भारतीय इतिहास : परीक्षोपयोगी तथ्य-संग्रह
मौर्यकाल (322–185 ई.पू.)
सम्पूर्ण वन-लाइनर नोट्स
Maurya Empire : Complete One-Liner Fact Sheet • प्रिलिम्स-केंद्रित संकलन
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★ Prelims Special
1मौर्य इतिहास के स्रोत (Sources)¶
- अर्थशास्त्र — कौटिल्य (चाणक्य/विष्णुगुप्त) कृत; राजनीति व शासन-प्रणाली का ग्रंथ; 15 अधिकरण, 180 प्रकरण, लगभग 6,000 श्लोक।
- अर्थशास्त्र की खोज — 1909 में आर. शामशास्त्री ने (मैसूर से) प्रकाशित किया।
- इंडिका — मेगस्थनीज (सेल्यूकस का राजदूत, चन्द्रगुप्त के दरबार में); मूल ग्रंथ अप्राप्य, उद्धरण स्ट्रैबो, एरियन, डियोडोरस में।
- इंडिका में भारतीय समाज 7 वर्गों/जातियों में विभक्त; भारत में दास-प्रथा का अभाव बताया।
- मुद्राराक्षस — विशाखदत्त (गुप्तकालीन नाटक); चन्द्रगुप्त द्वारा नंद-वंश के उन्मूलन की कथा; चन्द्रगुप्त को 'वृषल' कहा गया।
- पुराण — विष्णु पुराण में मौर्यों की वंशावली; मौर्यों को 'शूद्र' कुल का बताया।
- बौद्ध ग्रंथ — दीपवंश, महावंश (श्रीलंकाई), दिव्यावदान, अशोकावदान; मौर्यों को क्षत्रिय (मोरिय वंश) बताया।
- जैन ग्रंथ — हेमचन्द्र कृत परिशिष्टपर्वन (चन्द्रगुप्त के जैन जीवन का वर्णन), भद्रबाहु का कल्पसूत्र।
- सोमदेव का कथासरित्सागर व क्षेमेन्द्र की बृहत्कथामंजरी — पूरक साहित्यिक स्रोत।
- पुरातात्विक स्रोत — अशोक के अभिलेख (सर्वाधिक प्रामाणिक), मौर्य स्तंभ, NBPW (उत्तरी काली पॉलिशयुक्त मृद्भांड), आहत/पंचमार्क सिक्के (चाँदी-ताँबा)।
- जूनागढ़ अभिलेख (रुद्रदामन, 150 ई.) — चन्द्रगुप्त के राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य द्वारा सुदर्शन झील निर्माण का उल्लेख; अशोक के राज्यपाल तुषास्प (यवन) ने नहरें बनवाईं।
- कलिंग की जानकारी — हाथीगुम्फा अभिलेख (खारवेल) से भी पूरक साक्ष्य।
📌 परीक्षा दृष्टि (Exam Eye)
अर्थशास्त्र में 'राज्य के सप्तांग सिद्धांत' — राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड (सेना), मित्र। • मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र को 'पालिब्रोथा' कहा — सोन-गंगा संगम पर बसा, लकड़ी की दीवार, 570 बुर्ज व 64 द्वार।
2चन्द्रगुप्त मौर्य (322–298 ई.पू.) — संस्थापक¶
- 322 ई.पू. चाणक्य की सहायता से अंतिम नंद शासक धनानंद को हराकर मगध की गद्दी पर बैठा; राजधानी — पाटलिपुत्र।
- यूनानी लेखकों ने चन्द्रगुप्त को 'सैंड्रोकोट्स/एंड्रोकोट्स' कहा; पहचान विलियम जोन्स ने (1793) की।
- 305 ई.पू. सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया; संधि में सेल्यूकस ने 4 प्रांत — काबुल, कंधार, हेरात, मकरान (अराकोसिया, एरिया, पेरोपनिसडाई, जेड्रोसिया) दिए; बदले में चन्द्रगुप्त ने 500 हाथी दिए; वैवाहिक संधि भी हुई।
- सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को राजदूत बनाकर पाटलिपुत्र भेजा।
- प्लूटार्क के अनुसार चन्द्रगुप्त की सेना — 6 लाख; सम्पूर्ण उत्तर भारत विजित।
- अंतिम समय में जैन धर्म ग्रहण; आचार्य भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) गया; संलेखना (उपवास) द्वारा देह-त्याग — चन्द्रगिरि पहाड़ी।
- चन्द्रगुप्त को 'भारत का प्रथम ऐतिहासिक साम्राज्य-निर्माता' व मुक्तिदाता (Liberator) कहा जाता है।
3बिन्दुसार (298–273 ई.पू.)¶
- उपाधि — 'अमित्रघात' (शत्रु-विनाशक); यूनानी रूप 'अमित्रोकेट्स'; वायु पुराण में 'भद्रसार', जैन ग्रंथों में 'सिंहसेन'।
- सीरियाई शासक एंटियोकस-I ने डाइमेकस को तथा मिस्र के टॉलेमी-II फिलाडेल्फस ने डायोनिसियस को राजदूत भेजा।
- बिन्दुसार ने एंटियोकस-I से सूखी अंजीर, मीठी मदिरा व एक दार्शनिक भेजने का आग्रह किया; दार्शनिक भेजने से इनकार (यूनानी विधि में दार्शनिक बेचना वर्जित)।
- आजीविक सम्प्रदाय का अनुयायी; दरबार में आजीविक भविष्यवक्ता पिंगलवत्स।
- तक्षशिला विद्रोह दबाने हेतु पहले अशोक, फिर सुसीम को भेजा (दिव्यावदान)।
- तिब्बती इतिहासकार तारानाथ — चाणक्य ने बिन्दुसार के काल में '16 राज्यों के राजाओं व सामंतों का नाश' किया अर्थात दक्षिण-विजय का श्रेय।
⚡ फैक्ट-शीट : मौर्य वंशावली (क्रम याद रखें)
चन्द्रगुप्त → बिन्दुसार → अशोक → कुणाल → दशरथ → सम्प्रति → शालिशूक → देववर्मन → शतधन्वन → बृहद्रथ (अंतिम)। कुल शासक ≈ 9–10, कुल अवधि ≈ 137 वर्ष।
🔎 'मौर्य' शब्द की उत्पत्ति — तीन मत
- ब्राह्मण परंपरा (मुद्राराक्षस/पुराण) — नंदराज की दासी 'मुरा' से उत्पत्ति → शूद्र/निम्न कुल।
- बौद्ध परंपरा (महावंश/दिव्यावदान) — पिप्पलिवन के 'मोरिय' क्षत्रिय गण से — सर्वाधिक मान्य मत।
- जैन परंपरा — मयूर-पोषकों के ग्राम से संबंध; अशोक-स्तंभों/सिक्कों पर मयूर चिह्न इसका संकेत।
🌍 विदेशी राजदूत / लेखक — मिलान
| राजदूत | किसके दरबार में | भेजा |
|---|---|---|
| मेगस्थनीज | चन्द्रगुप्त | सेल्यूकस निकेटर |
| डाइमेकस | बिन्दुसार | एंटियोकस-I |
| डायोनिसियस | अशोक | टॉलेमी-II फिलाडेल्फस |
★ NET/PSC में यह मिलान बार-बार पूछा जाता है — क्रम: मे-डा-डा।
4सम्राट अशोक 'प्रियदर्शी' (273–232 ई.पू.)¶
- सिंहासन पर 273 ई.पू., विधिवत राज्याभिषेक 269 ई.पू. (4 वर्ष के उत्तराधिकार-संघर्ष के बाद)।
- अभिलेखों में नाम — 'देवानांप्रिय' व 'प्रियदर्शी'; 'अशोक' नाम केवल मास्की, गुर्जरा, नित्तूर व उडेगोलम लघु शिलालेखों में।
- माता — सुभद्रांगी/धर्मा (दिव्यावदान); राज्याभिषेक से पूर्व उज्जयिनी व तक्षशिला का उपराजा (वायसराय)।
- कलिंग युद्ध — 261 ई.पू. (राज्याभिषेक के 8वें वर्ष); वर्णन 13वें शिलालेख में — 1.5 लाख बंदी, 1 लाख मृत।
- युद्ध-पश्चात हृदय-परिवर्तन — 'भेरीघोष' के स्थान पर 'धम्मघोष' की नीति; भौतिक विजय के बदले धम्म विजय।
- बौद्ध धर्म में दीक्षा — उपगुप्त से (दिव्यावदान); महावंश के अनुसार निग्रोध ने प्रभावित किया; बाद में 'भिक्षुगतिक' बना।
- तृतीय बौद्ध संगीति — 250 ई.पू., पाटलिपुत्र; अध्यक्ष — मोग्गलिपुत्त तिस्स; 'कथावत्थु' का संकलन।
- धर्म-प्रचारक — पुत्र महेन्द्र व पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका (राजा तिस्स के काल में) भेजा; मज्झिम को हिमालय, सोन-उत्तरा को स्वर्णभूमि।
- राज्याभिषेक के 10वें वर्ष बोधगया व 20वें वर्ष लुम्बिनी की यात्रा; लुम्बिनी का भू-राजस्व घटाकर 1/8 किया (रुम्मिनदेई स्तंभलेख)।
- राज्याभिषेक के 14वें वर्ष 'धम्ममहामात्रों' की नियुक्ति।
☸ अशोक का धम्म (Dhamma)
धम्म = नैतिक आचार-संहिता, कोई धर्म/सम्प्रदाय नहीं। तत्व — माता-पिता की सेवा, बड़ों का आदर, अहिंसा, सत्य, दान, दासों से उदार व्यवहार, सभी सम्प्रदायों के प्रति सहिष्णुता (12वाँ शिलालेख)। धम्म की परिभाषा — 2रे स्तंभलेख में ("कल्याण ही धम्म है")।
5अशोक के अभिलेख — प्रिलिम्स का हॉट-स्पॉट¶
- अभिलेखों की लिपियाँ — ब्राह्मी (अधिकांश), खरोष्ठी (शाहबाजगढ़ी व मानसेहरा — पाकिस्तान), अरामेइक व यूनानी (अफगानिस्तान — शर-ए-कुना/कंधार द्विभाषी, लघमान, तक्षशिला)।
- ब्राह्मी लिपि का उद्वाचन (Decipherment) — जेम्स प्रिंसेप, 1837; दिल्ली-टोपरा स्तंभ फिरोजशाह तुगलक द्वारा दिल्ली लाया गया।
| वर्ग | प्रमुख तथ्य / विषय-वस्तु |
|---|---|
| 14 दीर्घ शिलालेख | I-पशुबलि निषेध • II-मनुष्य/पशु चिकित्सा, पड़ोसी राज्य (चोल, पांड्य, सतियपुत्र, केरलपुत्र, ताम्रपर्णी) • III-युक्त, रज्जुक, प्रादेशिक का दौरा • IV-धम्मघोष • V-धम्ममहामात्र • VI-प्रजा-हित हेतु सर्वदा उपलब्धता • VII/XII-सम्प्रदाय-सहिष्णुता • IX-धम्म समारोह • X-यश-त्याग • XI-धम्म-दान श्रेष्ठ • XIII-कलिंग युद्ध, 5 यूनानी शासक (एंटियोकस, टॉलेमी, एंटीगोनस, मगस, अलेक्जेंडर) • XIV-उपसंहार |
| शिलालेख स्थल (8) | शाहबाजगढ़ी, मानसेहरा (पाक), कालसी (उत्तराखंड), गिरनार (गुजरात), सोपारा (महाराष्ट्र), धौली व जौगड़ (ओडिशा), एर्रगुडि (आंध्र); सन्नति (कर्नाटक) भी। |
| पृथक कलिंग शिलालेख | धौली व जौगड़ में — 11वें, 12वें, 13वें के स्थान पर; "सभी मनुष्य मेरी संतान हैं"; XIII (कलिंग युद्ध) यहाँ जानबूझकर हटाया गया। |
| 7 स्तंभलेख (6 स्थल) | दिल्ली-टोपरा (एकमात्र — सातों लेख), दिल्ली-मेरठ, लौरिया अरेराज, लौरिया नंदनगढ़ (मयूर चिह्न), रामपुरवा, इलाहाबाद-कौशाम्बी ('रानी का अभिलेख' — कारुवाकी, तीवर की माता; प्रयाग-प्रशस्ति भी इसी पर)। |
| लघु शिलालेख | मास्की, गुर्जरा (MP), नित्तूर, उडेगोलम — 'अशोक' नाम • रूपनाथ (MP), सहसराम, बैराट, भाब्रू (राजस्थान — बौद्ध त्रिरत्न में आस्था, संघ को संबोधित) • ब्रह्मगिरि, सिद्धपुर, जटिंग-रामेश्वर (कर्नाटक)। |
| गुहालेख | बराबर पहाड़ी (गया) — सुदामा, कर्ण चौपार, विश्व झोपड़ी — आजीविकों को दान। |
📌 CG / MP / UP / RAJ स्पेशल
MP — रूपनाथ (जबलपुर), गुर्जरा (दतिया), सारो-मारो (शहडोल), पानगुड़रिया (सीहोर) • राजस्थान — बैराट/भाब्रू (विराटनगर, जयपुर) • UP — मेरठ व कौशाम्बी स्तंभ, सारनाथ लघु स्तंभलेख (संघभेद की चेतावनी — सारनाथ, सांची, कौशाम्बी तीनों पर); कालसी उत्तराखंड में • छत्तीसगढ़ में अशोक का कोई अभिलेख नहीं; परंतु सरगुजा की रामगढ़/सीताबेंगरा गुफा (जोगीमारा लेख) मौर्यकालीन — भारत की प्राचीनतम नाट्यशाला मानी जाती है।
6मौर्य प्रशासन (Administration)¶
- अत्यधिक केन्द्रीकृत नौकरशाही; राजा सर्वोच्च — कार्यपालिका, विधायिका, न्याय व सेना प्रधान।
- मंत्रिपरिषद — राजा की सलाहकार; अर्थशास्त्र में 12–20 सदस्य; आंतरिक मंत्रिणः (3–4 सदस्य)।
- अर्थशास्त्र में 18 तीर्थ (शीर्ष अधिकारी/विभाग-प्रमुख) व 27 (26+1) अध्यक्ष (आर्थिक विभागों के अधीक्षक)।
- प्रमुख तीर्थ — मंत्री, पुरोहित, सेनापति, युवराज (सर्वोच्च वेतन 48,000 पण), समाहर्ता, सन्निधाता, प्रशास्ता, दौवारिक, अंतर्वंशिक।
- प्रमुख अध्यक्ष — पण्याध्यक्ष (वाणिज्य), सीताध्यक्ष (राजकीय कृषि), लक्षणाध्यक्ष (टकसाल), पौतवाध्यक्ष (माप-तौल), शुल्काध्यक्ष, सूनाध्यक्ष (बूचड़खाना), मुद्राध्यक्ष (पासपोर्ट), नावाध्यक्ष, अश्वाध्यक्ष, हस्त्यध्यक्ष।
- गुप्तचर व्यवस्था — 'गूढ़पुरुष'; स्थायी गुप्तचर 'संस्था', भ्रमणशील 'संचरा'; महिला जासूस भी (वृषली, भिक्षुकी)।
| प्रांत (5) | राजधानी |
|---|---|
| उत्तरापथ | तक्षशिला |
| अवंतिराष्ट्र | उज्जयिनी |
| दक्षिणापथ | सुवर्णगिरि |
| कलिंग | तोसली |
| प्राची (मध्य/पूर्वी) | पाटलिपुत्र |
| अधिकारी | कार्य |
|---|---|
| समाहर्ता | राजस्व-संग्रह प्रमुख |
| सन्निधाता | राजकोष/कोषागार प्रमुख |
| रज्जुक | भूमि-मापन + ग्रामीण न्याय (दंड-वितरण अधिकार, अशोक के काल में) |
| प्रादेशिक | जिला-प्रशासन प्रमुख |
| युक्त | लिपिक/लेखा-अधिकारी |
| स्थानिक | जिला-स्तरीय कर-अधिकारी |
| गोप | 10 ग्रामों का प्रशासन |
| ग्रामिक | ग्राम-प्रधान (अवैतनिक) |
🏛 मेगस्थनीज के अनुसार नगर (पाटलिपुत्र) व सैन्य प्रशासन — 6+6 समितियाँ
नगर प्रशासन — 30 सदस्य, 6 समितियाँ (5-5 सदस्य): ① शिल्पकला ② विदेशी-देखभाल ③ जनगणना ④ व्यापार-वाणिज्य ⑤ विनिर्मित वस्तु-विक्रय ⑥ बिक्री-कर (1/10) वसूली। नगर-प्रमुख — 'एस्टीनोमोई'। • सैन्य प्रशासन — 30 सदस्य, 6 समितियाँ: पैदल, अश्व, गज, रथ, नौसेना, रसद/यातायात। सीमा-रक्षक — 'अंतपाल'। प्लिनी — मौर्य सेना: 6 लाख पैदल, 30 हजार अश्वारोही, 9 हजार हाथी।
7अर्थव्यवस्था, समाज व राजस्व¶
- भू-राजस्व — 'भाग' (उपज का 1/6 से 1/4); 'बलि' — अतिरिक्त/धार्मिक कर; 'हिरण्य' — नकद कर; 'प्रणय' — आपातकालीन कर।
- सीता भूमि — राजकीय कृषि-भूमि (सीताध्यक्ष के अधीन); सिंचाई-कर — 'उदक-भाग' (1/5 से 1/3)।
- मुद्रा — पण (चाँदी), माषक, काकणी (ताँबा); स्वर्ण मुद्रा — निष्क/सुवर्ण; आहत (पंचमार्क) सिक्कों पर मयूर, पर्वत, अर्धचन्द्र चिह्न।
- व्यापारिक मार्ग — उत्तरापथ (तक्षशिला–पाटलिपुत्र–ताम्रलिप्ति) व दक्षिणापथ; प्रमुख बंदरगाह — भड़ौच (भृगुकच्छ), सोपारा, ताम्रलिप्ति।
- वन-आय, खान (खन्याध्यक्ष), लवण (लवणाध्यक्ष), मदिरा (सुराध्यक्ष) — राजकीय एकाधिकार।
- तौल की इकाई — 'द्रोण'; उद्योग-श्रेणियाँ (गिल्ड) — 'श्रेणी', प्रधान — 'श्रेष्ठी/ज्येष्ठक'।
- विष्टि — बेगार/बलात् श्रम; न्यायालय — धर्मस्थीय (दीवानी) व कंटकशोधन (फौजदारी)।
- अकाल-साक्ष्य — सोहगौरा ताम्रपत्र (UP, गोरखपुर) व महास्थान अभिलेख (बांग्लादेश) — अन्नागारों से राहत का उल्लेख।
📌 परीक्षा दृष्टि — कथन आधारित प्रश्न
कौटिल्य: "प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है" • अशोक (धौली): "सभी मनुष्य मेरी संतान हैं" • अशोक का 'विहार-यात्रा त्याग व धम्म-यात्रा प्रारंभ' — 8वाँ शिलालेख • 1st शिलालेख — समाज (समारोह) निषेध, राजकीय रसोई में केवल 2 मयूर + 1 मृग वध की अनुमति, वह भी बाद में बंद।
8मौर्य कला एवं स्थापत्य (Art & Architecture)¶
- मौर्य कला के दो वर्ग — राजकीय (दरबारी): स्तंभ, स्तूप, गुफाएँ, राजप्रासाद; लोक-कला: यक्ष-यक्षिणी मूर्तियाँ, मृण्मूर्तियाँ।
- अशोक-स्तंभ — एकाश्म (monolithic), चुनार (मिर्जापुर) के बलुआ पत्थर से निर्मित; विशिष्ट चमकदार ओपदार पॉलिश।
- सारनाथ सिंह-शीर्ष (4 सिंह) — भारत का राष्ट्रीय प्रतीक (26 जन. 1950 से); अबेकस पर 4 पशु — हाथी, अश्व, वृषभ, सिंह + धर्मचक्र।
- रामपुरवा वृषभ-शीर्ष — राष्ट्रपति भवन में; लौरिया-नंदनगढ़ — सिंह-शीर्ष; संकिसा — गज-शीर्ष; वैशाली स्तंभ — एकल सिंह, अभिलेख-रहित।
- यूनानी/ईरानी (एकेमेनिड) प्रभाव की बहस — घंटाकृति (bell-shaped) शीर्ष पर्सिपोलिस से साम्य; पर भारतीय स्तंभ एकाश्म व स्वतंत्र।
- स्तूप — अशोक ने 84,000 स्तूप बनवाए (परंपरा); सांची स्तूप (MP, रायसेन) — मूल ईंट-निर्मित मौर्यकालीन, UNESCO धरोहर (1989); भरहुत, धर्मराजिका (तक्षशिला), पिप्रहवा प्राचीनतम।
- गुफा-स्थापत्य का आरंभ — बराबर गुफाएँ (अशोक → आजीविकों को); लोमश ऋषि गुफा — चैत्य-तोरण द्वार, हाथी-अलंकरण; नागार्जुनी गुफाएँ — पौत्र दशरथ ने आजीविकों को दीं (गोपिका, वापीयका, वडथिका)।
- दीदारगंज (पटना) की चामरग्राही यक्षिणी — मौर्य पॉलिश का उत्कृष्ट नमूना; परखम (मथुरा) यक्ष।
- पाटलिपुत्र — कुम्हरार उत्खनन: 80-स्तंभों वाला सभा-भवन (डी.बी. स्पूनर); एरियन/फाह्यान ने प्रासाद को 'देव-निर्मित' कहा।
- मृण्मूर्तियाँ (टेराकोटा), NBPW मृद्भांड — मौर्यकाल का 'डीलक्स वेयर'।
🔗 संबंधित:गुप्त §8 कला-स्थापत्य
9परवर्ती मौर्य व साम्राज्य का पतन¶
- 185 ई.पू. अंतिम मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या उसके ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने सैन्य-निरीक्षण के दौरान की → शुंग वंश की स्थापना (स्रोत: बाणभट्ट का 'हर्षचरित')।
- अशोक का पौत्र दशरथ — 'देवानांप्रिय' उपाधि प्रयोग करने वाला अंतिम ज्ञात मौर्य; सम्प्रति — जैन धर्म-संरक्षक ('जैन अशोक')।
- पतन के कारण (इतिहासकार-मत): हरप्रसाद शास्त्री — ब्राह्मण-विरोधी नीतियों की प्रतिक्रिया; हेमचन्द्र रायचौधरी — अशोक की अहिंसा/शांतिवादी नीति से सैन्य दुर्बलता; रोमिला थापर — अति-केन्द्रीकृत प्रशासन व निर्बल उत्तराधिकारी, आर्थिक संकट; डी.डी. कोसंबी — आर्थिक दबाव, मुद्रा-अवमूल्यन (सिक्कों में मिलावट)।
- अन्य कारण — साम्राज्य-विभाजन, दूरस्थ प्रांतों की स्वतंत्रता, यूनानी (बैक्ट्रियन) आक्रमण।
⏳ त्वरित पुनरावृत्ति टाइमलाइन (Rapid Revision)
322 चन्द्रगुप्त का राज्यारोहण
305 सेल्यूकस-युद्ध व संधि
298 बिन्दुसार गद्दी पर
273 अशोक सत्तासीन
269 राज्याभिषेक
261 कलिंग युद्ध
250 तृतीय बौद्ध संगीति
232 अशोक की मृत्यु
185 बृहद्रथ-वध, शुंग वंश
🔗 संबंधित:गुप्त §2 नये साम्राज्य का उदय
10PYQ-स्टाइल सुपर वन-लाइनर्स (सभी परीक्षाओं से)¶
- 'अशोक के अभिलेखों' की ओर ध्यान दिलाने वाले प्रारंभिक विद्वान — टीफेन्थैलर (दिल्ली स्तंभ); पढ़ा — प्रिंसेप (1837)।
- कंधार अभिलेख — यूनानी + अरामेइक द्विभाषी; अफगान क्षेत्र में धम्म-प्रचार का प्रमाण।
- अशोक की रानियाँ — देवी/महादेवी (विदिशा; महेन्द्र-संघमित्रा की माता), कारुवाकी (एकमात्र अभिलेख-उल्लिखित — प्रयाग 'रानी अभिलेख'), असंधिमित्रा, तिष्यरक्षिता।
- कुणाल — 'धर्मविवर्धन'; अंधा होने की कथा (तिष्यरक्षिता षड्यंत्र — दिव्यावदान)।
- UPSC: बराबर की गुफाएँ अशोक ने आजीविक सम्प्रदाय को दीं — बार-बार पूछा गया तथ्य।
- UPSC: अशोक के शिलालेखों में वर्णित 5 समकालीन यूनानी राजा — XIII शिलालेख (धम्म-विजय 600 योजन तक)।
- 'देवानांप्रिय' उपाधि श्रीलंकाई राजा तिस्स ने भी धारण की।
- अर्थशास्त्र में गणिकाओं पर नियंत्रण — गणिकाध्यक्ष; माप-तौल — पौतवाध्यक्ष।
- पाटलिपुत्र नगर-रक्षक/कोतवाल सदृश — 'नागरक' (अर्थशास्त्र)।
- सांची का निकटतम प्राचीन नगर — विदिशा (बेसनगर); अशोक विदिशा की 'देवी' से यहीं मिला।
🏆 मौर्यकाल के 'प्रथम' (Firsts) — रैपिड फायर
भारत का प्रथम अखिल भारतीय साम्राज्य
लिखित अभिलेख जारी करने वाला प्रथम शासक — अशोक
गुफा-स्थापत्य (रॉक-कट) का प्रारंभ — बराबर
प्रथम यथार्थ तिथि-निर्धारण — XIII शिलालेख के यूनानी राजाओं से
पशु-चिकित्सालयों का प्रथम उल्लेख — II शिलालेख
प्रथम व्यवस्थित जनगणना-संकेत — मेगस्थनीज की तीसरी समिति
अभिलेखों में प्राकृत (मागधी) — जन-भाषा में शासकीय संदेश का प्रथम प्रयोग
🎯 अंतिम स्मरण-सूत्र (Mnemonics)
प्रांत-राजधानी: "उत्तर में तक्षक, अवंति में उज्जैन, दक्षिण में सोना, कलिंग में तोसली" • विदेशी राजदूत क्रम: मे-डा-डा = मेगस्थनीज (चन्द्रगुप्त) → डाइमेकस (बिन्दुसार) → डायोनिसियस (अशोक) • 'अशोक' नाम वाले लेख: "मास्की गुर्जर नित्तूर उडे"।
11🎯 स्व-परीक्षण — 10 प्रश्न¶
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