छत्तीसगढ़ के हिंदी लेखक डॉ. विनोद कुमार शुक्ल को मिला 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार

छत्तीसगढ़ के हिंदी लेखक डॉ. विनोद कुमार शुक्ल को मिला 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार

  • प्रख्यात हिंदी साहित्यकार, 88 वर्षीय विनोद कुमार शुक्ल को हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए 2024 का 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • यह भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जिसे भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य के लिए दिया जाता है.
  • इसके अंतर्गत 11 लाख रुपये की राशि, वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है.
  • विनोद कुमार शुक्ल हिन्दी के 12वें और छत्तीसगढ़ के पहले साहित्यकार हैं जिन्हें यह पुरस्कार मिला है.
  • हिंदी लेखक विनोद कुमार शुक्ल छत्तीसगढ़ से ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ जीतने वाले पहले लेखक बने।

विनोद कुमार शुक्ल, छत्तीसगढ़ के एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और लेखक, को भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान “ज्ञानपीठ पुरस्कार” के लिए चुना गया है। श्री शुक्ल जी का जन्म 1 जनवरी 1947 को राजनांदगांव में हुआ था। वे लगभग पचास वर्षों से साहित्यिक लेखन में सक्रिय हैं। उनका पहला काव्य संग्रह “लगभग जय हिंद” वर्ष 1971 में प्रकाशित हुआ था।

उनके उपन्यास “नौकर की कमीज”“खिलेगा तो देखेंगे” और “दीवार में एक खिड़की रहती थी” हिंदी साहित्य की श्रेष्ठ कृतियों में गिने जाते हैं। उनकी कहानियों की पुस्तकें जैसे “पीड़ पर कमरा” और “महाविद्यालय”, तथा कविताएँ जैसे “वह आदमी चला गया, नया गरम कोट पहनकर”“आकाश धरती को खटकता है” और “कविता से लंबी कविता” पाठकों में अत्यंत लोकप्रिय हैं। उन्होंने बच्चों के लिए भी कई पुस्तकें लिखी हैं और उनके कार्यों का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

विनोद कुमार शुक्ल को इससे पहले गजानन माधव मुक्तिबोध फैलोशिपरज़ा पुरस्कार और साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।

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