मिलमेडिकॉन-2025
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री ने नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में सैन्य परिवेश में शारीरिक और मानसिक आघात (Physical and Mental Trauma in Military Settings) पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, मिलमेडिकॉन-2025 (MILMEDICON-2025) का उद्घाटन किया।
संबंधित तथ्य
- यह सम्मेलन संपूर्ण विश्व में सैन्य चिकित्सा में नवाचारों, चुनौतियों और सुधारों पर केंद्रित है।
- यह आयोजन सैन्य नर्सिंग सेवा के 100 वर्ष पूरे होने और युद्ध चिकित्सा के क्षेत्र में नारी शक्ति के महत्त्व को प्रदर्शित करने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
- यह भारतीय सेना के “सुधार वर्ष” को चिह्नित करता है।
- इसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और परिचालन स्थितियों में ‘ट्रॉमा’ संबंधी देखभाल क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक पहल के रूप में रखा गया है।
मुख्य बिंदु
- वैश्विक सहयोग (Global Cooperation)
- 15 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ सशस्त्र बल, शिक्षाविद और नागरिक विशेषज्ञ।
- रणनीतिक संवाद और चिकित्सा नवाचार के लिए मंच।
- आघात (ट्रॉमा) देखभाल सुधार (Trauma Care Reforms)
- उन्नत युद्ध आघात (ट्रॉमा) देखभाल प्रोटोकॉल।
- हताहतों को शीघ्र निकालने के लिए युद्धक्षेत्र प्रतिक्रिया मॉडल।
- वैश्विक संघर्ष क्षेत्रों से प्राप्त उदाहरणों को भारतीय सिद्धांत में समाहित करना।
- प्रौद्योगिकी एकीकरण (Technology Integration)
- सैन्य स्वास्थ्य सेवा में AI: पूर्वानुमानित निदान, टेली मेडिसन (Telemedicine) तथा अभिलेखीकरण।।
- चिकित्सकों के लिए सिमुलेशन और VR -आधारित प्रशिक्षण।
- कॉम्बैट मेडिसिन में महिलाएँ (Women in Combat Medicine)
- युद्ध क्षेत्रों में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिकाओं को मान्यता।
- सैन्य नर्सिंग सेवा शताब्दी- रक्षा स्वास्थ्य सेवा में महिलाओं के योगदान की पुष्टि।
सामरिक महत्त्व
- युद्धक्षेत्र में आघात के दौरान जीवित रहने की दर में सुधार करके परिचालन तत्परता को बढ़ाता है।
- उच्च जोखिम युक्त, प्रतिकूल वातावरणों के लिए सुदृढ़ स्वास्थ्य देखभाल ढाँचे का निर्माण करता है।
- वैश्विक रक्षा-चिकित्सा सहयोग में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
- सशस्त्र बलों की लॉजिस्टिक और सहायता प्रणालियों में व्यापक सुधारों को संरेखित करता है।
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