पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले कारक: Factors Influencing Curriculum

पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले कारक: Factors Influencing Curriculum

पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक कौन – कौन है?

पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाले कारक ( Factors Influencing Curriculum ): – पाठ्यक्रम शिक्षा का व्यापक प्रत्य है। इसकी प्रकृति सैद्धान्तिक अधिक व्यवहारिक कम होती है । पाठ्यक्रम विकास का सम्बंध शिक्षा तथा सामाजिक विकास से है । इसलिए शिक्षा और समाज में होने वाले अनेक कारक पाठ्यक्रम को प्रभावित करते हैं । संक्षेप में इन कारकों का उल्लेख निम्नलिखित है-

सामाजिक परिवर्तन :

सामाजिक परिवर्तन भी पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाला एक कारक है । सामाजिक परिवर्तन होन से भौतिक एवं आर्थिक परिवर्तन भी होते है । इन आर्थिक, सामाजिक, भौतिक परिवर्तन में तीव्र गति होने से यह पाठ्यक्रमों को प्रभावित किया है। क्योंकि जब भी समाज में परिवर्तन होता है तो शिक्षा प्रणाली में भी परिवर्तन होता है और शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन होने से पाठ्यक्रम में परिवर्तन होना स्वाभाविक है । 

उदाहरणार्थ – विज्ञान और तकनीकी प्रगति ने शिक्षा को प्रभावित किया है । आज व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के साथ तकनीकी के प्रशिक्षण , दूरवर्ती शिक्षा तथा सम्प्रेषण के माध्यम का विकास हुआ है । इन सबके विकास से शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन आया है , जिससे पाठ्यक्रम प्रभावित हुआ है ।
शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन
पुरातन काल से लेकर शिक्षा और पाठ्यक्रम में गहरा सम्बंध रहा है । दोनों एक दूसरे पर अन्योन्याश्रित रहे हैं । जब – जब शिक्षा व्यवस्था या शिक्षा के उद्देश्यों में परिवर्तन हुआ तब – तब पाठ्यक्रम भी परिवर्तन हुआ है । चूकी समय एवं परिस्थिति के अनुसार शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन करना पड़ा है । 
 

जैसे छोटे बालकों के लिए बाल केन्द्रित शिक्षा , माध्यमिक स्तर पर विषय केन्द्रित शिक्षा प्रणाली शैखिक व्यवस्था के परिवर्तन की ही देन है । इसलिए शैक्षिक व्यवस्था के परिवर्तन के कारण पाठ्यक्रमो के स्वरूप में भी परिवर्तन करना पड़ता है । अतः कहा जा सकता है कि शिक्षा में परिवर्तन पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक है । 

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परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन : –

परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन होने से पाठ्यक्रम प्रभावित होता है। समय और माँग के अनुसार परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन होते रहते हैं और जब परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन होते हैं तो उन्हीं के अनुरूप पाठ्यक्रमों में भी परिवर्तन करना पड़ता है। 

 

वर्तमान समय में परीक्षा प्रणाली में विभिन्नता पाई जाती है। कहीं पर निषेधात्मक परीक्षा प्रणाली तो कहीं पर वस्तुनिष्ठ परीक्षा प्रणाली अपनाई गई है । इसलिए इन परीक्षा प्रणालियों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रमों का निमार्ण किया जाता है । अतः कहा जा सकता है कि परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन भी पाठ्यक्रम को प्रभावित करती है । 

शासन प्रणाली में परिवर्तन : –

शासन प्रणाली में परिवर्तन होने से भी पाठ्यक्रम प्रभावित होता है । जब देश में शासन प्रणाली बदलती है और नई सरकार का गठन होता है तो इस नई सरकार द्वारा अशिक्षा प्रणाली में सुधर लाने के लिए अनेक प्रकार के परिवर्तन किये जाते हैं । जिससे पाठ्यक्रम के स्वरूप पर भी प्रभाव पड़ता है । 

 

भारत जैसे देश में एक शिक्षा प्रणाली न होने पर पाठ्यक्रम पर और भी गहरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि सभी राज्यों में भिन्न – भिन्न शिक्षा प्रणाली होने से वहाँ पाठ्यक्रम के प्रारूप विभिन्न स्तरों पर अलग – अलग हैं । इसलिए शासन प्रणाली में परिवर्तन को भी पाठ्यक्रम को प्रभावित करने वाला मुख्य कारक माना जा सकता है ।

राष्ट्रीय शिक्षा आयोग तथा समितियाँ : –

शिक्षा प्रणाली में सुधार हेतु भिन्न-भिन्न समय एवं परिस्थितियों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर अनेक शिक्षा आयोग एवं समितियों का गठन किया गया । इन आयोगों एवं समितियों ने प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च स्तर पर शिक्षा में सुधार के लिए अनेक सुझाव दिए । सरकार द्वारा इन सुझावों को लागू भी किया गया , जिससे शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन हुआ । शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन होने से पाठ्यक्रम के प्रारूप में भी परिवर्तन करना पड़ा। अतः कहा जा सकता है कि शिक्षा के आयोगों तथा समितियों के सुझाव ने पाठ्यक्रम को प्रभावित किया । 

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अध्ययन समिति :

शिक्षा में सुधार के लिए विभिन्न प्रकार की अध्ययन समितियों का गठन होता है। विभिन्न स्तरों पर अध्ययन समितियों का मुख्य कार्य पाठ्यक्रम का निर्माण तथा उसमें सुधार करना है। इन अध्ययन समिमियों के रूचियो, रूझानो, अभिवृत्तियों तथा मानसिक विकस का सीधा प्रभाव इस पर पड़ता है। इन समितियों के सदस्य और अध्यक्ष मिलकर इसमें में सुधार और बदलाव लाते है। अतः कहा जा सकता है कि ये अध्ययन समितियाँ पाठ्यक्रम को प्रभावित करते हैं ।

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