जनजाति स्वतंत्रता सेनानियों का भारत का पहला डिजिटल संग्रहालय

जनजाति स्वतंत्रता सेनानियों का भारत का पहला डिजिटल संग्रहालय

चर्चा में क्यों? 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर, 2025 को छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर, अटल नगर में भारत के पहले डिजिटल जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन किया। 

  • यह संग्रहालय ब्रिटिश उपनिवेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले जनजातीय वीरों के साहस, त्याग और विरासत का प्रतीक है।

मुख्य बिंदु

  • संग्रहालय के बारे में:
    • शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय” नामक  यह भारत का पहला पूर्णतः डिजिटल संग्रहालय है, जो जनजातीय वीरों को समर्पित है।
    • यह संग्रहालय उन्नत डिजिटल एवं इंटरैक्टिव प्रौद्योगिकी के माध्यम से जनजातीय नेताओं की वीरता और विद्रोह की गाथा को प्रदर्शित करता है।
    • आगंतुकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिये इसमें VFX डिस्प्लेइंटरैक्टिव स्क्रीनडिजिटल प्रोजेक्शन तथा QR-कोड आधारित स्टोरीटेलिंग को एकीकृत किया गया है।
  • वीर नारायण सिंह को श्रद्धांजलि:
    • यह संग्रहालय शहीद वीर नारायण सिंह (1820–1857) को समर्पित है, जो छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद स्वतंत्रता सेनानी और सोनाखान के जमींदार थे।
    • उन्होंने वर्ष 1856–57 के अकाल के दौरान ब्रिटिश अनाज जमाखोरी के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया तथा औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध किसानों और आदिवासियों को संगठित किया।
    • वर्ष 1857 में पकड़े जाने और फाँसी दिये जाने के पश्चात् वे मध्य भारत में आदिवासी प्रतिरोध और स्वशासन के प्रतीक बन गए।
    • रायपुर स्थित वीर नारायण सिंह स्टेडियम का नाम भी उनके सम्मान में रखा गया है।
  • प्रदर्शित विद्रोह और आंदोलन: 
    • इसमें हल्बा विद्रोहपरलकोट विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भूमकाल आंदोलन, तारापुर और लिंगागिरी विद्रोह, रानी चौरी संघर्ष तथा झंडा और जंगल सत्याग्रह जैसे ऐतिहासिक विद्रोह शामिल हैं।
See also  राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RASHTRIYA GOKUL MISSION)
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