सारनाथ में बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी

सारनाथ में बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी

चर्चा में क्यों? 

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को 3 से 5 नवंबर 2025 तक सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार में जनता के लिये प्रदर्शित किया जाएगा। यह आयोजन विहार की 94वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। सारनाथ वही ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना प्रथमउपदेश, धर्मचक्र प्रवर्तन, दिया था।

मुख्य बिंदु

  • कार्यक्रम के बारे में:
    • इस तीन दिवसीय समारोह का आयोजन महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ केंद्र द्वारा किया जा रहा है, जिसमें वियतनामी संघ और हनोई के श्रद्धालुओं का सहयोग शामिल है।
  • अवशेषों के बारे में:
    • विहार के अंदर स्वर्ण बुद्ध प्रतिमा के नीचे रखे अवशेष 2,600 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। प्राचीन गांधार क्षेत्र से प्राप्त एक अवशेष वर्ष 1956 में महाबोधि सोसाइटी को उपहार में दिया गया।
      • नागार्जुनकोंडा (आंध्र प्रदेश) से प्राप्त एक अन्य अवशेष उत्कीर्ण पत्थर के बक्से में संरक्षित है, जिससे इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होती है। 
  • ये अवशेष वर्ष में केवल बुद्ध पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर प्रदर्शित किये जाते हैं, जिससे यह प्रदर्शनी आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाती है।
    • बुद्ध पूर्णिमा (वेसाक): बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और परिनिर्वाण का स्मरण कराती है, जो उनकी आध्यात्मिक यात्रा के संपूर्ण चक्र का प्रतीक है।
    • कार्तिक पूर्णिमा: कार्तिक मास की पूर्णिमा, परंपरागत रूप से बुद्ध के दिव्य लोक में उपदेश देने के पश्चात् मानव क्षेत्र में वापसी से जुड़ी होती है, जो नवीनता और करुणा का संकेत देती है।
  • वैश्विक भागीदारी:
    • भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, नेपाल, जापान और अन्य देशों के भिक्षु, भक्त और तीर्थयात्री इसमें भाग लेंगे, जो बौद्ध एकता और विरासत में सारनाथ की भूमिका की पुष्टि करते हैं।
  • आध्यात्मिक महत्त्व:
    • यह प्रदर्शनी श्रद्धालुओं को पवित्र अवशेषों को देखने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का दुर्लभ अवसर देती है, जिससे बौद्ध धर्म की उत्पत्ति के साथ उनका संबंध और घनिष्ठ होता है, जिसकी शुरुआत 2,500 साल पहले सारनाथ में हुई थी।
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मूलगंध कुटी विहार, सारनाथ:

  • वर्ष 1931 में महाबोधि सोसाइटी द्वारा निर्मित यह विहार धमेक स्तूप के निकट स्थित है, जो उस स्थल को चिह्नित करता है जहाँ भगवान बुद्ध ने प्रथम बार धर्म की शिक्षा दी थी।
  • विहार के आंतरिक भाग में जापानी कलाकार कोसेत्सु नोसु द्वारा बनाए गए भित्ति चित्र और बुद्ध के अवशेष संरक्षित हैं। 
  • यह विहार वैश्विक बौद्ध तीर्थयात्रा शृंखला में सबसे पूजनीय स्थलों में से एक है।
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