चोल कालीन इतिहास — सम्पूर्ण नोट्स

चोल कालीन इतिहास — सम्पूर्ण नोट्स

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South Indian History Medieval India Art & Architecture Local Self-Government

1️⃣ चोल वंश का परिचय Introduction to Chola Dynasty

  • चोल वंश दक्षिण भारत के सबसे शक्तिशाली एवं दीर्घजीवी (longest-ruling) राजवंशों में से एक था।
  • चोलों का मूल क्षेत्र कावेरी नदी डेल्टा (तमिलनाडु) था, जिसे Cholamandalam कहा जाता था।
  • चोल साम्राज्य का उल्लेख संगम साहित्य और अशोक के शिलालेखों (तीसरी शताब्दी ई.पू.) में भी मिलता है — इसे "प्राचीन चोल" कहा जाता है।
  • आधुनिक/मध्यकालीन इतिहास में जिस चोल साम्राज्य की चर्चा होती है, उसकी स्थापना विजयालय ने 9वीं शताब्दी में की — इसे "मध्यकालीन चोल" (Imperial Cholas) कहा जाता है।

2️⃣ उत्पत्ति एवं प्रारंभिक शासक Origin & Early Rulers

848 ई.
विजयालय ने तंजावुर (तंजौर) पर अधिकार कर मध्यकालीन चोल साम्राज्य की नींव रखी।
871–907 ई.
आदित्य प्रथम — पल्लवों को पराजित कर तोंडईमंडलम पर अधिकार किया; चोल शक्ति का विस्तार प्रारंभ हुआ।
907–955 ई.
परान्तक प्रथम — पांड्यों को पराजित कर "मदुरै कोंड" की उपाधि धारण की, परन्तु तक्कोलम के युद्ध में राष्ट्रकूटों से पराजित हुआ।

3️⃣ प्रमुख चोल शासक Key Chola Rulers (Most Important for Exams)

👑 राजराज प्रथम (985–1014 ई.)

चोल साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक/उत्कर्षकर्ता। "बृहदेश्वर मंदिर" (तंजावुर) का निर्माण कराया। श्रीलंका के कुछ भाग जीते। मूल नाम अरुलमोझिवर्मन

👑 राजेन्द्र प्रथम (1014–1044 ई.)

राजराज का पुत्र। गंगा घाटी अभियान चलाया, उपाधि "गंगईकोंड चोल"। नई राजधानी गंगईकोंड चोलपुरम बसाई। दक्षिण-पूर्व एशिया (श्रीविजय) पर नौसैनिक अभियान।

👑 राजाधिराज प्रथम

कोप्पम के युद्ध में चालुक्यों से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त — युद्धभूमि में मरने वाला एकमात्र चोल सम्राट।

👑 कुलोत्तुंग प्रथम (1070–1122 ई.)

चोल-चालुक्य (वेंगी) शाखाओं का एकीकरण किया। चीन को व्यापारिक दूत भेजे। दीर्घकालीन शांति एवं समृद्धि का काल।

याद रखने की युक्ति: प्रमुख शासकों का क्रम — विजयालय → आदित्य I → परान्तक I → राजराज I → राजेन्द्र I → राजाधिराज I → कुलोत्तुंग I — संक्षेप में "वि-आ-प-रा-रा-रा-कु" के रूप में याद करें।

4️⃣ प्रशासनिक व्यवस्था Administrative System

इकाई (Unit)विवरण
मण्डलम् (Mandalam)प्रांत — सबसे बड़ी प्रशासनिक इकाई, राजपरिवार का सदस्य या वायसराय शासक
वलनाडु / कोट्टममण्डलम् का उपविभाग (जिला स्तर)
नाडुजिले के अंतर्गत तहसील स्तरीय इकाई — स्वायत्त सभा होती थी
ऊर / ग्रामसबसे छोटी इकाई — गाँव, जहाँ "सभा" व "ऊर" कार्यरत थीं
  • राजा को "उडैयार" या "पेरुमाल" कहा जाता था; शासन में राजा को दैवीय अधिकार प्राप्त माना जाता था।
  • राजस्व विभाग को "पुरवुवरी तिणैक्कलम्" कहा जाता था; भूमि सर्वेक्षण कर भू-राजस्व निर्धारित होता था।
  • सेना में पैदल, अश्व, गज एवं शक्तिशाली नौसेना शामिल थी।

5️⃣ स्थानीय स्वशासन Local Self-Government — उत्तरमेरूर अभिलेख (अति महत्वपूर्ण)

🏛️ उत्तरमेरूर अभिलेख (Uttaramerur Inscription) — परान्तक प्रथम के समय

  • ग्राम सभा सदस्यों के चयन हेतु "कुडवोलाई" (लॉटरी / गुप्त मतदान) पद्धति का वर्णन।
  • सभा के लिए न्यूनतम उम्र, संपत्ति, शिक्षा संबंधी पात्रता शर्तें निर्धारित थीं।
  • गाँव की सभा विभिन्न समितियों (वारियम) में बँटी होती थी — जैसे उद्यान समिति, टैंक समिति, न्याय समिति
  • यह व्यवस्था आधुनिक भारत की पंचायती राज प्रणाली की प्रेरणा मानी जाती है।
संस्थाकार्य
ऊर (Ur)सामान्य ग्राम सभा, सभी वयस्क करदाता शामिल
सभा (Sabha)केवल ब्राह्मण ग्रामों (अग्रहार) की विशिष्ट सभा
नगरम् (Nagaram)व्यापारिक नगरों की सभा

7️⃣ कला एवं स्थापत्य Art & Architecture

🛕 बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर

निर्माता: राजराज प्रथम (1010 ई.)। द्रविड़ स्थापत्य का शिखर। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (Great Living Chola Temples)।

🛕 गंगईकोंडचोलपुरम मंदिर

निर्माता: राजेन्द्र प्रथम, बृहदेश्वर मंदिर के समान शैली में निर्मित।

🎭 नटराज की कांस्य प्रतिमा

चोल कालीन कांस्य मूर्तिकला (Bronze sculpture) की सर्वश्रेष्ठ कृति — "लॉस्ट वैक्स" / सिरे-पेर्दु तकनीक (Cire Perdue) से निर्मित।

📜 साहित्य

तमिल साहित्य का उत्कर्ष — कम्बन कृत "रामावतारम् (कम्ब रामायण)" इसी काल की रचना है।

"द्रविड़ स्थापत्य शैली अपने चरम विकास पर चोल काल में पहुँची, जिसका सर्वोत्तम उदाहरण तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर है।"

8️⃣ अर्थव्यवस्था एवं व्यापार Economy & Trade

  • अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि था — कावेरी डेल्टा अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र था।
  • व्यापारिक संगठन/गिल्ड — "मणिग्रामम्" एवं "अय्यावोले-500" सक्रिय थे।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया एवं चीन के साथ समुद्री व्यापार प्रमुख था — मसाले, वस्त्र, धातु निर्यात होते थे।
  • स्वर्ण व ताम्र सिक्कों का प्रचलन था; मंदिरों के पास भी भूमि व आर्थिक संसाधन होते थे (मंदिर अर्थव्यवस्था)।

9️⃣ पतन के कारण Causes of Decline

  • उत्तराधिकारियों में निरंतर सत्ता संघर्ष एवं कमजोर शासक।
  • पांड्यों का पुनरुत्थान एवं चोल साम्राज्य पर निरंतर आक्रमण।
  • होयसल एवं काकतीय शक्तियों का उदय जिसने चोल प्रभाव क्षेत्र को सीमित किया।
  • 13वीं शताब्दी के अंत तक चोल साम्राज्य का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया (अंतिम शासक: राजेन्द्र चोल तृतीय)।

🔟 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य Quick Revision — One-Liner Facts

  • चोल साम्राज्य की स्थापना — विजयालय (848 ई.)
  • वास्तविक उत्कर्षकर्ता — राजराज प्रथम
  • बृहदेश्वर मंदिर निर्माता — राजराज प्रथम
  • गंगा घाटी अभियान — राजेन्द्र प्रथम
  • "गंगईकोंड चोल" उपाधि — राजेन्द्र प्रथम
  • श्रीविजय अभियान — राजेन्द्र प्रथम
  • उत्तरमेरूर अभिलेख संबंधित — स्थानीय स्वशासन / ग्राम सभा
  • कुडवोलाई पद्धति — सभा सदस्यों के चयन की लॉटरी प्रणाली
  • नटराज प्रतिमा तकनीक — सिरे-पेर्दु (Lost Wax Technique)
  • कम्ब रामायण रचनाकार — कम्बन
  • चोल साम्राज्य की राजधानी (आरंभ) — तंजावुर, (बाद में) — गंगईकोंडचोलपुरम
  • तक्कोलम युद्ध — परान्तक प्रथम बनाम राष्ट्रकूट (चोल पराजित)
  • युद्धभूमि में मरने वाला एकमात्र चोल सम्राट — राजाधिराज प्रथम
टिप: परीक्षा में "उत्तरमेरूर अभिलेख" और "कुडवोलाई पद्धति" से जुड़े प्रश्न लगभग हर वर्ष किसी न किसी राज्य PSC में पूछे जाते हैं — इसे विशेष रूप से याद रखें।

📝 अभ्यास प्रश्न Practice MCQs

प्रश्न 1.

बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?

(a) विजयालय   (b) राजराज प्रथम   (c) राजेन्द्र प्रथम   (d) कुलोत्तुंग प्रथम

उत्तर: (b) राजराज प्रथम

प्रश्न 2.

उत्तरमेरूर अभिलेख किस विषय से संबंधित है?

(a) भू-राजस्व व्यवस्था   (b) नौसेना संगठन   (c) स्थानीय स्वशासन (ग्राम सभा)   (d) व्यापारिक संगठन

उत्तर: (c) स्थानीय स्वशासन (ग्राम सभा)

प्रश्न 3.

"गंगईकोंड चोल" की उपाधि किस शासक ने धारण की?

(a) राजराज प्रथम   (b) राजेन्द्र प्रथम   (c) परान्तक प्रथम   (d) आदित्य प्रथम

उत्तर: (b) राजेन्द्र प्रथम

प्रश्न 4.

"कुडवोलाई" पद्धति का संबंध किससे था?

(a) सेना भर्ती   (b) कर निर्धारण   (c) सभा सदस्यों का चयन (लॉटरी)   (d) मंदिर निर्माण

उत्तर: (c) सभा सदस्यों का चयन (लॉटरी)

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