🕌 मुगल साम्राज्य का इतिहास
बाबर से बहादुर शाह जफर तक · Exam-Oriented Notes
★ बाबरनामा: आत्मकथा (तुर्की भाषा में)
★ मूल: फरगना (आधुनिक उज़्बेकिस्तान)
- पहली पानीपत की लड़ाई (1526): बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराया। युद्ध में तोपों (Artillery) का सफल प्रयोग किया।
- खानवा की लड़ाई (1527): राणा सांगा (मेवाड़) को हराया। यह विजय बाबर के साम्राज्य की नींव बनी।
- बाबरनामा: बाबर की आत्मकथा — 'तुज़ुक-ए-बाबरी'। इसमें भारत की प्राकृतिक सुंदरता, वनस्पति और जीव-जंतुओं का वर्णन है।
- भारत में बाग़: बाबर ने भारत में 'चारबाग' (Persian Garden) शैली की शुरुआत की — आगरा में 'रामबाग'।
- मृत्यु (1530): 48 वर्ष की आयु में आगरा में निधन। उसे काबुल (अफगानिस्तान) में दफनाया गया।
बाबर (जन्म: 1483, फरगना) मुगल साम्राज्य का संस्थापक था। वह तैमूर (पिता की ओर) और चंगेज़ खान (माता की ओर) का वंशज था। 12 वर्ष की आयु में ही वह फरगना का शासक बन गया था। भारत आने से पहले उसने समरकंद पर विजय प्राप्त की और फिर काबुल (1504) को अपनी राजधानी बनाया।
🔹 पहली पानीपत की लड़ाई (21 अप्रैल 1526): बाबर ने 12,000 सैनिकों के साथ इब्राहिम लोदी की 1,00,000 सेना को पराजित किया। बाबर की तोपें (Artillery) और घुड़सवार सेना (Cavalry) निर्णायक साबित हुई। इस युद्ध ने दिल्ली सल्तनत का अंत कर भारत में मुगल शासन की नींव रखी।
🔹 खानवा की लड़ाई (16 मार्च 1527): बाबर का सबसे कठिन युद्ध राणा सांगा (मेवाड़) के साथ हुआ। राणा सांगा ने राजपूत संघ बनाया था। बाबर ने 'जिहाद' का नारा दिया और शराब पीना छोड़ दिया। इस युद्ध में बाबर की विजय ने उत्तर भारत में मुगल सत्ता को स्थिर किया।
🔹 बाबरनामा (तुज़ुक-ए-बाबरी): यह बाबर की आत्मकथा है, जो उसने तुर्की भाषा में लिखी। इसमें उसने भारत की प्राकृतिक सुंदरता, फल-फूल, पशु-पक्षी, और यहाँ की जलवायु का विस्तृत वर्णन किया है। यह विश्व साहित्य की अमूल्य निधि मानी जाती है।
🔹 बाग़ और संस्कृति: बाबर भारत में 'चारबाग' (Four Gardens) शैली लाया, जो मध्य एशियाई बाग़बानी की परंपरा थी। उसने आगरा में 'रामबाग' (पहला चारबाग) बनवाया। वह एक प्रतिभाशाली कवि भी था — उसने फ़ारसी और तुर्की में कविताएँ लिखीं।
★ 1555 में सिंहासन पुनः प्राप्त
★ हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली) — भारत का पहला मुगल मकबरा
- शेरशाह सूरी (1540): कन्नौज के युद्ध में हुमायूँ पराजित हुआ और 15 वर्ष निर्वासन में रहा।
- 1555 में पुनः विजय: शेरशाह के उत्तराधिकारियों को हराकर दिल्ली पुनः प्राप्त की।
- हुमायूँ का मकबरा: उसकी विधवा 'हमीदा बानो बेगम' ने बनवाया। दिल्ली में स्थित यह भारत का पहला मुगल मकबरा है।
- चित्रकला: हुमायूँ ने फ़ारसी कलाकारों को भारत बुलाया, जिससे मुगल चित्रकला की नींव पड़ी।
- मृत्यु (1556): अपनी पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर मृत्यु। उत्तराधिकारी — अकबर (13 वर्ष)।
हुमायूँ बाबर का पुत्र और मुगल साम्राज्य का दूसरा सम्राट था। वह दो बार शासक बना — पहले 1530-1540 तक, फिर 1555-1556 तक। उसके शासन का अधिकांश समय संघर्ष में बीता।
🔹 शेरशाह सूरी का विद्रोह: बिहार का अफगान शासक शेरशाह सूरी हुमायूँ का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी था। 1539 में 'चौसा' और 1540 में 'कन्नौज' के युद्ध में हुमायूँ पराजित हुआ। उसे 15 वर्ष निर्वासन में (ईरान, अफगानिस्तान) बिताने पड़े। इस दौरान शेरशाह ने 'सूरी साम्राज्य' की स्थापना की।
🔹 ईरान में निर्वासन: हुमायूँ ने ईरानी शासक 'शाह तहमास्प' से सहायता माँगी। ईरानी सम्राट ने 14,000 सैनिक दिए, और बदले में हुमायूँ ने शिया धर्म स्वीकार कर लिया। इस सहायता से हुमायूँ ने कंधार और काबुल पुनः प्राप्त किए।
🔹 1555 में पुनः सिंहासन: शेरशाह (1545 में मृत्यु) के उत्तराधिकारियों में आपसी संघर्ष के कारण सूरी साम्राज्य कमजोर हुआ। हुमायूँ ने 1555 में 'सरहिंद' के युद्ध में सूरी सेना को हराकर दिल्ली पुनः प्राप्त किया।
🔹 सांस्कृतिक योगदान: हुमायूँ ने फ़ारसी कलाकारों ('मीर सैयद अली' और 'अब्दुस समद') को भारत बुलाया, जिन्होंने मुगल चित्रकला शैली की नींव रखी। हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली) — जो UNESCO विश्व धरोहर स्थल है — मुगल स्थापत्य का प्रारंभिक उदाहरण है और ताजमहल के निर्माण की प्रेरणा बना।
★ मनसबदारी व्यवस्था — सैन्य प्रशासन
★ नवरत्न (9 रत्न) — बीरबल, तानसेन, अबुल फ़ज़ल, आदि
- दूसरी पानीपत (1556): बैरम खान की सहायता से हेमू को हराया। अकबर की आयु — 13 वर्ष।
- दीन-ए-इलाही (1582): अकबर ने इस्लाम, हिंदू, जैन, ईसाई — सभी धर्मों के अच्छे तत्वों को मिलाकर नया धर्म बनाया।
- नवरत्न (9 रत्न): अबुल फ़ज़ल (इतिहासकार), बीरबल (सलाहकार), तानसेन (संगीतकार), राजा टोडरमल (राजस्व मंत्री)।
- मनसबदारी व्यवस्था: सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों को 'मनसब' (पद) दिया गया। 'ज़ात' और 'सवार' — दो प्रकार के मनसब।
- फतेहपुर सीकरी: अकबर ने 1571 में नई राजधानी बनाई। बुलंद दरवाज़ा — विजय स्मारक।
अकबर (1542-1605) मुगल साम्राज्य का सबसे महान शासक था। उसने 13 वर्ष की आयु में (1556) सिंहासन प्राप्त किया और 49 वर्ष शासन किया। उसके शासन में मुगल साम्राज्य अफगानिस्तान से बंगाल तक फैल गया।
🔹 दूसरी पानीपत की लड़ाई (5 नवंबर 1556): अकबर के संरक्षक 'बैरम खान' ने हेमू (आदिल शाह का सेनापति) को पराजित किया। हेमू को विक्रमादित्य की उपाधि मिली थी। यह युद्ध अकबर के साम्राज्य की नींव था।
🔹 राजपूत नीति: अकबर ने राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध बनाए। उसने 'जोधा बाई' (मरियम-उज़-ज़मानी) — आमेर के राजा भारमल की पुत्री — से विवाह किया। मानसिंह (आमेर) और भगवान दास उसके प्रमुख राजपूत सेनापति थे। इस नीति ने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया।
🔹 दीन-ए-इलाही (1582): अकबर ने इबादतखाना (House of Worship) की स्थापना की, जहाँ विभिन्न धर्मों के विद्वान बहस करते थे। इसी के आधार पर उसने 'दीन-ए-इलाही' (ईश्वरीय धर्म) की स्थापना की। यह एकाधिकारवादी धर्म नहीं था, बल्कि सभी धर्मों के सर्वोत्तम तत्वों का संग्रह था।
🔹 प्रशासनिक सुधार:
• मनसबदारी व्यवस्था: सैनिक अधिकारियों को 'मनसब' (पद) दिया।
'ज़ात' (व्यक्तिगत स्थिति) और 'सवार' (घुड़सवारों की संख्या) — दो प्रकार।
• राजस्व व्यवस्था: 'टोडरमल' ने 'दहशाला' (Zabti)
प्रणाली लागू की — भूमि को मापकर उपज के अनुसार कर निर्धारण।
• 'सुलह-ए-कुल' (Peace for All): अकबर की नीति — सभी धर्मों के प्रति सम्मान।
🔹 सांस्कृतिक उपलब्धियाँ: अकबर के दरबार में 'नवरत्न' (9 रत्न) थे — अबुल फ़ज़ल (आइन-ए-अकबरी के लेखक), बीरबल (विदूषक/सलाहकार), तानसेन (संगीतकार), राजा टोडरमल (राजस्व मंत्री)। अकबर ने फतेहपुर सीकरी (1571) नई राजधानी बनाई, जहाँ 'बुलंद दरवाज़ा' (54 मीटर ऊँचा) — गुजरात विजय का स्मारक — स्थित है।
★ तुज़ुक-ए-जहाँगीरी — आत्मकथा
★ शिकार और प्रकृति प्रेम
- नूरजहाँ (1611): 'मेहर-उन-निसा' से विवाह। वह वास्तविक शासक बन गई — सिक्कों पर उसका नाम।
- चित्रकला: जहाँगीर के शासन में मुगल चित्रकला अपने चरम पर थी। मानसिंह और अबुल हसन प्रमुख चित्रकार।
- तुज़ुक-ए-जहाँगीरी: उसकी आत्मकथा — फ़ारसी में लिखी। इसमें राजनीति, प्रकृति, कला और न्याय का वर्णन है।
- 'न्याय की जंजीर' (Chain of Justice): आगरा के किले में 60 घंटियों वाली जंजीर — कोई भी न्याय माँग सकता था।
- सर सर टॉमस रो (1615): अंग्रेज़ राजदूत जेम्स प्रथम के शासनकाल में आया — व्यापार अनुमति प्राप्त की।
जहाँगीर (जन्म: 1569) अकबर का पुत्र और मुगल साम्राज्य का चौथा सम्राट था। उसके शासन को 'चित्रकला और न्याय का युग' कहा जाता है। उसने अपनी आत्मकथा 'तुज़ुक-ए-जहाँगीरी' में अपने शासन का विस्तृत विवरण दिया है।
🔹 नूरजहाँ (1611): जहाँगीर ने 'मेहर-उन-निसा' (जिसे बाद में 'नूरजहाँ' — 'संसार का प्रकाश' — नाम दिया) से विवाह किया। वह अत्यंत बुद्धिमान, सुंदर और महत्वाकांक्षी थी। उसने सिक्कों पर अपना नाम खुदवाया और 'शाही फरमान' जारी किए। वह वास्तविक शासक थी, और जहाँगीर ने उसे पूर्ण स्वतंत्रता दी।
🔹 चित्रकला: जहाँगीर के शासन में मुगल चित्रकला अपने चरम पर पहुँची। वह स्वयं एक उत्कृष्ट कला समीक्षक था और चित्रकारों को 'रंग और रेखा का जादूगर' कहता था। 'अबुल हसन' और 'मानसिंह' उसके दरबार के प्रमुख चित्रकार थे। पशु-पक्षियों के चित्र उसकी विशेष रुचि थे।
🔹 न्याय की जंजीर (Zanjir-e-Adal): जहाँगीर ने आगरा के किले में 60 घंटियों वाली स्वर्ण-जंजीर लगवाई। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी गरीब हो, इस जंजीर को खींचकर सम्राट तक अपनी पीड़ा पहुँचा सकता था। यह जहाँगीर की न्यायप्रियता का प्रतीक है।
🔹 विदेशी यात्री: सर टॉमस रो (1615-1619) — अंग्रेज़ राजदूत — जहाँगीर के दरबार में आया। उसने अंग्रेज़ों को सूरत में व्यापार की अनुमति प्राप्त की। 'विलियम हॉकिन्स' भी इसी काल में आया था। जहाँगीर ने पुर्तगालियों को हुगली (बंगाल) में व्यापार की अनुमति दी।
★ लाल किला (दिल्ली)
★ जामा मस्जिद (दिल्ली)
- ताजमहल (1632-1653): मुमताज महल (आरज़ुमंद बानो) की स्मृति में बनवाया। 22 वर्ष में बना। श्वेत संगमरमर का उपयोग।
- लाल किला (दिल्ली, 1638-1648): शाहजहाँ ने राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित की। 'दीवान-ए-आम' और 'दीवान-ए-खास'।
- जामा मस्जिद (दिल्ली, 1650-1656): भारत की सबसे बड़ी मस्जिद। 25,000 लोगों की क्षमता।
- मोती मस्जिद (आगरा): संगमरमर से निर्मित — 'मोती' (मोती) जैसी चमक।
- उत्तराधिकार युद्ध (1657-1658): पुत्रों 'दारा शिकोह' और 'औरंगज़ेब' के बीच संघर्ष। औरंगज़ेब विजयी हुआ।
शाहजहाँ (1592-1666) मुगल साम्राज्य का पाँचवाँ सम्राट था। उसके शासनकाल (1628-1658) को 'स्थापत्य कला का स्वर्णिम युग' कहा जाता है। उसने अपनी राजधानी 'शाहजहाँबाद' (पुरानी दिल्ली) में स्थापित की।
🔹 ताजमहल (1632-1653): शाहजहाँ ने अपनी प्रिय पत्नी 'मुमताज महल' (आरज़ुमंद बानो) की याद में आगरा में ताजमहल बनवाया। यह 22 वर्ष में बना और इसमें 20,000 कारीगरों ने काम किया। यह श्वेत संगमरमर (White Marble) से निर्मित है और UNESCO विश्व धरोहर स्थल है। 'उस्ताद अहमद लाहौरी' इसके मुख्य वास्तुकार थे।
🔹 लाल किला (1638-1648): शाहजहाँ ने दिल्ली में लाल किला (Red Fort) बनवाया, जो लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) से निर्मित है। इसमें 'दीवान-ए-आम' (सार्वजनिक दरबार) और 'दीवान-ए-खास' (निजी दरबार) हैं। 'नहर-ए-बहिश्त' (स्वर्ग की नहर) — पानी की नहर किले के अंदर बहती थी।
🔹 जामा मस्जिद (1650-1656): यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है, जो दिल्ली में स्थित है। इसमें 25,000 लोग एक साथ नमाज़ पढ़ सकते हैं। यह लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित है।
🔹 शाहजहाँ की मृत्यु: 1657 में शाहजहाँ बीमार हो गया, जिससे उत्तराधिकार युद्ध शुरू हुआ। औरंगज़ेब ने अपने भाई 'दारा शिकोह' को पराजित किया और 1658 में सिंहासन पर बैठा। शाहजहाँ को आगरा के किले में नज़रबंद कर दिया गया, जहाँ उसने 8 वर्ष बिताए और 1666 में अपनी मृत्यु तक ताजमहल की ओर देखते रहे।
★ दक्कन विजय (बीजापुर, गोलकुंडा)
★ शिवाजी के साथ संघर्ष
- सिंहासन (1658): भाई दारा शिकोह को पराजित कर सिंहासन प्राप्त किया। 'आलमगिर' (विश्व विजेता) की उपाधि ली।
- धार्मिक नीति: अकबर की नीति को उलट दिया। 'जज़िया' (हिंदुओं पर कर) पुनः लागू किया। मंदिरों को तोड़ा गया।
- शिवाजी (1674-1680): मराठा शासक 'शिवाजी' ने मुगलों का लगातार विरोध किया। 1680 में शिवाजी की मृत्यु।
- दक्कन अभियान (1686-1687): बीजापुर (1686) और गोलकुंडा (1687) पर विजय प्राप्त की।
- मृत्यु (1707): औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में 88 वर्ष की आयु में निधन। उसके बाद मुगल साम्राज्य का पतन शुरू हुआ।
औरंगज़ेब (1618-1707) मुगल साम्राज्य का छठा और अंतिम महान सम्राट था। उसने 49 वर्ष शासन किया — जो किसी भी मुगल सम्राट से अधिक था। उसने 'आलमगिर' (विश्व विजेता) की उपाधि धारण की और मुगल साम्राज्य को अपने चरम विस्तार (लगभग पूरा भारत) तक पहुँचाया।
🔹 धार्मिक नीति: औरंगज़ेब कट्टर सुन्नी मुस्लिम था। उसने अकबर की धार्मिक सहिष्णुता की नीति को उलट दिया। 1679 में उसने 'जज़िया' (धार्मिक कर) हिंदुओं पर पुनः लागू किया। कई हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया (वाराणसी का विश्वनाथ मंदिर, मथुरा का केशवदेव मंदिर)। उसने दरबारी संगीत पर भी प्रतिबंध लगा दिया।
🔹 शिवाजी के साथ संघर्ष: मराठा शासक 'शिवाजी' औरंगज़ेब का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी था। 1665 में शिवाजी आगरा आए और औरंगज़ेब के दरबार में अपमानित हुए, लेकिन वह चालाकी से बच निकले। 1674 में शिवाजी ने 'मराठा साम्राज्य' की स्थापना की और 'छत्रपति' की उपाधि ली। 1680 में शिवाजी की मृत्यु के बाद औरंगज़ेब ने दक्कन में मराठों के खिलाफ अभियान जारी रखा, लेकिन उसे पूर्ण सफलता नहीं मिली।
🔹 दक्कन विजय (1686-1687): औरंगज़ेब ने बीजापुर (1686) और गोलकुंडा (1687) — दो प्रमुख दक्कनी सल्तनतों — पर विजय प्राप्त की। इसने मुगल साम्राज्य को भारत के सबसे दक्षिणी भाग तक पहुँचा दिया। लेकिन इन अभियानों में अत्यधिक खर्च हुआ, जिससे शाही खजाना खाली हो गया।
🔹 मृत्यु और पतन: 1707 में औरंगज़ेब की औरंगाबाद में 88 वर्ष की आयु में मृत्यु हुई। उसकी मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का तेज़ी से पतन शुरू हुआ। उत्तराधिकारियों में आपसी संघर्ष, बढ़ती मराठा शक्ति, और अंग्रेज़ों/फ्रांसीसियों का बढ़ता प्रभाव — सभी ने मिलकर मुगल साम्राज्य को कमज़ोर किया। 1857 में बहादुर शाह जफर के साथ मुगल साम्राज्य का अंत हुआ।
★ मराठा, अफगान, अंग्रेज़ों का उदय
★ 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
- 1707-1857: 11 कमज़ोर शासक — 'बहादुर शाह प्रथम' से 'बहादुर शाह जफर' तक।
- नादिरशाह का आक्रमण (1739): ईरानी शासक 'नादिरशाह' ने दिल्ली लूटी। 'मयूर सिंहासन' और 'कोहिनूर हीरा' छीन लिया।
- बहादुर शाह जफर (1837-1857): मुगल साम्राज्य का अंतिम शासक। एक कवि और सूफी था।
- 1857 का विद्रोह: बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों ने सम्राट घोषित किया। अंग्रेज़ों ने विद्रोह कुचला।
- अंत: बहादुर शाह जफर को रंगून (म्यांमार) निर्वासित कर दिया गया। 1862 में उनकी मृत्यु — मुगल साम्राज्य का अंत।
उत्तर-मुगल काल (1707-1857) मुगल साम्राज्य के पतन और विघटन का काल है। औरंगज़ेब की मृत्यु (1707) के बाद 11 कमज़ोर शासक (बहादुर शाह प्रथम से बहादुर शाह जफर तक) सिंहासन पर बैठे, लेकिन उनमें से कोई भी सक्षम नहीं था। इस काल में मुगल साम्राज्य नाममात्र का हो गया।
🔹 नादिरशाह का आक्रमण (1739): ईरानी शासक 'नादिरशाह' ने 1739 में दिल्ली पर आक्रमण किया। उसने 'मयूर सिंहासन' (Peacock Throne) और 'कोहिनूर हीरा' छीन लिया। दिल्ली में बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ और शहर लूट लिया गया। इस आक्रमण ने मुगल साम्राज्य को अपूरणीय क्षति पहुँचाई।
🔹 स्वतंत्र राज्यों का उदय: कमज़ोर मुगल शासकों के कारण प्रांतीय गवर्नरों ने स्वतंत्र राज्य की स्थापना कर ली — अवध (सआदत खान), बंगाल (मुर्शिद कुली खान), हैदराबाद (आसफ जाह), मैसूर (हैदर अली/टीपू), पंजाब (रंजीत सिंह)।
🔹 मराठा और अफगान: मराठा साम्राज्य (शिवाजी, पेशवा बाजीराव, माधवराव) उत्तर भारत में मुगलों का स्थान ले रहा था। 1761 में 'पानीपत की तीसरी लड़ाई' में अहमद शाह अब्दाली (अफगान) ने मराठों को पराजित किया, जिससे मुगलों को अल्पकालीन राहत मिली।
🔹 अंग्रेज़ों का उदय: 1757 में 'प्लासी की लड़ाई' में अंग्रेज़ों ने बंगाल पर नियंत्रण कर लिया। 1765 में 'इलाहाबाद की संधि' के तहत शाह आलम द्वितीय ने अंग्रेज़ों को 'दीवानी अधिकार' (बंगाल, बिहार, उड़ीसा) प्रदान किए। अब मुगल शासक अंग्रेज़ों की 'पेंशनभोगी' बनकर रह गए।
🔹 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम: 1857 में विद्रोहियों ने बहादुर शाह जफर को 'सम्राट' घोषित किया। लेकिन अंग्रेज़ों ने दिल्ली पुनः प्राप्त की और बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर रंगून (म्यांमार) निर्वासित कर दिया। 1862 में उनकी मृत्यु हुई — मुगल साम्राज्य का अंत।