यूनानी, रोम, चीनी एवं अरबी यात्रियों का क्रमबद्ध विवरण –
1. नियार्कस (326 ई.पू.) – यूनानी
यह सिकन्दर के जल सेनाध्यक्ष के रूप में भारत आया था।
2. आनेसिक्रिटस (326 ई.पू.) – यूनानी
इसने सिकन्दर की जीवनी लिखी थी।
3. आरिस्टोबुलस (326ई.पू.) – यूनानी
इसने ‘हिस्ट्री ऑफ वार‘ नामक पुस्तक लिखा था।
4. मेगस्थनीज (303ई.पू.) – यूनानी
यह सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था तथा चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। इसने अपनी पुस्तक ‘इण्डिका‘ में मौर्य युगीन समाज एवं संस्कृति का वर्णन किया है।
5. डाइमेकस (285 ई.पू.) – सीरिया
इसे सीरियाई शासक अन्तियोकस ने राजदूत के रूप में बिन्दुसार के दरबार में भेजा था।
6. डाइनोसियस (285ई.पू.) – मिस्र
यह मिस्त्र नरेश टालमी फिलाडेल्फस का राजदूत था तथा अशोक के दरबार में आया था।
7. फाह्यान (399-414ई.) – चीन
यह गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य‘ (375-415ई.) के समय में आया था। इसने अपने विवरण ‘फू-क्यो-की‘ में मध्य देश के समाज एवं संस्कृति का उल्लेख किया है तथा यहाँ की जनता को सुखी एवं समृद्ध बताया है। इसने पाटलिपुत्र की यात्रा की तथा मौर्य शासक के राजदरबार के अवशेष की चर्चा की।
8. सुंगयुन (518ई.) – चीन
इसने अपने तीन वर्ष की यात्रा में बौद्ध ग्रन्थ की प्रतियाँ एकत्रित किया।
9. ह्वेनसांग (629-645ई.) – चीन
यह हर्षवर्धन के काल में भारत आया। इसका यात्रा वृत्तान्त ‘सी–यू–की नाम से प्रसिद्ध है। इससे हर्षकालीन भारत के समाज, धर्म एवं राजनीति पर विस्तृत प्रकाश पड़ता है। इसे यात्रियों का राजकुमार कहा जाता है इसने भारत को ‘यीन-तू‘ अर्थात चंद्रमा का देश कहा है।
10. इत्सिंग (671 ई. या 675ई.) – चीन
इसकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ए रिकार्ड ऑफ दि बुद्धिस्ट रिलीजन एज प्रेक्टिस्ड इन इण्डिया‘ में मुख्यतः बौद्ध धर्म से सम्बन्धित विवरण है।
11. अलमसूदी (943ई-दसवीं शताब्दी) – बगदाद
10वीं सदी में महीपाल के समय में भारत आया। अलमसूदी ने गुर्जर प्रतिहार राज्य को ‘अलजुज‘ एवं महीपाल को ‘बऊरा‘ कहा है
12. सुलेमान (9वीं शताब्दी (851) – अरब
यह 9वीं शताब्दी में गुर्जर प्रतिहार शासक मिहिरभोज एवं राष्ट्रकूट शासक अमोघवर्ष प्रथम के समय में भारत आया था। सुलेमान के अनुसार मिहिर भोज अरबों (मुसलमानों) का घोर शत्रु था।
13. अलबरूनी अबूरेहान (11 वीं शताब्दी) – ख्वारिज्म या खीवा
1017 ई. में महमूद गजनवी के साथ उसके कन्नौज अभियान के समय भारत आया मूलतः अरबी भाषा में लिखित उसकी पुस्तक किताबु-उल-हिन्द या तहकीक-ए-हिन्द का अंग्रेजी अनुवाद एडवर्ड साँची ने किया था। तहकीक-ए-हिन्द* (भारत की खोज) में भारतीय भूगोल, ज्योतिष, गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र, धार्मिक जीवन एवं दर्शन, सामाजिक रीति-रिवाजों आदि का विस्तार से वर्णन किया है।
14. इब्नबतूता (1333ई.) – मोरक्को (अफ्रीका)
यह मोहम्मद बिन तुगलक के काल में आया था । यह 14वीं शताब्दी में अपनी विश्व यात्राओं के लिए जाना जाता है जिसे उसने अपनी पुस्तक रिहला (अरबी में “यात्रा”) में वर्णित किया। उनकी यात्राएँ लगभग 30 वर्षों तक चलीं और उन्होंने तीन महाद्वीपों – अफ्रीका, एशिया और यूरोप – के लगभग 44 आधुनिक देशों की यात्रा की। उनकी यात्राएँ मार्को पोलो से भी अधिक विस्तृत थीं।
15. तारानाथ (12 वीं शताब्दी) – तिब्बत
इसने कंग्यूर और तंग्यूर नामक ग्रन्थ में भारत सम्बन्धी विवरण प्रस्तुत किया है।
16. मार्कोपोलो (13वी शताब्दी) – इटली
यह 13वीं शताब्दी के अंत में पाण्ड्य देश की यात्रा पर आया था स्थापित वर्णन पाण्ड्य इतिहास के अध्ययन के लिए उपयोगी है।