भारत के प्रधान मंत्री ने ICDRI 2025 में आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए वैश्विक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया
भारत की 5 प्रमुख वैश्विक प्राथमिकताएं
- आपदा प्रतिरोध या आपदा जोखिम का सामना करने की क्षमता को शिक्षा में शामिल करना।
- आपदा प्रतिरोध के लिए एक वैश्विक डिजिटल रिपोजिटरी तैयार करना।
- विकासशील देशों की वित्त-पोषण तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नवीन वित्त-पोषण प्रणाली को बढ़ावा देना।
- भारत द्वारा लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) को बड़े महासागरीय देशों के रूप में मान्यता दिए जाने की पुष्टि करना। साथ ही, उनकी सुभेद्यताओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर बल देना।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत बनाना।
आपदा रोधी अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICDRI) के मुख्य निष्कर्ष
- SIDS में कॉल टू एक्शन फॉर कॉस्टल रेसिलिएंस लॉन्च किया गया: इसमें तटीय अवसंरचनाओं में लचीलापन बढ़ाने के लिए सिफारिशें की गई है। साथ ही, 2034 तक SIDS जैसे सुभेद्य क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है।
- इस पहल में 2025 और 2034 के बीच आसानी से वित्त जुटाने तथा मजबूत अवसंरचना के निर्माण के लिए 10 कार्रवाइयों को रेखांकित किया गया है, जैसे:
- SIDS ग्लोबल डेटा हब 2.0 लॉन्च करना,
- 2030 तक SIDS में 100% बहु-आपदा प्रारंभिक-चेतावनी कवरेज सुनिश्चित करना,
- SIDS के लिए वन-स्टॉप प्रमाणन प्रक्रिया विकसित करना,
- जलवायु वित्त को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्रालयों के भीतर लचीलापन/ प्रतिरोध इकाइयां स्थापित करना आदि।
- इस पहल में 2025 और 2034 के बीच आसानी से वित्त जुटाने तथा मजबूत अवसंरचना के निर्माण के लिए 10 कार्रवाइयों को रेखांकित किया गया है, जैसे:
- निवेश ढांचे को बेहतर बनाना: नीतिगत, वित्तीय और तकनीकी मानकों को एकीकृत करके मजबूत तटीय अवसंरचना के विकास के लिए समय पर, प्रभावी एवं मापनीय वित्त-पोषण सुनिश्चित करना।
- यूरोप में पहली बार मेजबानी: इसका आयोजन फ्रांस के नीस शहर में किया गया था। इससे इस सम्मेलन का प्रभाव व्यापक हुआ तथा समावेशी संवाद और साझेदारी को बढ़ावा मिला।
आपदा रोधी अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICDRI) के बारे में
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