मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद · क्षेत्रीय राज्य · विदेशी आक्रमण · दक्षिण भारत
राजनीतिक स्थिति (200 ई.पू. – 300 ई.)
मौर्य साम्राज्य का पतन: 180 ई.पू. के आसपास — अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या (पुष्यमित्र शुंग)। उत्तर भारत: शुंग (185–73 ई.पू.), कण्व (73–28 ई.पू.), फिर कुषाण/मध्य एशियाई शक्तियाँ। पश्चिम/मध्य: सातवाहन (आंध्र/दक्कन) — मौर्यों के बाद सबसे शक्तिशाली दक्षिण भारतीय साम्राज्य। सुदूर दक्षिण: संगम युग — चेर, चोल, पांड्य — तीन प्रमुख राजवंश (मुवेन्दर)। विदेशी प्रभाव: यूनानी (इंडो-ग्रीक), शक (पश्चिमी क्षत्रप), पार्थियन, कुषाण — उत्तर-पश्चिम में प्रभाव।
प्रमुख स्रोत (Sources)
• साहित्यिक: संगम साहित्य (एट्टुतोकै, पट्टुप्पट्टु), पेरिप्लस (यूनानी पाठ), टॉलेमी का भूगोल।
• पुरातात्त्विक: नासिक, नानाघाट, हाथीगुम्फा अभिलेख — सातवाहन एवं कलिंग राजाओं के अभिलेख।
• मुद्राएँ: सातवाहन (सीसा, ताँबा), रोमन सिक्के (अरिकमेडु, मुजिरिस)।
• विदेशी वृत्तांत: 'पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी' (पहली शताब्दी ई.) — व्यापार मार्ग, बंदरगाह।
• अभिलेख: नासिक अभिलेख — गौतमीपुत्र सातकर्णी की माँ गौतमी बालश्री द्वारा उत्कीर्ण।
काल: लगभग 1st शताब्दी ई.पू. – 3rd शताब्दी ई. (लगभग 450 वर्ष)। स्थापक:सिमुक (c. 1st शताब्दी ई.पू.) — प्रथम शासक। राजधानी: प्रतिष्ठान (पैठन, महाराष्ट्र) / अमरावती (आंध्र प्रदेश) — दोहरी राजधानी। वंश: 'आंध्र' या 'शातवाहन' कहलाए — मौर्यों के सामंत थे, बाद में स्वतंत्र। क्षेत्र: महाराष्ट्र, दक्कन, आंध्र, कर्नाटक के कुछ भाग — 'दक्षिणापथ' का शासक। शकों से संघर्ष: पश्चिमी क्षत्रप (शक) से निरंतर युद्ध — गौतमीपुत्र सातकर्णी ने शकों को पराजित किया।
शासक
शासनकाल (लगभग)
प्रमुख उपलब्धियाँ/घटनाएँ
सिमुक
1st शताब्दी ई.पू.
वंश के संस्थापक — स्वतंत्र राज्य की स्थापना
कृष्ण
1st शताब्दी ई.पू.
सिमुक का भाई/उत्तराधिकारी — साम्राज्य विस्तार
सातकर्णी I
1st शताब्दी ई.पू.
अश्वमेध यज्ञ किया — साम्राज्य सुदृढ़
गौतमीपुत्र सातकर्णी
106–130 ई.
सबसे महान शासक — शकों (नहपान) को पराजित किया — नासिक अभिलेख
वसिष्ठिपुत्र पुलुमावी
130–159 ई.
अभिलेखों में 'पुलुमावी' — मुद्राओं पर जहाज का चित्रण (समुद्री व्यापार)
यज्ञश्री सातकर्णी
170–190 ई.
अंतिम महान शासक — शकों पर पुनः विजय — सिक्कों पर 'यज्ञश्री'
अंतिम शासक
220–250 ई.
रुद्रदामन (शक) द्वारा पराजित — सातवाहन साम्राज्य का अंत
गौतमीपुत्र सातकर्णी — विशेष
शासन: 106–130 ई. — सातवाहन वंश का सर्वश्रेष्ठ शासक। युद्ध: नहपान (शक शासक) को पराजित किया — पश्चिमी भारत (गुजरात, मालवा) पर अधिकार। अभिलेख:नासिक अभिलेख — उसकी माँ गौतमी बालश्री ने उत्कीर्ण कराया — "सभी क्षत्रियों का विनाशक" (सात क्षत्रियों को हराया)। उपाधि:"दक्षिणापथ का स्वामी" — दक्षिण भारत का सम्राट। राज्य: ब्राह्मण धर्म का संरक्षण — अश्वमेध यज्ञ किए। मुद्राएँ: सीसा, ताँबा, चाँदी — गौतमीपुत्र सातकर्णी का नाम अंकित।
सातवाहन — शासन व्यवस्था
प्रशासन: साम्राज्य को 'जनपदों' में बाँटा — राज्य का अधिकारी 'अमात्य' (मंत्री), 'सेनापति' (सेना प्रमुख)। राजस्व: 'बलि' (नियमित कर), 'भाग' (फसल का 1/6), 'कर' (अतिरिक्त शुल्क) — भूमि राजस्व मुख्य आय। सेना: घुड़सवार, हाथी, रथ — पश्चिमी क्षत्रपों के विरुद्ध प्रभावी। न्याय: राजा सर्वोच्च न्यायाधीश — 'धर्मसभा' न्यायिक निकाय। सामन्त: सामन्त राजाओं की व्यवस्था — 'महाभोज' (सामन्तों को उपाधि)।
सातवाहन — प्रशासन, राजस्व, मुद्राएँ एवं अर्थव्यवस्था
कर · मुद्राएँ · व्यापार · भूमि प्रशासन · संरक्षण
प्रशासनिक ढाँचा
• केन्द्रीय स्तर: राजा (महाराज), मंत्री (अमात्य), सेनापति (सेना प्रमुख)।
• प्रांतीय स्तर: 'जनपद' — अधिकारी 'महाराज' (उपाधि) — प्रांतों पर शासन।
• स्थानीय स्तर: ग्राम — 'ग्रामिक' (गाँव का मुखिया), 'महात्तर' (ग्राम पंचायत)।
• श्रेणियाँ (गिल्ड): व्यापारियों के संघ — 'श्रेणियाँ' — उत्पादन, व्यापार का नियंत्रण।
• दान: बौद्ध एवं ब्राह्मण संस्थाओं को भूमि-दान — 'अग्रहार' (ब्राह्मणों को गाँव)।
अर्थव्यवस्था एवं मुद्राएँ
• मुद्राएँ:सीसा (Lead), ताँबा (Copper), चाँदी (Silver) — अधिकतर सीसा सिक्के।
• व्यापार: आंतरिक — कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प (कपड़ा, धातु)।
• समुद्री व्यापार: रोम के साथ — मुजिरिस, अरिकमेडु बंदरगाह।
• कर:बलि (6%), भाग (1/6), कर (अतिरिक्त) — भूमि राजस्व मुख्य स्रोत।
• सिंचाई: तालाब, बावड़ी, नहरें — कृषि का आधार।
• व्यापारिक संघ: 'श्रेणियाँ' — व्यापारियों, कारीगरों के संगठन।
प्रमुख शासक: करिकाल चोल — वेंनी का युद्ध, कल्लणई बाँध (कावेरी)
व्यापार: विदेशी (रोम) — व्यापारिक बेड़ा
चोलों का प्रतीक: बाघ
चेर
चेर राजवंश
Cheras · Vanji · Malabar
पश्चिमी घाट
राजधानी: वंजी (केरल)
प्रमुख शासक: सेंगुट्टुवन — (इलंगो अडिगल का अभिलेख)
हिमालय अभियान — युद्ध में विजय
चेरों का प्रतीक: धनुष
समृद्ध समुद्री व्यापार — काली मिर्च, इलायची
संगम (Sangam) — तीन संगम
प्रथम संगम: मदुरै — 4440 वर्ष — पाणिनि, आगस्त्य — (पौराणिक)। द्वितीय संगम: कपाटपुरम — 3700 वर्ष — तोलकाप्पियार (तोलकाप्पियम्)। तृतीय संगम: मदुरै — 1850 वर्ष — सर्वाधिक प्रसिद्ध — एट्टुतोकै, पट्टुप्पट्टु। संरक्षक: पांड्य राजाओं ने संरक्षण दिया — विद्वानों, कवियों को संरक्षण।
प्रमुख सांगम राजा — तुलनात्मक
• चोल करिकाल: वेंनी (स्थान) में 109 राजाओं को हराया — 'कल्लणई' (कावेरी बाँध) निर्माण।
• पांड्य नेडुंजेलियन: तलैयालंगानम (Madurai) में चेर-चोल संघ को हराया।
• चेर सेंगुट्टुवन: कनक (लक्ष्मी) की मूर्ति लाने के लिए हिमालय गए — 'पथित्रुप्पत्तु' में वर्णन।
समय: पहली शताब्दी ई.पू. – तीसरी शताब्दी ई. (अधिकतर गतिविधि)। स्रोत:‘पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी’ (ग्रीक पाठ — 60 ई. के आसपास) — व्यापार मार्ग, बंदरगाह, वस्तुएँ। रोमन सिक्के: भारत में बड़ी संख्या में मिले (अरिकमेडु, मुजिरिस, कोर्कै) — रोमन सम्राटों के (टिबेरियस, ऑगस्टस, क्लॉडियस)। मार्ग: मिस्त्र (रेड सी) → अरब सागर → भारत का पश्चिमी तट (मुजिरिस, भड़ौच) → फिर आगे पूर्वी तट (अरिकमेडु)। रोमन कमी: प्लिनी (1st शताब्दी) ने लिखा — "भारत, चीन और अरब से रोम का 100 मिलियन सेस्टरस प्रति वर्ष चला जाता है" (सोने का बहिर्वाह)।
भारत से निर्यात (Exports)
• काली मिर्च (Pepper): 'काली मिर्च' — सबसे मूल्यवान वस्तु — मालाबार तट (केरल)।
• मसाले: इलायची, लौंग, जायफल, दारचीनी — दक्षिण भारत का विशेष उत्पाद।
• वस्त्र: मलमल, रेशम, सूती कपड़ा — 'मुशलिन' (मुशलिन) — बंगाल, तमिलनाडु।
• मोती: मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु) — विश्व प्रसिद्ध मोती।
• हाथी दाँत: भारतीय हाथी — शिल्प, आभूषण।
• रत्न/हीरा: गोलकुंडा (आंध्र) — हीरा, माणिक्य।
• कछुआ खोल: आभूषण, कंघी — दक्षिण भारत।
भारत में आयात (Imports)
• रोमन सिक्के: सोना, चाँदी — भुगतान का प्रमुख साधन।
• मदिरा (Wine): इटली से — धनी वर्ग द्वारा उपयोग।
• काँच (Glassware): अलेक्जेंड्रिया, रोम — बर्तन, मोती।
• ताम्र पात्र (Bronze): रोमन कलाकृति — मूर्तियाँ, दीपक।
• जैतून का तेल: रोमन साम्राज्य से — खाना पकाने, धार्मिक अनुष्ठान।
• सुगन्धित पदार्थ: अगर, चन्दन, गुलाब (मध्य एशिया से भी)।
जाति · वर्ग · व्यवसाय · महिलाएँ · शिक्षा · ग्रामीण-नगरीय जीवन
सामाजिक संरचना
• जाति व्यवस्था: चार वर्ण — ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र — परन्तु दक्षिण में कम कठोर।
• व्यवसायिक समूह: किसान (उलवर), व्यापारी (वाणिगर), कारीगर (तच्छर, कुम्मर)।
• इदंगाई (बायाँ) एवं वलंगाई (दायाँ) जातियाँ: व्यापारिक और सैन्य समूहों के बीच प्रतिस्पर्धा।
• ग्राम जीवन: 'ऊर' (गाँव) — सामुदायिक जीवन, पंचायत ('मनरम')।
• नगरीय जीवन: 'पट्टिनम' (बंदरगाह नगर) — मदुरै, कावेरीपट्टिनम, वंजी — व्यापार, शिल्प, प्रशासन के केन्द्र।
महिलाएँ एवं शिक्षा
• महिलाएँ: संगम साहित्य में महिला कवियाँ (अव्वैयार, काक्काईपादिनियार) — कुछ स्वतंत्रता।
• शिक्षा: ब्राह्मण एवं बौद्ध संस्थाएँ — तमिल, संस्कृत, प्राकृत का ज्ञान।
• विवाह: बहुपत्नी प्रथा (राजाओं में), 'कलप्पु' (नियुक्ति) और 'पोरुळ' (संपत्ति) विवाह।
• सती: दुर्लभ — केवल वीरपत्नियों में (नायकों की मृत्यु पर)।
• व्यवसाय: कृषि, हस्तशिल्प, व्यापार, नृत्य, गायन — विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएँ।
धर्म एवं संस्कृति — बौद्ध · जैन · भक्ति · ब्राह्मणवाद
अशोक के स्तूप · नासिक की गुफाएँ · सातवाहन संरक्षण · संगम धर्म
धार्मिक परिदृश्य
• बौद्ध धर्म: अशोक के बाद दक्षिण में प्रसार — स्तूप (अमरावती, नागार्जुनकोंडा) — सातवाहनों ने बौद्धों को संरक्षण दिया।
• जैन धर्म: संगम काल में प्रभाव — जैन आचार्यों ने तमिल साहित्य का विकास किया — 'शिलप्पदिकारम्' जैन ग्रन्थ है।
• ब्राह्मणवाद/हिन्दू धर्म: अश्वमेध, वाजपेय यज्ञ — सातवाहन राजाओं ने कराए।
• भक्ति आन्दोलन: प्रारम्भिक भक्ति — विष्णु, शिव, मुरुगन की पूजा — संगम साहित्य में उल्लेख।
• ग्रामीण देवी-देवता: कोर्रवै (युद्ध देवी), मुरुगन (तमिल देवता) — स्थानीय पूजा।
प्रमुख स्थापत्य/कलाएँ
• अमरावती स्तूप: आंध्र — बौद्ध कला का उत्कृष्ट उदाहरण — यक्ष, बोधिसत्व, जातक कथाएँ।
• नागार्जुनकोंडा: बौद्ध विहार, स्तूप, मूर्तियाँ — सातवाहन/इक्ष्वाकु काल।
• नासिक/अजंता/एलोरा: चट्टान-कटाई (रॉक-कट) — बौद्ध चैत्य, विहार — सातवाहन संरक्षण।
• मूर्तियाँ: यक्ष, यक्षिणी, बोधिसत्व — प्राकृतिक, सरल रेखाएँ — दक्षिण भारतीय शैली।
• मसाले: काली मिर्च, इलायची, लौंग, जायफल — उच्च मूल्य — रोम में अत्यधिक माँग।
• वस्त्र: मलमल (मुशलिन), रेशम, सूती कपड़ा — बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु।
• मोती: मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु) — विश्व प्रसिद्ध मोती — रोमन महिलाएँ पहनती थीं।
• हाथी दाँत: भारतीय हाथी — शिल्प, बर्तन, मूर्तियाँ।
• रत्न/हीरा: गोलकुंडा (आंध्र) — हीरा, माणिक्य, पन्ना।
• कछुआ खोल: आभूषण, कंघी, बर्तन — समुद्री तटों से।
आयात (Imports to India)
• रोमन सिक्के: सोना (ऑरियस), चाँदी (डेनारियस) — भुगतान, संचय, कलाकृति।
• मदिरा: इटली, ग्रीस — कुलीन वर्ग, धार्मिक अनुष्ठान।
• काँच: अलेक्जेंड्रिया, रोम — बर्तन, मोती, खिड़कियाँ।
• ताम्र पात्र (Bronze): रोमन मूर्तियाँ, दीपक, बर्तन — कलात्मक वस्तुएँ।
• जैतून का तेल: रोमन साम्राज्य — खाना पकाने, धार्मिक, औषधीय।
• सुगन्धित पदार्थ: अगर, चन्दन, गुलाब (मध्य एशिया/रोम) — इत्र, दवाएँ।
प्लिनी की शिकायत (Pliny's Complaint)
रोमन लेखक प्लिनी (सीनियर) ने अपनी पुस्तक 'नेचुरल हिस्ट्री' (1st शताब्दी ई.) में लिखा — “भारत, चीन और अरब से रोम का 100 मिलियन सेस्टरस प्रति वर्ष चला जाता है” — यह रोमन सोने के बहिर्वाह (drain of gold) की प्रमुख शिकायत थी। इससे पता चलता है कि भारत-रोम व्यापार बहुत बड़ा और असंतुलित (भारत के पक्ष में) था।