भारत-जापान ने JCM कार्यान्वयन नियम अपनाया
जलवायु परिवर्तन शमन में द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा — संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (JCM) के तहत कार्बन क्रेडिट व्यापार को बढ़ावा
भारत और जापान ने संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (Joint Crediting Mechanism - JCM) के कार्यान्वयन नियमों को औपचारिक रूप से अपनाया है। यह कदम जलवायु परिवर्तन शमन और कार्बन क्रेडिट व्यापार में द्विपक्षीय सहयोग को एक नई दिशा देता है। JCM के तहत भारत और जापान मिलकर हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देंगे और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी के लिए संयुक्त रूप से काम करेंगे।
- JCM — भारत और जापान के बीच उत्सर्जन में कमी के लिए एक द्विपक्षीय क्रेडिटिंग तंत्र।
- कार्यान्वयन नियम — JCM के तहत परियोजनाओं की पात्रता, मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV) प्रक्रिया निर्धारित।
- कार्बन क्रेडिट — भारत में स्थापित परियोजनाओं से प्राप्त क्रेडिट दोनों देशों के बीच विभाजित किए जाएंगे।
- प्रमुख क्षेत्र — ऊर्जा, परिवहन, अपशिष्ट प्रबंधन, वानिकी और नवीकरणीय ऊर्जा।
- परीक्षा उपयोगी — GS-II (International Relations), GS-III (Environment, Climate Change, Energy) और प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य।
भारत-जापान JCM कार्यान्वयन नियमों को अपनाने से द्विपक्षीय संबंधों में हरित सहयोग की एक नई शुरुआत हुई है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं —
- JCM के तहत परियोजनाओं को उत्सर्जन में मापनीय कमी प्रदर्शित करनी होगी।
- परियोजनाएँ नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, वानिकी, अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ परिवहन क्षेत्रों में होनी चाहिए।
- परियोजनाएँ अतिरिक्तता (Additionality) — यानी बिना JCM के भी परियोजना नहीं होती — को प्रदर्शित करें।
- परियोजनाओं को दोनों देशों की मान्यता प्राप्त निकायों से अनुमोदन की आवश्यकता।
- मापन (Measurement) — परियोजनाओं द्वारा उत्सर्जन में कमी को मानकीकृत पद्धतियों से मापा जाएगा।
- रिपोर्टिंग (Reporting) — परियोजना कार्यान्वयनकर्ता नियमित अंतराल पर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
- सत्यापन (Verification) — तृतीय-पक्ष सत्यापनकर्ता द्वारा उत्सर्जन में कमी को प्रमाणित किया जाएगा।
- MRV प्रक्रिया JCM की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।
- परियोजनाओं से प्राप्त कार्बन क्रेडिट भारत और जापान के बीच विभाजित किए जाएंगे।
- क्रेडिट विभाजन परियोजना-आधारित होगा और पूर्व-निर्धारित अनुपात में होगा।
- दोनों देश क्रेडिट का उपयोग अपने राष्ट्रीय उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने में कर सकते हैं।
- यह तंत्र अंतर्राष्ट्रीय कार्बन बाजार के सिद्धांतों के अनुरूप है।
- JCM के तहत जापानी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का भारत में हस्तांतरण होगा।
- स्थानीय कार्यान्वयन के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- दोनों देशों के विशेषज्ञों के बीच ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।
- यह तंत्र सतत विकास और हरित विकास को समर्थन देता है।
- JCM का कार्यान्वयन संयुक्त समिति (Joint Committee) द्वारा निरीक्षण किया जाएगा।
- संयुक्त समिति में दोनों देशों के अधिकारी शामिल होंगे।
- समिति नियमों की समीक्षा और संशोधन करने के लिए सक्षम होगी।
- परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था बनाई गई है।
| चुनौती क्षेत्र Challenge Area | समस्या की प्रकृति Nature | मुख्य मुद्दा Key Issue |
|---|---|---|
| तकनीकी Technology Gap | प्रौद्योगिकी अंतर | जापानी प्रौद्योगिकियों का भारतीय परिस्थितियों में अनुकूलन — लागत, स्थानीयता और रखरखाव की चुनौतियाँ। |
| वित्तीय Financial Barriers | उच्च प्रारंभिक निवेश | जापानी स्वच्छ प्रौद्योगिकियाँ महंगी — भारत में छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए वित्तीय बाधा। |
| नीतिगत Regulatory & Policy Issues | विभिन्न नीतिगत ढाँचे | भारत की जलवायु नीति और जापान की उत्सर्जन कटौती योजनाओं में समन्वय। कार्बन क्रेडिट की मान्यता और स्वीकृति। |
| बाजार Market Acceptance | बाजार की तैयारी | भारत में कार्बन क्रेडिट बाजार अभी विकासशील अवस्था में — पर्याप्त मांग और बुनियादी ढाँचे का अभाव। |
- 1
परियोजनाओं की विविधता बढ़ाना — नए क्षेत्रों जैसे हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, और स्मार्ट सिटीज़ में JCM परियोजनाओं को प्रोत्साहन। (Diversifying project portfolio)
- 2
वित्तीय तंत्र को मजबूत करना — JCM परियोजनाओं के लिए विशेष वित्तीय सुविधाएँ और कम लागत वाले ऋण की व्यवस्था। (Strengthening financial mechanisms)
- 3
क्षमता निर्माण कार्यक्रम — स्थानीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना। (Capacity building programs)
- 4
कार्बन बाजार विकास — भारत में कार्बन क्रेडिट व्यापार के लिए मजबूत बुनियादी ढाँचा और नियामक ढाँचा विकसित करना। (Developing carbon market infrastructure)
- 5
अन्य देशों के साथ सहयोग — JCM मॉडल को अन्य देशों के साथ साझा करना और क्षेत्रीय कार्बन बाजार को बढ़ावा देना। (Expanding collaboration with other countries)
"संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (JCM) भारत-जापान जलवायु सहयोग का एक मॉडल है।" इस कथन के प्रकाश में JCM के महत्व, चुनौतियों और संभावनाओं का विश्लेषण करें।
1. JCM भारत और जापान के बीच एक द्विपक्षीय कार्बन क्रेडिट तंत्र है।
2. JCM के तहत केवल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ ही पात्र हैं।
3. JCM के कार्यान्वयन नियमों में MRV प्रक्रिया शामिल है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से सही है/हैं? (Which statements are correct?)
JCM — Joint Crediting Mechanism — भारत-जापान द्विपक्षीय कार्बन क्रेडिट तंत्र।
कार्बन क्रेडिट — Carbon Credit — उत्सर्जन में कमी के लिए व्यापार योग्य परमिट।
MRV — Measurement, Reporting, Verification — उत्सर्जन मापन की प्रक्रिया।
अतिरिक्तता — Additionality — यह प्रदर्शित करना कि परियोजना JCM के बिना संभव नहीं थी।
संयुक्त समिति — Joint Committee — JCM के कार्यान्वयन की निगरानी करने वाली समिति।
हरित प्रौद्योगिकी — Green Technology — पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी।
NDC — Nationally Determined Contributions — जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान।
JCM पूर्ण रूप: Joint Crediting Mechanism
JCM भारत-जापान के बीच 2011 में शुरू हुआ।
MRV का अर्थ: Measurement, Reporting, Verification
JCM के प्रमुख क्षेत्र: ऊर्जा, परिवहन, वानिकी, अपशिष्ट
JCM के तहत कार्बन क्रेडिट दोनों देशों के बीच विभाजित होते हैं।
JCM पेरिस समझौता (Article 6) के अनुरूप है।
JCM परियोजनाओं में अतिरिक्तता (Additionality) आवश्यक है।
पिछली परीक्षाओं में पूछे गए समान विषय:
📌 UPSC 2023 Mains GS-III: "कार्बन क्रेडिट व्यापार — भारत के लिए अवसर और चुनौतियाँ।"
📌 UPSC 2021 Pre: जलवायु परिवर्तन शमन में द्विपक्षीय सहयोग पर प्रश्न।
📌 UPSC 2019 Mains GS-II: "भारत की जलवायु नीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।"