सल्तनत काल — दिल्ली सल्तनत

सल्तनत काल — मध्यकालीन भारत | Delhi Sultanate — Medieval India
मध्यकालीन भारत · विस्तृत अध्ययन · Exam Special

सल्तनत काल — दिल्ली सल्तनत DELHI SULTANATE — Medieval India (1206–1526 ई.)

गुलाम · खिलजी · तुगलक · सैय्यद · लोदी — पाँच वंश · 320 वर्ष · 36 सुल्तान
UPSC CSEUPPSCBPSC CGPSCState PSCSSC CGLNDA/CDS
📋
CLICKABLE INDEX · किसी भी खण्ड पर क्लिक करें
विषय-सूची — सल्तनत काल सम्पूर्ण
Click any section → Jump directly | प्रत्येक खण्ड में ⬆ वापस बटन भी है
📢 उपयोग: नीचे किसी भी बटन पर क्लिक करें — उस खण्ड पर सीधे पहुँचेंगे। हर खण्ड के नीचे ⬆ सूची पर वापस और 🔗 सम्बन्धित खण्डों के लिंक हैं।
📜
खण्ड 01 · Introduction
परिचय — दिल्ली सल्तनत की स्थापना
Foundation of Delhi Sultanate · 1206 ई. से प्रारम्भ
1192 ई. में तराईन के द्वितीय युद्ध में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया। 1206 ई. में गोरी की मृत्यु के बाद उसके दास कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की नींव रखी। यह भारत का प्रथम मुस्लिम साम्राज्य था जो 320 वर्षों (1206–1526) तक चला।
मूल तथ्य · Key Facts
अवधि: 1206–1526 ई. (320 वर्ष)
राजधानी: दिल्ली
वंश: 5 (गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद, लोदी)
कुल सुल्तान: ~36
स्थापना के पूर्व · Before 1206
तराईन I (1191) — गोरी पराजित
तराईन II (1192) — पृथ्वीराज पराजित
चन्दावर (1194) — जयचन्द पराजित
1206 — कुतुबुद्दीन ऐबक — सल्तनत
इतिहास के स्रोत · Sources
फारसी साहित्य: तबकात-ए-नासिरी (मिनहाज-उस-सिराज), तारीख-ए-फिरोजशाही (जियाउद्दीन बरनी), खजाइन-उल-फुतूह (अमीर खुसरो)
विदेशी यात्री: इब्न बतूता — रिहला | मार्को पोलो (दक्षिण भारत, आंशिक)
पुरातात्विक: कुतुब मीनार, इल्बारी अभिलेख, सिक्के
वंशकालसंस्थापकश्रेष्ठ शासकपतन कारण
गुलाम (ममलूक)1206–1290कुतुबुद्दीन ऐबकइल्तुतमिश / बलबनबलबन के उत्तराधिकारी कमज़ोर
Weak successors of Balban
खिलजी1290–1320जलालुद्दीन खिलजीअलाउद्दीन खिलजीमलिक काफूर की महत्वाकांक्षा
Malik Kafur's ambition
तुगलक1320–1414गयासुद्दीन तुगलकफिरोज तुगलकतैमूर आक्रमण 1398
Timur's invasion 1398
सैय्यद1414–1451खिज्र खाँ(कोई नहीं)स्वयं आलम शाह ने बहलोल को सत्ता सौंपी
Alam Shah voluntarily surrendered
लोदी1451–1526बहलोल लोदीसिकन्दर लोदीपानीपत I (1526) — बाबर
Battle of Panipat I
👑
खण्ड 02 · Slave/Mamluk Dynasty
गुलाम वंश (ममलूक वंश) — 1206–1290
Slave Dynasty — First Dynasty of Delhi Sultanate · कुतुब मीनार · इक्ता · बलबन
मुहम्मद गोरी के दास कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में दिल्ली सल्तनत की स्थापना की। इसे इल्बारी वंश भी कहते हैं क्योंकि इल्तुतमिश और बलबन दोनों "इल्बारी" तुर्क जनजाति से थे। इस वंश के तीन महान शासक हुए — ऐबक, इल्तुतमिश और बलबन।
संस्थापक
कुतुबुद्दीन ऐबक
Qutbuddin Aibak
1206–1210 ई.
"लाखबख्श" — उदार दानी
कुतुब मीनार की नींव (1193)
कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद — प्रथम
अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (अजमेर)
चौगान खेलते हुए मृत्यु (1210)
लाहौर में दफन
सर्वश्रेष्ठ
शम्सुद्दीन इल्तुतमिश
Iltutmish
1211–1236 ई.
कुतुब मीनार पूर्ण किया
इक्ता प्रणाली व्यवस्थित की
चाँदी का टंका + ताँबे का जीतल
चहलगानी (40 तुर्क सरदार) बनाया
पुत्री रजिया को उत्तराधिकारी चुना
खलीफा से मान्यता प्राप्त की
एकमात्र महिला
रजिया सुल्तान
Razia Sultana
1236–1240 ई.
दिल्ली सल्तनत की एकमात्र महिला
पर्दा त्यागा — दरबार में खुले चेहरे
तुर्क सरदारों का विरोध
याकूत (अश्वशाला अधिकारी) से मित्रता
कैथल (हरियाणा) में हत्या 1240
रक्त-लौह नीति
गयासुद्दीन बलबन
Ghiyasuddin Balban
1266–1287 ई.
"रक्त और लौह की नीति"
"नियाबत-ए-खुदाई" — ईश्वर का प्रतिनिधि
सिजदा और पाइबोस प्रथा
चहलगानी (चालीसा) का नाश
मंगोल आक्रमण रोके
दीवान-ए-अर्ज (सेना विभाग)
कुतुब मीनार — परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है
ऊँचाई: 72.5 मीटर | मंजिलें: 5 | नींव: कुतुबुद्दीन ऐबक (1193) | प्रथम 3 मंजिल: इल्तुतमिश | 4-5वीं मंजिल: फिरोज तुगलक | सामग्री: बलुआ पत्थर (붉 + पीला) | UNESCO विश्व धरोहर 1993 | कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद — भारत की प्रथम मस्जिद
इक्ता प्रणाली · Iqta System
इल्तुतमिश ने व्यवस्थित किया। भूमि के बजाय राजस्व क्षेत्र (इक्ता) दिया जाता था। अधिकारी — इक्तादार/मुक्ती। बाद में जागीरदारी का आधार।
चहलगानी · Chalisa (40 Nobles)
इल्तुतमिश ने 40 तुर्क सरदारों का एक शक्तिशाली समूह बनाया। बलबन ने इसे समाप्त किया क्योंकि ये सुल्तान की शक्ति को चुनौती देते थे।
खण्ड 03 · Khilji Dynasty
खिलजी वंश — 1290–1320
Khilji Dynasty · अलाउद्दीन खिलजी — बाजार सुधार · मंगोल विरोध · दक्षिण विजय
अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का सबसे शक्तिशाली सुल्तान था। उसने पूरे भारत पर विजय प्राप्त की, 4 बार मंगोल आक्रमण रोके और 4 क्रान्तिकारी बाजार सुधार लागू किये।
संस्थापक
जलालुद्दीन खिलजी
Jalaluddin Khilji
1290–1296 ई.
खिलजी वंश संस्थापक
वृद्ध और उदार शासक
देवगिरि लूट — अलाउद्दीन
भतीजे अलाउद्दीन ने हत्या की
महान विजेता
अलाउद्दीन खिलजी
Alauddin Khilji
1296–1316 ई.
"सिकन्दर-ए-सानी" — "द्वितीय सिकन्दर"
4 मंगोल आक्रमण रोके
देवगिरि, गुजरात, राजस्थान, मालवा
मलिक काफूर से दक्षिण अभियान
4 बाजार सुधार
दीवान-ए-रियासत, शाहना-ए-मण्डी
सेनापति
मलिक काफूर
Malik Kafur
सेनापति (1310–16)
1000 दीनार में खरीदा गया दास
देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र विजय
माबर (तमिलनाडु) तक पहुँचा
अलाउद्दीन की मृत्यु पर महत्वाकांक्षी हुआ
अलाउद्दीन के 4 बाजार सुधार — परीक्षा में अवश्य पूछे जाते हैं
1. अनाज मण्डी (Shahana-i-Mandi) — अन्न और अनाज | 2. कपड़ा मण्डी (Sarai-i-Adl) — कपड़े और वस्त्र
3. घोड़ा मण्डी — घोड़े, मवेशी | 4. मवेशी मण्डी (General Market) — दास, पशु
अधिकारी: शाहना-ए-मण्डी (अधीक्षक) | बरीद (प्रतिवेदक) | मुन्हियाँ (गुप्तचर) | कठोर मूल्य नियंत्रण
मंगोल आक्रमण (4 बार) — सभी असफल
1297 — जलालुद्दीन सैयद पराजित
1299 — नुसरत खाँ ने रोका
1303 — सिरी किले का निर्माण
1305-06 — अलपखाँ ने 1,20,000 मंगोल मारे
सिरी नगर + अलाई मीनार
अलाउद्दीन ने सिरी — मंगोलों से रक्षा हेतु नया नगर बसाया। अलाई मीनार — कुतुब मीनार से दोगुनी ऊँची बनाने का प्रयास — अधूरा रहा।
🏛
खण्ड 04 · Tughlaq Dynasty
तुगलक वंश — 1320–1414
Tughlaq Dynasty · मुहम्मद बिन तुगलक के 5 प्रयोग · फिरोज तुगलक के सुधार · तैमूर आक्रमण
तुगलक वंश सल्तनत काल का सबसे लम्बे समय तक (94 वर्ष) शासन करने वाला वंश था। इसमें मुहम्मद बिन तुगलक ("विद्वान मूर्ख") और फिरोज तुगलक (कल्याणकारी शासक) — दो परस्पर विरोधी चरित्र के शासक हुए।
संस्थापक
गयासुद्दीन तुगलक
Ghiyasuddin Tughlaq
1320–1325 ई.
तुगलकाबाद नगर बसाया
"खलीफा का प्रतिनिधि" दावा
नहर व्यवस्था प्रारम्भ
पुत्र जौना खाँ के षड्यन्त्र से मृत्यु
"बुद्धिमान मूर्ख"
मुहम्मद बिन तुगलक
Muhammad bin Tughlaq
1325–1351 ई.
5 साहसी प्रयोग (सभी असफल)
दोआब में कर वृद्धि — अकाल में
राजधानी → दौलताबाद (1327)
प्रतीक मुद्रा — ताँबे का टोकन
खुरासान अभियान — अधूरा
इब्न बतूता — काजी-उल-कुजात
कल्याणकारी
फिरोज शाह तुगलक
Firoz Shah Tughlaq
1351–1388 ई.
300 नहरें, 150 पुल, 100 सराय
फिरोजाबाद, जौनपुर, हिसार, फतेहाबाद
दीवान-ए-खैरात — दानविभाग
अशोक स्तम्भ दिल्ली लाया
दासों की संख्या — 1,80,000
जिजिया — ब्राह्मणों पर भी लगाया
विनाश
तैमूर का आक्रमण
Timur's Invasion
1398 ई.
तुगलक सुल्तान — महमूद तुगलक भागा
दिल्ली की भयंकर लूट
1 लाख कैदियों का वध
तुगलक वंश की कमर टूटी
1414 — वंश समाप्त
मुहम्मद बिन तुगलक के 5 प्रयोग — UPSC में सर्वाधिक पूछे जाते हैं
1. दोआब में कर वृद्धि (1326): अकाल के समय कर बढ़ाया → किसान बर्बाद → विद्रोह
2. राजधानी दौलताबाद (1327): दिल्ली से देवगिरि → 2 वर्ष बाद वापसी → हजारों की मृत्यु
3. प्रतीक/टोकन मुद्रा (1329): चाँदी की जगह ताँबा → जाली सिक्के → बाजार ठप
4. खुरासान अभियान: मंगोलों को हराने की योजना → सेना तैयार पर अभियान स्थगित
5. करांचिल अभियान: कुमाऊँ पहाड़ियों पर हमला → बीमारी और वापसी में भारी हानि
इब्न बतूता — रिहला
मोरक्को का यात्री — 1333 में भारत आया | 8 वर्ष — काजी-उल-कुजात नियुक्त | "रिहला" — यात्रा वर्णन | चीन और मालदीव भी गए | तुगलक काल का सर्वोत्तम स्रोत।
फिरोज तुगलक के कल्याणकारी कार्य
सुल्तान का नहर निर्माण सबसे बड़ा योगदान। पश्चिमी यमुना नहर (हरियाणा) | उलूग खाँ नहर | रोजगार और कृषि विकास | मस्जिद-मदरसे।
🌙
खण्ड 05 · Sayyid Dynasty
सैय्यद वंश — 1414–1451
Sayyid Dynasty · खिज्र खाँ · कमजोर शासन · 37 वर्ष · 4 शासक
तैमूर आक्रमण के बाद खिज्र खाँ ने 1414 में सैय्यद वंश स्थापित किया। ये तैमूर के प्रतिनिधि थे और "सुल्तान" की उपाधि धारण नहीं की — केवल "रैयत-ए-आला" (जनता के प्रमुख) कहलाये। यह सल्तनत का सबसे कमजोर वंश था।
4 सैय्यद शासक
1. खिज्र खाँ (1414–21) — संस्थापक, तैमूर का प्रतिनिधि
2. मुबारक शाह (1421–34) — "सुल्तान" उपाधि ली, यह्या ने "तारीख-ए-मुबारकशाही" लिखी
3. मुहम्मद शाह (1434–43) — बहलोल लोदी का प्रभाव बढ़ा
4. आलम शाह (1443–51) — बदायूँ भाग गया, स्वयं सत्ता बहलोल को सौंपी
सैय्यद वंश की कमजोरियाँ
• सत्ता केवल दिल्ली तक सीमित
• कोई स्वतंत्र नीति नहीं
• सरदारों का नियंत्रण शासकों पर
बहलोल लोदी का बढ़ता प्रभाव
• कोई उल्लेखनीय निर्माण नहीं
परीक्षा महत्व
सैय्यद वंश के बारे में परीक्षा में पूछा जाता है: (1) संस्थापक कौन, (2) कितने शासक, (3) वंश का अन्त कैसे। याद करें: खिज्र खाँ (1414) → स्वेच्छा से सत्ता बहलोल को (1451) | BPSC और CGPSC में अक्सर पूछा जाता है।
🏹
खण्ड 06 · Lodi Dynasty
लोदी वंश — 1451–1526 (प्रथम अफगान वंश)
Lodi Dynasty · सिकन्दर लोदी — आगरा · पानीपत प्रथम (1526) · दिल्ली सल्तनत का अन्त
लोदी वंश दिल्ली सल्तनत का एकमात्र अफगान वंश था। सिकन्दर लोदी ने आगरा नगर बसाया। अन्तिम शासक इब्राहीम लोदी पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) में बाबर से पराजित हुआ और दिल्ली सल्तनत का अन्त हुआ।
संस्थापक
बहलोल लोदी
Bahlol Lodi
1451–1489 ई.
पंजाब के गवर्नर से सुल्तान
सरदारों को "मसनद-ए-आली" उपाधि
जौनपुर सल्तनत पर विजय (1479)
अफगान कबीलाई व्यवस्था
श्रेष्ठ शासक
सिकन्दर लोदी
Sikandar Lodi
1489–1517 ई.
आगरा नगर की स्थापना (1504)
आगरा राजधानी बनाया
मुसलमानों की शिक्षा पर ध्यान
कट्टर मुसलमान — हिन्दुओं पर अत्याचार
"गुलरुखी" — उपनाम से कविता
गाज-ए-सिकन्दरी — मापन इकाई
अन्तिम
इब्राहीम लोदी
Ibrahim Lodi
1517–1526 ई.
दिल्ली सल्तनत का अन्तिम सुल्तान
सरदारों से कटु सम्बन्ध
दौलत खाँ + आलम खाँ ने बाबर को बुलाया
पानीपत I (21 अप्रैल 1526) — पराजित
युद्धभूमि में मृत्यु — प्रथम सुल्तान
बाबर ने मुगल साम्राज्य स्थापित किया
पानीपत का प्रथम युद्ध — 21 अप्रैल 1526
बाबर बनाम इब्राहीम लोदी | स्थान: पानीपत (हरियाणा)
बाबर की विजय के कारण: तोपखाने का प्रयोग (उस्ताद अली + मुस्तफा) | तुलुगमा व्यूह (flank attack) | लोदी सेनापतियों की फूट
परिणाम: दिल्ली सल्तनत समाप्त | मुगल साम्राज्य प्रारम्भ | बाबर को 57 करोड़ रु. की सम्पत्ति मिली
🏛
खण्ड 07 · Administrative System
प्रशासनिक व्यवस्था — दिल्ली सल्तनत
Central Administration · Provincial · Revenue · Military · Judiciary
केन्द्रीय प्रशासन · Central Administration
सुल्तान — सर्वोच्च शक्ति, सेनापति, न्यायाधीश
वजीर (PM) — दीवान-ए-विजारत प्रमुख, सर्वोच्च मंत्री
आरिज-ए-ममालिक — सेना विभाग (दीवान-ए-अर्ज)
दीवान-ए-इंशा — पत्र-व्यवहार विभाग
दीवान-ए-रसालत — विदेश विभाग
काजी-उल-कुजात — मुख्य न्यायाधीश
प्रान्तीय प्रशासन · Provincial Admin
सल्तनत → इक्ता (प्रान्त) में विभाजित
इक्तादार/मुक्ती — प्रान्त का शासक
शिक (जिला) → शिकदार
परगनाआमिल
गाँवग्रामपति/मुकद्दम
विभाग / Departmentकार्य / Functionप्रमुख / Head
दीवान-ए-विजारतवित्त और राजस्व
Finance & Revenue
वजीर
दीवान-ए-अर्जसेना विभाग
Military Department
आरिज-ए-ममालिक
दीवान-ए-इंशाराजकीय पत्राचार
Royal Correspondence
दबीर-ए-खास
दीवान-ए-रसालतधार्मिक/विदेश मामले
Religious & Foreign Affairs
सद्र-उस-सुदूर
दीवान-ए-खैरातदान और परोपकार
Charity — Firoz Tughlaq
फिरोज तुगलक का विशेष
दीवान-ए-बन्दगानदास विभाग
Slave Department — Firoz
फिरोज तुगलक
सेना व्यवस्था · Military System
दीवान-ए-अर्ज — सेना विभाग
हल्का / ग़ुलाम — शाही सेना
हशम-ए-कल्ब — केन्द्रीय सेना
अश्वारोही, पैदल, हाथी सेना
अलाउद्दीन — दाग+हुलिया प्रथा (घोड़ों की पहचान)
न्याय व्यवस्था · Judiciary
सुल्तान — सर्वोच्च न्यायाधीश
काजी-उल-कुजात — मुख्य न्यायाधीश (दिल्ली)
काजी — प्रान्त / नगर का न्यायाधीश
इस्लामी कानून (शरीयत) आधार
दीवानी + फौजदारी दोनों
💰
खण्ड 08 · Economic System
आर्थिक व्यवस्था — भूमि, राजस्व और व्यापार
Land Revenue · Iqta System · Alauddin's Market Reforms · Trade
भूमि राजस्व
Land Revenue System
खराज — कृषि भूमि पर कर
अलाउद्दीन — उपज का 50%
घरही — गृह कर
खाम्स — युद्ध लूट का 4/5 सुल्तान को
जिजिया — गैर-मुस्लिमों पर
खम्स का 1/5 — सेना को
अलाउद्दीन के राजस्व सुधार
Alauddin's Revenue Reforms
भू-राजस्व — उपज का 50%
चराई कर (घास-खरीही)
गृह कर (घरही)
भूमि की माप — बिस्वा
शाहना-ए-मण्डी — बाजार नियन्त्रण
राजस्व एकत्रण — अमिल
सिक्के और मुद्रा
Coins & Currency
टंका — चाँदी (इल्तुतमिश)
जीतल — ताँबे का सिक्का
टोकन मुद्रा — मुहम्मद बिन तुगलक
सोने का सिक्का — दीनार
रुपया — शेरशाह सूरी (बाद में)
व्यापार और उद्योग
Trade & Commerce
अरब-फारस से घोड़े का आयात
निर्यात — मसाले, कपड़े, हीरे
श्रेणियाँ कमजोर हुईं
बाजार नियन्त्रण → व्यापार प्रभावित
तुगलक काल में व्यापार में कमी
🏘
खण्ड 09 · Social Structure
सामाजिक व्यवस्था — हिन्दू-मुस्लिम समाज
Social Classes · Ulema · Slavery · Position of Hindus · Sufi Influence
मुस्लिम समाज के वर्ग
अशराफ — उच्च वर्ग (तुर्क, अरब, अफगान)
उलेमा — धार्मिक विद्वान (शरीयत)
अजलाफ — मध्य वर्ग (भारतीय मुसलमान)
अरजाल — निम्न वर्ग
गुलाम/दास — सबसे नीचे
हिन्दुओं की स्थिति
जिजिया कर — गैर-मुस्लिमों पर
जजिया — सुरक्षा के बदले कर
सूफी प्रभाव — हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव
अलाउद्दीन — जिजिया, भूमि कर दोनों
फिरोज ने ब्राह्मणों पर भी जिजिया लगाया
भक्ति और सूफी आन्दोलन का प्रभाव — सामाजिक समन्वय
सल्तनत काल में चिश्ती सूफी सिलसिला सर्वाधिक लोकप्रिय था। निजामुद्दीन औलिया (दिल्ली), मुईनुद्दीन चिश्ती (अजमेर) — ये हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों में श्रद्धेय थे। इसी काल में भक्ति संत कबीर, रैदास आदि ने हिन्दू-मुस्लिम एकता का सन्देश दिया।
सूफी साहित्य →
🕌
खण्ड 10 · Art & Architecture
कला, स्थापत्य एवं साहित्य
Indo-Islamic Architecture · Qutb Complex · Literature · Amir Khusrau
सल्तनत काल में भारतीय-इस्लामी (Indo-Islamic) स्थापत्य शैली का विकास हुआ। इसमें इस्लामी मेहराब, गुम्बद और भारतीय शिखर, स्तम्भ का अद्भुत समन्वय हुआ।
कुतुब कॉम्प्लेक्स
Qutb Complex — Delhi · UNESCO
कुतुब मीनार — ऐबक → इल्तुतमिश
कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद
इल्तुतमिश का मकबरा
अलाई दरवाजा — अलाउद्दीन
अलाई मीनार — अधूरी
UNESCO 1993
तुगलक स्थापत्य
Tughlaq Architecture
तुगलकाबाद किला — गयासुद्दीन
जहाँपनाह नगर — मुहम्मद बिन तुगलक
फिरोजशाह कोटला — फिरोज
फिरोजाबाद — नया नगर
अशोक स्तम्भ — दिल्ली लाया
ढलवाँ दीवारें — तुगलक विशेषता
सल्तनत के प्रमुख मकबरे
Important Tombs
इल्तुतमिश का मकबरा — दिल्ली
गयासुद्दीन तुगलक — तुगलकाबाद
फिरोज तुगलक — हौजखास
लोदी गार्डन — लोदी मकबरे
मुबारक शाह सैय्यद — मुबारकपुर
लोदी स्थापत्य
Lodi Architecture
लोदी गार्डन (दिल्ली) — मकबरे
मोठकी मस्जिद — सिकन्दर लोदी
दोहरा गुम्बद — लोदी विशेषता
आगरा में निर्माण
सल्तनत कालीन प्रमुख साहित्यकार
अमीर खुसरो (1253–1325) — "तूती-ए-हिन्द" | "खड़ी बोली के जनक" | खजाइन-उल-फुतूह, तुगलकनामा, किरान-उस-सादैन | सितार और तबले के जनक
जियाउद्दीन बरनी — तारीख-ए-फिरोजशाही, फतवा-ए-जहाँदारी
मिनहाज-उस-सिराज — तबकात-ए-नासिरी (1260 ई.)
इसामी — फुतुह-उस-सलातीन (1350 ई.) | दक्कन में लिखी
अमीर खुसरो — बहुमुखी प्रतिभा
7 सुल्तानों के दरबार में। संगीत — सितार, तबला के आविष्कारक माने जाते हैं। कव्वाली का आविष्कार। "ज़िहाल-ए-मस्कीन" — प्रसिद्ध गीत। गुरु — निजामुद्दीन औलिया।
Indo-Islamic स्थापत्य की विशेषताएँ
मेहराब (Arch), गुम्बद (Dome), मीनार (Minaret), मस्जिद, मकबरा — ये इस्लामी तत्व। भारतीय तत्व — स्तम्भ, जाली, नक्काशी। "पिशताक" — प्रवेशद्वार शैली।
📌
खण्ड 11 · Important One-Liners
महत्वपूर्ण एक-पंक्ति तथ्य
सर्वाधिक पूछे जाने वाले तथ्य · UPSC · UPPSC · BPSC · CGPSC · SSC
01
दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की — वह मुहम्मद गोरी का दास था — "लाखबख्श" उपाधि।UPSC/सभी PSC
02
दिल्ली सल्तनत की एकमात्र महिला शासक रजिया सुल्तान (1236–40) थी — इल्तुतमिश की पुत्री — कैथल (हरियाणा) में मृत्यु।BPSC/CGPSC
03
कुतुब मीनार की नींव कुतुबुद्दीन ऐबक (1193), पूर्ण इल्तुतमिश ने किया — ऊँचाई 72.5 मीटर, 5 मंजिलें — UNESCO 1993सभी परीक्षाएँ
04
बलबन की "रक्त और लौह नीति" — चहलगानी नाश — "सिजदा" (साष्टांग प्रणाम) प्रथा — "नियाबत-ए-खुदाई" सिद्धान्त।UPSC/UPPSC
05
अलाउद्दीन खिलजी ने 4 बाजार सुधार किये — अनाज, कपड़ा, घोड़ा, मवेशी मण्डी — "शाहना-ए-मण्डी" — अधीक्षक।UPSC/BPSC
06
मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी दौलताबाद स्थानान्तरित की (1327) — 2 वर्ष में वापसी — "बुद्धिमान मूर्ख" (इतिहासकारों का मत)।UPPSC/CGPSC
07
इब्न बतूता (मोरक्को) 1333 में मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में आया — काजी-उल-कुजात नियुक्त — "रिहला" में भारत का विवरण।UPSC/SSC
08
फिरोज तुगलक ने 300 नहरें, 150 पुल, 100 सराय बनाईं — दीवान-ए-खैरात (दान विभाग) स्थापित किया।BPSC/CGPSC
09
तैमूर ने 1398 ई. में दिल्ली पर आक्रमण किया — भयंकर लूट — 1 लाख कैदियों का वध — तुगलक वंश की कमर टूटी।UPSC/UPPSC
10
सिकन्दर लोदी ने 1504 में आगरा नगर बसाया और उसे राजधानी बनाया — "गुलरुखी" नाम से फारसी कविता लिखता था।UPPSC/SSC
11
पानीपत का प्रथम युद्ध (21 अप्रैल 1526) — बाबर बनाम इब्राहीम लोदी — बाबर ने तुलुगमा व्यूह और तोपखाना प्रयोग किया।सभी परीक्षाएँ
12
अमीर खुसरो को "तूती-ए-हिन्द" (भारत का तोता) और "खड़ी बोली के जनक" कहा जाता है — 7 सुल्तानों के दरबार में रहे।UPSC/CGPSC
13
सैय्यद वंश (1414–51) के संस्थापक खिज्र खाँ थे — तैमूर के प्रतिनिधि — "सुल्तान" उपाधि नहीं ली — केवल "रैयत-ए-आला"BPSC/CGPSC
14
इल्तुतमिश ने चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल सिक्का चलाया — इक्ता प्रणाली व्यवस्थित की — खलीफा की मान्यता प्राप्त की।UPSC/सभी
📋
खण्ड 12 · Previous Year Questions
पिछले वर्षों के परीक्षा प्रश्न
UPSC · UPPSC · BPSC · CGPSC · SSC CGL — Actual Past Questions
UPSC 2023
अलाउद्दीन खिलजी के बाजार सुधारों में "शाहना-ए-मण्डी" और "बरीद" का क्या कार्य था?
शाहना-ए-मण्डी — बाजार का अधीक्षक (Superintendent)। बरीद — प्रतिवेदक/सूचना अधिकारी। मुन्हियाँ — गुप्तचर। ये तीनों मिलकर बाजार में मूल्य नियन्त्रण सुनिश्चित करते थे। दीवान-ए-रियासत — समग्र बाजार नियंत्रण विभाग।
UPPSC 2023
मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा राजधानी दौलताबाद स्थानान्तरण के क्या कारण थे और यह क्यों असफल हुआ?
कारण: (1) देश के केन्द्र में होने से शासन आसान होगा, (2) दक्षिण पर नियंत्रण। असफलता: दिल्ली की जनता को जबरन ले जाया गया, पानी और जलवायु की समस्या, उत्तर पर नियंत्रण कमजोर हुआ, मंगोल आक्रमण का भय — 2 वर्ष में वापसी।
BPSC 2022
बलबन की "रक्त और लौह नीति" क्या थी और उसने चहलगानी को क्यों समाप्त किया?
बलबन की नीति — कठोर शासन और विद्रोहियों का दमन। "नियाबत-ए-खुदाई" — राजा ईश्वर का प्रतिनिधि। चहलगानी — 40 शक्तिशाली तुर्क सरदार जो सुल्तान को चुनौती देते थे। बलबन ने इन्हें समाप्त किया क्योंकि ये उसकी सत्ता के लिए खतरा थे।
CGPSC 2023
दिल्ली सल्तनत के किस वंश ने सबसे लम्बे समय तक शासन किया और उसमें कौन-कौन से प्रमुख शासक हुए?
तुगलक वंश (1320–1414) — 94 वर्ष — सबसे लम्बा। प्रमुख शासक: गयासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद बिन तुगलक, फिरोज शाह तुगलक। अन्त — तैमूर आक्रमण (1398) के बाद। गुलाम वंश — 84 वर्ष, खिलजी — 30, सैय्यद — 37, लोदी — 75 वर्ष।
UPSC 2022
इक्ता प्रणाली क्या थी और इसे किसने प्रारम्भ किया? इसका सल्तनत काल में क्या महत्व था?
इल्तुतमिश ने इक्ता प्रणाली को व्यवस्थित किया (कुछ इतिहासकार ऐबक को भी श्रेय देते हैं)। इक्ता — राजस्व क्षेत्र जो अधिकारियों को नकद वेतन के बजाय दिया जाता था। इक्तादार (मुक्ती) भूमि से राजस्व एकत्र करता था। यह सामन्ती व्यवस्था का आधार बना।
SSC CGL 2023
पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) में बाबर की विजय के क्या कारण थे?
बाबर की विजय के कारण: (1) तोपखाने का प्रभावी प्रयोग (उस्ताद अली और मुस्तफा) (2) तुलुगमा व्यूह — घेरावदार आक्रमण रणनीति (3) लोदी सरदारों की फूट (4) इब्राहीम लोदी का हठी स्वभाव और अकेलापन। बाबर का तोपखाना पहली बार भारत में प्रयोग हुआ।
UPPSC 2022
फिरोज तुगलक के प्रशासनिक सुधारों का वर्णन करें।
फिरोज के सुधार: (1) 300 नहरें — कृषि विस्तार (2) दीवान-ए-खैरात — गरीबों के लिए दान (3) दीवान-ए-बन्दगान — दास विभाग (4) नये नगर — फिरोजाबाद, जौनपुर, हिसार (5) अशोक स्तम्भ दिल्ली लाया (6) रोजगार दफ्तर (दीवान-ए-इस्तीहकाक) — बेरोजगारों के लिए।
📝
खण्ड 13 · Practice MCQs
अभ्यास MCQ — उत्तर जाँचें
Click करें · हरा = सही · लाल = गलत · व्याख्या तुरन्त दिखेगी
प्रश्न 01 · गुलाम वंश
दिल्ली सल्तनत में "चहलगानी" (Chalisa) की स्थापना किसने की और इसे किसने समाप्त किया?
इल्तुतमिश ने 40 तुर्क सरदारों का समूह "चहलगानी/चालीसा" बनाया। बलबन ने इसे समाप्त किया क्योंकि ये सरदार सुल्तान की शक्ति के लिए खतरा बन गये थे। बलबन खुद चहलगानी का सदस्य था।
प्रश्न 02 · खिलजी वंश
अलाउद्दीन खिलजी ने अपने बाजार सुधारों के लिए कितने बाजार स्थापित किये और कौन से?
✅ अलाउद्दीन ने 4 बाजार स्थापित किये: (1) अनाज मण्डी (शहना-ए-मण्डी), (2) कपड़ा और वस्त्र मण्डी (सराय-ए-अदल), (3) घोड़े और मवेशी मण्डी, (4) सामान्य बाजार (दास, मवेशी, अन्य)।
प्रश्न 03 · तुगलक वंश
मुहम्मद बिन तुगलक की "प्रतीक मुद्रा" योजना क्यों असफल हुई?
✅ सुल्तान ने चाँदी की जगह ताँबे का टोकन सिक्का चलाया (1329)। लोगों ने घर में ही ताँबे के नकली सिक्के ढालने शुरू कर दिये। बाजार में जाली सिक्कों की बाढ़ आ गई, सरकारी खजाना भर गया लेकिन मूल्य रहित सिक्कों से। सुल्तान को योजना वापस लेनी पड़ी।
प्रश्न 04 · सामान्य
दिल्ली सल्तनत में "दीवान-ए-अर्ज" का क्या कार्य था?
दीवान-ए-अर्ज — सेना विभाग। प्रमुख — आरिज-ए-ममालिक। घोड़ों की दाग और सैनिकों का हुलिया (हुलिया प्रथा) — अलाउद्दीन ने शुरू किया। दीवान-ए-विजारत — वित्त। दीवान-ए-इंशा — पत्राचार। दीवान-ए-खैरात — दान (फिरोज)।
प्रश्न 05 · लोदी वंश
लोदी वंश की विशेषता क्या थी जो इसे अन्य सुल्तान वंशों से अलग करती है?
✅ लोदी वंश दिल्ली सल्तनत का एकमात्र अफगान (Pashtun) वंश था। बाकी सभी वंश (गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैय्यद) तुर्क मूल के थे। इससे अफगान सरदारों का महत्व बढ़ा लेकिन केन्द्रीय शक्ति कमजोर हुई।
🧠
खण्ड 14 · Mnemonics & Memory Tricks
स्मरण सूत्र — परीक्षा में कभी न भूलें
Memory Tricks · Mnemonics · एक बार पढ़ें, हमेशा याद रहेगा
👑
दिल्ली सल्तनत के 5 वंश — क्रम
गु → खि → तु → सै → लो
गुलाम (1206) → खिलजी (1290) → तुगलक (1320) → सैय्यद (1414) → लोदी (1451–1526)
Trick: "गु-खि-तु-सै-लो = गुजरात-खिलाफ-तुरन्त-सैनिक-लो"
Slave→Khilji→Tughlaq→Sayyid→Lodi | 1206→1290→1320→1414→1451→1526
🗼
कुतुब मीनार — कौन, कब, कितना
नींव: ऐबक (1193) → 3 मंजिल: इल्तुतमिश → 4-5: फिरोज तुगलक → UNESCO: 1993
ऊँचाई: 72.5 मीटर | मंजिलें: 5 | सामग्री: बलुआ पत्थर
Trick: "A(ibak) built base → I(ltutmish) completed → F(iroz) repaired → UNESCO 1993"
🧪
मुहम्मद बिन तुगलक के 5 प्रयोग
द-रा-प्र-खु-क = दोआब कर + राजधानी दौलताबाद + प्रतीक मुद्रा + खुरासान + करांचिल
Trick: "दोराप्रखुकर = दो राजा प्रतीक खुरा करो"
5 Experiments: Doab tax → Daulatabad capital → Token currency → Khorasan plan → Qarachil
🏪
अलाउद्दीन के 4 बाजार — याद करें
अ-क-घो-म = अनाज + कपड़ा + घोड़ा + मवेशी
Trick: "अकबर घोड़े पर मवेशी ले गया" (अ=अनाज, क=कपड़ा, घो=घोड़ा, म=मवेशी)
4 Markets: Grain + Cloth + Horse + Cattle | Superintendent = Shahna-e-Mandi
📅
सल्तनत काल की 10 अनिवार्य तिथियाँ
1192 तराईन II (गोरी विजय) | 1206 सल्तनत स्थापना | 1236 रजिया सुल्तान | 1290 खिलजी | 1296 अलाउद्दीन | 1320 तुगलक | 1327 दौलताबाद | 1333 इब्न बतूता | 1398 तैमूर | 1526 पानीपत I
Key dates: 1192→1206→1236→1290→1296→1320→1327→1333→1398→1526
💡
प्रमुख विभाग — नाम और कार्य
दी-विज = दीवान-ए-विजारत (वित्त) | दी-अर्ज = सेना | दी-इंशा = पत्र | दी-रसा = विदेश | दी-खैरात = दान (फिरोज)
Trick: "विज, अर्ज, इंशा, रसा, खैरात — वित्त-सेना-पत्र-विदेश-दान"
Departments: Wizarat(Finance)→Arz(Army)→Insha(Letters)→Rasalat(Foreign)→Khairat(Charity)
📊
खण्ड 15 · Score Tracker
आपका अभ्यास स्कोर
MCQ अभ्यास परिणाम · Session Score
0
सही ✅
0
गलत ❌
0%
सटीकता
सल्तनत काल — मध्यकालीन भारत · Delhi Sultanate · 2025
UPSC · UPPSC · BPSC · CGPSC · SSC CGL · NDA/CDS — 15 खण्ड · सभी अन्तर-सम्बद्ध
Scroll to Top