भारत-अफ्रीका साझेदारी: वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना

भारत-अफ्रीका साझेदारी: वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना

संदर्भ

भारतीय उद्योग परिसंघ (Confederation of Indian Industry- CII) के 20वें भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन में सरकार ने वर्ष 2030 तक भारत-अफ्रीका द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का आह्वान किया।

कॉन्क्लेव के मुख्य बिंदु

  • ध्यान केंद्रित करना: मूल्य संवर्द्धन, प्रौद्योगिकी-संचालित कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा।
  • वस्तु व्यापार पर औद्योगिक सहयोग: वस्तु व्यापार से आगे बढ़कर औद्योगिक सहयोग और मूल्य संवर्द्धन की ओर वृद्धि की आवश्यकता है।
  • सेवा क्षेत्र में भारत एक महाशक्ति के रूप में: इंजीनियरिंग, IT, AI और वास्तुकला जैसी सेवाओं में भारत एक लागत-प्रतिस्पर्द्धी भागीदार के रूप में।
  • संसाधन भागीदार के रूप में अफ्रीका: अफ्रीका क्रिटिकल  मिनरल, ऊर्जा और कृषि वस्तुओं का एक विश्वसनीय स्रोत है।
  • साझा विकास लक्ष्य: रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असंतुलन को कम करके और हरित विकास को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक समृद्धि सुनिश्चित करना।

भारत-अफ्रीका व्यापार की वर्तमान स्थिति

  • संतुलित द्विपक्षीय व्यापार: द्विपक्षीय व्यापार अत्यधिक संतुलित है, भारत का निर्यात 42.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर और आयात 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
  • अफ्रीका के आयात परिदृश्य में अप्रयुक्त अवसर: अफ्रीका का आयात प्रोफाइल अप्रयुक्त अवसरों को दर्शाता है, उदाहरण के लिए, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में जहाँ अफ्रीका सालाना 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के वाहनों का आयात करता है, जबकि भारत केवल 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आपूर्ति करता है।
  • प्रतिस्पर्द्धा की बजाय पूरकताओं की खोज: प्रतिस्पर्द्धा की बजाय पूरकताओं की खोज की व्यापक संभावना है।

सहयोग के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र

  • कृषि और खाद्य सुरक्षा: प्रौद्योगिकी-संचालित कृषि, सहकारी और स्वयं सहायता समूह मॉडल, और फसल विविधीकरण में सहयोग।
    • अफ्रीका क्रिटिकल मिनरल और पेट्रोलियम उत्पादों के माध्यम से भारत का समर्थन कर सकता है, जबकि भारत उर्वरक, कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य उत्पाद प्रदान कर सकता है।
  • उद्योग और विनिर्माण: यात्री वाहनों, वाणिज्यिक वाहनों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों, और वहनीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी समाधानों सहित ऑटोमोबाइल क्षेत्र में विस्तार।
    • कच्चे माल के निर्यात से वैश्विक बाजारों के लिए मूल्यवर्धित उत्पादन की ओर परिवर्तन।
  • स्वास्थ्य सेवा और औषधियाँ: किफायती जेनेरिक दवाएँ, टीके, चिकित्सा उपकरण और चिकित्सा पर्यटन।
    • कोविड-19 महामारी ने दवाओं और टीकों के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को प्रदर्शित किया।
  • नवीकरणीय ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी प्रौद्योगिकियों में संयुक्त प्रयास।
    • कोबाल्ट और लीथियम सहित अफ्रीका की खनिज संपदा, भारत के हरित परिवर्तन के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  • डिजिटल और वित्तीय प्रणालियाँ: भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) को अपनाने से लेन-देन की लागत कम हो सकती है और अफ्रीका का वित्तीय बुनियादी ढाँचा मजबूत हो सकता है।
    • IT, AI, दूरसंचार और वित्तीय प्रौद्योगिकी सेवाओं में अवसर मौजूद हैं।
  • मानव पूँजी और ज्ञान साझाकरण: भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने हेतु शिक्षा, कौशल विकास, स्टार्ट-अप, अनुसंधान एवं विकास और युवा साझेदारी में सहयोग।
See also  The Organization of the Petroleum Exporting Countries (OPEC)

सामरिक महत्त्व

  • जनसांख्यिकीय शक्ति: भारत और अफ्रीका की कुल जनसंख्या 2 अरब से अधिक है, जो वैश्विक जनसंख्या का एक-तिहाई है।
  • ऐतिहासिक संबंध: स्वतंत्रता संग्राम और महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका के साथ जुड़ाव के माध्यम से गहरे ऐतिहासिक संबंध है।
  • वैश्विक दक्षिण नेतृत्व: विश्व व्यापार संगठन, संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक निर्णय लेने को प्रभावित करने में ‘ग्लोबल साउथ’  की साझा जिम्मेदारी।
  • आकांक्षाओं का अभिसरण: भारत की वर्ष 2047 तक की विकासात्मक आकांक्षाएँ अफ्रीका के समृद्धि लक्ष्यों के साथ संरेखित होती हैं।
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