भारत का इतिहास
महत्वपूर्ण परीक्षोपयोगी तथ्य
अध्याय 5 : मौर्य साम्राज्य
चंद्रगुप्त मौर्य • बिंदुसार • अशोक • प्रशासन • कला • पतन
1
परिचय एवं पृष्ठभूमि
परीक्षा-दृष्टि : मौर्य साम्राज्य की स्थापना, विस्तार और महत्वपूर्ण स्रोत।
मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने 322 ई.पू. में की।
यह प्राचीन भारत का प्रथम विशाल एवं केंद्रीकृत साम्राज्य था।
मौर्य काल के प्रमुख स्रोत — अर्थशास्त्र (कौटिल्य), इंडिका (मेगास्थनीज) और अशोक के अभिलेख।
मौर्य साम्राज्य का विस्तार उत्तर में अफगानिस्तान से दक्षिण में कर्नाटक तक था।
मौर्य काल में केंद्रीकृत प्रशासन, स्थायी सेना और कुशल कर प्रणाली थी।
इस काल में बौद्ध धर्म का तेजी से प्रसार हुआ।
मौर्य साम्राज्य लगभग 137 वर्षों (322–185 ई.पू.) तक चला।
मौर्य काल को प्राचीन भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग भी कहा जाता है।
2
चंद्रगुप्त मौर्य (322–298 ई.पू.)
परीक्षा-दृष्टि : चंद्रगुप्त की विजय, प्रशासन और जैन धर्म से संबंध।
चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म मगध में हुआ था। कुछ विद्वान उन्हें नंद वंश का वंशज मानते हैं।
उन्होंने चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद को हराया।
चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस निकेटर को 305 ई.पू. में हराया और उत्तर-पश्चिमी भारत पर अधिकार किया।
सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त से किया और 500 हाथी उपहार में दिए।
चंद्रगुप्त ने अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार प्रशासन चलाया।
उनके समय में मगध साम्राज्य का केंद्र था। राजधानी पाटलिपुत्र थी।
चंद्रगुप्त ने अपनी अंतिम अवस्था में जैन धर्म अपनाया और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में संथारा व्रत लिया।
चंद्रगुप्त ने मेगास्थनीज को राजदूत के रूप में स्वीकार किया।
चंद्रगुप्त मौर्य ने भारत में प्रथम बार एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की।
🧠 स्मरण-सूत्र
चंद्रगुप्त की उपलब्धि : "सेल्यूकस को हाथी मिले" → सेल्यूकस से युद्ध में 500 हाथी मिले।
3
बिंदुसार (298–273 ई.पू.)
परीक्षा-दृष्टि : बिंदुसार की विजय और उपाधियाँ।
बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। उसे अमित्रघात (शत्रुओं का संहारक) कहा जाता था।
यूनानी स्रोतों में उसे अमित्रोचेट्स कहा गया है।
बिंदुसार ने दक्षिण भारत में मैसूर तक विजय प्राप्त की।
वह आजीवक संप्रदाय का अनुयायी था।
बिंदुसार के समय में मौर्य साम्राज्य का और विस्तार हुआ।
उसके शासनकाल में तक्षशिला में विद्रोह हुआ, जिसे दबाया गया।
बिंदुसार ने सीरिया के राजा एंटिओकस से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखे।
4
अशोक महान (273–232 ई.पू.)
परीक्षा-दृष्टि : कलिंग युद्ध, धर्म नीति, अभिलेख और बौद्ध धर्म का प्रसार।
अशोक ने कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) जीता, लेकिन युद्ध की भयावहता से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म अपनाया।
अशोक ने धम्म (धर्म) का प्रचार किया — अहिंसा, सहिष्णुता, दान और नैतिक जीवन पर बल।
अशोक के अभिलेख मुख्यतः तीन प्रकार के हैं — शिलालेख, स्तंभ लेख और गुफा लेख।
सबसे महत्वपूर्ण 13वाँ शिलालेख है, जिसमें कलिंग युद्ध का वर्णन है।
अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।
अशोक ने तीसरी बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र में बुलाई।
अशोक के स्तंभ शीर्ष पर चार सिंह (अशोक चक्र) भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना।
अशोक ने धम्म महामात्र नियुक्त किए जो धर्म का प्रचार करते थे।
अशोक के बाद के वर्षों में उसने बौद्ध विहारों और स्तूपों का निर्माण करवाया।
अशोक की मृत्यु 232 ई.पू. में हुई।
★ अति महत्वपूर्ण
अशोक के प्रमुख अभिलेख
- 13वाँ शिलालेख — कलिंग युद्ध का वर्णन
- पillar Edict VII — सबसे लंबा अभिलेख
- Minor Rock Edict I — सबसे पुराना अभिलेख
- Schism Edict — बौद्ध संघ में एकता का आदेश
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मौर्य प्रशासन, अर्थव्यवस्था एवं कला
परीक्षा-दृष्टि : केंद्रीकृत प्रशासन, अर्थशास्त्र और मौर्य कला।
अर्थशास्त्र (कौटिल्य) — मौर्य प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ।
मेगास्थनीज की इंडिका में मौर्य प्रशासन का विस्तृत वर्णन है।
मौर्य प्रशासन केंद्रीकृत था — राजा सर्वोच्च, मंत्रिपरिषद, अमात्य, सेनापति, कोषाध्यक्ष आदि।
मौर्य काल में स्थायी सेना थी जिसमें पैदल, घुड़सवार, हाथी और रथ शामिल थे।
मौर्य काल में भूमि कर (भाग), व्यापार कर और शुल्क वसूले जाते थे।
मौर्य कला में स्तंभ, स्तूप और गुफा प्रमुख हैं।
सांची स्तूप, सारनाथ स्तंभ, बाराबर गुफाएँ और धौली हाथी मौर्य काल के हैं।
मौर्य काल में उत्तरापथ और दक्षिणापथ जैसी व्यापारिक सड़कें थीं।
मौर्य काल में सिंचाई और कृषि को सरकारी संरक्षण मिला।
⚡ एक नज़र में — अध्याय 5 के 18 अमोघ तथ्य
- मौर्य साम्राज्य की स्थापना — चंद्रगुप्त मौर्य (322 ई.पू.)
- चंद्रगुप्त के गुरु — चाणक्य (कौटिल्य)
- सेल्यूकस से युद्ध — चंद्रगुप्त विजयी (305 ई.पू.)
- बिंदुसार की उपाधि — अमित्रघात
- अशोक का कलिंग युद्ध — 261 ई.पू.
- अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया
- अशोक के अभिलेख — शिलालेख, स्तंभ लेख
- 13वाँ शिलालेख — कलिंग युद्ध का वर्णन
- अशोक ने बौद्ध धर्म प्रचार के लिए महेंद्र और संघमित्रा भेजे
- तीसरी बौद्ध संगीति — पाटलिपुत्र (अशोक के समय)
- मौर्य कला का प्रतीक — सांची स्तूप, सारनाथ स्तंभ
- अर्थशास्त्र — कौटिल्य
- इंडिका — मेगास्थनीज
- मौर्य प्रशासन — केंद्रीकृत
- मौर्य काल में स्थायी सेना थी
- अशोक के बाद मौर्य साम्राज्य का पतन शुरू हुआ
- मौर्य साम्राज्य लगभग 137 वर्ष चला
- मौर्य काल को प्राचीन भारत का स्वर्णिम युग माना जाता है
📖 अगला अध्याय : अध्याय 6 — उत्तर मौर्य काल (शुंग, सातवाहन एवं विदेशी शासक) शीघ्र प्रकाशित होगा।
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