः मानव-जाति के अपराधों एवं दुर्भाग्यों का लेखा है | एडवर्ड गिबन | Decline and Fall of the Roman Empire — भाव-अनुवाद। |
| घटना नहीं, "दीर्घ अवधि" इतिहास की असली इकाई है | फ़र्नां ब्रॉदेल · अन्नाल्स स्कूल | भूगोल एवं संरचना पर केन्द्रित इतिहास। |
| अब तक का समस्त इतिहास वर्ग-संघर्ष का इतिहास है | कार्ल मार्क्स | ऐतिहासिक भौतिकवाद। |
- हेगेल = "इतिहास से कुछ नहीं सीखते" · संतायना = "जो याद नहीं रखते, वे दोहराते हैं" — दोनों प्रायः बदलकर पूछे जाते हैं।
- टॉयनबी = चुनौती एवं प्रत्युत्तर · स्पेंगलर = जैविक क्षय — दोनों चक्रीय हैं, पर रूपक अलग।
- "साध्य साधन को उचित ठहराता है" मैकियावेली की पुस्तक में इन्हीं शब्दों में नहीं है — यह उनके तर्क का लोकप्रिय सार है।
- वॉल्टेयर वाला अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता का प्रसिद्ध वाक्य वास्तव में उनकी जीवनीकार एवलिन बीट्रिस हॉल का लिखा है।