🏛️ प्राचीन छत्तीसगढ़ का इतिहास
पेपर 2 · इतिहास · Complete Ancient History of Chhattisgarh
• दक्षिण कोशल — प्राचीन नाम
• महानदी — जीवन रेखा
• शिवनाथ, अरपा — सहायक नदियाँ
• 36 गढ़ — नाम की उत्पत्ति
- प्राचीन नाम — दक्षिण कोशल: छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम 'दक्षिण कोशल' था।
- महानदी — जीवन रेखा: महानदी प्रमुख नदी। शिवनाथ, अरपा, खरून — सहायक नदियाँ।
- प्राकृतिक सीमाएँ: उत्तर — विंध्य, दक्षिण — सतपुड़ा।
- छत्तीसगढ़ मैदान: उपजाऊ मैदान — महानदी व सहायक नदियों के किनारे। चावल — मुख्य फसल।
- छत्तीसगढ़ नाम: 'छत्तीस' (36) + 'गढ़' — 36 राज्य/किले, कलचुरि काल में।
- दक्षिण कोशल — छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम क्या है?
- महानदी — की प्रमुख सहायक नदियाँ कौन-सी हैं?
- छत्तीसगढ़ — नाम की उत्पत्ति कैसे हुई?
प्राचीन छत्तीसगढ़ का भौगोलिक नाम 'दक्षिण कोशल' था। यह क्षेत्र महानदी और उसकी सहायक नदियों (शिवनाथ, अरपा, खरून, सोंधुर) के उपजाऊ मैदान में स्थित है।
🔹 प्राकृतिक सीमाएँ (Natural Boundaries):
उत्तर — विंध्य श्रेणी (मध्य प्रदेश की सीमा), दक्षिण — सतपुड़ा श्रेणी, पश्चिम — महादेव पहाड़ियाँ (बालाघाट), पूर्व — उड़ीसा की सीमा। इन प्राकृतिक सीमाओं ने सांस्कृतिक-आर्थिक-राजनीतिक इकाई के रूप में छत्तीसगढ़ को आकार दिया।
🔹 महानदी — जीवन रेखा:
महानदी (उद्गम — सिहावा, रायपुर) छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी नदी है। यह 858 किमी लंबी है और बंगाल की खाड़ी में गिरती है। शिवनाथ, अरपा, खरून, सोंधुर, जोंक — प्रमुख सहायक नदियाँ। इन नदियों के किनारे प्राचीन सभ्यताएँ (सिरपुर, तालागाँव, आम्रपुर) विकसित हुईं।
🔹 छत्तीसगढ़ मैदान:
छत्तीसगढ़ मैदान उपजाऊ, समतल, जल-युक्त है। यह महानदी, शिवनाथ, अरपा के जलोढ़ मैदान से बना है। चावल — मुख्य फसल (भारत का 'चावल का कटोरा')। गेहूँ, मक्का, तिलहन, दलहन — अन्य फसलें।
🔹 छत्तीसगढ़ नाम की उत्पत्ति:
'छत्तीस' (36) + 'गढ़' — 36 राज्यों/किलों का क्षेत्र। कलचुरि काल (10वीं-12वीं शताब्दी) में छत्तीसगढ़ में 36 गढ़ (राज्य) थे — रतनपुर, खैरागढ़, बस्तर, सरगुजा, कोरिया, रायगढ़, जशपुर, आदि।
• रामायण-महाभारत — कोशल साम्राज्य का दक्षिणी भाग
• 36 गढ़ — छत्तीसगढ़ नाम की उत्पत्ति
• प्राकृतिक सीमाएँ — विंध्य-सतपुड़ा श्रेणियाँ
• पुरापाषाण — महानदी घाटी
• नवपाषाण — कृषि, बर्तन
• तालागाँव — महत्वपूर्ण स्थल
• शैल चित्र — बस्तर, सरगुजा
- पुरापाषाण (500,000-10,000 ई.पू.): महानदी-शिवनाथ घाटी में हस्त-कुल्हाड़ी, खुरपी मिले।
- मध्यपाषाण (10,000-5000 ई.पू.): सूक्ष्म उपकरण (माइक्रोलिथ)। शिकार-संग्रहण जीवन।
- नवपाषाण (5000-1000 ई.पू.): कृषि शुरू। मिट्टी के बर्तन। तालागाँव — प्रमुख स्थल।
- शैल चित्र: बस्तर, सरगुजा, कांकेर की गुफाओं में — जानवर, शिकार, नृत्य।
- तालागाँव — किस काल का स्थल है? (नवपाषाण)
- शैल चित्र — कहाँ-कहाँ मिले हैं? (बस्तर, सरगुजा, कांकेर)
छत्तीसगढ़ का प्रागैतिहासिक काल पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण — तीन चरणों में विभाजित है। महानदी, शिवनाथ, अरपा घाटियों में कई प्रागैतिहासिक स्थल मिले हैं।
🔹 पुरापाषाण काल (500,000-10,000 ई.पू.):
महानदी और शिवनाथ घाटियों में हस्त-कुल्हाड़ी (Handaxe), खुरपी (Chopper), फलक (Scraper) मिले हैं। ये उपकरण क्वार्ट्जाइट से बने हैं।
🔹 मध्यपाषाण काल (10,000-5000 ई.पू.):
सूक्ष्म पाषाण उपकरण (Microliths) बस्तर, सरगुजा, कांकेर में मिले हैं। शिकार-संग्रहण जीवन शैली।
🔹 नवपाषाण काल (5000-1000 ई.पू.):
कृषि की शुरुआत — चावल, गेहूँ, मक्का। मिट्टी के बर्तन। तालागाँव (बिलासपुर) — सबसे महत्वपूर्ण नवपाषाण स्थल।
🔹 शैल चित्र (Rock Paintings):
बस्तर, सरगुजा, कांकेर की गुफाओं में शैल चित्र — जानवर, शिकार, नृत्य, युद्ध। लाल, पीला, सफेद, काला — प्राकृतिक रंगों का उपयोग।
• तालागाँव — नवपाषाण (बिलासपुर)
• कल्चुरी — नवपाषाण (रायपुर)
• गुफाएँ — शैल चित्र (बस्तर, सरगुजा)
• नागवंशी (3री-4थी शताब्दी)
• सरभापुरिया (4थी-6वीं)
• पांडुवंशी (6वीं-8वीं)
• कलचुरि (10वीं-12वीं)
- नागवंशी (3री-4थी): कालिंग-कोशल क्षेत्र, सिरपुर शिलालेख।
- सरभापुरिया (4थी-6वीं): सिरपुर राजधानी। प्रवर सेन, महासेन — प्रमुख शासक।
- पांडुवंशी (6वीं-8वीं): कवर्धा, राजनांदगांव। त्रिभुवन देव प्रमुख।
- कलचुरि (10वीं-12वीं): रतनपुर राजधानी। रतनदेव, जाजल्लदेव। 36 गढ़ स्थापित।
- सरभापुरिया — राजधानी क्या थी? (सिरपुर)
- कलचुरि — राजधानी क्या थी? (रतनपुर)
- 36 गढ़ — किस काल में स्थापित हुए? (कलचुरि)
प्राचीन छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण राजवंशों ने शासन किया — नागवंशी, सरभापुरिया, पांडुवंशी, कलचुरि, बाणवंशी।
🔹 सरभापुरिया (4थी-6वीं शताब्दी):
सिरपुर (श्रीपुर) राजधानी। प्रवर सेन, सुदर्शन, महासेन — प्रमुख शासक। ब्राह्मी लिपि में शिलालेख। बौद्ध, जैन, हिंदू — धार्मिक सहिष्णुता।
🔹 कलचुरि (10वीं-12वीं शताब्दी):
रतनपुर राजधानी। प्रथम कलचुरि — कोकल्लदेव I। रतनदेव (11वीं शताब्दी) — महान शासक। 36 गढ़ — इनके शासन में स्थापित।
| राजवंश | काल | राजधानी | प्रमुख शासक |
|---|---|---|---|
| नागवंशी | 3री-4थी | सिरपुर | — |
| सरभापुरिया | 4थी-6वीं | सिरपुर | प्रवर सेन |
| पांडुवंशी | 6वीं-8वीं | कवर्धा | त्रिभुवन देव |
| कलचुरि | 10वीं-12वीं | रतनपुर | रतनदेव |
• सिरपुर — सरभापुरिया
• आम्रपुर — पांडुवंशी
• रतनपुर — कलचुरि
• स्वर्ण मुद्राएँ — गुप्त काल
- सिरपुर (4थी-6वीं): सरभापुरिया शिलालेख। ब्राह्मी लिपि, संस्कृत।
- आम्रपुर (6वीं-8वीं): पांडुवंशी शिलालेख। त्रिभुवन देव के अभिलेख।
- रतनपुर (10वीं-12वीं): कलचुरि शिलालेख। 36 गढ़ का पहला उल्लेख।
- ताम्रपत्र-मुद्राएँ: दान-अनुदान के लिए ताम्रपत्र। स्वर्ण, चाँदी, ताँबा मुद्राएँ।
- सिरपुर शिलालेख — किस वंश से संबंधित हैं? (सरभापुरिया)
- ताम्रपत्र — किस कार्य के लिए उपयोग होते थे? (दान-अनुदान)
प्राचीन छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण स्रोत — शिलालेख, ताम्रपत्र, मुद्राएँ।
🔹 सिरपुर शिलालेख:
सिरपुर से प्राप्त 15 से अधिक शिलालेख। ब्राह्मी लिपि, संस्कृत भाषा।
🔹 रतनपुर शिलालेख:
कलचुरि वंश के शिलालेख। '36 गढ़' का सबसे पहला उल्लेख।
• लक्ष्मण मंदिर — सिरपुर
• भोरमदेव — कलचुरिकालीन
• देवबलोदा — कलचुरिकालीन
• बौद्ध स्तूप — सिरपुर
- लक्ष्मण मंदिर (सिरपुर): गुप्तकालीन (4थी-6वीं)। ईंटों से निर्मित।
- भोरमदेव (कवर्धा): कलचुरिकालीन (11वीं-12वीं)। नागर शैली।
- देवबलोदा (राजनांदगांव): कलचुरिकालीन मंदिर। शिव-पार्वती मूर्तियाँ।
- बौद्ध स्तूप (सिरपुर): 4थी-6वीं शताब्दी के स्तूप, विहार।
- लक्ष्मण मंदिर — कहाँ स्थित है? (सिरपुर)
- भोरमदेव — किस शैली में बना है? (नागर शैली)
प्राचीन छत्तीसगढ़ की कला गुप्तकालीन, कलचुरिकालीन, बौद्ध, जैन, हिंदू परंपराओं का संगम है। सिरपुर, भोरमदेव, देवबलोदा — प्रमुख केंद्र।
🔹 लक्ष्मण मंदिर — सिरपुर:
गुप्तकालीन मंदिर। ईंटों से निर्मित, विष्णु की मूर्तियाँ।
🔹 भोरमदेव मंदिर — कवर्धा:
कलचुरिकालीन शिव मंदिर। नागर शैली — शिखर 20 मीटर ऊँचा।
• हिंदू — शिव, विष्णु, दुर्गा
• बौद्ध — महायान, हीनयान
• जैन — श्वेतांबर, दिगंबर
• आदिवासी — प्रकृति-पूजा
- हिंदू धर्म: शिव (भोरमदेव), विष्णु (लक्ष्मण मंदिर), दुर्गा (महिषासुरमर्दिनी)।
- बौद्ध धर्म: 4थी-8वीं शताब्दी में फला-फूला। सिरपुर, अर्जुनगढ़ — केंद्र।
- जैन धर्म: तीर्थंकर पूजा। सिरपुर, रायपुर — जैन मंदिर।
- आदिवासी धर्म: प्रकृति-पूजा — वृक्ष, पशु, नदी, पहाड़।
- भोरमदेव — किस देवता का मंदिर है? (शिव)
- बौद्ध धर्म — कब फला-फूला? (4थी-8वीं)
प्राचीन छत्तीसगढ़ में हिंदू, बौद्ध, जैन, आदिवासी धर्म एक साथ पनपे। धार्मिक सहिष्णुता — छत्तीसगढ़ की विशेषता।
🔹 हिंदू धर्म:
शिव — भोरमदेव, विष्णु — लक्ष्मण मंदिर, दुर्गा — महिषासुरमर्दिनी।
🔹 बौद्ध धर्म:
4थी-8वीं शताब्दी में फला-फूला। सिरपुर, अर्जुनगढ़ में बौद्ध स्तूप, विहार।
• कृषि — चावल, गेहूँ
• खनिज — लोहा, हीरा
• व्यापार — अंतर्राष्ट्रीय
• मुद्राएँ — स्वर्ण, चाँदी
- कृषि: चावल मुख्य फसल। गेहूँ, मक्का, दलहन — अन्य फसलें।
- खनिज: लोहा, ताँबा, हीरा, टिन, बॉक्साइट — प्राचीन काल में खनन।
- व्यापार: स्थानीय (गाँव-गाँव), क्षेत्रीय (कोशल-कलिंग), अंतर्राष्ट्रीय (रोमन साम्राज्य)।
- मुद्राएँ: स्वर्ण (दीनार), चाँदी, ताँबा — प्रचलित मुद्राएँ।
- छत्तीसगढ़ — की मुख्य फसल क्या है? (चावल)
- बस्तर — किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है? (हीरा)
प्राचीन छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था कृषि, खनिज, व्यापार, मुद्राएँ, कर-व्यवस्था पर आधारित थी।
🔹 कृषि — आर्थिक आधार:
चावल — मुख्य फसल (भारत का 'चावल का कटोरा')। गेहूँ, मक्का, ज्वार, बाजरा — अन्य फसलें।
🔹 खनिज संपदा:
लोहा (बस्तर), ताँबा (बस्तर), हीरा (बस्तर, कांकेर) — प्राचीन काल में खनन और व्यापार।
🔹 व्यापार:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार — रोमन साम्राज्य (हीरा, मसाले, वस्त्र), दक्षिण-पूर्व एशिया (मसाले, वस्त्र, मोती)।