अमेरिकी राष्ट्रपति और “जी-2”: वैश्विक सहयोगियों के लिए निहितार्थ

अमेरिकी राष्ट्रपति और “जी-2”: वैश्विक सहयोगियों के लिए निहितार्थ

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन पेपर- 2:  अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के साथ “जी-2” (G-2) बैठक की बात कही, जिससे अमेरिका-चीन द्विपक्षीय नेतृत्व और वैश्विक सहयोगियों के लिए इसके संभावित प्रभाव पर बहस तेज हो गई। 
  • यह पहल एशिया और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक अस्थिरता पैदा कर सकती है, क्योंकि क्वाड और अन्य बहुपक्षीय गठबंधन अमेरिका-चीन संतुलन पर आधारित हैं।

 

जी-2 अवधारणा: परिचय और उत्पत्ति

  • “जी-2” का विचार पहली बार 2005 में अर्थशास्त्री सी. फ्रेड बर्गस्टन द्वारा प्रस्तुत किया गया था। 
  • उनका तर्क था कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका और चीन को द्विपक्षीय स्तर पर सहयोग करना चाहिए।
  • वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने इस विचार को और मजबूती दी।
  • जी-2 का उद्देश्य जी-20, आईएमएफ या डब्ल्यूटीओ को प्रतिस्थापित करना नहीं,
    • बल्कि अमेरिका-चीन के समन्वय से वैश्विक शासन को पूरक और सशक्त बनाना था।
  • इसके प्रारंभिक समर्थन में ओबामा प्रशासन भी शामिल था, जिसने अमेरिका-चीन संबंधों में इसका प्रयोग किया।

चीन की बदलती वैश्विक भूमिका

  • बीते दो दशकों में चीन ने वैश्विक शक्ति में तेजी से वृद्धि की है।
  • शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और वैश्विक प्रौद्योगिकी अवसंरचना में अपनी पकड़ मजबूत की है।
  • बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के माध्यम से चीन ने वैश्विक आर्थिक प्रभाव बढ़ाया।
  • सैन्य आधुनिकीकरण और आर्थिक शक्ति के विस्तार ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ चीन के संबंधों को नए सिरे से परिभाषित किया।
  • इन विकासों ने ट्रम्प प्रशासन को चीन को “रणनीतिक साझेदार” से “रणनीतिक प्रतिस्पर्धी” के रूप में पहचानने के लिए प्रेरित किया।
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ट्रम्प की जी-2 रूपरेखा: द्विपक्षीयता की वापसी

  • हाल ही में ट्रम्प द्वारा जी-2 शब्दावली का उपयोग अमेरिका-चीन संबंधों में द्विपक्षीय प्राथमिकता की ओर संकेत करता है।
  • यह क्वाड और अन्य बहुपक्षीय गठबंधनों के विपरीत है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए बनाए गए हैं।
  • संभावित प्रभाव: अमेरिका प्रमुख मुद्दों जैसे व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा पर सीधे चीन के साथ बातचीत कर सकता है, जिससे पारंपरिक सहयोगी हाशिए पर जा सकते हैं।

वैश्विक प्रतिक्रियाएँ

भारत:

  • भारत को द्विपक्षीय प्राथमिकता के कारण कूटनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
  • अमेरिकी टैरिफ और व्यापार नीति के बदलावों ने क्वाड शिखर सम्मेलन को स्थगित कर दिया।

जापान और ऑस्ट्रेलिया:

  • जी-2 को लेकर असहज हैं, क्योंकि इससे क्वाड के बहुपक्षीय दृष्टिकोण और अमेरिकी प्रतिबद्धता प्रभावित हो सकती है।

आसियान देश:

  • अमेरिका-चीन तनाव में कमी का स्वागत, लेकिन द्विपक्षीय समझौते की कीमत पर उनकी स्वायत्तता और हित प्रभावित हो सकते हैं।

वैश्विक व्यवस्था पर संभावित प्रभाव:

अमेरिका-चीन के बीच जी-2 मॉडल अपनाने के कई गहन निहितार्थ हैं, जो वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

  1. छोटे और मध्यम शक्ति देशों के लिए रणनीतिक दबाव
    • द्विपक्षीय प्राथमिकता के कारण छोटे देशों को वैश्विक निर्णयों से दूर रखा जा सकता है।
    • उदाहरण: दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में अमेरिका और चीन के बीच किसी समझौते की कीमत उनके क्षेत्रीय हितों पर पड़ सकती है।
    • इससे इन देशों की स्वायत्तता और नीतिगत स्वतंत्रता सीमित हो सकती है।
  2. बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका में कमी
    • जी-2 मॉडल सीधे दो महाशक्तियों के बीच समन्वय पर केंद्रित है, जिससे जी-20, आईएमएफ, डब्ल्यूटीओ और संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका कमजोर पड़ सकती है।
    • इससे वैश्विक शासन का पारदर्शिता और समान प्रतिनिधित्व वाला स्वरूप प्रभावित हो सकता है।
  3. वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक प्रभाव
    • अमेरिका-चीन द्विपक्षीय निर्णय वैश्विक व्यापार प्रवाह, तकनीकी विनिमय और निवेश नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
    • छोटे और विकासशील देशों के लिए व्यापार और निवेश अवसर अस्थिर हो सकते हैं, क्योंकि वे अमेरिका-चीन समझौतों में सीधे शामिल नहीं होंगे।
    • विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
  4. क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य संतुलन पर प्रभाव
    • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका-चीन द्विपक्षीय निर्णय से क्षेत्रीय गठबंधनों की भूमिका प्रभावित हो सकती है।
    • क्वाड जैसे बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग कमजोर हो सकते हैं, जिससे चीन की आक्रामक गतिविधियों का मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  5. वैश्विक जलवायु और तकनीकी नीतियों पर असर
    • जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा निवेश और वैश्विक प्रौद्योगिकी मानकों पर निर्णय अब केवल दो महाशक्तियों के बीच केंद्रित हो सकता है।
    • इससे वैश्विक रूप से साझा पहल और नियम-आधारित समाधान कठिनाई का सामना कर सकते हैं।
  6. संभावित सकारात्मक पहलू
    • कुछ विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका-चीन की अस्थायी सहयोगात्मक पहल वैश्विक तनाव और आर्थिक अस्थिरता को कम कर सकती है।
    • उदाहरण: सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता, वैश्विक व्यापारिक समझौतों में तेजी, और जलवायु वार्ता में सहयोग।
    • यह मॉडल अल्पकालिक समाधान के रूप में काम कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक बहुपक्षीय संतुलन के लिए जोखिम बना रहेगा।
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 निष्कर्ष:

  • अमेरिका-चीन के बीच जी-2 मॉडल केवल द्विपक्षीय वार्ता या समझौता नहीं है। यह वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था की संरचना को सीधे प्रभावित करता है।
  • यह छोटे और मध्यम देशों के लिए रणनीतिक अस्थिरता और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका में कमी का संकेत देता है। 
  • क्वाड जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों की पारंपरिक भूमिका कमजोर हो सकती है, जबकि वैश्विक व्यापार, तकनीकी विनिमय और जलवायु नीतियाँ भी सीधे दो महाशक्तियों के निर्णयों पर निर्भर हो सकती हैं। 
  • इसके बावजूद, अस्थायी अमेरिका-चीन सहयोग वैश्विक आर्थिक प्रवाह को स्थिर करने और तनाव कम करने में मददगार हो सकता है।

प्रश्न. जी-2 बैठक का उल्लेख किस प्रमुख द्विपक्षीय संबंध को उजागर करता है ?

(a) भारत-जापान

(b) अमेरिका-चीन

(c) यूरोपीय संघ-अमेरिका

(d) अमेरिका-भारत

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