मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बुंदेलों के महल-किले

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बुंदेलों के महल-किले

 
  • बुंदेलों के महल-किलों में बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित निम्नलिखित 6 प्रमुख संरचनाएं शामिल हैं-
  • गढ़कुंडार किला: यह गढ़कुंडार में स्थित है, जो बुंदेल राजपूतों की प्रारंभिक राजधानी थी।

  • राजा महल (ओरछा): यह महल बुंदेला शासक मधुकर शाह के शासनकाल के दौरान बनवाया गया था।
    • 16वीं शताब्दी में राजधानी को ओरछा स्थानांतरित कर दिया गया था।
  • जहांगीर महल (ओरछा): इसका निर्माण मधुकर शाह के शासनकाल में प्रारंभ हुआ था और इसका प्रमुख निर्माण बीर सिंह देव के शासनकाल में हुआ था।
  • दतिया महल: इसका निर्माण 1620 ई. में बीर सिंह देव ने करवाया था। यह पांच मंजिला भवन है, जिसे बीर सिंह देव महल के नाम से भी जाना जाता है।
  • झाँसी का किला: यह किला 17वीं शताब्दी के प्रारंभ में बीर सिंह देव ने बनवाया था।
  • धुबेला महल: यह महल 17वीं शताब्दी में महाराजा छत्रसाल ने बनवाया था और यह धुबेला झील के पास स्थित है।
  • बुंदेलों के महल-किलों की मुख्य विशेषताएं:
    • बुंदेल राजपूत शैली और मुगल शैली का संश्लेषण: छतरियों और जटिल नक्काशी जैसी पारंपरिक राजपूत विशेषताओं को बरकरार रखते हुए ओजी मेहराब, गुंबद और गुंबददार मार्ग जैसे मुगल तत्वों को शामिल किया गया है। 
    • मुगल रूपांकनों व भित्ति चित्रों की स्थानीय पुनर्व्याख्या: मुगल शैली के साथ-साथ रागमाला और रासलीला जैसे प्रतीकात्मक विषयों से प्रेरित हैं।
    • रक्षा और सौंदर्यशास्त्र का एकीकरण: छतरियों, अलंकरणीय गुंबदों और मेहराबदार खिड़कियों के रूप में सौंदर्यशास्त्र के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थलाकृति के अनुकूल उन्नत किलेबंदी रणनीतियों का समन्वय किया गया है।
    • स्थापत्यकला: यह मंडल रूपी सममित योजना पर आधारित है। इसके केंद्र में एक खुला प्रांगण है, जो आसमान की ओर खुला है।
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बुंदेलों के बारे में

  • बुंदेला राजपूत मूल रूप से गहरवार क्षत्रिय हैं। राजा पंचम ने बुंदेल साम्राज्य की स्थापना 12वीं शताब्दी के अंतिम चरण में की थी।
  • जब चंदेलों की सत्ता का पतन हो रहा था, तब बुंदेलों ने गढ़कुंडार को अपनी राजधानी बनाया था।
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