हेनरी डेरोज़ियो और “यंग बंगाल मूवमेंट” : 19वीं शताब्दी के कलकत्ता में सामाजिक क्रांति

हेनरी डेरोज़ियो और “यंग बंगाल मूवमेंट” : 19वीं शताब्दी के कलकत्ता में सामाजिक क्रांति

डेरोज़ियो का परिचय

➤ हेनरी डेरोज़ियो (1809–1831) इंडो-पुर्तगाली वंश का विचारक, कवि और शिक्षक था।

➤ 1826 में वह कलकत्ता के हिंदू कॉलेज (आधुनिक प्रेसिडेंसी कॉलेज) में प्राध्यापक बना।

➤ उसका उद्देश्य विद्यार्थियों में विचार-स्वतंत्रता, विवेक, आधुनिकता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना था।

यंग बंगाल आंदोलन (Young Bengal Movement)

➤ डेरोज़ियो के शिष्यों को “Derozians” या “Young Bengal” कहा जाता था।

➤ उनकी प्रमुख विशेषताएँ :

► विचार-स्वतंत्रता पर बल

► सामाजिक-धार्मिक कुरीतियों और अंधविश्वास का विरोध

► स्त्री-शिक्षा का समर्थन

► उपनिवेशवाद और दासता का विरोध

► धर्मनिरपेक्ष, समतावादी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

डेरोज़ियो के विचारों का महत्व

➤ डेरोज़ियो का मानना था कि गुलाम व्यक्ति को यह समझाना आवश्यक है कि स्वतंत्रता क्या होती है।

➤ उसने “स्वतंत्रता प्रत्येक मानव का प्राकृतिक अधिकार है” यह विचार फैलाया।

➤ यंग बंगाल समूह ने चर्च और धार्मिक संस्थाओं की अंधश्रद्धाओं को चुनौती दी।

➤ उन्होंने वाद-विवाद, लेखन और भाषणों के माध्यम से सामाजिक सुधारों का प्रचार किया।

बौद्धिक एवं सामाजिक प्रभाव

➤ “Derozians” केवल सुधारक नहीं, बल्कि विचार-प्रवर्तक और क्रांतिकारी थे।

➤ उन्होंने आधुनिक शिक्षा के माध्यम से नए समाज के निर्माण का प्रयास किया।

सामाजिक विषय :

► जातिभेद और अस्पृश्यता का विरोध

► महिलाओं के अधिकारों का समर्थन

► लोकतांत्रिक दृष्टिकोण

► विज्ञान और तर्क पर आधारित शिक्षा

साम्राज्यवादी दृष्टिकोण से संघर्ष

➤ डेरोज़ियो और उसके शिष्य मैकॉले की “एंग्लिसाइज़ेशन” नीति से भिन्न थे।

➤ वे अंग्रेज़ी शिक्षा को साधन मानते थे, पर उसका उपयोग भारतीय समाज में प्रगतिशील सोच विकसित करने के लिए करना चाहते थे।

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➤ उनका आग्रह था कि अंग्रेज़ी शिक्षा भारतीयों को गुलाम बनाने के लिए नहीं, बल्कि मुक्त विचारों के लिए होनी चाहिए।

डेरोज़ियो के बाद के प्रभाव

➤ डेरोज़ियो की मृत्यु मात्र 22 वर्ष की आयु में (1831) हो गई, लेकिन उसकी विचारधारा जीवित रही।

➤ यंग बंगाल के शिष्यों ने आगे चलकर समाज-सुधारकों को प्रेरित किया।

➤ ब्रह्म समाज, भारतीय राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार आंदोलनों पर उसका स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।

डेरोज़ियो आंदोलन की सीमाएँ

➤ इसका प्रभाव मुख्यतः उच्चवर्गीय, अंग्रेज़ी-शिक्षित युवाओं तक सीमित रहा।

➤ ग्रामीण और निम्न वर्गों पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव कम था।

➤ व्यावहारिक सामाजिक सुधारों के क्रियान्वयन में उनकी सफलता सीमित रही।

पूरक जानकारी

➤ डेरोज़ियो को “भारत का पहला आधुनिक विद्रोही शिक्षक” कहा जाता है।

➤ उसकी विचारधारा का गांधी, नेहरू और विवेकानंद जैसे चिंतकों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा।

➤ यंग बंगाल ने भारतीय समाज में “तर्कशीलता के बीज” बोए, जो आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन में अंकुरित हुए।

➤ इस आंदोलन ने भारतीय बुद्धिजीवियों में “राष्ट्रवाद की भावना” विकसित की।

✅ निष्कर्ष :

हेनरी डेरोज़ियो और यंग बंगाल आंदोलन ने अल्प समय में भारतीय समाज को विचार-स्वतंत्रता, तर्कशक्ति और आधुनिकता का नया मार्ग दिखाया। यद्यपि यह आंदोलन अल्पजीवी रहा, फिर भी इसके प्रभाव से आगे चलकर सामाजिक सुधार और राष्ट्रवादी चेतना की मजबूत नींव पड़ी।

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