महात्मा गांधी की छत्तीसगढ़ यात्रा

महात्मा गांधी की छत्तीसगढ़ यात्रा

यहां आपको प्रतियोगी परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ का इतिहास के पूछे जाने वाले महात्मा गाँधी की छत्तीसगढ़ यात्रा (Mahatma Gandhi in Chhattisgarh Visit) के बारे में जानकारी दी गई है। जिसमें छत्तीसगढ़ की वैचारिक और राजनैतिक यात्रा में महात्मा गांधी के प्रवास (Chhattisgarh Mahatma Gandhi Visit) महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।

महात्मा गांधी छत्तीसगढ़ प्रवास में दो बार आये- पहले 20 दिसम्बर 1920 को एवं दूसरी बार 22 नवंबर 1933 को छत्तीसगढ़ यात्रा किया गया था।

महात्मा गांधी का प्रथम प्रवास ‘कण्डेल नहर सत्याग्रह‘ (Dhamtari Kandel Canal Satyagraha) में उनके योगदान के लिए याद किया जाता है।

जिसमें अंग्रेजों की ज्यादतियों के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे धमतरी जिले के ‘कण्डेल गांव’ के किसानों ने गांधी जी को पत्र लिखकर उनका मार्गदर्शन मांगा था।

बापू इस आंदोलन से इस कदर प्रभावित थे कि छत्तीसगढ़ में प्रथम बार 21 दिसम्बर 1920 को धमतरी पहुंचकर उन्होंने सत्याग्रहियों को प्रेरित किया।

गांधीजी के पहुंचने की सूचना पाकर अंग्रेजों के हाथ-पांव पहले ही फूल चुके थे, उन्होंने अपना ‘किसान विरोधी आंदोलन‘ वापस ले लिया था।

यह वह दौर था जब पूरे भारत में राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian Independence Movement) हिलोरें ले रहा था। छत्तीसगढ़ में भी गांव-गांव में इस आंदोलन का गहरा प्रभाव था।

तब यहां के लोग अंग्रेजों की दासता से मुक्ति के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों से भी मुक्ति के लिए आंदोलित थे।

गांधीजी ने छत्तीसगढ़ के लोगों की भावनाओं और विचारों को न केवल दिशा दी बल्कि उनके संघर्षो में वे साथ खड़े हुए। यदि बापू जीवित होते तो 2 अक्टूबर 2019 को 150 वर्ष के होते।

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उनका 150वां जन्मदिवस (Mahatma Gandhi 150th Birthday) एक और बड़ा अवसर है उनके पुण्य स्मरण का। साथ ही छत्तीसगढ़ से वैचारिक और भावनात्मक जुड़ाव के लिए उनके सामने नतमस्तक होने का।

गांधीजी के छत्तीसगढ़ प्रवास (Mahatma Gandhi in Chhattisgarh) की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है:–

गांधीजी का पहला छत्तीसगढ़ प्रवास ‘यात्रा’ (Mahatma Gandhi’s First Visit to Chhattisgarh) की जानकारी इस प्रकार है-

तारीखयात्रा विवरण
20 दिसम्बर 1920रायपुर पहुंचे, आम सभा को संबोधित किया। ‘माधव राव सप्रे हाई स्कूल’ में महिलाओं की एक सभा को संबोधित किया- वर्तमान गांधी चौक, साथ ही स्व. पंडित रविशंकर शुक्ल दृष्टिगोचर होते हुए)
21 दिसम्बर 1920धमतरी पहुंचे, कण्डेल सत्याग्रह के संबंध में भाषण दिया, मकई चौक पर स्वागत के लिए जन सैलाब उमड़ा, धमतरी से लौटकर रायपुर के ‘आनंद समाज वाचनालय‘ (वर्तमान अमीनपारा, कंकालीरोड, रायपुर) के बगल के मैदान पर सभा को संबोधित किया। रायपुर तात्यापारा के मछली बाड़ा में महिलाओं की सभा को संबोधित किया। साथ ही महात्मा गांधीजी द्वारा जैतूसाव मठ भी गए।

गांधीजी का दूसरा छत्तीसगढ़ प्रवास ‘यात्रा’ (Mahatma Gandhi’s Second Visit to Chhattisgarh) की जानकारी इस प्रकार है-

तारीखयात्रा विवरण
22 नवंबर 1933दुर्ग पहुंचे, सभा को संबोधित किया, उसी रात रायपुर पहुंचे, आमापारा से बूढ़ापारा तक ऐतिहासिक जुलूस का शुभारंभ किया (सामाजिक सुधार आंदोलन के सिलसिले में)।
23 नवंबर 1933विक्टोरिया गार्डेन (मोतीबाग) में खादी और स्वदेशी प्रदर्शनी का अवलोकन (जिसको स्व. पं. रविशंकर शुक्ल जी द्वारा आगवानी किया गया), मौदहापारा में सभा संबोधित, सतनामी आश्रम और अनाथालय का दौरा किया।
24 नवंबर 1933बिलासपुर में सभा, ट्रेन से रायपुर लौटे, लाॅरी स्कूल (वर्तमान स्प्रे स्कूल) में सभा संबोधित किया।
25 नवंबर 1933धमतरी में सभा संबोधन किया।
26 नवंबर 1933सारागांव, खरोरा, पलारी, कनकी, बलौदाबाजार और सीमगा का दौरा किया।
27 नवंबर 1933डुमरतराई, माना, अभनपुर, भोथीडीह, मरौद, कुरूद दौरा
28 नवंबर 1933सुबह बालाघाट के लिए रवाना (अपने इसी छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान महात्मा गांधीजी भाटापारा और राजिम भी गए थे) 
 
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