🏛️ प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास
पेपर 2 · इतिहास · Complete Ancient History of Chhattisgarh
• दक्षिण कोशल — प्राचीन नाम
• महानदी — जीवन रेखा
• शिवनाथ, अरपा — प्रमुख सहायक नदियाँ
• विंध्य-सतपुड़ा — पर्वत श्रेणियाँ
• छत्तीसगढ़ मैदान — उपजाऊ क्षेत्र
- प्राचीन नाम — दक्षिण कोशल: छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम 'दक्षिण कोशल' था। रामायण-महाभारत काल में कोशल साम्राज्य का दक्षिणी भाग।
- महानदी — जीवन रेखा: महानदी छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदी है। शिवनाथ, अरपा, खरून, सोंधुर — प्रमुख सहायक नदियाँ।
- प्राकृतिक सीमाएँ: उत्तर — विंध्य श्रेणी, दक्षिण — सतपुड़ा श्रेणी, पश्चिम — महादेव पहाड़ियाँ, पूर्व — उड़ीसा की सीमा।
- छत्तीसगढ़ मैदान: उपजाऊ मैदान — महानदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे। चावल — मुख्य फसल।
- छत्तीसगढ़ नाम की उत्पत्ति: 'छत्तीस' (36) + 'गढ़' — 36 राज्यों/किलों का क्षेत्र। कलचुरि काल में 36 गढ़ थे।
- दक्षिण कोशल — छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम क्या है?
- महानदी — की प्रमुख सहायक नदियाँ कौन-सी हैं?
- छत्तीसगढ़ — नाम की उत्पत्ति कैसे हुई?
प्राचीन छत्तीसगढ़ का भौगोलिक नाम 'दक्षिण कोशल' था। यह क्षेत्र महानदी और उसकी सहायक नदियों (शिवनाथ, अरपा, खरून, सोंधुर, जोंक) के उपजाऊ मैदान में स्थित है।
🔹 प्राकृतिक सीमाएँ:
उत्तर — विंध्य श्रेणी (मध्य प्रदेश की सीमा)।
दक्षिण — सतपुड़ा श्रेणी, बस्तर की पहाड़ियाँ।
पश्चिम — महादेव पहाड़ियाँ (बालाघाट)।
पूर्व — उड़ीसा की सीमा, महानदी का डेल्टा क्षेत्र।
इन प्राकृतिक सीमाओं ने सांस्कृतिक-आर्थिक-राजनीतिक इकाई के रूप में
छत्तीसगढ़ को आकार दिया।
🔹 महानदी — जीवन रेखा:
महानदी (उद्गम — सिहावा, रायपुर) छत्तीसगढ़ की
सबसे बड़ी नदी है। यह 858 किमी
लंबी है और बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
शिवनाथ, अरपा, खरून, सोंधुर, जोंक — प्रमुख सहायक नदियाँ।
इन नदियों के किनारे प्राचीन सभ्यताएँ (सिरपुर, तालागाँव, आम्रपुर)
विकसित हुईं।
🔹 छत्तीसगढ़ मैदान:
छत्तीसगढ़ मैदान उपजाऊ, समतल, जल-युक्त है।
यह महानदी, शिवनाथ, अरपा के जलोढ़ मैदान से बना है।
चावल — मुख्य फसल (भारत का 'चावल का कटोरा')।
गेहूँ, मक्का, तिलहन, दलहन — अन्य फसलें।
🔹 खनिज संपदा:
छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध है —
लोहा, बॉक्साइट, कोयला, टिन, कैल्साइट, संगमरमर, हीरा।
बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर — खनिज-प्रधान क्षेत्र।
प्राचीन काल में लोहा, ताँबा, हीरा का व्यापार होता था।
• रामायण-महाभारत — कोशल साम्राज्य का दक्षिणी भाग
• महानदी घाटी — सभ्यता का केंद्र
• 36 गढ़ — छत्तीसगढ़ नाम की उत्पत्ति
• प्राकृतिक सीमाएँ — विंध्य-सतपुड़ा श्रेणियाँ
• पुरापाषाण — महानदी घाटी उपकरण
• मध्यपाषाण — सूक्ष्म पाषाण उपकरण
• नवपाषाण — कृषि, मिट्टी के बर्तन
• तालागाँव — महत्वपूर्ण स्थल
• कल्चुरी, बारी — प्रागैतिहासिक स्थल
- पुरापाषाण काल (500,000-10,000 ई.पू.): महानदी और शिवनाथ घाटी में पाषाण उपकरण। हस्त-कुल्हाड़ी, खुरपी, फलक — प्रमुख उपकरण।
- मध्यपाषाण काल (10,000-5000 ई.पू.): सूक्ष्म पाषाण उपकरण (माइक्रोलिथ)। शिकार-संग्रहण पर आधारित जीवन। बस्तर, सरगुजा क्षेत्र।
- नवपाषाण काल (5000-1000 ई.पू.): कृषि की शुरुआत। मिट्टी के बर्तन — निर्माण। तालागाँव, कल्चुरी — महत्वपूर्ण स्थल।
- तालागाँव (बिलासपुर): नवपाषाण स्थल। मिट्टी के बर्तन, पाषाण उपकरण, जानवरों की हड्डियाँ — प्राप्त।
- शैल चित्र: बस्तर, सरगुजा, कांकेर की गुफाओं में शैल चित्र — प्रागैतिहासिक कला। जानवर, शिकार, नृत्य — चित्रित विषय।
- तालागाँव — किस काल का महत्वपूर्ण स्थल है? (नवपाषाण)
- शैल चित्र — छत्तीसगढ़ में कहाँ-कहाँ मिले हैं? (बस्तर, सरगुजा, कांकेर)
- पुरापाषाण — के उपकरण कहाँ मिले हैं? (महानदी, शिवनाथ घाटी)
छत्तीसगढ़ का प्रागैतिहासिक काल पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण — तीन चरणों में विभाजित है। महानदी, शिवनाथ, अरपा घाटियों में कई प्रागैतिहासिक स्थल मिले हैं।
🔹 पुरापाषाण काल (500,000-10,000 ई.पू.):
महानदी और शिवनाथ घाटियों में
पुरापाषाण उपकरण मिले हैं —
हस्त-कुल्हाड़ी (Handaxe), खुरपी (Chopper), फलक (Scraper), छुरी (Knife)।
ये उपकरण क्वार्ट्जाइट (पत्थर) से बने हैं।
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव क्षेत्रों में ये उपकरण मिले हैं।
🔹 मध्यपाषाण काल (10,000-5000 ई.पू.):
इस काल के सूक्ष्म पाषाण उपकरण (Microliths)
बस्तर, सरगुजा, कांकेर, जशपुर में मिले हैं।
शिकार-संग्रहण जीवन शैली।
हड्डी के उपकरण, पत्थर के मनके भी मिले हैं।
गुफाएँ (बस्तर, सरगुजा) — शरण स्थल।
🔹 नवपाषाण काल (5000-1000 ई.पू.):
कृषि की शुरुआत — चावल, गेहूँ, मक्का।
मिट्टी के बर्तन — निर्माण, पशुपालन —
गाय, बकरी, सुअर। तालागाँव (बिलासपुर) —
सबसे महत्वपूर्ण नवपाषाण स्थल। कल्चुरी, बारी, पेंड्रा —
अन्य महत्वपूर्ण स्थल।
🔹 शैल चित्र (Rock Paintings):
बस्तर, सरगुजा, कांकेर, जशपुर की गुफाओं में
शैल चित्र मिले हैं — जानवर, शिकार, नृत्य,
युद्ध, धार्मिक अनुष्ठान। लाल, पीला, सफेद, काला —
प्राकृतिक रंगों का उपयोग। प्रागैतिहासिक कला का महत्वपूर्ण प्रमाण।
• तालागाँव — नवपाषाण (बिलासपुर)
• कल्चुरी — नवपाषाण (रायपुर)
• बारी — नवपाषाण (दुर्ग)
• पेंड्रा — नवपाषाण (बिलासपुर)
• गुफाएँ — शैल चित्र (बस्तर, सरगुजा)
• नागवंशी (3री-4थी शताब्दी)
• सरभापुरिया (4थी-6वीं शताब्दी)
• पांडुवंशी (6वीं-8वीं शताब्दी)
• कलचुरि (10वीं-12वीं शताब्दी)
• बाणवंशी (7वीं-8वीं शताब्दी)
- नागवंशी (3री-4थी शताब्दी): कालिंग-कोशल क्षेत्र के प्राचीन शासक। सिरपुर में शिलालेख।
- सरभापुरिया (4थी-6वीं शताब्दी): सिरपुर राजधानी। प्रवर सेन, सुदर्शन, महासेन — प्रमुख शासक। ब्राह्मी लिपि में शिलालेख।
- पांडुवंशी (6वीं-8वीं शताब्दी): कवर्धा, राजनांदगांव क्षेत्र। त्रिभुवन देव, सोमेश्वर देव — प्रमुख शासक।
- कलचुरि (10वीं-12वीं शताब्दी): रतनपुर राजधानी। रतनदेव, जाजल्लदेव, प्रथम कलचुरि। 36 गढ़ — उनके शासन में।
- बाणवंशी (7वीं-8वीं शताब्दी): कोशल-कलिंग क्षेत्र। शिलालेख, मुद्राएँ — प्रमाण।
- सरभापुरिया — की राजधानी क्या थी? (सिरपुर)
- कलचुरि — की राजधानी क्या थी? (रतनपुर)
- 36 गढ़ — किस काल में स्थापित हुए? (कलचुरि काल)
प्राचीन छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण राजवंशों ने शासन किया — नागवंशी, सरभापुरिया, पांडुवंशी, कलचुरि, बाणवंशी।
🔹 नागवंशी (3री-4थी शताब्दी):
कालिंग-कोशल क्षेत्र के शासक। सिरपुर में शिलालेख।
नाग देवता की पूजा — प्रमुख धार्मिक प्रवृत्ति।
गुफा, मंदिर, मूर्तियाँ — इनके शासन में निर्मित।
🔹 सरभापुरिया (4थी-6वीं शताब्दी):
सिरपुर (श्रीपुर) राजधानी। प्रवर सेन, सुदर्शन, महासेन, सोम —
प्रमुख शासक। ब्राह्मी लिपि में शिलालेख।
लक्ष्मण मंदिर — गुप्तकालीन स्थापत्य।
बौद्ध, जैन, हिंदू — धार्मिक सहिष्णुता।
🔹 पांडुवंशी (6वीं-8वीं शताब्दी):
कोशल क्षेत्र (वर्तमान कवर्धा, राजनांदगांव)।
त्रिभुवन देव, सोमेश्वर देव — प्रमुख शासक।
शिव, विष्णु, बुद्ध — तीनों धर्मों को समर्थन।
मंदिर, बौद्ध स्तूप, जैन मंदिर — निर्मित।
🔹 कलचुरि (10वीं-12वीं शताब्दी):
रतनपुर राजधानी (वर्तमान बिलासपुर के पास)।
प्रथम कलचुरि — कोकल्लदेव I (9वीं शताब्दी)।
रतनदेव (11वीं शताब्दी) — महान शासक।
जाजल्लदेव (12वीं शताब्दी) — अंतिम महान कलचुरि।
36 गढ़ (राज्य) — इनके शासन में स्थापित।
भोरमदेव मंदिर, देवबलोदा मंदिर — इनके समय में निर्मित।
🔹 बाणवंशी (7वीं-8वीं शताब्दी):
कोशल-कलिंग क्षेत्र (छत्तीसगढ़-उड़ीसा की सीमा)।
शिलालेख, मुद्राएँ — इनके शासन का प्रमाण।
शिव, सूर्य — प्रमुख देवता।
| राजवंश | काल | राजधानी | प्रमुख शासक |
|---|---|---|---|
| नागवंशी | 3री-4थी शताब्दी | सिरपुर | — |
| सरभापुरिया | 4थी-6वीं शताब्दी | सिरपुर | प्रवर सेन, महासेन |
| पांडुवंशी | 6वीं-8वीं शताब्दी | कवर्धा | त्रिभुवन देव |
| कलचुरि | 10वीं-12वीं शताब्दी | रतनपुर | रतनदेव, जाजल्लदेव |
| बाणवंशी | 7वीं-8वीं शताब्दी | — | — |
• सिरपुर शिलालेख — सरभापुरिया
• आम्रपुर शिलालेख — पांडुवंशी
• रतनपुर शिलालेख — कलचुरि
• ताम्रपत्र — दान-अनुदान
• स्वर्ण मुद्राएँ — गुप्त काल
- सिरपुर शिलालेख (4थी-6वीं शताब्दी): सरभापुरिया वंश के शासकों के शिलालेख। ब्राह्मी लिपि — संस्कृत भाषा। प्रवर सेन, महासेन के शिलालेख।
- आम्रपुर शिलालेख (6वीं-8वीं शताब्दी): पांडुवंशी के शिलालेख। त्रिभुवन देव के अभिलेख। राजनांदगांव क्षेत्र।
- रतनपुर शिलालेख (10वीं-12वीं शताब्दी): कलचुरि वंश के शिलालेख। रतनदेव, जाजल्लदेव के अभिलेख। 36 गढ़ का उल्लेख।
- ताम्रपत्र अभिलेख: दान-अनुदान, भूमि-दान के लिए। बिलासपुर, रायपुर, कवर्धा से प्राप्त।
- मुद्राएँ (Coins): स्वर्ण, चाँदी, ताँबा की मुद्राएँ। गुप्त काल की मुद्राएँ — राजा-देवी, अश्वमेध। कलचुरि मुद्राएँ — नाग देवता।
- सिरपुर शिलालेख — किस वंश से संबंधित हैं? (सरभापुरिया)
- ताम्रपत्र — किस कार्य के लिए उपयोग होते थे? (दान-अनुदान)
- रतनपुर — के शिलालेख किस वंश के हैं? (कलचुरि)
प्राचीन छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं — शिलालेख, ताम्रपत्र, मुद्राएँ। ये राजवंशों, शासकों, धर्म, अर्थव्यवस्था, समाज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।
🔹 सिरपुर शिलालेख (4थी-6वीं शताब्दी):
सिरपुर (महानदी के किनारे) से प्राप्त
15 से अधिक शिलालेख। ब्राह्मी लिपि,
संस्कृत भाषा। सरभापुरिया
वंश के शासकों — प्रवर सेन, सुदर्शन, महासेन, सोम के अभिलेख।
राज्य-विस्तार, दान-धर्म, युद्ध-विजय का वर्णन।
🔹 आम्रपुर शिलालेख (6वीं-8वीं शताब्दी):
आम्रपुर (राजनांदगांव) से प्राप्त शिलालेख।
पांडुवंशी के शासक त्रिभुवन देव
के अभिलेख। शिव-विष्णु पूजा का वर्णन।
बौद्ध, जैन धर्मों को समर्थन।
🔹 रतनपुर शिलालेख (10वीं-12वीं शताब्दी):
रतनपुर (बिलासपुर के पास) से प्राप्त
कलचुरि वंश के शिलालेख।
रतनदेव, जाजल्लदेव, प्रथम कलचुरि के अभिलेख।
'36 गढ़' (राज्य) का सबसे पहला उल्लेख।
कला, साहित्य, धर्म को समर्थन।
🔹 ताम्रपत्र अभिलेख:
ताम्रपत्र (Copper Plates) दान-अनुदान,
भूमि-दान, कर-मुक्ति के लिए उपयोग होते थे।
बिलासपुर, रायपुर, कवर्धा, राजनांदगांव से प्राप्त।
सरभापुरिया, पांडुवंशी, कलचुरि — तीनों वंशों के ताम्रपत्र मिले हैं।
🔹 मुद्राएँ (Coins):
स्वर्ण, चाँदी, ताँबा की मुद्राएँ —
गुप्त काल (राजा-देवी, अश्वमेध),
कलचुरि (नाग देवता, शिव),
सातवाहन (सिरपुर क्षेत्र)।
अर्थव्यवस्था, व्यापार, राज्य की जानकारी।
• सिरपुर — सरभापुरिया (4थी-6वीं शताब्दी)
• आम्रपुर — पांडुवंशी (6वीं-8वीं शताब्दी)
• रतनपुर — कलचुरि (10वीं-12वीं शताब्दी)
• ताम्रपत्र — दान-अनुदान (सभी वंश)
• लक्ष्मण मंदिर — सिरपुर (गुप्तकालीन)
• भोरमदेव मंदिर — कलचुरिकालीन
• देवबलोदा मंदिर — कलचुरिकालीन
• बौद्ध स्तूप — सिरपुर, अर्जुनगढ़
• जैन मंदिर — सिरपुर, रायपुर
- लक्ष्मण मंदिर (सिरपुर): गुप्तकालीन स्थापत्य (4थी-6वीं शताब्दी)। ईंटों से निर्मित। विष्णु की मूर्तियाँ।
- भोरमदेव मंदिर (कवर्धा): कलचुरिकालीन (11वीं-12वीं शताब्दी)। शिव मंदिर। नागर शैली — उत्तर भारतीय स्थापत्य।
- देवबलोदा मंदिर (राजनांदगांव): कलचुरिकालीन मंदिर। शिव-पार्वती की मूर्तियाँ। नागर शैली।
- बौद्ध स्तूप (सिरपुर): 4थी-6वीं शताब्दी के बौद्ध स्तूप। मिट्टी, ईंटों से निर्मित। बौद्ध भिक्षु आवास (विहार)।
- जैन मंदिर (सिरपुर, रायपुर): जैन धर्म से संबंधित मंदिर। तीर्थंकरों की मूर्तियाँ। 4थी-8वीं शताब्दी।
- लक्ष्मण मंदिर — कहाँ स्थित है? (सिरपुर)
- भोरमदेव मंदिर — किस शैली में बना है? (नागर शैली)
- बौद्ध स्तूप — छत्तीसगढ़ में कहाँ-कहाँ मिले हैं? (सिरपुर, अर्जुनगढ़)
प्राचीन छत्तीसगढ़ की कला एवं स्थापत्य गुप्तकालीन, कलचुरिकालीन, बौद्ध, जैन, हिंदू परंपराओं का अद्भुत संगम है। सिरपुर, भोरमदेव, देवबलोदा, रतनपुर — प्रमुख स्थापत्य केंद्र।
🔹 लक्ष्मण मंदिर — सिरपुर (4थी-6वीं शताब्दी):
सिरपुर (महानदी के किनारे) में स्थित गुप्तकालीन
मंदिर। ईंटों से निर्मित (बिना मोर्टार)।
विष्णु की मूर्तियाँ — दशावतार, वामन, नरसिंह।
गुप्तकालीन स्थापत्य की विशेषताएँ —
सरल, भव्य, अलंकरण रहित।
🔹 भोरमदेव मंदिर — कवर्धा (11वीं-12वीं शताब्दी):
भोरमदेव (कवर्धा जिला) में स्थित कलचुरिकालीन
शिव मंदिर। नागर शैली
(उत्तर भारतीय स्थापत्य)। शिखर (स्पियर) — 20 मीटर ऊँचा।
भव्य, अलंकृत, मूर्तियों से सजा।
कलचुरि शासकों का निर्माण।
🔹 देवबलोदा मंदिर — राजनांदगांव (11वीं-12वीं शताब्दी):
देवबलोदा (राजनांदगांव जिला) में स्थित
कलचुरिकालीन मंदिर। शिव-पार्वती
की मूर्तियाँ। नागर शैली — शिखर, गर्भगृह, मंडप।
मूर्तिकला — उत्कृष्ट, भाव-प्रधान।
🔹 बौद्ध स्थापत्य — सिरपुर, अर्जुनगढ़:
सिरपुर, अर्जुनगढ़ में 4थी-8वीं
शताब्दी के बौद्ध स्तूप और विहार
(भिक्षु-आवास) मिले हैं। मिट्टी, ईंटों से निर्मित।
बुद्ध की मूर्तियाँ, बोधिसत्व, धर्म-चक्र — प्रमुख प्रतीक।
बौद्ध धर्म का प्रसार — महायान, हीनयान दोनों।
🔹 जैन स्थापत्य — सिरपुर, रायपुर:
सिरपुर, रायपुर, बिलासपुर में
जैन मंदिर और मूर्तियाँ
मिली हैं। तीर्थंकर — ऋषभदेव, महावीर, पार्श्वनाथ।
श्वेतांबर, दिगंबर — दोनों परंपराओं के प्रमाण।
• सिरपुर — लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध स्तूप, जैन मंदिर
• भोरमदेव — शिव मंदिर (नागर शैली)
• देवबलोदा — शिव-पार्वती मंदिर
• अर्जुनगढ़ — बौद्ध स्तूप
• रतनपुर — कलचुरि किला, मंदिर
• हिंदू धर्म — शिव, विष्णु, दुर्गा
• बौद्ध धर्म — महायान, हीनयान
• जैन धर्म — श्वेतांबर, दिगंबर
• आदिवासी धर्म — प्रकृति-पूजा
• धार्मिक सहिष्णुता — सभी धर्मों को समर्थन
- हिंदू धर्म: शिव (भोरमदेव, देवबलोदा), विष्णु (लक्ष्मण मंदिर, सिरपुर), दुर्गा (महिषासुरमर्दिनी) — प्रमुख देवता।
- बौद्ध धर्म: 4थी-8वीं शताब्दी में फला-फूला। महायान, हीनयान — दोनों परंपराएँ। सिरपुर, अर्जुनगढ़ — प्रमुख केंद्र।
- जैन धर्म: तीर्थंकर (ऋषभदेव, महावीर, पार्श्वनाथ) की पूजा। सिरपुर, रायपुर, बिलासपुर — जैन मंदिर।
- आदिवासी धर्म: प्रकृति-पूजा (वृक्ष, पशु, नदी, पहाड़)। गोंड, बैगा, हल्बा — अपनी धार्मिक परंपराएँ।
- धार्मिक सहिष्णुता: सरभापुरिया, पांडुवंशी, कलचुरि — सभी धर्मों को समर्थन। हिंदू-बौद्ध-जैन — एक साथ पनपे।
- भोरमदेव — किस देवता का मंदिर है? (शिव)
- बौद्ध धर्म — छत्तीसगढ़ में कब फला-फूला? (4थी-8वीं शताब्दी)
- तीर्थंकर — किस धर्म से संबंधित हैं? (जैन धर्म)
प्राचीन छत्तीसगढ़ में हिंदू, बौद्ध, जैन, आदिवासी धर्म एक साथ पनपे। सिरपुर, भोरमदेव, देवबलोदा, रतनपुर — धार्मिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र थे।
🔹 हिंदू धर्म:
शिव — भोरमदेव (कवर्धा), देवबलोदा (राजनांदगांव),
विष्णु — लक्ष्मण मंदिर (सिरपुर),
दुर्गा — महिषासुरमर्दिनी मूर्तियाँ (सिरपुर, रतनपुर)।
सूर्य, गणेश,
कार्तिकेय — अन्य प्रमुख देवता।
नाग-पूजा — आदिवासी-हिंदू मिश्रण।
🔹 बौद्ध धर्म:
4थी-8वीं शताब्दी में बौद्ध धर्म फला-फूला।
महायान और हीनयान
दोनों परंपराएँ प्रचलित थीं। सिरपुर, अर्जुनगढ़ में
बौद्ध स्तूप, विहार (भिक्षु-आवास) मिले हैं। बुद्ध की मूर्तियाँ
— ध्यान मुद्रा, अभय मुद्रा, धर्म-चक्र मुद्रा। बोधिसत्व —
अवलोकितेश्वर, मंजुश्री, पद्मपाणि। सिरपुर —
बौद्ध अध्ययन का केंद्र।
🔹 जैन धर्म:
सिरपुर, रायपुर, बिलासपुर में जैन मंदिर
और मूर्तियाँ मिली हैं। तीर्थंकर —
ऋषभदेव (आदिनाथ), महावीर (24वें तीर्थंकर), पार्श्वनाथ (23वें), नेमिनाथ (22वें)।
श्वेतांबर, दिगंबर — दोनों परंपराओं के प्रमाण।
सिरपुर — जैन तीर्थ केंद्र भी था।
🔹 आदिवासी धर्म:
गोंड, बैगा, हल्बा, मुरिया, ओराँव — अपनी पारंपरिक
धार्मिक मान्यताएँ — प्रकृति-पूजा (वृक्ष, नदी, पहाड़, पशु),
पूर्वज-पूजा, शमनवाद (Shamanism)।
बस्तर, सरगुजा, कांकेर — आदिवासी धार्मिक केंद्र।
🔹 धार्मिक सहिष्णुता:
सरभापुरिया, पांडुवंशी, कलचुरि — तीनों वंशों ने
सभी धर्मों को संरक्षण दिया।
शिलालेख — बौद्ध, जैन, हिंदू मंदिरों के दान-अनुदान का प्रमाण।
धार्मिक सहिष्णुता — छत्तीसगढ़ की विशेषता।
• हिंदू — भोरमदेव, देवबलोदा, सिरपुर (लक्ष्मण मंदिर)
• बौद्ध — सिरपुर, अर्जुनगढ़ (स्तूप, विहार)
• जैन — सिरपुर, रायपुर, बिलासपुर (मंदिर, मूर्तियाँ)
• आदिवासी — बस्तर, सरगुजा, कांकेर (प्रकृति-पूजा)
• कृषि — चावल, गेहूँ, दलहन
• खनिज — लोहा, ताँबा, हीरा, टिन
• व्यापार — स्थानीय, क्षेत्रीय, अंतर्राष्ट्रीय
• मुद्राएँ — स्वर्ण, चाँदी, ताँबा
• कर-व्यवस्था — कृषि, व्यापार पर कर
- कृषि — आर्थिक आधार: चावल (मुख्य फसल), गेहूँ, मक्का, दलहन, तिलहन — प्रमुख फसलें। महानदी का जलोढ़ मैदान — उपजाऊ।
- खनिज संपदा: लोहा, ताँबा, टिन, हीरा, बॉक्साइट — प्राचीन काल में खनन। बस्तर — हीरा उत्पादन।
- व्यापार: स्थानीय व्यापार — गाँव-गाँव, क्षेत्रीय व्यापार — कोशल-कलिंग-दक्षिण भारत, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार — रोमन साम्राज्य, दक्षिण-पूर्व एशिया।
- मुद्राएँ: स्वर्ण (दीनार), चाँदी, ताँबा की मुद्राएँ। गुप्त काल — राजा-देवी, अश्वमेध मुद्राएँ।
- कर-व्यवस्था: कृषि-कर (उपज का 1/6 भाग), व्यापार-कर, खनिज-कर — मुख्य कर।
- छत्तीसगढ़ — की मुख्य फसल क्या है? (चावल)
- बस्तर — किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है? (हीरा)
- मुद्राएँ — किस धातु की प्रचलित थीं? (स्वर्ण, चाँदी, ताँबा)
प्राचीन छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था कृषि, खनिज, व्यापार, मुद्राएँ, कर-व्यवस्था पर आधारित थी। यह क्षेत्र आत्मनिर्भर, समृद्ध, व्यापारिक था।
🔹 कृषि — आर्थिक आधार:
चावल — मुख्य फसल (भारत का 'चावल का कटोरा')।
गेहूँ, मक्का, ज्वार, बाजरा, दलहन (अरहर, मूंग, उड़द), तिलहन (तिल, सरसों)
— अन्य प्रमुख फसलें। महानदी के जलोढ़ मैदान में
सिंचाई (नहरें, तालाब) — प्राचीन काल से।
कृषि-अधिशेष — व्यापार का आधार।
🔹 खनिज संपदा — अर्थव्यवस्था का आधार:
छत्तीसगढ़ खनिज-समृद्ध क्षेत्र है —
लोहा (बस्तर, दंतेवाड़ा),
ताँबा (बस्तर, सरगुजा),
टिन (बस्तर),
हीरा (बस्तर, कांकेर),
बॉक्साइट (बस्तर, कवर्धा)।
प्राचीन काल में लोहे, हीरे का व्यापार होता था।
🔹 व्यापार — स्थानीय, क्षेत्रीय, अंतर्राष्ट्रीय:
स्थानीय व्यापार — गाँव-गाँव, नगर-नगर (सिरपुर, रतनपुर, तालागाँव)।
क्षेत्रीय व्यापार — कोशल-कलिंग (उड़ीसा), दक्षिण भारत, मध्य भारत, पूर्वी भारत।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार — रोमन साम्राज्य
(हीरा, मसाले, वस्त्र), दक्षिण-पूर्व एशिया (मसाले, वस्त्र, मोती)।
🔹 मुद्राएँ (Coins):
स्वर्ण (दीनार — 8 ग्राम), चाँदी
(रूप्यक — 3 ग्राम), ताँबा (कर्षापण — 10 ग्राम) —
प्रचलित मुद्राएँ। गुप्त काल —
राजा-देवी (समुद्रगुप्त), अश्वमेध (घोड़ा यज्ञ) मुद्राएँ।
कलचुरि — नाग देवता, शिव मुद्राएँ।
मुद्राएँ — व्यापार, राज्य, धर्म की जानकारी।
🔹 कर-व्यवस्था:
कृषि-कर — उपज का 1/6 भाग (षष्ठांश)।
व्यापार-कर — 5%-10% (व्यापार मार्गों पर)।
खनिज-कर — खनन पर कर।
धार्मिक-कर — मंदिर-दान, तीर्थ-यात्रा।
शिलालेख (सिरपुर, आम्रपुर, रतनपुर) —
कर-व्यवस्था का वर्णन।
• सिरपुर — महानदी के किनारे, व्यापारिक केंद्र
• रतनपुर — कलचुरि राजधानी, व्यापारिक केंद्र
• महानदी — जल मार्ग (व्यापार, परिवहन)
• तालागाँव — कृषि-व्यापारिक केंद्र